शाम का सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था और पार्क के उस सुनसान कोने में सुनहरी रोशनी पेड़ों की टहनियों से छनकर जमीन पर आ रही थी। रोहन बेंच पर बैठा अपनी पुरानी स्कूल की दोस्त मेघा का इंतजार कर रहा था, जिससे वह करीब पाँच साल बाद मिल रहा था। मेघा अब एक प्रोफेशनल जिम ट्रेनर बन चुकी थी और उसके शरीर में आए बदलावों की चर्चा उनके पुराने दोस्तों के बीच आम थी। जब मेघा दूर से आती दिखाई दी, तो रोहन की सांसें जैसे थम सी गईं क्योंकि मेघा की चाल में एक गजब का आत्मविश्वास और उसके शरीर की बनावट में एक बिजली सी कशिश थी। उसने तंग काले रंग की जिम लेगिंग्स और एक छोटा सा सफेद क्रॉप टॉप पहना हुआ था, जो उसके सुडौल और कसरती शरीर को पूरी तरह से उभार रहा था।
मेघा जब पास आई, तो रोहन ने देखा कि उसकी मेहनत ने उसके शरीर को किसी देवी की प्रतिमा जैसा बना दिया था। उसके सीने पर उभरे हुए वह दो रसीले तरबूज उसके क्रॉप टॉप के अंदर से बाहर आने को बेताब लग रहे थे और चलने के साथ उनमें होने वाली हलचल रोहन की धड़कनों को बढ़ा रही थी। मेघा का पिछवाड़ा इतना गोल और सख्त लग रहा था कि लेगिंग्स की पतली परत भी उसकी बनावट को छिपा नहीं पा रही थी। जब वे गले मिले, तो रोहन को मेघा के शरीर की गर्माहट और उसके पसीने की हल्की भीनी खुशबू महसूस हुई, जिसने उसके अंदर के सोए हुए अरमानों को जगा दिया। मेघा की आँखों में एक शरारत थी और उसका चेहरा कसरत के कारण गुलाबी चमक रहा था, जो उसे और भी कामुक बना रहा था।
दोनों बेंच पर बैठकर पुरानी यादें ताजा करने लगे, लेकिन रोहन का ध्यान बार-बार मेघा के उन उभारों पर जा रहा था। मेघा ने अपनी फिटनेस जर्नी के बारे में बताना शुरू किया और बातचीत के दौरान उसने रोहन का हाथ पकड़ लिया। रोहन को महसूस हुआ कि मेघा की हथेलियां कोमल लेकिन मजबूत थीं। बातों-बातों में मेघा ने कहा कि यहाँ पास में ही एक बहुत घना और सुनसान इलाका है जहाँ वह अक्सर मेडिटेशन करने जाती है। उसने रोहन को वह जगह देखने के लिए उकसाया और रोहन मना नहीं कर पाया। वे दोनों उठकर घनी झाड़ियों और बड़े पेड़ों के पीछे वाले हिस्से में चले गए, जहाँ परिंदों की चहचहाहट के अलावा और कोई शोर नहीं था।
वहाँ पहुँचते ही माहौल में एक अजीब सी उत्तेजना फैल गई। मेघा ने रोहन की आँखों में देखते हुए धीरे से कहा कि उसे आज बहुत गर्मी लग रही है। उसने अपने क्रॉप टॉप को थोड़ा नीचे से खींचा, जिससे उसके तरबूजों की गहराई और साफ दिखने लगी। रोहन ने अपनी हिचकिचाहट को किनारे रखते हुए मेघा की पतली कमर पर हाथ रखा, तो उसे लगा जैसे उसने किसी गरम लोहे को छू लिया हो। मेघा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और रोहन के करीब आ गई। रोहन ने धीरे से मेघा के होंठों को चूमना शुरू किया, जिसका स्वाद किसी मीठे अंगूर जैसा था। मेघा की सांसें तेज होने लगी थीं और वह रोहन के बालों में अपनी उंगलियां फंसाकर उसे और करीब खींच रही थी।
रोहन के हाथ अब मेघा के उन सख्त और बड़े तरबूजों पर पहुँच चुके थे। उसने कपड़े के ऊपर से ही उन्हें सहलाना शुरू किया, तो महसूस किया कि उनके सिरों पर लगे छोटे-छोटे मटर अब पूरी तरह से अकड़ चुके थे। मेघा के मुँह से एक हल्की आह निकली और उसने रोहन के हाथ को और जोर से अपने सीने पर दबा लिया। रोहन ने धीरे से उसके क्रॉप टॉप के बटन खोले और उन शानदार अंगों को आजाद कर दिया। चाँदनी जैसी सफेद त्वचा पर वे गहरे रंग के मटर किसी नगीने की तरह चमक रहे थे। रोहन ने झुककर एक मटर को अपने मुँह में लिया, तो मेघा ने अपनी पीठ धनुष की तरह मोड़ ली और उसके मुँह से दबी हुई कराह निकलने लगी।
जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ रही थी, रोहन ने मेघा की लेगिंग्स को धीरे-धीरे नीचे सरकाना शुरू किया। जब वह नीचे उतरी, तो मेघा की रेशमी त्वचा और उसकी गहरी खाई के चारों ओर मौजूद बारीक बाल रोहन की नजरों के सामने थे। रोहन ने अपने कपड़ों को भी उतार फेंका और उसका कड़क खीरा अब पूरी तरह से अपनी ताकत दिखाने को तैयार था। मेघा ने जब उस विशाल खीरे को देखा, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उसने घुटनों के बल बैठकर रोहन के खीरे को अपने हाथों में लिया और उसे सहलाने लगी। फिर उसने धीरे-धीरे उस खीरे को अपने मुँह में लेना शुरू किया, जिससे रोहन के पूरे शरीर में बिजली की लहर दौड़ गई।
मेघा की जीभ जब खीरे के ऊपरी हिस्से पर घूम रही थी, तो रोहन को लगा कि उसका रस अभी निकल जाएगा। लेकिन उसने खुद को संभाला और मेघा को जमीन पर बिछाए गए अपने कपड़ों पर लेटा दिया। रोहन अब मेघा की टांगों के बीच था और उसकी जीभ मेघा की उस गीली खाई को चाटने लगी थी। मेघा अपनी कमर को ऊपर-नीचे कर रही थी और उसके हाथ रोहन के सिर को अपनी खाई की तरफ और जोर से धकेल रहे थे। रोहन की उंगली जब उस खाई की गहराई में गई, तो मेघा ने जोर से चीखते हुए रोहन का नाम पुकारा। वहाँ से निकलने वाला प्राकृतिक रस अब रोहन की उंगलियों को पूरी तरह से भिगो चुका था।
अब समय आ गया था उस असली काम का जिसके लिए दोनों तड़प रहे थे। रोहन ने मेघा की टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे के अगले हिस्से को उस रसीली खाई के मुहाने पर टिका दिया। जैसे ही उसने पहला धक्का लगाया, मेघा के मुँह से एक लंबी आह निकली। वह खाई बहुत तंग थी, लेकिन रोहन के खीरे ने धीरे-धीरे अपनी जगह बना ली। रोहन ने सामने से खोदना शुरू किया, और हर धक्के के साथ मेघा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे। जंगल के उस शांत कोने में अब सिर्फ शरीर के टकराने की आवाजें और मेघा की सिसकारियां गूंज रही थीं। रोहन की गति अब तेज हो रही थी और वह गहराई तक खुदाई कर रहा था।
मेघा ने रोहन को अपनी तरफ घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने के लिए कहा। वह घुटनों के बल बैठ गई और अपना भारी पिछवाड़ा रोहन की तरफ कर दिया। रोहन ने पीछे से उसके कमर को पकड़ा और अपने खीरे को फिर से उस गीली खाई में उतार दिया। इस स्थिति में खुदाई और भी गहरी हो रही थी। मेघा अपने हाथों से अपने ही तरबूजों को मसल रही थी और रोहन को और तेज खोदने के लिए कह रही थी। रोहन के शरीर से पसीना बहकर मेघा की पीठ पर गिर रहा था। मेघा चिल्ला रही थी, “हाँ रोहन, और तेज… मुझे पूरी तरह से खोद डालो!” रोहन का नियंत्रण अब खत्म हो रहा था क्योंकि वह खाई अब बहुत ज्यादा गरम और संकरी महसूस हो रही थी।
कुछ ही मिनटों की उस भीषण खुदाई के बाद, रोहन को महसूस हुआ कि उसका रस अब निकलने ही वाला है। मेघा भी अपने चर्मोत्कर्ष पर थी और उसका पूरा शरीर कांप रहा था। रोहन ने अंतिम कुछ तेज धक्के लगाए और अपना सारा गर्म रस मेघा की उस गहरी खाई के अंदर उड़ेल दिया। उसी पल मेघा का भी रस निकलना शुरू हुआ और वह निढाल होकर जमीन पर गिर पड़ी। दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे और उनकी सांसें अभी भी बहुत तेज चल रही थीं। उस सुनसान पार्क के कोने में अब एक गहरी शांति थी, लेकिन उन दोनों के शरीरों के बीच का वह भावनात्मक और शारीरिक जुड़ाव अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका था।
काफी देर तक वे वहीं लेटे रहे, एक-दूसरे की धड़कनों को महसूस करते हुए। रोहन ने मेघा के माथे को चूमा और मेघा ने उसके सीने पर अपना सिर रख दिया। मेघा की हालत ऐसी थी जैसे वह किसी गहरी नींद से जागी हो, उसकी आँखों में तृप्ति और प्यार का मिला-जुला भाव था। उन्होंने धीरे-धीरे अपने कपड़े पहने और वापस मुख्य रास्ते की तरफ चल दिए। जाते-जाते मेघा ने रोहन का हाथ दबाया और कान में फुसफुसाते हुए कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। रोहन के चेहरे पर एक मुस्कान थी, वह जान चुका था कि यह पुरानी दोस्ती अब एक नई और बेहद रोमांचक राह पर निकल पड़ी है जहाँ ऐसी खुदाई के और भी कई दौर आने वाले थे।