रात के ग्यारह बज चुके थे और पूरे घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। राजेश अपने कमरे में लेटा हुआ छत की ओर देख रहा था, लेकिन उसके मन में अपनी साली कविता के शरीर का अक्स तैर रहा था। कविता जो अपनी बड़ी बहन की शादी के बाद अक्सर यहाँ रहने आती थी, उसकी मादक देह और उभरते हुए अंगों ने राजेश की रातों की नींद हराम कर दी थी। राजेश जानता था कि यह रिश्ता मर्यादाओं की जंजीरों में बंधा है, लेकिन उसकी आँखों ने जब भी कविता के शरीर के उतार-चढ़ाव देखे, उसका मन विचलित हो उठता था। वह उसके अंगों की बनावट और उसकी चाल में छिपे आकर्षण को नजरअंदाज नहीं कर पा रहा था, विशेष रूप से उसकी रेशमी त्वचा और वह मादक गंध जो उसके पास से गुजरते वक्त महसूस होती थी।
तभी कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और कविता अंदर आई, उसके हाथ में पानी का गिलास था। उसने एक पतली सी सूती नाइटगाउन पहनी थी, जिसके अंदर उसके गोल और रसीले तरबूज साफ झलक रहे थे। कविता की उम्र अभी मात्र 24 साल थी और उसका शरीर पूरी तरह से यौवन की दहलीज पर खड़ा था। उसके शरीर का ढांचा ऐसा था कि जो भी देखे, वह बस देखता ही रह जाए। उसके तरबूज इतने भारी और सुडौल थे कि नाइटगाउन के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जैसे ही वह राजेश के पास झुकी, राजेश की नजरें सीधे उसके नाइटगाउन के गले से झांकते उन गहरे खड्डों और उन पर जड़े गुलाबी मटर पर जा टिकीं।
राजेश का मन जोर-जोर से धड़कने लगा, वह अपनी उत्तेजना को छुपाने की कोशिश कर रहा था लेकिन कविता की मौजूदगी ने उसके अंदर के सोए हुए जानवर को जगा दिया था। कविता ने गिलास मेज पर रखा और जाने के बजाय वहीं बेड के कोने पर बैठ गई। उसने अपनी सुडौल टांगों को एक-दूसरे पर चढ़ा रखा था, जिससे उसका पिछवाड़ा और भी उभर कर सामने आ रहा था। उसके पिछवाड़े का घेराव इतना मांसल और आकर्षक था कि राजेश का हाथ अनायास ही उसकी ओर बढ़ने को मचलने लगा। दोनों के बीच एक अनकहा सा खिंचाव था, एक ऐसी प्यास जो बरसों से दबी हुई थी और आज वह मर्यादा की सीमाओं को लांघने के लिए तैयार थी।
राजेश ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और कविता की हथेली पर रख दिया। कविता ने अपनी आँखें झुका लीं, लेकिन उसका हाथ पीछे नहीं खींचा। राजेश ने उसके चेहरे को अपनी ओर मोड़ा और उनके होंठों का मधुर स्पर्श शुरू हुआ। यह स्पर्श धीरे-धीरे गहराता गया और राजेश के हाथ कविता के भारी तरबूजों पर पहुँच गए। उसने उन मुलायम और गर्म तरबूजों को अपने हाथों में भरकर मसलना शुरू किया। कविता के मुँह से एक धीमी सी आह निकली और उसने राजेश को और करीब खींच लिया। राजेश के हाथ अब उसके नाइटगाउन के अंदर पहुँच चुके थे, जहाँ वह उन नन्हे और सख्त मटरों को अपनी उंगलियों से सहला रहा था, जिससे कविता का पूरा शरीर कांप उठा।
उत्तेजना अब अपने चरम पर थी। राजेश ने कविता को पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया और उसकी गहरी और रसीली खाई को निहारने लगा। उस खाई के आसपास हल्के काले बाल थे जो उसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। राजेश ने अपना सिर नीचे झुकाया और अपनी जीभ से उस खाई को चाटना शुरू कर दिया। कविता बिस्तर पर तड़पने लगी, उसके हाथ राजेश के बालों में फंस गए थे। जैसे-जैसे राजेश की जीभ उस खाई के अंदर गहराई तक जा रही थी, कविता का शरीर धनुष की तरह तनने लगा। वह बार-बार अपनी कमर ऊपर उठाती ताकि राजेश और गहराई से उसे तृप्त कर सके।
जब कविता पूरी तरह से गीली हो गई और उसकी खाई से रसीला पदार्थ निकलने लगा, तब राजेश ने अपना सख्त और लंबा खीरा बाहर निकाला। वह खीरा इतना मजबूत और गर्म था कि कविता उसे देखकर दंग रह गई। राजेश ने अपने खीरे को कविता की खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से धक्का दिया। कविता ने कसकर राजेश के कंधों को पकड़ लिया। जैसे ही वह खीरा पूरी तरह से अंदर समाया, एक अजीब सी शांति और चरम सुख का अहसास दोनों को हुआ। राजेश ने अब सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ कविता के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके टकराने की आवाज कमरे में गूँज रही थी।
खुदाई की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी। राजेश अब पागलपन की हद तक पहुँच चुका था। उसने कविता को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में ला दिया। पीछे से उसका पिछवाड़ा इतना विशाल और कामुक लग रहा था कि राजेश ने अपनी पूरी ताकत से धक्के मारने शुरू किए। हर प्रहार पर कविता के मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं और वह ‘जीजा जी, और तेज’ की पुकार लगा रही थी। कमरे का तापमान बढ़ चुका था और दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर थे। राजेश का खीरा उस तंग खाई में बार-बार गहराई तक जा रहा था, जिससे घर्षण और आनंद का एक अद्भुत संगम बन रहा था।
अंततः, वह क्षण आ गया जब दोनों का सब्र जवाब दे गया। राजेश ने अपनी गति और तेज कर दी और कविता की खाई के अंदर ही अपने खीरे से सारा गर्म रस छोड़ दिया। उसी पल कविता का भी रस निकल गया और वह बेदम होकर बिस्तर पर गिर पड़ी। दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए गहरी सांसें ले रहे थे। वह रात उनके जीवन की सबसे रोमांचक और यादगार रात बन गई थी। शरीर की थकावट और मन की शांति के बीच, उन्होंने महसूस किया कि यह केवल शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि उनकी दबी हुई इच्छाओं का एक विशाल विस्फोट था जिसने उन्हें एक-दूसरे के और करीब ला दिया था।