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मामी की जोरदार चु@#ई भाभी के साथ मिलकर

पिछली कहानी में अपने पढ़ा था किस तरह से में मामा के घर गया छुट्टियां मानने और मैने वहां अपनी भाभी की चू@@ई की अगर पहला पार्टी नहीं पढ़ा है तो यहां से पढ़े 👇 

                          मामा के घर भाभी की चु@#ई 

छुट्टियां खत्म होने से पहले के कुछ दिन और भी रोमांचक हो गए, क्योंकि अब मामी की नजरें हम पर टिकी रहने लगी थीं। मैंने महसूस किया कि मामी थोड़ी अलग-सी लग रही थीं – वो हमें साथ देखकर हल्की-हल्की मुस्कान देतीं, लेकिन उनकी आंखों में एक ऐसी चमक थी जो पहले कभी नहीं दिखी। भाभी और मैं अब ज्यादा सतर्क हो गए थे, फिर भी वो आकर्षण इतना गहरा था कि रातें बिना एक-दूसरे के करीब आने के अधूरी लगतीं। एक रात, जब मामा गहरी नींद में थे, मैं चुपके से भाभी के कमरे में पहुंचा। हम बातों में खो गए, स्पर्श धीरे-धीरे गहरा होता गया, और हम एक-दूसरे की गर्माहट में डूबने लगे। तभी दरवाजे के बाहर से हल्की-सी सरसराहट हुई, जैसे कोई सांस रोककर खड़ा हो। हम दोनों रुक गए, दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन बाहर कुछ नजर नहीं आया। हमने सोचा शायद हवा का शोर है, पर वो मामी थीं, जो दरवाजे की छोटी-सी झिरी से चुपके-चुपके सब देख रही थीं। उनकी सांसें तेज चल रही थीं, लेकिन वो एक शब्द भी नहीं बोलीं।

मामी की उम्र करीब 45 के आसपास थी, पर उनका शरीर अभी भी वैसा ही आकर्षक था – गोरी चमकदार त्वचा, भरे-भरे कर्व्स, और वो साड़ी जो हर मोड़ पर उनकी खूबसूरती को और उभारती। उन्होंने कभी ऐसा कुछ इशारा भी नहीं किया था, लेकिन उस रात जब उन्होंने हमें इतने करीब देखा, तो रोकने की बजाय उनके अंदर कुछ जाग उठा। वो चुपके से अपने कमरे में लौटीं, बिस्तर पर लेट गईं, और धीरे से हाथ अपनी साड़ी के नीचे ले गईं। वो दृश्य आंखों के सामने घूम रहा था, उनकी उंगलियां धीरे-धीरे नीचे सरक रही थीं, सांसें भारी हो रही थीं। वो खुद को छू रही थीं, आंखें बंद करके, हल्की-हल्की कराहते हुए, लेकिन मन में एक गहरी चाहत थी कि काश वो भी उस पल का हिस्सा होतीं।

अगले दिन सुबह मामी ने मुझे किचन में बुलाया, मदद मांगते हुए। वो जानबूझकर झुक रही थीं, साड़ी का पल्लू सरक रहा था, स्त@#@ की हल्की झलक मिल रही थी। मैं समझ रहा था कि ये संयोग नहीं है। शाम को वो मेरे पास आईं, चाय का कप थमाते हुए बोलीं, “बेटा, आजकल तुम बहुत खुश दिखते हो… क्या बात है?” उनकी आवाज में एक अलग मिठास थी। मैंने हल्के से मुस्कुराकर कहा, “मामी, यहां का सुकून है शायद।” उन्होंने मेरी आंखों में देखा और धीरे से बोलीं, “सुकून तो कई तरह का होता है… कभी-कभी अकेलापन भी बहुत तकलीफ देता है।” उनकी बातों में एक गहरा मतलब छिपा था। मैं चुप रहा, लेकिन दिल में एक हलचल सी हुई।

अगली रात मामी फिर दरवाजे के पास आईं, लेकिन इस बार वो खुद को छिपाने की कोशिश नहीं कर रही थीं। जब हम भाभी के साथ गहरे स्पर्श में थे, उनकी हल्की आहट सुनकर हम रुक गए। भाभी घबरा गईं, मैंने दरवाजा खोला। मामी वहां खड़ी थीं – चेहरा लाल, आंखें नम, लेकिन चाहत से भरी। भाभी ने डरते-डरते कहा, “मामी जी, आप…” मामी ने धीरे से हाथ जोड़े, “रुक जाओ बेटा… मैं कुछ नहीं कहूंगी। बस… मुझे भी समझ आ रहा है। तुम्हारे मामा अब सालों से…” उनकी आवाज भर आई। हम सब चुप हो गए। वो पल इतना भारी था कि कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था।

