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भाभी को मालिश करके चोदा Bhabhi ko Malish Karke Choda

मैं रिया हूँ, दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में रहती हूँ अपने पति रोहन के साथ, लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरी पीठ में दर्द हो रहा है नीचे तक फैल जाता है. रोहन एक सॉफ्टवेयर अभियंता हैं जो देर रात तक कार्यालय में रहते हैं और सुबह जल्दी निकल जाते हैं, जिससे हमारा वो निकट समय बहुत कम हो गया है जो पहले हुआ करता था, लेकिन मैं चुपचाप सब सहन करती हूँ क्योंकि भारतीय परिवार में एक बहू को तो सब बर्दाश्त करना पड़ता ही है अपनी भावनाओं को दबाकर रखना, लेकिन अंदर से एक अकेलापन बढ़ता जा रहा है

मेरे ससुराल में मेरा देवर विक्की भी रहता है जो 25 साल का है और अभी महाविद्यालय समाप्त करके नौकरी की तलाश में है, वो घर पर ही ज्यादा समय बिताता है और कभी-कभी मेरी सहायता करता है लेकिन मैं हमेशा उससे दूरी बनाकर रखती हूँ क्योंकि रिश्तों की मर्यादा का खयाल आता है, विक्की का शरीर मजबूत है व्यायामशाला जाता है और उसकी मुस्कान में एक मासूमियत है लेकिन कभी-कभी उसकी नजरें मुझ पर टिकती हैं तो मुझे एक अजीब सा एहसास होता है जैसे वो मेरी सुंदरता को महसूस कर रहा हो, लेकिन मैं खुद को समझाती हूँ कि ये सिर्फ कल्पना है और मैं एक संस्कारी बहू हूँ जो कभी गलत नहीं सोच सकती, फिर भी रातों में जब दर्द बढ़ता है तो मैं सोचती हूँ कि काश कोई ऐसा हो जो मेरे इस दर्द को समझे और थोड़ी राहत दे सके, लेकिन रोहन से कहने की हिम्मत नहीं होती क्योंकि वो पहले से थके रहते हैं।

एक शाम की बात है जब मैं रसोई में खड़ी होकर सब्जियाँ काट रही थी और अचानक पीठ में इतना तेज दर्द हुआ कि मैं चीख पड़ी और चाकू मेरे हाथ से गिर गया, वो आवाज सुनकर विक्की दौड़कर आया और मुझे सहारा देकर सोफे पर बिठाया, उसकी आँखों में चिंता थी और उसने पूछा भाभी क्या हो गया आप ठीक तो हैं ना, मैंने दर्द से कराहते हुए कहा कि पीठ में बहुत दर्द हो रहा है रोज का लेकिन आज ज्यादा है, वो बोला भाभी आप चिकित्सक को ठीक से क्यों नहीं दिखातीं या फिर तेल से मालिश करवा लो राहत मिल जाएगी, मैंने कहा विक्की मैं अकेली कैसे करूँगी और भैया तो देर से आते हैं, वो थोड़ा झिझका लेकिन फिर बोला भाभी अगर आप कहें तो मैं कर दूँ मालिश मेरे हाथ अच्छे हैं व्यायामशाला में सीखा है मांसपेशियों को शिथिल कैसे करना, मैं चौंक गई क्योंकि एक देवर का भाभी की मालिश करना हमारे परिवार में उचित नहीं लगता लेकिन दर्द इतना था कि मैंने हाँ कह दिया लेकिन अंदर एक डर था कि कहीं गलत न लगे, विक्की ने कहा ठीक है भाभी कमरे में लेट जाइए मैं तेल लेकर आता हूँ,

 

मैं कमरे में गई और बिस्तर पर पेट के बल लेट गई साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकाया ताकि कमर दिखे लेकिन मन में शर्म का एहसास था जैसे मैं कुछ गलत कर रही हूँ, कमरे में मद्धिम रोशनी थी बाहर से वर्षा की बूंदों की आवाज आ रही थी जो वातावरण को और ज्यादा गहन बना रही थी, विक्की आया और उसके हाथों में सरसों का तेल था जो गर्म था और उसकी सुगंध कमरे में फैल गई, वो मेरे पास बैठा और धीरे से मेरी कमर पर तेल लगाने लगा उसके हाथ इतने कोमल लेकिन मजबूत थे कि स्पर्श से ही एक सिहरन दौड़ गई लेकिन मैंने खुद को संभाला और सोचा कि ये सिर्फ मालिश है कुछ नहीं।

