रीना भाभी की चु@@ई—>
गर्मी की वो दोपहर आज भी मुझे याद है जब घर के बाकी सदस्य एक शादी में गए हुए थे और मैं अपनी प्यारी रीना भाभी के साथ घर पर अकेला था। रीना भाभी, जिनकी उम्र लगभग तीस साल थी, सुंदरता का एक जीता जागता उदाहरण थीं। उनकी गेंहुई रंगत, रेशमी लंबे बाल और उनकी आँखों में छिपी वो शरारत किसी भी मर्द का दिल धड़काने के लिए काफी थी। उस दिन उन्होंने एक पतली सी सूती साड़ी पहनी थी, जो उनके शरीर के हर घुमाव को साफ-साफ बयां कर रही थी। उनके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उन्हें देखते ही सुध-बुध खो बैठे।
रीना भाभी के शरीर का हर हिस्सा किसी कलाकृति की तरह तराशा हुआ था। उनकी साड़ी के ब्लाउज से उनके बड़े-बड़े रसीले तरबूज आधे बाहर झांक रहे थे, जो उनकी हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। जब वो चलती थीं, तो उनके पिछवाड़े का उतार-चढ़ाव मेरी धड़कनों को बेकाबू कर देता था। उनके कमर की पतली ढलान और उनके गोरे पैर मुझे अपनी ओर खींचते थे। उनकी नाभि के पास लगा वो काला तिल जैसे मेरी नजरों को वहीं कैद कर लेता था। उनकी हर अदा में एक ऐसी मादकता थी, जो मुझे पागल करने के लिए काफी थी।
हमारे बीच एक ऐसा अनकहा रिश्ता था, जो सिर्फ देवर और भाभी का नहीं रह गया था। हम दोनों घंटों बैठकर बातें करते थे और उन बातों में अक्सर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और गहरा लगाव झलकता था। रीना भाभी मुझे बहुत प्यार करती थीं, लेकिन वो प्यार धीरे-धीरे एक गहरी चाहत में बदलने लगा था। उनकी बातों में अब एक अलग तरह की गर्मी महसूस होने लगी थी। जब भी मैं उनके पास से गुजरता, वो अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा और ढीला कर देतीं, जिससे उनके मटर साफ नजर आने लगते थे। यह आकर्षण अब एक प्यास बन चुका था।
उस दोपहर जब रसोई में भाभी खाना बना रही थीं, तो पसीने की कुछ बूंदें उनके गले से फिसलकर उनके तरबूजों के बीच की गहरी घाटी में समा रही थीं। मैं उन्हें देख रहा था और मेरी सांसें तेज हो गई थीं। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराते हुए कहा, ‘समीर, क्या देख रहे हो? क्या तुम्हें भी गर्मी लग रही है?’ उनकी उस आवाज में एक अजीब सी खनक थी, जिसने मेरे मन के संघर्ष को खत्म कर दिया। मेरी झिझक अब टूट रही थी और मेरा मन बस उन्हें अपनी बाहों में भरने के लिए मचल उठा था।
मैं धीरे से उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपनी हथेलियां उनकी कोमल कमर पर टिका दीं। मेरा पहला स्पर्श पाते ही भाभी के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी। मैंने अपने हाथ ऊपर की ओर बढ़ाए और उनके रेशमी तरबूजों को धीरे से अपनी उंगलियों में भर लिया। वो इतने मुलायम और गर्म थे कि मुझे लगा जैसे मैं किसी सपने में हूँ। भाभी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा और उनके होंठों पर एक ऐसी मुस्कान थी जो मुझे आगे बढ़ने का निमंत्रण दे रही थी।
भाभी ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने कमरे की ओर ले गईं। कमरे में अंधेरा था और बस खिड़की से आती हुई हल्की रोशनी उनके चेहरे को चमका रही थी। मैंने उन्हें अपनी बाहों में लिया और उनके होंठों का रस चखने लगा। हमारी सांसें एक-दूसरे में उलझ रही थीं। मैंने धीरे-धीरे उनके कपड़े उतारने शुरू किए। जब वो पूरी तरह से निर्वस्त्र हुईं, तो उनकी सुंदरता ने मेरा दम निकाल दिया। उनके तरबूज अब पूरी तरह से स्वतंत्र थे और उनके ऊपर के मटर ठंड और उत्तेजना से पूरी तरह से सख्त हो गए थे।