मैंने आगे बढ़कर उनका हाथ थामा, “मामी, आप…” वो सिहर उठीं, लेकिन हाथ नहीं छोड़ा। भाभी ने धीरे से कहा, “मामी जी, बैठ जाइए।” हम तीनों बिस्तर पर बैठ गए। मामी ने लंबी सांस ली और बोलीं, “मैंने तुम दोनों को देखा… और मुझे लगा कि मैं भी जी रही हूं। सालों से ये घर बस एक जिम्मेदारी बन गया है। कोई स्पर्श नहीं, कोई बात नहीं।” उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन साथ ही एक राहत भी। भाभी ने उनका हाथ थामा, “मामी जी, हम समझते हैं… लेकिन ये…” मामी ने मुस्कुराकर कहा, “मैं कुछ नहीं मांग रही। बस… अगर तुम्हें बुरा न लगे, तो मुझे भी थोड़ा सुकून दो।”

वो बातें घंटों चलती रहीं। मामी ने अपनी जिंदगी की बातें बताईं – कैसे मामा का ध्यान सिर्फ खेती और काम पर रह गया, कैसे वो रातों को अकेले रोती थीं। भाभी ने भी अपनी बातें शेयर कीं – भाई की अनुपस्थिति का दर्द। मैं चुपचाप सुनता रहा, लेकिन मन में एक अजीब सी करुणा और चाहत दोनों उमड़ रही थी। धीरे-धीरे बातें हल्की हुईं, हंसी आई। मामी ने कहा, “तुम दोनों इतने अच्छे हो… मुझे लगा था कि मैं बूढ़ी हो गई हूं।” भाभी ने हंसकर कहा, “मामी जी, आप अभी भी बहुत खूबसूरत हैं।” मामी शर्मा गईं।

हम तीनों बिस्तर पर बैठे थे। मामी बीच में, भाभी एक तरफ, मैं दूसरी तरफ। पहले तो सिर्फ हाथ थामे हुए थे। मामी की उंगलियां मेरी उंगलियों में उलझी हुई थीं, उनकी हथेली थोड़ी गीली थी – शायद घबराहट से। मैंने धीरे से उनका हाथ ऊपर उठाया और अपनी हथेली पर रखकर सहलाया। मामी ने आंखें बंद कर लीं और एक लंबी सांस ली। भाभी ने भी उनका दूसरा हाथ थामा और धीरे से कहा, “मामी जी, अब सब ठीक हो जाएगा… हम हैं ना आपके साथ।”

मैंने धीरे से मामी की तरफ झुका, उनकी गर्दन के पास अपना चेहरा ले जाकर उनकी त्वचा की गर्माहट महसूस की। उनकी गर्दन पर हल्का सा चू@#@न किया – वो जगह जहां नाड़ी तेज धड़क रही थी। मामी सिहर उठीं, उनकी सांस रुक-रुक कर आने लगी। “बेटा… इतने साल बाद… कोई ऐसा…” उनकी आवाज कांप रही थी। मैंने उनकी गर्दन पर जीभ फेरी, हल्के से चाटा, और फिर धीरे-धीरे कान के पास पहुंचा। कान की लौ को हल्के से दांतों से दबाया, मामी ने एक छोटी सी आह भरी, “आह्ह…” 

भाभी ने भी आगे बढ़कर मामी के दूसरे कंधे पर होंठ रख दिए। मामी की साड़ी का पल्लू अब सरक चुका था। मैंने धीरे से पल्लू को और नीचे खींचा, उनके स्त@#@ अब साफ दिख रहे थे – भरे हुए, गोरे, नि@#@ल हल्के गुलाबी और सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्त@#@ को हथेली से ढक लिया, धीरे से दबाया। मामी ने पीठ पीछे की और कराहा, “ओह… धीरे… बहुत संवेदनशील है…” मैंने नि@#@ल को उंगलियों से घुमाया, हल्के से खींचा। मामी की सांसें अब तेज और गहरी हो गईं। भाभी ने दूसरा स्त@#@ मुंह में लिया, जीभ से खेलने लगीं। मामी की उंगलियां मेरे बालों में फंस गईं, वो मेरे सिर को दबा रही थीं।