विक्की ने धीरे-धीरे अपनी उँगलियों से मेरी कमर को दबाना शुरू किया पहले हल्का-हल्का फिर थोड़ा जोर से जैसे वो हर मांसपेशी को महसूस कर रहा हो और दर्द को बाहर निकाल रहा हो, मैं आँखें बंद करके लेटी रही और महसूस कर रही थी कि उसके हाथों की गर्माहट मेरी त्वचा में उतर रही है और दर्द कम हो रहा है लेकिन साथ ही एक अजीब सा सुकून भी मिल रहा है जो मैंने बहुत दिनों से महसूस नहीं किया था, वो बोला भाभी दर्द कहाँ ज्यादा है बताइए मैं वहाँ ध्यान दूँगा, मैंने कहा कमर के नीचे थोड़ा और नीचे, वो थोड़ा नीचे सरका और मेरी ग@@ड के ऊपरी हिस्से पर हाथ फेरने लगा जो साड़ी के नीचे था लेकिन स्पर्श इतना निकट था कि मेरी साँसें तेज हो गईं और मन में विचार आने लगे कि ये ठीक नहीं है 

लेकिन शरीर ने विरोध नहीं किया बल्कि मैंने खुद को और शिथिल कर लिया, विक्की की साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं क्योंकि वो झुककर मालिश कर रहा था और उसकी गंध एक पुरुषोचित सुगंध थी जो मुझे अंदर तक प्रभावित कर रही थी, मैंने सोचा कि बस थोड़ी देर और फिर रुकवा दूँगी लेकिन मालिश जारी रही और उसके हाथ अब मेरी जाँघों के पास पहुँच गए जहाँ तेल लगाकर वो दबा रहा था और हर दबाव से मेरी चू@@ा में एक हल्की सी गर्माहट फैल रही थी जैसे कोई आग धीरे-धीरे सुलग रही हो, मैंने खुद को रोकने की कोशिश की और कहा विक्की बस अब ठीक है लेकिन मेरी आवाज में वो दृढ़ता नहीं थी जो होनी चाहिए थी बल्कि एक कमजोरी थी जो विक्की ने महसूस कर ली और वो बोला भाभी अभी पूरा नहीं हुआ थोड़ा और कर लेता हूँ आपको पूरी राहत मिलेगी, मैं चुप रही क्योंकि दर्द के साथ अब एक नई चाहत जाग रही थी जो मुझे रोक नहीं पा रही थी।

रात हो चुकी थी और रोहन अभी तक घर नहीं लौटे थे क्योंकि उनकी बैठक देर तक चल रही थी, कमरे में सिर्फ हम दोनों थे और बाहर वर्षा की आवाज और तेज हो गई थी जैसे वो हमारे बीच की चुप्पी को और गहन बना रही हो, विक्की ने मालिश जारी रखी और अब उसके हाथ मेरी साड़ी के नीचे सरकने लगे पहले हल्के से फिर थोड़ा जोर से जैसे वो मेरी ग@@ड को मसल रहा हो और हर स्पर्श से मेरी चू@@ा गीली होने लगी थी लेकिन मैंने खुद को याद दिलाया कि ये गलत है मैं भाभी हूँ और वो देवर लेकिन शरीर की ये तड़प नैतिकता से ऊपर उठ रही थी, वो फुसफुसाया भाभी आपकी त्वचा कितनी मुलायम है जैसे रेशम हो और आप इतनी सुंदर हैं कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा, उसकी बातें सुनकर मेरी धड़कनें तेज हो गईं और मैंने कहा विक्की ये गलत है हम रिश्तेदार हैं 

लेकिन मेरी आवाज में वो विरोध नहीं था जो मन में था बल्कि एक आमंत्रण सा था जो विक्की ने समझ लिया और उसके हाथ अब मेरी चू@@ा के पास पहुँच गए जहाँ उसने हल्के से उँगलियाँ फेरीं और क्लि@@ को छुआ जिससे मेरी कमर खुद उठ गई और एक सिसकारी निकल गई आह विक्की धीरे लेकिन मैंने रोकने की बजाय और निकट हो गई, वो समझ गया कि मैं अब रुक नहीं सकती और उसने धीरे से मेरी साड़ी पूरी ऊपर सरका दी और मेरी चू@@ा पर तेल लगाकर मालिश करने लगा 

लेकिन अब ये मालिश नहीं थी बल्कि एक कामुक स्पर्श था जो हमें दोनों को एक नई दुनिया में ले जा रहा था, मैंने आँखें बंद कर लीं और महसूस किया कि उसके हाथ कितने कुशल हैं जो हर हिस्से को छूकर उत्तेजित कर रहे हैं और मेरी झ@@ट हल्की थी जो गीली हो चुकी थी, विक्की मेरी बगल में बैठा था और मैं पेट के बल लेटी थी इसलिए उसके हाथ मेरी पीठ से होते हुए बगलों से घूमकर चू@@ा तक पहुँच रहे थे बिना किसी असंभव गति के जैसे वो मेरी बॉडी को बगल से पकड़ रहा हो।