मैंने नीचे झुककर उनके मटर को अपने मुंह में लिया और उन्हें धीरे-धीरे चूसने लगा। भाभी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं और वो मेरा सिर अपने सीने से और जोर से दबाने लगीं। फिर मेरी नजर उनकी गहरी खाई पर गई, जो बालों के बीच छिपी हुई थी। मैंने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, तो महसूस हुआ कि उनकी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। भाभी अपनी कमर ऊपर उठा रही थीं और उन्हें वो अहसास बहुत पसंद आ रहा था। मैंने नीचे झुककर उनकी खाई चाटना शुरू कर दिया, जिससे उनका शरीर कांपने लगा।
भाभी की उत्तेजना अब चरम पर थी, उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर नीचे ले गईं और मेरे सख्त खीरा को महसूस किया। उन्होंने धीरे से मेरा खीरा अपने कोमल हाथों में लिया और उसे सहलाने लगीं। फिर वो घुटनों के बल बैठ गईं और मेरा खीरा मुंह में लेकर उसे चूसने लगीं। उनका खीरा चूसना इतना आनंददायक था कि मुझे लगा मेरा रस अभी निकल जाएगा। भाभी की जीभ का स्पर्श और उनके होंठों की गर्मी मेरे खीरा को और भी ज्यादा सख्त और लंबा कर रही थी।
अब भाभी सहन नहीं कर पा रही थीं, उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरे खीरा को अपनी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठ गईं। जैसे ही मेरा खीरा उनकी तंग खाई में समाया, हम दोनों के मुंह से एक साथ आह निकली। वो बहुत ही तंग और गर्म थी। भाभी ने ऊपर-नीचे होना शुरू किया और सामने से खोदना जारी रखा। उनके तरबूज मेरी आंखों के सामने झूल रहे थे और मैं उन्हें पकड़कर मरोड़ रहा था। खुदाई की वो आवाज कमरे में गूंज रही थी।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। डॉगी स्टाइल में भाभी का पिछवाड़ा बहुत ही आकर्षक लग रहा था। मैं अपने खीरा को पूरी ताकत से उनकी खाई में डाल रहा था और हर वार के साथ भाभी जोर-जोर से कराह रही थीं। ‘ओह समीर, और जोर से खोदो, आज मुझे पूरा खोद डालो,’ उनके ये शब्द मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहे थे। हमारी खुदाई अब अपनी पूरी रफ्तार पर थी और हम दोनों ही पसीने से तर-बतर हो चुके थे।
भाभी की खाई अब पूरी तरह से चिकनी हो चुकी थी और मेरा खीरा उसमें बिना किसी रुकावट के अंदर-बाहर हो रहा था। मैंने उनकी कमर पकड़कर उन्हें अपने और करीब खींच लिया। भाभी की आहें अब चीखों में बदल रही थीं। मुझे महसूस हुआ कि मेरा रस निकलने वाला है। मैंने भाभी को फिर से सीधा लिटाया और अपनी पूरी ताकत झोंक दी। बस कुछ ही पलों में, हम दोनों का शरीर कांप उठा और मेरा गरम-गरम रस उनकी खाई के अंदर गहराई में छूटने लगा। भाभी ने भी अपना रस निकाल दिया और मुझे कसकर गले लगा लिया।
खुदाई खत्म होने के बाद हम दोनों काफी देर तक एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। भाभी का चेहरा सुकून से भरा हुआ था और उनके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। उन्होंने मेरे माथे को चूमा और कहा, ‘समीर, तुमने आज मुझे वो खुशी दी है जिसकी मुझे बरसों से तलाश थी।’ मेरी हालत ऐसी थी कि मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था, बस उनकी गर्माहट महसूस कर रहा था। उस दिन के बाद से हमारे बीच का बंधन और भी गहरा हो गया, जो सिर्फ शरीर का नहीं बल्कि आत्मा का जुड़ाव बन गया।