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ऑफिस में चु@@ई

ऑफिस की उस रात की खामोशी में एक अजीब सी उत्तेजना घुली हुई थी और बाहर शहर की रोशनियाँ धुंधली पड़ रही थीं। आर्यन अपनी मेज पर बैठा हुआ था लेकिन उसका ध्यान फाइल की जगह सामने बैठी अपनी जूनियर समीरा पर था जो देर रात तक उसके साथ प्रोजेक्ट खत्म करने के लिए रुकी हुई थी। समीरा ने आज एक बहुत ही चुस्त सफेद सिल्क की शर्ट और काली पेंसिल स्कर्ट पहनी हुई थी जो उसके उभारों को बहुत ही कामुक तरीके से उभार रही थी। आर्यन की सांसें भारी होने लगी थीं जब उसने देखा कि समीरा कैसे झुककर फाइल उठा रही थी और उसकी शर्ट के बटन उसके भारी भरकम तरबूजों के दबाव से टूटने को बेताब दिख रहे थे।

समीरा की शारीरिक बनावट किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थी क्योंकि उसके शरीर का हर अंग एक अलग ही कहानी बयां कर रहा था। उसके रेशमी सफेद शर्ट के नीचे से उसके दो बड़े और सख्त तरबूज साफ झलक रहे थे जिनके बीच की गहरी घाटी आर्यन की आँखों को अपनी ओर खींच रही थी। जब वह चलती थी तो उसके भारी और गोल पिछवाड़े की हरकत आर्यन के दिल की धड़कन बढ़ा देती थी क्योंकि उसकी पेंसिल स्कर्ट उसके पिछले हिस्से पर इतनी कसी हुई थी कि उसके शरीर की हर लकीर साफ समझ आ रही थी। आर्यन ने मन ही मन सोचा कि उन तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे मटर के दाने कितने सख्त और रसीले होंगे जो स्पर्श के लिए तड़प रहे होंगे।

दोनों के बीच एक अनकहा भावनात्मक जुड़ाव पहले से ही था जो आज रात की तन्हाई में एक नए मोड़ की तलाश में था। आर्यन धीरे से समीरा के पास जाकर खड़ा हो गया और उसके कंधे पर हाथ रखा जिससे समीरा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने ऊपर देखा तो आर्यन की आँखों में छिपी भूख उसे साफ दिखाई दे रही थी जो उसे डरा नहीं रही थी बल्कि उसके भीतर की सोई हुई प्यास को जगा रही थी। उन दोनों के बीच की झिझक अब धीरे-धीरे कम हो रही थी और कमरे का तापमान जैसे बढ़ने लगा था क्योंकि उनकी सांसों की गरमाहट एक-दूसरे के चेहरे पर महसूस हो रही थी।

आर्यन ने धीरे से अपना हाथ समीरा के चेहरे पर फेरा और उसकी मखमली त्वचा को महसूस किया जिससे समीरा की आँखें खुद-ब-खुद बंद हो गईं। उसने समीरा के कानों के पास जाकर फुसफुसाया और उसके गले पर अपनी सांसें छोड़ीं जिससे समीरा के शरीर के बाल खड़े हो गए। आर्यन ने अपना हाथ नीचे ले जाते हुए उसके शर्ट के ऊपर से ही उन भारी तरबूजों को अपनी हथेलियों में भरा और धीरे से दबाया जिससे समीरा के मुँह से एक हल्की आह निकली। वह उन तरबूजों की नरमी और उन पर उभरे हुए मटर के दानों की सख्ती को महसूस कर पा रहा था जो अब शर्ट के कपड़े को चीरकर बाहर आना चाहते थे।

समीरा ने भी अब अपनी झिझक त्याग दी थी और उसने आर्यन की गर्दन के चारों ओर अपनी बाहें डाल दीं और उसे अपने करीब खींच लिया। आर्यन ने बिना देर किए उसके होठों को अपने होठों में भर लिया और एक गहरा रसभरा मिलन शुरू हुआ जिसमें दोनों की जुबानें एक-दूसरे का स्वाद ले रही थीं। धीरे-धीरे आर्यन के हाथ समीरा की स्कर्ट के नीचे सरकने लगे जहाँ उसे रेशमी त्वचा का अहसास हुआ और वह ऊपर की ओर बढ़ते हुए उसकी गहरी खाई के करीब पहुँच गया। समीरा की सांसें अब तेज और अनियंत्रित हो चुकी थीं क्योंकि वह आर्यन के हाथों के जादू में पूरी तरह खो चुकी थी और उसका शरीर थरथराने लगा था।

आर्यन ने समीरा को उठाकर मेज पर बैठा दिया और उसकी शर्ट के बटन एक-एक करके खोलने लगा जिससे उसके दूधिया सफेद तरबूज पूरी तरह आजाद हो गए। उन तरबूजों के बीच का हिस्सा पसीने की हल्की बूंदों से चमक रहा था और उनके ऊपर मौजूद भूरे रंग के मटर पूरी तरह तन चुके थे। आर्यन ने अपना चेहरा नीचे झुकाया और बारी-बारी से उन तरबूजों को चूसना शुरू किया और मटर के दानों को अपने दांतों के बीच हल्के से दबाया जिससे समीरा अपना सिर पीछे की ओर झुकाकर कराहने लगी। वह उसके तरबूजों को अपनी हथेलियों में मसल रहा था जैसे वह कोई कीमती फल हो जिसका सारा रस वह आज ही निचोड़ लेना चाहता हो।