धीरे-धीरे विक्की ने अपनी स्थिति बदली और अब वो मेरे ऊपर झुक गया उसके शरीर की गर्माहट मेरी पीठ पर महसूस हो रही थी और उसके लि@@ का दबाव मेरी ग@@ड से टकरा रहा था जो सख्त हो चुका था, मैंने मन में सोचा कि ये क्या हो रहा है मैं एक विवाहित महिला हूँ और ये मेरा देवर है अगर किसी को पता चला तो परिवार टूट जाएगा लेकिन शरीर की ये तड़प इतनी मजबूत थी कि मैं खुद को रोक नहीं पाई और मैंने धीरे से कहा विक्की और नीचे करो दर्द वहाँ भी है, वो मुस्कुराया और उसके हाथ अब मेरी चू@@ा में अंदर गए पहले एक उंगली फिर दो और वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा जी-स्पॉट को छूता हुआ 

जिससे मेरी साँसें रुक सी गईं और मैं कमर हिलाने लगी जैसे लहरें मेरे शरीर में दौड़ रही हों, बाहर वर्षा की बूंदें खिड़की पर टकरा रही थीं और कमरे में हमारी साँसों की आवाजें गूँज रही थीं जो मिश्रित होकर एक संगीत सा बना रही थीं, विक्की ने कहा भाभी आप अंदर से कितनी गर्म हैं जैसे कोई आग जल रही हो और मैं आपकी ये आग बुझाना चाहता हूँ लेकिन मैंने कहा विक्की नहीं ये गलत है लेकिन मेरी कमर खुद उसके हाथों की दिशा में बढ़ रही थी और मैं जानती थी कि अब पीछे हटना नामुमकिन है, वो रुका नहीं और उसने मुझे धीरे से पलटा अब मैं पीठ पर लेटी थी उसके सामने मेरे स्त@@ उसके ब्लाउज में कैद थे 

लेकिन नि@@ल सख्त हो चुके थे जो ब्लाउज से उभर रहे थे, विक्की ने ब्लाउज के हुक खोले और मेरे स्त@@ को हाथों में लिया पहले मसला फिर मुँह में लिया और चू@@ा जिससे दर्द और मजा दोनों का मिश्रण हो गया मैं सिसकारी आह विक्की धीरे लेकिन और जोर से और उसके स्पर्श से मेरी चू@@ा और गीली हो गई, मैं पीठ पर लेटी थी और विक्की मेरी बगल में नीचे झुका हुआ था इसलिए उसके हाथ मेरी पीठ से होते हुए स्त@@ तक पहुँच रहे थे और उसका मुँह आसानी से मेरे नि@@ल तक पहुँच रहा था बिना किसी खिंचाव के।

अब विक्की ने अपनी कमीज उतारी और उसके मजबूत शरीर की मांसपेशियाँ चमक रही थीं पसीने से जो वर्षा की नमी से मिलकर एक चमक दे रही थीं, मैंने उसके सीने पर हाथ फेरा और महसूस किया कि कितना ठोस है वो जैसे कोई मूर्ति हो और मेरे मन में एक अपराध बोध था कि मैं अपने पति को धोखा दे रही हूँ लेकिन विक्की का स्पर्श इतना नशीला था कि मैं भूल गई सब और उसके लि@@ को पैंट के ऊपर से छुआ जो सख्त और बड़ा था, वो बोला भाभी आप मुझे पागल कर रही हो और उसने पैंट उतार दी उसका ल@ंड बाहर आ गया जो नसों से फूला हुआ था और सिरा गीला पूर्व रस से, मैंने झिझकते हुए उसे हाथ में लिया और हल्के से सहलाया 

लेकिन मन में शर्म थी कि ये क्या कर रही हूँ लेकिन विक्की ने मेरी चू@@ा पर अपना ल@ंड रगड़ा और धीरे से धक्का दिया चू@@ा फैली दर्द हुआ लेकिन मीठा था पूरा अंदर गया और दीवारें कसकर पकड़ीं, वो धक्के मारने लगा पहले धीरे जैसे हर पल को महसूस कर रहा हो फिर तेज हर धक्के में चटकने की आवाज और रस का बहाव मैं कमर उठा रही थी आह विक्की जोर से और गहरा और हम दोनों पसीने से तर हो गए थे शरीर लहरा रहे थे जैसे कोई तूफान आया हो, मैं चरम पर पहुँच गई लहरें दौड़ीं शरीर काँप रहा था 

लेकिन विक्की रुका नहीं उसने स्थिति बदली मुझे ऊपर बिठाया और मैं ऊपर-नीचे हो रही थी मेरे स्त@@ उछल रहे थे वो उन्हें पकड़कर मसल रहा था नि@@ल को चूस रहा था और आखिर उसका गर्म रस मेरी चू@@ा में फूटा जैसे कोई नदी बह गई हम दोनों थककर लेट गए साँसें तेज लेकिन संतुष्टि इतनी गहन थी कि लग रहा था ये राज हमेशा हमारे बीच रहेगा लेकिन मन में अपराध बोध भी था जो हमें और निकट ला रहा था, मैं पीठ पर लेटी थी और विक्की मेरे ऊपर था इसलिए धक्कों में उसका शरीर मेरे ऊपर दब रहा था और हाथ मेरे बगलों को पकड़ रहे थे संतुलन के लिए ताकि गति तर्कसंगत लगे न कि असंभव।

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