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पुरानी सहेली की चुदाई

पुरानी सहेली की चुदाई—>आर्यन अपनी जिम के सुनसान इलाके में बने एक छोटे से निजी गार्डन में बैठा था जहाँ वह अक्सर कसरत के बाद आराम किया करता था। रात के दस बज रहे थे और चाँद की धीमी रोशनी पेड़ों के पत्तों से छनकर नीचे आ रही थी। तभी उसे कदमों की आहट सुनाई दी और उसने देखा कि नेहा उसकी तरफ बढ़ रही थी। नेहा उसकी स्कूल की सबसे पुरानी दोस्त थी, जो दस साल बाद शहर वापस आई थी। आज उसने काले रंग की बहुत ही टाइट जिम लेगिंग्स और एक छोटा सा स्पोर्ट्स टॉप पहना हुआ था जिसने उसके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को बड़ी ही खूबसूरती से नुमाया किया था। आर्यन उसे देखते ही रह गया क्योंकि उसकी यादों वाली वह पतली सी लड़की अब एक बेहद आकर्षक और भरे हुए बदन वाली महिला में तब्दील हो चुकी थी।

नेहा के शरीर की बनावट देख कर आर्यन के मन में हलचल मच गई। उसके सीने पर दो विशाल तरबूज थे जो उसकी टाइट ब्रा के अंदर से बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे। जैसे-जैसे वह करीब आ रही थी, उसके उन तरबूजों में होने वाली हल्की सी हरकत आर्यन की धड़कनें बढ़ा रही थी। उन तरबूजों के बीच की गहरी घाटी और उनके ऊपर उभरे हुए मटर जैसे निप्पल साफ़ संकेत दे रहे थे कि नेहा भी अंदर से काफी उत्तेजित है। उसकी कमर बहुत पतली थी लेकिन उसका पिछवाड़ा इतना भारी और गोल था कि उस तंग कपड़े में वह किसी नक्काशी की तरह लग रहा था। आर्यन ने महसूस किया कि उसका अपना खीरा उसकी जींस के अंदर अब सरकने लगा है और कठोर हो रहा है।

उन दोनों के बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव हमेशा से था, लेकिन आज उस जज्बात ने एक नई करवट ली थी। नेहा उसके पास आकर बैठ गई और उसके शरीर से उठने वाली उस भीनी-भीनी खुशबू ने आर्यन के दिमाग की नसों को झकझोर दिया। वे पुरानी बातें करने लगे, लेकिन उनकी आँखों में एक अलग ही भूख थी। नेहा ने आर्यन के हाथ पर अपना हाथ रखा और उसकी मस्कुलर बाहों को सहलाने लगी। आर्यन को महसूस हुआ कि नेहा का स्पर्श कितना गर्म और कोमल था। दोनों की साँसें अब भारी होने लगी थीं और शब्दों की जगह अब सिर्फ आँखों के इशारे काम कर रहे थे। उनके बीच की झिझक अब धीरे-धीरे पिघल रही थी और वासना का जन्म हो रहा था।

आर्यन ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर नेहा के गालों को छुआ। नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना चेहरा उसके हाथ पर टिका दिया। आर्यन को याद आया कि कैसे वह स्कूल में इसे खोने से डरता था, लेकिन आज वह उसे पा लेने की तीव्र इच्छा से भरा हुआ था। उसका खीरा अब पूरी तरह से अकड़ चुका था और नेहा की नज़रों से यह बात छिपी नहीं थी। उसने धीरे से अपना हाथ आर्यन की जांघों पर रखा और ऊपर की तरफ बढ़ने लगी। जब उसका हाथ उस कड़े हुए खीरे पर पड़ा, तो आर्यन के मुँह से एक दबी हुई आह निकल गई। नेहा ने शरमाते हुए उसे देखा और फिर एक शरारती मुस्कान के साथ उसे सहलाना शुरू कर दिया।

अगले ही पल, आर्यन ने नेहा को अपनी बाहों में खींच लिया और उसके होठों का रसास्वादन करने लगा। उनके बीच का यह संगम बहुत ही गहरा और भावुक था। आर्यन के हाथ नेहा के भारी तरबूजों पर पहुँच गए और वह उन्हें अपनी मुट्ठियों में भरकर मसलने लगा। नेहा की कराहें अब उस शांत गार्डन में गूँजने लगी थीं। आर्यन ने उसके टॉप को धीरे से ऊपर उठाया, जिससे उसके दोनों रसीले तरबूज आज़ाद होकर बाहर आ गिरे। वे चाँदनी रात में किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक रहे थे। आर्यन ने झुककर उन मटर जैसे निप्पलों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें चूसने लगा। नेहा के शरीर में बिजली सी दौड़ गई और उसने आर्यन के बालों को कसकर पकड़ लिया।

