रेखा मौसी की चु@@ई —> दोपहर की चिलचिलाती धूप में समीर जब अपनी मौसी रेखा के घर पहुँचा, तो उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि यह छुट्टियाँ उसके जीवन का सबसे कामुक अध्याय बनने वाली हैं। रेखा मौसी की उम्र करीब अड़तीस साल थी, लेकिन उनकी फिटनेस किसी पच्चीस साल की युवती को मात देती थी। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, समीर की नज़रें उनकी पतली कमर और भारी कूल्हों पर टिक गईं। रेखा ने एक जालीदार हल्की नीली साड़ी पहनी थी, जिसके भीतर से उनके शरीर की बनावट साफ झलक रही थी। उनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी और आँखों में एक ऐसी गहराई, जो किसी भी मर्द को खुद में डुबो देने के लिए काफी थी। समीर ने उनके पैर छुए, तो रेखा ने उसे गले लगा लिया, और उस पल समीर के सीने पर उनके दो विशाल और नरम तरबूज का दबाव महसूस हुआ, जिससे उसके शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई।
रेखा मौसी का शरीर कुदरत का एक अनमोल तोहफा था, उनके शरीर का हर हिस्सा उभारों और गहराइयों से भरा हुआ था। उनकी साड़ी के पल्लू से झांकते हुए उनके गोरे और गोल तरबूज समीर की धड़कनों को तेज़ कर रहे थे। जब वो चलती थीं, तो उनका पिछवाड़ा एक खास लय में हिलता था, जो समीर के मन में गंदी कल्पनाओं को जन्म दे रहा था। उनके सांवले बदन पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं, जो उनके ब्लाउज के भीतर समा रही थीं। समीर ने गौर किया कि उनके तरबूज के ऊपर छोटे-छोटे मटर साफ उभर रहे थे, जो शायद गर्मी या समीर की मौजूदगी की वजह से सख्त हो गए थे। रेखा ने समीर को कमरे में बैठाया और ठंडा पानी लाने के लिए मुड़ीं, तब उनके भारी पिछवाड़े का नज़ारा समीर की आँखों के सामने पूरी तरह से खुल गया।
शाम ढलते-ढलते घर का माहौल और भी ज्यादा भारी होने लगा था, क्योंकि रेखा के पति काम के सिलसिले में शहर से बाहर थे। दोनों ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठे पुरानी बातें कर रहे थे, लेकिन समीर का ध्यान सिर्फ मौसी के होठों और उनकी गर्दन की सुराहीदार बनावट पर था। रेखा को भी शायद समीर की नज़रों की तपिश महसूस हो रही थी, क्योंकि वो बार-बार अपना पल्लू ठीक कर रही थीं, जिससे उनके तरबूज और भी ज्यादा उभर कर सामने आ रहे थे। बातचीत के दौरान जब समीर का हाथ गलती से मौसी की जांघों से टकराया, तो एक गहरी खामोशी छा गई। रेखा ने अपना हाथ नहीं हटाया, बल्कि समीर की आँखों में गहराई से देखते हुए मुस्कुरा दीं। उस मुस्कान में एक आमंत्रण था, एक दबी हुई प्यास थी जिसे बरसों से किसी ने नहीं बुझाया था।
समीर के मन में चल रहा संघर्ष अब खत्म हो चुका था और उसकी जगह एक तीव्र इच्छा ने ले ली थी। उसने धीरे से अपना हाथ रेखा मौसी की कमर पर रखा, जहाँ से उनकी त्वचा रेशम की तरह मुलायम और गर्म महसूस हो रही थी। रेखा ने एक गहरी आह भरी और अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे वो इस पल का सालों से इंतज़ार कर रही हों। समीर ने उनके करीब जाकर उनके कानों के पास फुसफुसाते हुए कहा कि वो कितनी खूबसूरत लग रही हैं। रेखा की सांसें तेज़ हो गईं और उनके मटर जैसे हिस्से साड़ी के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिखने लगे। समीर ने अपनी उंगलियों से उनकी कमर को सहलाना शुरू किया, जिससे रेखा के शरीर में एक सिहरन पैदा हुई और वो धीरे-धीरे समीर की गोद की तरफ झुकने लगीं।
पहला स्पर्श ही इतना नशीला था कि दोनों की धड़कनें बेकाबू हो गईं। समीर ने साहस जुटाया और रेखा मौसी के होठों पर अपने होंठ रख दिए। यह चुंबन नहीं था, बल्कि दो प्यासी आत्माओं का मिलन था। रेखा ने भी पूरी शिद्दत से समीर का साथ दिया और अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी। समीर के हाथों ने अब अपना रास्ता बदल लिया था और वो मौसी के भारी तरबूज को अपनी हथेलियों में भरकर दबाने लगा। तरबूज इतने नरम और रसीले थे कि समीर उन्हें छोड़ना ही नहीं चाहता था। रेखा के मुंह से दबी हुई कराहें निकलने लगीं और उन्होंने समीर के सिर को अपने सीने से चिपका लिया। कमरे की लाइटें धीमी थीं और बाहर की खामोशी में केवल उनकी भारी सांसों की आवाज़ गूँज रही थी, जो आने वाले तूफ़ान की आहट दे रही थी।
