सोनाली ट्रेन की AC 2-टियर में ऊपरी बर्थ पर लेटी थी। रात के 2 बज चुके थे। ट्रेन दिल्ली से मुंबई जा रही थी, और बाहर अंधेरा इतना गहरा था कि सिर्फ़ खिड़की से गुजरती लाइट्स की झलक दिखती थी। सोनाली की हल्की नीली सलवार-कमीज़ थोड़ी सी सिकुड़ी हुई थी, और कमीज़ के ऊपर के दो बटन खुले होने से उसके तरबूज हल्के से उभरे हुए थे। वह सो नहीं पा रही थी – मन में एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे कोई अनकही इच्छा जाग रही हो।
नीचे वाली बर्थ पर अर्जुन लेटा था। वह भी जाग रहा था। दोनों दिन भर में कई बार नजरें मिला चुके थे – चाय लेते वक्त, डिनर के दौरान, और जब ट्रेन रुकी थी तो प्लेटफॉर्म पर। अर्जुन ने धीरे से पूछा, “सो नहीं रही?” सोनाली ने झुककर देखा। “नहीं… नींद नहीं आ रही।” अर्जुन मुस्कुराया। “मुझे भी। क्या करूं?” सोनाली ने हल्के से हँसते हुए कहा, “बातें करें?”
बातें शुरू हुईं। पहले छोटी-मोटी – काम, परिवार, ट्रेन की यात्रा। फिर धीरे-धीरे गहरी हो गईं। अर्जुन ने बताया कि वह एक फोटोग्राफर है, जो अकेले घूमता रहता है। सोनाली ने कहा कि वह एक छोटी सी कंपनी में काम करती है, लेकिन जीवन में कुछ कमी महसूस होती है। ट्रेन की हल्की झटकों में दोनों की आवाजें धीमी हो गईं। अर्जुन ने ऊपर हाथ बढ़ाया और सोनाली की उंगलियां छू लीं। बस एक हल्का सा स्पर्श। सोनाली की सांस रुक गई। उसने हाथ नहीं छुड़ाया।
अर्जुन धीरे से बर्थ पर चढ़ आया। जगह कम थी, इसलिए दोनों बहुत करीब थे। उनकी सांसें अब एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। पहले संतरा चूसना बहुत धीमा और सावधान था – जैसे कोई डर रहा हो कि कोई जाग न जाए। अर्जुन के होंठ सोनाली के होंठों को बड़े नरमी से चूस रहे थे, जीभ हल्के से छू रही थी। सोनाली की आँखें बंद हो गईं। उसका शरीर ट्रेन की हरकत के साथ हल्का-हल्का हिल रहा था। अर्जुन का हाथ धीरे से सोनाली की कमर पर गया, फिर ऊपर। उसने कमीज़ के बटन और खोले। तरबूज अब खुले थे। मटर सख्त होकर बाहर आ गए थे। अर्जुन ने एक तरबूज को हल्के से दबाया। सोनाली के मुंह से एक दबी हुई आह निकली – इतनी धीमी कि सिर्फ अर्जुन सुन सका। अर्जुन ने मटर को मुंह में लिया, जीभ से बहुत धीरे घुमाया। सोनाली ने अर्जुन के बाल पकड़ लिए, उसे और करीब खींचा।
ट्रेन की रफ्तार और अंधेरा दोनों को ढक रहा था। अर्जुन ने सोनाली की सलवार का नाड़ा खोला। सोनाली ने विरोध नहीं किया, बस आँखें बंद रखीं। अर्जुन ने धीरे से अपनी जींस उतारी। उसका खीरा पहले से ही तैयार था। सोनाली ने शर्म से नजरें फेर लीं, लेकिन फिर चुपके से देखा। अर्जुन ने सोनाली की खाई को छुआ। उंगली से बहुत नरमी से अंदर-बाहर किया। सोनाली की कमर हल्के से उठी। “अर्जुन… धीरे…” उसकी आवाज कांप रही थी। अर्जुन ने खाई चाटना शुरू किया – जीभ बहुत धीरे, बहुत गहराई से। सोनाली ने तकिए को मुंह में दबा लिया ताकि कराह बाहर न जाए। उसकी खाई पूरी तरह गीली हो चुकी थी। खुजली इतनी गहरी थी कि वह खुद को रोक नहीं पा रही थी।
अर्जुन ने सोनाली को थोड़ा सा करवट दिया। जगह कम थी, इसलिए पिछवाड़े से खोदना आसान था। उसने अपना खीरा सोनाली की खाई पर टिकाया। बहुत धीरे से दबाया। खीरा अंदर सरकता हुआ महसूस हुआ। सोनाली ने दर्द और सुख से होंठ काट लिए। अर्जुन रुक-रुक कर अंदर जा रहा था – हर इंच को महसूस करते हुए, ट्रेन की हर झटके के साथ ताल मिलाते हुए। जब पूरा अंदर गया तो दोनों एक पल रुके। सांसें मिल रही थीं। फिर अर्जुन ने धीमी गति से खोदना शुरू किया। हर थ्रस्ट के साथ सोनाली के तरबूज हिल रहे थे। अर्जुन एक हाथ से उन्हें सहला रहा था। सोनाली की कराहें अब तकिए में दब रही थीं। पसीना दोनों के शरीर पर चिपक रहा था।
रफ्तार बहुत धीरे-धीरे बढ़ी। सोनाली महसूस कर रही थी कि उसकी खाई अब खीरे को बहुत कसकर जकड़ रही है। अर्जुन और गहराई से धक्का दे रहा था। अचानक सोनाली का शरीर तेजी से कांप उठा। रस छूट गया – गर्म, चुपके से, खीरे को भिगोता हुआ। अर्जुन भी कुछ सेकंड बाद कांप उठा और अपना रस अंदर छोड़ दिया। दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे से चिपके रहे। ट्रेन की आवाज ही अब सुनाई दे रही थी।
सोनाली ने अर्जुन की छाती पर सिर रखा। अर्जुन ने उसके बाल सहलाए। सोनाली धीरे से बोली, “सुबह मुंबई पहुंच जाएंगे… फिर?” अर्जुन ने कहा, “फिर हम नंबर एक्सचेंज करेंगे। और यह रात हमेशा याद रखेंगे।” दोनों मुस्कुराए। ट्रेन चलती रही, लेकिन उस रात की चुप्पी में उनका राज हमेशा के लिए छिप गया।