मीरा माँ की चु@@ई—>
बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और रात के सन्नाटे में बादलों की गड़गड़ाहट दिल को दहला देने वाली थी, लेकिन आर्यन के कमरे के अंदर का माहौल कुछ और ही था। मीरा, जो उसकी सौतेली माँ थी, आज अपनी रेशमी नीली साड़ी में गजब का कहर ढा रही थी। उसके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उसे देखकर अपनी सुध-बुध खो दे। मीरा के तरबूज इतने उभरे हुए और पुष्ट थे कि ब्लाउज का कपड़ा उन्हें सँभालने में नाकाम हो रहा था। जब वह सांस लेती, तो उसके तरबूज ऊपर-नीचे होते और उनकी गहराई आर्यन की आँखों के सामने एक नशा सा घोल देती थी। आर्यन पिछले कई महीनों से अपनी माँ की इस कामुक काया को छुप-छुपकर निहारा करता था, लेकिन आज का अकेलापन और बिजली का चले जाना जैसे उसके सब्र का बांध तोड़ने पर आमादा था।
मीरा की कमर बहुत ही पतली और लचीली थी, जबकि उसका पिछवाड़ा काफी भरा हुआ और गोल था, जो चलने पर किसी लहर की तरह डोलता था। जब आर्यन ने मीरा को रसोई में काम करते हुए देखा, तो उसका खीरा धीरे-धीरे अपनी जगह से सरकने लगा और पायजामे में एक भारीपन का एहसास होने लगा। मीरा की गर्दन सुराहीदार थी और उसके कान के पास से गुजरती हुई लटें उसके चेहरे की चमक को और बढ़ा रही थीं। आर्यन को देख मीरा ने एक गहरी सांस ली, जिससे उसके ब्लाउज के अंदर दबे तरबूज और भी ज्यादा उभर आए। उसने आर्यन की ओर देखते हुए धीमी आवाज में कहा, आर्यन बेटा, डर लग रहा है क्या? बिजली भी नहीं है और पापा भी शहर से बाहर हैं। उसकी आवाज में एक अजीब सी थरथराहट थी जो आर्यन के दिल के तारों को छेड़ गई।
आर्यन धीरे-धीरे मीरा के करीब गया और उसने महसूस किया कि मीरा की सांसें भी तेज चल रही थीं। कमरे में मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में मीरा का यौवन और भी निखर कर आ रहा था। उन दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता और एक दबी हुई इच्छा थी जो सालों से सुलग रही थी। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर मीरा के कंधे पर हाथ रखा, जो एकदम मखमली और गर्म था। स्पर्श पाते ही मीरा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उसके चेहरे पर लज्जा की एक हल्की सी लाली छा गई। उसने अपनी नज़रें झुका लीं, लेकिन आर्यन का हाथ नहीं हटाया। उस पल में उन दोनों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव एक गहरी कामुकता में बदलने लगा था, जहाँ रिश्तों की मर्यादा और मन की इच्छाओं के बीच एक द्वंद्व छिड़ा हुआ था।
आर्यन ने धीरे से मीरा को अपनी ओर खींचा और उसके गले के पास अपनी नाक ले जाकर उसकी खुशबू महसूस करने लगा। मीरा ने अपनी आँखें मूंद लीं और एक धीमी सी कराह उसके गले से निकली। आर्यन ने अपने हाथों को मीरा की कमर पर रखा और उसे महसूस किया कि वह पसीने से भीग रही थी। उसने मीरा के कानों में फुसफुसाते हुए कहा, माँ, आप आज बहुत सुंदर लग रही हैं, मेरा खुद पर काबू नहीं रह रहा। मीरा ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और आर्यन के चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके होठों का रसपान किया। यह मिलन इतना गहरा था कि दोनों की सांसें एक दूसरे में घुलने लगीं। आर्यन ने महसूस किया कि मीरा के तरबूज उसके सीने से दब रहे थे, जिससे उसे एक असीम सुख का अनुभव हो रहा था।
जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ी, आर्यन ने मीरा की साड़ी का पल्लू कंधे से सरका दिया, जिससे उसके सफ़ेद और गोल तरबूज पूरी तरह सामने आ गए। उन तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे मटर की तरह दाने उभरे हुए थे जो ठंड और उत्तेजना से सख्त हो गए थे। आर्यन ने झुककर एक मटर को अपने मुंह में लिया और उसे धीरे से चूसने लगा। मीरा की सिसकियां अब कमरे में गूँजने लगी थीं, वह आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फँसाकर उसे और भी जोर से अपने सीने से चिपका रही थी। उसका शरीर धनुष की तरह तन गया था और वह धीरे-धीरे अपना पिछवाड़ा आर्यन के खीरे पर रगड़ने लगी थी। आर्यन को महसूस हो रहा था कि उसका खीरा अब अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ मीरा की गहराई में उतरने को बेताब है।
मीरा ने आर्यन के पायजामे को नीचे उतारा और जब उसकी नज़र आर्यन के विशाल और कड़क खीरे पर पड़ी, तो वह हक्की-बक्की रह गई। उसने धीरे से अपने कोमल हाथों से खीरे को पकड़ा और उसे सहलाने लगी। कुछ ही पलों में उसने उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे ऊपर-नीचे चूसना शुरू किया। खीरा चूसना आर्यन के लिए एक ऐसा अनुभव था जिसने उसे स्वर्ग की याद दिला दी। मीरा बड़े प्यार से और गहराई से उस पर अपना जादू चला रही थी। कुछ देर बाद, आर्यन ने मीरा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह उतार दिए। मीरा की घनी बालों वाली खाई अब आर्यन के सामने थी, जो पूरी तरह से गीली और रसीली हो चुकी थी। आर्यन ने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, तो मीरा ने अपनी कमर उठाकर आर्यन का साथ देना शुरू कर दिया।
आर्यन अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था, उसने मीरा के दोनों पैरों को चौड़ा किया और अपने भारी खीरे को खाई के मुहाने पर टिका दिया। जैसे ही उसने पहला धक्का लगाया, मीरा की एक तेज कराह निकली और उसका पूरा बदन कांप गया। आर्यन ने धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ उसका खीरा मीरा की खाई की गहराई को नाप रहा था। मीरा के मुँह से आर्यन… और… तेज़… जैसे शब्द निकलने लगे। कमरे में शरीर के टकराने की आवाज़ और सिसकियां गूँज रही थीं। आर्यन ने मीरा को उल्टा लेटाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। इस स्थिति में मीरा का पिछवाड़ा इतना आकर्षक लग रहा था कि आर्यन ने अपनी गति और भी बढ़ा दी। मीरा के तरबूज बिस्तर पर रगड़ खा रहे थे और वह खुशी और दर्द के एक अनोखे मिश्रण का आनंद ले रही थी।
खुदाई की प्रक्रिया अब अपने चरम पर थी, दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और सांसें उखड़ रही थीं। आर्यन ने मीरा को फिर से सीधा किया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। उसने अब तक की सबसे गहरी और तेज़ खुदाई शुरू की। मीरा चिल्ला रही थी, उसका शरीर झटके खा रहा था और उसकी खाई से रस निकलने लगा था। आर्यन ने भी महसूस किया कि अब उसका भी रस छूटने वाला है, उसने आखिरी कुछ दमदार धक्के लगाए और अपना सारा गर्म रस मीरा की खाई के अंदर ही उड़ेल दिया। मीरा ने आर्यन को कसकर पकड़ लिया और दोनों कुछ देर तक उसी अवस्था में लेटे रहे, जैसे समय ठहर गया हो। उनके चेहरों पर एक अजीब सा सुकून और तृप्ति का भाव था, जो केवल रूहानी और जिस्मानी मिलन के बाद ही आता है।
खुदाई खत्म होने के बाद, दोनों एक-दूसरे की बाहों में सिमट कर लेटे रहे। मीरा का सिर आर्यन के सीने पर था और आर्यन प्यार से उसके बालों को सहला रहा था। वह शर्म जो पहले थी, अब एक गहरे लगाव में बदल चुकी थी। मीरा ने धीरे से कहा, आज तुमने मुझे सच में एक औरत होने का एहसास कराया है आर्यन। आर्यन ने उसके माथे को चूमा और महसूस किया कि यह केवल एक जिस्मानी भूख नहीं थी, बल्कि दो अकेले दिलों का मिलन था। बाहर बारिश अब धीमी हो चुकी थी, लेकिन उनके अंदर की आग ने एक नई कहानी लिख दी थी। वे जानते थे कि अब उनके बीच का रिश्ता पहले जैसा नहीं रहेगा, लेकिन इस बदलाव में उन्हें एक अनूठा आनंद और सुकून मिल रहा था जो शब्दों में बयां करना नामुमकिन था।