धीरे-धीरे कपड़ों का बोझ कम होने लगा और जल्द ही दोनों पूरी तरह से कुदरती हालत में एक-दूसरे के सामने थे। समीर की आँखें रेखा मौसी की नग्न सुंदरता को देखकर फटी की फटी रह गईं। उनके शरीर पर घने और काले बाल थे जो उनकी जांघों के बीच की गहरी खाई को छिपाने की कोशिश कर रहे थे। समीर ने अपना हाथ नीचे बढ़ाकर उनकी खाई को टटोला, जो पहले से ही गीली और फिसलन भरी हो चुकी थी। रेखा ने समीर के सख्त खीरा को अपने हाथों में पकड़ लिया और उसे सहलाने लगीं। उनका स्पर्श इतना जादुई था कि समीर का खीरा और भी बड़ा और कड़ा हो गया। रेखा ने बिना देर किए अपना सिर नीचे झुकाया और समीर के खीरा को अपने मुंह में ले लिया, उसे किसी कीमती फल की तरह चूसने लगीं, जिससे समीर के मुँह से सिसकारी निकल गई।
समीर अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था, उसने मौसी को बेड पर लिटाया और उनकी टांगें फैलाकर उनकी खाई को चाटना शुरू कर दिया। रेखा बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठियों में भींच रही थीं और उनका शरीर धनुष की तरह ऊपर की ओर उठ रहा था। जैसे ही समीर की जीभ उनकी खाई के भीतर गई, रेखा ने ज़ोर से चिल्लाते हुए अपना सारा रस छोड़ना शुरू कर दिया। समीर ने अपनी उंगली से उनकी खाई में गहराई तक खुदाई शुरू की, जिससे रेखा पागलों की तरह तड़पने लगीं। उन्होंने समीर को अपने ऊपर खींच लिया और उसे अपने भीतर उतारने की विनती करने लगीं। समीर ने अपने खीरा को उनकी खाई के द्वार पर रखा और एक झटके में सामने से खोदना शुरू कर दिया।
खुदाई की प्रक्रिया बहुत ही दमदार और लयबद्ध थी। हर धक्के के साथ समीर का खीरा रेखा मौसी की गहराई को नाप रहा था। कमरे में केवल शरीर के टकराने की आवाज़ और रेखा की ‘आह-ऊह’ की आवाज़ें गूँज रही थीं। समीर ने उनके दोनों तरबूज को अपने हाथों में पकड़ रखा था और उन्हें बुरी तरह मसल रहा था। रेखा कह रही थीं, ‘हाँ समीर, और तेज़ खोदो, मुझे पूरी तरह भर दो, आज मेरा कोना-कोना तुम्हारी प्यास से भीग जाना चाहिए।’ समीर ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी, वो अपनी पूरी ताकत से रेखा की खाई की गहराई में खुदाई कर रहा था। पसीने से तरबतर दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपक रहे थे और गर्मी अपने चरम पर पहुँच चुकी थी।
कुछ देर बाद, समीर ने रेखा को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने की स्थिति में ला दिया। पीछे से उनका पिछवाड़ा किसी ऊँचे पहाड़ की तरह लग रहा था। समीर ने अपने खीरा को पीछे के रास्ते की तरफ ले जाकर फिर से ज़ोरदार खुदाई शुरू की। रेखा को इस अंदाज़ में खुदाई करवाना बहुत पसंद आ रहा था, वो बेड के सिरहाने को पकड़कर झूल रही थीं। समीर के हर धक्के के साथ उनका पूरा बदन कांप रहा था। अंत में, जब दोनों का रस निकलने वाला था, समीर ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और रेखा की खाई के भीतर अपना गरम रस छोड़ दिया। रेखा ने भी उसी पल अपना रस निकाला और पूरी तरह निढाल होकर समीर की बाहों में गिर गईं।
खुदाई के बाद की वो शांति बहुत ही सुखद थी। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, पसीने और प्रेम के रसों में सराबोर। रेखा मौसी की आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी और समीर को लग रहा था जैसे उसने दुनिया की सबसे बड़ी जंग जीत ली हो। उनके बिखरे हुए बाल और लाल हुए मटर उनकी उत्तेजना की गवाही दे रहे थे। समीर ने धीरे से उनके माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में और कस लिया। रेखा ने मुस्कुराते हुए कहा कि उसने आज उसे फिर से जीवित कर दिया है। उस रात की यादें समीर के जेहन में हमेशा के लिए ताज़ा रहने वाली थीं, जहाँ उसने अपनी मौसी के साथ प्रेम और वासना की वो ऊँचाइयाँ छुई थीं, जिन्हें वो कभी नहीं भूल सकता था।