अंजलि भाभी की मदहोश चु@@ई—>बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और ठंडी हवा के झोंके खिड़की से अंदर आ रहे थे, जिससे कमरे का माहौल एकदम रूमानी हो गया था। अंजलि भाभी बालकनी के पास खड़ी होकर गिरती बूंदों को देख रही थीं, उनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी और अधूरी इच्छाओं की परछाई साफ दिख रही थी। उनका रेशमी पल्लू कंधे से सरक गया था, जिससे उनकी गोरी पीठ और सुडौल बदन की झलक साफ मिल रही थी, जो किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थी। समीर, जो उनका देवर था, दरवाजे पर खड़ा होकर उन्हें चुपचाप निहार रहा था और उसके मन में अपनी भाभी के प्रति बरसों से दबी हुई भावनाएं उफान मार रही थीं।
भाभी का शरीर किसी सांचे में ढला हुआ सा लगता था, उनके भरे हुए तरबूज ब्लाउज के अंदर से बाहर आने को बेताब दिख रहे थे और उनकी गहरी खाई वाली कमर हर बार समीर की धड़कनें बढ़ा देती थी। उनका पिछवाड़ा इतना गोल और मांसल था कि साड़ी के कपड़े के ऊपर से भी उसकी गोलाई समीर की आँखों में उतर रही थी। भाभी की उम्र 28 साल थी, लेकिन उनकी जवानी अभी भी अपनी पूरी रंगत पर थी, जो किसी भी मर्द को खुद पर काबू खोने के लिए मजबूर कर सकती थी। समीर अक्सर सोचता था कि भैया इतने खूबसूरत बदन को छोड़कर काम के सिलसिले में हफ्तों बाहर कैसे रह लेते हैं, क्या उन्हें इस खजाने की कद्र नहीं है।
समीर धीरे से उनके पास गया और अपनी भारी आवाज में बोला, ‘भाभी, आप अभी तक सोई नहीं, क्या बात है आज बहुत उदास लग रही हैं?’ अंजलि ने मुड़कर देखा और एक फीकी मुस्कान के साथ कहा, ‘समीर, कभी-कभी अकेलापन बहुत डराने लगता है, लगता है जैसे इस बड़े घर में मैं सिर्फ एक दीवार बनकर रह गई हूँ।’ समीर ने उनकी आंखों में देखा, जिनमें नमी और प्यास दोनों थी, उसने अपना हाथ धीरे से उनके कंधे पर रखा, जिससे भाभी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उन दोनों के बीच एक अनकहा जज्बात था, जो आज बारिश की इस रात में अपनी सीमाओं को लांघने के लिए तैयार खड़ा था।
अंजलि ने समीर का हाथ नहीं हटाया, बल्कि उसकी तरफ और झुक गईं, उनकी सांसें अब तेज हो रही थीं और सीने के तरबूज ऊपर-नीचे हो रहे थे। समीर ने साहस जुटाया और उनके गालों को छुआ, भाभी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी, जो समीर के कानों में शहद की तरह घुली। ‘समीर, यह गलत है…’ उन्होंने धीरे से फुसफुसाया, लेकिन उनके हाथों ने समीर की शर्ट को मजबूती से पकड़ लिया था, जो उनके मन की असली चाहत को बयां कर रहा था। समीर ने उनके माथे को चूमा और कहा, ‘भाभी, प्यार और जरूरत कभी गलत नहीं होती, मैं बस आपको वो खुशी देना चाहता हूँ जिसके लिए आप तरस रही हैं।’
समीर ने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और उनके चेहरे के हर हिस्से पर अपना प्यार बरसाने लगा, भाभी का शरीर अब पूरी तरह से ढीला पड़ चुका था और वह समीर के स्पर्श का आनंद ले रही थीं। कमरे की मद्धम रोशनी में उनका रूप और भी निखर उठा था, जब समीर ने उनके ब्लाउज की डोरियां खोलीं और उनके गोरे तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए। समीर ने उन्हें अपनी हथेलियों में भरा और उनके ऊपर लगे नन्हे मटर जैसे निप्पल को सहलाने लगा, जिससे भाभी के मुंह से एक दबी हुई कराह निकल गई। वह बार-बार समीर का नाम पुकार रही थीं और उनके अंदर की दबी हुई आग अब ज्वाला बनकर धधकने लगी थी।