नेहा अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। उसने आर्यन की पैंट की ज़िप खोली और उसके विशाल खीरे को बाहर निकाल लिया। वह खीरा अब अपनी पूरी ताकत के साथ खड़ा था और नेहा उसे देखकर दंग रह गई। उसने बिना देर किए उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे बड़ी ही शिद्दत से चूसने लगी। आर्यन की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उसे स्वर्ग जैसा सुख महसूस होने लगा। नेहा की जीभ जब उस खीरे के ऊपरी हिस्से पर फिरती, तो आर्यन का रस निकलने को बेताब हो जाता। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद नेहा ने आर्यन को अपनी खाई की तरफ इशारा किया जो अब पूरी तरह से भीग चुकी थी और चिपचिपे रस से भरी हुई थी।

आर्यन ने नेहा को घास पर लिटा दिया और उसकी लेगिंग्स को उसके पैरों से खींचकर अलग कर दिया। जैसे ही उसकी लेगिंग्स उतरी, आर्यन के सामने उसकी वह गहरी खाई और घने काले बालों का जंगल साफ़ दिखाई देने लगा। वह खाई अब पूरी तरह से रसीली हो चुकी थी और आर्यन के खीरे का इंतज़ार कर रही थी। आर्यन ने अपनी उंगली से उस खाई में उंगली करना शुरू किया, जिससे नेहा का शरीर धनुष की तरह ऊपर उठ गया। वह कहने लगी, “आर्यन, अब और इंतज़ार मत करो, मुझे अपनी इस गहरी खुदाई का मज़ा चखने दो, मुझे आज पूरी तरह से खोद डालो।”

आर्यन ने अपने भारी खीरे को नेहा की गीली खाई के मुहाने पर रखा और एक गहरा धक्का लगाया। वह खीरा आधा अंदर चला गया और नेहा के मुँह से एक चीख निकल गई जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी। आर्यन ने उसे अपने गले लगाया और धीरे-धीरे हरकत करने लगा। उसकी खुदाई अब लय पकड़ चुकी थी। जैसे-जैसे वह अंदर-बाहर हो रहा था, नेहा की खाई से चप-चप की आवाज़ आने लगी। आर्यन ने उसे सामने से खोदना शुरू किया जिसे देख कर नेहा की आँखों में आँसू और चेहरे पर चरम सुख के भाव थे। हर धक्के के साथ नेहा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन उन्हें बार-बार चूम रहा था।

कुछ देर बाद, आर्यन ने नेहा को घुमाया और उसे घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब उसे पिछवाड़े से खोदने का समय था। नेहा का वह भारी और गोल पिछवाड़ा अब पूरी तरह से आर्यन के सामने था। आर्यन ने अपने खीरे को पीछे से उसकी खाई में उतारा और तेज़ गति से खुदाई शुरू कर दी। नेहा अपनी हथेलियों को घास पर टिकाए हुए उन धक्कों को झेल रही थी। उसके मटर जैसे निप्पल अब घास को छू रहे थे। आर्यन ने उसके पिछवाड़े को कसकर पकड़ लिया और अपनी पूरी ताकत से उसे खोदने लगा। नेहा बेहाल हो चुकी थी, उसकी आवाज़ अब लड़खड़ा रही थी और वह बस यही कह रही थी, “हाँ आर्यन, और तेज़… मुझे पूरी तरह से भर दो!”

खुदाई अब अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। आर्यन को महसूस हुआ कि उसकी नसों में अब लावा उबल रहा है। नेहा की खाई भी अब बुरी तरह कांपने लगी थी और उसे भी रस निकलने का आभास होने लगा था। आर्यन ने अपने धक्कों की रफ़्तार और तेज़ कर दी और नेहा के कानों में प्यार भरी बातें फुसफुसाने लगा। अचानक, नेहा का शरीर पूरी तरह से अकड़ गया और उसकी खाई से गरम रस का फव्वारा फूट पड़ा। ठीक उसी समय, आर्यन ने भी अपना सारा गरम रस नेहा की उस गहरी खाई के अंदर उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपक कर घास पर गिर पड़े और लम्बी-लम्बी साँसें लेने लगे।

उस गहरी खुदाई के बाद, गार्डन में एक बार फिर शांति छा गई थी। नेहा आर्यन की छाती पर अपना सिर रखकर लेटी हुई थी और उसकी आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी। उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था और उसके तरबूज आर्यन की छाती से चिपके हुए थे। आर्यन ने उसे अपनी बाहों में समेट लिया और उसके माथे को चूमा। उनकी यह रात सिर्फ एक जिस्मानी खेल नहीं थी, बल्कि बरसों की दबी हुई भावनाओं का एक सैलाब था जो आज आज़ाद हो गया था। वे जानते थे कि अब उनके बीच का रिश्ता पहले जैसा नहीं रहेगा, वह और भी गहरा और अटूट हो चुका था।

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