अब आर्यन का हाथ समीरा की जांघों के बीच की उस मखमली और गीली खाई की ओर बढ़ा जहाँ पहले से ही काफी नमी आ चुकी थी। उसने स्कर्ट को ऊपर किया और अपनी उंगलियों से उस गहरी खाई को सहलाना शुरू किया जिससे समीरा ने अपनी जांघें आर्यन की कमर के चारों ओर कस लीं। आर्यन अपनी उंगली से उस खाई के भीतर खुदाई करने लगा और उसके गीलेपन को महसूस करने लगा जो हर बीतते पल के साथ बढ़ता जा रहा था। समीरा की सिसकियां अब कमरे की खामोशी को चीर रही थीं क्योंकि वह आर्यन की उंगलियों की गहराई को अपनी रूह तक महसूस कर रही थी और उसका शरीर झटके ले रहा था।

आर्यन ने अब अपनी पैंट की जिप खोली और अपना लंबा, सख्त और गरमाहट से भरा हुआ खीरा बाहर निकाला जो अब पूरी तरह से खुदाई के लिए तैयार था। समीरा ने जब उस विशाल और नसदार खीरे को देखा तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई और उसने धीरे से उसे अपने हाथों में पकड़ लिया। उसने उस खीरे की लंबाई को महसूस किया और फिर धीरे-धीरे उस खीरे को अपने मुँह में लेना शुरू किया जिससे आर्यन की आँखों के सामने अंधेरा छा गया। वह उस खीरे को पूरी गहराई तक चूस रही थी और आर्यन के अंडों को भी अपनी उंगलियों से सहला रही थी जिससे आर्यन की उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गई थी।

आर्यन ने अब समीरा को मेज पर लेटाया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रखकर सामने से खुदाई शुरू करने का फैसला किया। जैसे ही उसने उस सख्त खीरे को समीरा की तंग और गीली खाई के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया, समीरा के मुँह से एक तीखी चीख निकली जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी। वह खाई इतनी तंग थी कि आर्यन का खीरा उसमें समाने के लिए संघर्ष कर रहा था लेकिन धीरे-धीरे वह पूरी गहराई तक अंदर चला गया। अब आर्यन ने अपनी लय पकड़ ली थी और वह पूरी ताकत से समीरा की उस गहरी खाई में खुदाई करने लगा जिससे हर धक्के के साथ मांस के टकराने की आवाज गूंजने लगी।

समीरा अब पूरी तरह से आर्यन के नीचे दबी हुई थी और वह हर धक्के के साथ ऊपर की ओर उछल रही थी जबकि आर्यन उसके तरबूजों को जोर-जोर से मसल रहा था। आर्यन ने उसे पलटा और अब पिछवाड़े से खुदाई शुरू की जिससे समीरा अपने हाथों के बल झुक गई और उसका भारी पिछवाड़ा आर्यन की ओर तन गया। आर्यन ने फिर से अपने खीरे को उस गीली खाई में उतारा और पीछे से जोर-जोर से खोदन शुरू किया जिससे समीरा की कमर लचकने लगी। वह अपनी पूरी ताकत से उस खाई के भीतर वार कर रहा था और समीरा की आहें अब चीखों में बदल चुकी थीं क्योंकि वह आनंद के उस मुकाम पर थी जहाँ सब कुछ धुंधला लगने लगता है।

काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद दोनों का शरीर पसीने से लथपथ हो चुका था और उनकी धड़कनें बेकाबू थीं। आर्यन ने अपनी गति और बढ़ा दी और अंत में समीरा की गहराई में अपना सारा गरम रस छोड़ दिया जिससे समीरा का शरीर कांप उठा और उसका भी रस निकलना शुरू हो गया। दोनों एक-दूसरे में लिपटे हुए मेज पर ही गिर पड़े और काफी देर तक सिर्फ उनकी भारी सांसों की आवाज सुनाई देती रही। उस रात ऑफिस की उस मेज ने एक ऐसी प्यास को बुझते हुए देखा था जो सालों से दोनों के भीतर दबी हुई थी और अब उनके बीच का रिश्ता हमेशा के लिए बदल चुका था।

खुदाई खत्म होने के बाद समीरा आर्यन की बाहों में सिमटी हुई थी और उसकी आँखों में एक संतुष्टि भरी चमक थी जो पहले कभी नहीं देखी गई थी। आर्यन ने उसके माथे को चूमा और उसके बिखरे हुए बालों को सवारा जबकि समीरा अभी भी उन लम्हों की खुमारी में डूबी हुई थी। कमरे में अभी भी उनकी उत्तेजना और पसीने की एक मिली-जुली गंध मौजूद थी जो उस रात की गवाह थी। उन्होंने धीरे-धीरे अपने कपड़े पहने और एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुराए क्योंकि वे जानते थे कि अब कल की सुबह उनके लिए एक नई शुरुआत लेकर आएगी जहाँ वे सिर्फ कलीग नहीं बल्कि एक-दूसरे की रूह के हिस्से बन चुके थे।

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