धीरे-धीरे कपड़े जमीन पर गिरते गए और भाभी का पूरा बदन समीर के सामने निर्वस्त्र था, उनके गुप्त अंगों के पास के छोटे-छोटे बाल समीर की उत्तेजना को और बढ़ा रहे थे। समीर ने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनके पैरों के बीच की उस गहरी खाई को निहारने लगा, जो अब गीली होकर चमक रही थी। उसने अपनी उंगली से उस खाई को टटोलना शुरू किया, तो भाभी ने अपने कूल्हे ऊपर उठा दिए और जोर-जोर से सिसकारियां भरने लगीं। ‘उफ़ समीर, और तेज… बहुत बेचैनी हो रही है,’ भाभी ने अपनी टांगें फैलाते हुए कहा और समीर अब अपनी जीभ से उस खाई को चाटने लगा।
अंजलि भाभी का पूरा शरीर अब पसीने से भीग चुका था और उनके शरीर की खुशबू समीर को पागल कर रही थी, उसने अपना कड़क और लंबा खीरा बाहर निकाला। भाभी ने जैसे ही उस विशाल खीरे को देखा, उनकी आँखें फटी की फटी रह गई और उन्होंने धीरे से उसे अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू किया। ‘समीर, यह तो बहुत बड़ा है, क्या मैं इसे झेल पाऊंगी?’ उन्होंने शर्माते हुए पूछा, लेकिन उनकी आँखों में उसे अंदर लेने की तीव्र इच्छा थी। समीर ने उनके होंठों को चूसते हुए अपना खीरा उनके मुंह के पास लाया और भाभी ने उसे पूरा अंदर लेकर चूसना शुरू कर दिया, जिससे समीर के पूरे बदन में बिजली सी दौड़ गई।
अब समय आ गया था उस असली खुदाई का, जिसके लिए दोनों का शरीर और आत्मा तड़प रहे थे, समीर ने भाभी को सीधा लिटाया और उनके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। उसने अपने खीरे की नोक को उनकी गीली और तंग खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से एक धक्का दिया, भाभी के मुंह से एक लंबी चीख निकली। ‘आह्ह्ह… समीर… बहुत भरा हुआ महसूस हो रहा है…’ उन्होंने समीर की पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए, लेकिन जैसे ही समीर ने दूसरा गहरा धक्का दिया, वह पूरी तरह से अंदर चला गया। भाभी की आँखों से आंसू की एक बूंद निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि उस परम सुख की थी जो उन्हें वर्षों बाद मिल रहा था।
समीर ने अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की और कमरे में ‘चपा-चप’ की आवाजें गूँजने लगीं, हर धक्के के साथ भाभी के तरबूज बुरी तरह उछल रहे थे और उनके मटर जैसे निप्पल समीर के सीने से रगड़ खा रहे थे। ‘हाँ समीर… ऐसे ही… और जोर से खोदो मुझे… मुझे आज खत्म कर दो…’ अंजलि अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं। वह अपने पिछवाड़े को ऊपर उठा-उठा कर समीर के हर धक्के का स्वागत कर रही थीं, उनकी आवाजें अब चीखों में बदल गई थीं। समीर ने उन्हें पलट दिया और अब पिछवाड़े से खुदाई शुरू की, जिससे अंजलि के पूरे बदन में एक अलग ही कंपन महसूस होने लगा।
खुदाई का यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा, समीर कभी सामने से तो कभी पीछे से भाभी की उस गहरी खाई को तृप्त कर रहा था, दोनों पसीने से लथपथ थे। अचानक भाभी का शरीर पूरी तरह से अकड़ने लगा और उनके अंदर से ढेर सारा रस निकलने लगा, उन्होंने समीर को कसकर जकड़ लिया और जोर से चिल्लाईं। उसी पल समीर ने भी अपना सारा गरम रस उनकी खाई के अंदर छोड़ दिया, दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और गहरी सांसें लेने लगे। कमरे में अब सिर्फ उन दोनों की सांसों की आवाज और बाहर बारिश की बूंदों का शोर था, जो उनकी इस मिलन की गवाही दे रहे थे।
काफी देर तक दोनों ऐसे ही लिपटे रहे, भाभी का चेहरा अब शांत और संतुष्ट था, उन्होंने समीर के माथे को चूमा और कहा, ‘तुमने आज मुझे फिर से जिंदा कर दिया समीर।’ समीर ने उन्हें अपने सीने से लगा लिया, वह जानता था कि यह सिर्फ एक रात की बात नहीं थी, बल्कि एक नए रिश्ते की शुरुआत थी। अंजलि के बिखरे हुए बाल और उनके चेहरे पर फैली लाली उनकी इस सुखद थकान को बयां कर रही थी। बारिश अब धीमी हो चुकी थी, लेकिन उनके दिलों में लगी वो आग अब एक मीठी आंच में बदल गई थी, जो उन्हें हमेशा एक-दूसरे के करीब रखेगी।