धीरे-धीरे हमने मामी को बिस्तर पर लिटाया। उनकी साड़ी अब पूरी तरह सरक चुकी थी। मैंने उनकी पेटीकोट की डोरी खोली, धीरे से नीचे सरकाया। मामी की कमर नंगी हो गई, नाभि गहरी और आकर्षक। मैंने नाभि में जीभ डाली, चाटा। मामी की कमर उठी, वो कराह रही थीं, “आह… वहां… बहुत अच्छा लगता है…” भाभी ने मामी की जांघों पर हाथ फेरना शुरू किया, धीरे-धीरे ऊपर की तरफ। मामी की सांसें अब रुक-रुक कर आ रही थीं।

मैंने मामी की साड़ी पूरी तरह उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पैंटी में थीं। ब्लाउज के हुक खोले, ब्लाउज भी उतार दिया। मामी अब सिर्फ पैंटी में लेटी थीं। उनकी पैंटी पर हल्का गीला धब्बा दिख रहा था। मैंने उंगलियों से उस धब्बे को छुआ, मामी सिहर उठीं। भाभी ने पैंटी की किनारी पकड़ी और धीरे से नीचे खींची। मामी की चू@#@त अब पूरी नंगी थी – झ@#@ट हल्के, मुलायम, और नीचे सब गीला और चमकदार। मैंने उंगलियों से हल्के से छुआ, मामी ने कमर ऊपर उठाई, “ओह… बेटा… वहां…” 

मैंने अपनी उंगली धीरे से अंदर डाली, बहुत धीरे। मामी की चू@#@त गर्म और तंग थी, लेकिन गीली होने से आसानी से अंदर चली गई। मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। मामी की आंखें बंद थीं, मुंह खुला, लगातार आहें निकल रही थीं, “आह… और… और गहराई से…” भाभी ने मामी के नि@#@ल को फिर से मुंह में लिया, और साथ ही अपनी उंगली मामी की चू@#@त के ऊपरी हिस्से पर रखकर हल्के से रगड़ने लगीं। मामी अब पूरी तरह खो चुकी थीं। उनकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी, हाथ बिस्तर की चादर को कसकर पकड़े हुए थे।

मैंने अपना ल@#ंड निकाला – वो पहले से ही सख्त और तैयार था। मामी ने आंखें खोलीं, उसे देखा और धीरे से बोलीं, “इतना… मजबूत… कितने साल बाद…” मैंने मामी की जांघें थोड़ी फैलाईं, ल@#ंड को उनके चू@#@त पर रखा और धीरे से दबाया। सिरा अंदर गया, मामी ने लंबी कराह ली, “ओह्ह… धीरे… बहुत दिनों बाद…” मैंने बहुत धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। मामी की चू@#@त ने मेरे ल@#ंड को कसकर पकड़ लिया, गर्म और गीली। मैं रुका रहा, उन्हें एडजस्ट होने का समय दिया। मामी ने मेरी कमर पर पैर लपेट लिए, “अब… धीरे-धीरे…”

मैंने धीमी गति से हिलना शुरू किया – बाहर-भीतर, बहुत धीरे। हर धक्के में मामी की कराहें बढ़ती गईं। “आह… ऐसे ही… गहराई से…” भाभी अब मामी के होंठों पर चु@#@न कर रही थीं, उनकी जीभ मामी की जीभ से खेल रही थी। मैंने गति थोड़ी बढ़ाई, लेकिन अभी भी धीमी। मामी की स्त@#@ उछल रहे थे, मैंने एक हाथ से उन्हें दबाया, दूसरा हाथ उनकी कमर पर रखा। हर धक्के के साथ मामी की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं – “ओह… हां… और… मत रुको…” 

काफी देर तक हम ऐसे ही रहे – धीमी, गहरी, भावनाओं से भरी चु@#@ई। मामी की आंखें मेरी आंखों में थीं, वो मुझे देख रही थीं, जैसे सालों की प्यास बुझ रही हो। भाभी ने भी शामिल होकर मामी के भो@#@ड़ा को हल्के से छुआ, जो अब पूरी तरह फैल चुका था। मामी की कराहें अब तेज हो गईं, “आ… रहा है… ओह… बहुत जोर से…” उनकी चू@#@त ने मेरे ल@#ंड को और कस लिया, शरीर कांपने लगा। मैंने भी गति बढ़ाई, आखिरी कुछ धक्के जोर से दिए। मामी ने चीख दबी आवाज में मारी, “आ रहा है… आ रहा है…” और हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे। उनका शरीर थरथरा उठा, मेरे ल@#ंड पर उनकी चू@#@त की लहरें दौड़ रही थीं। मैं भी उनके अंदर ही थककर गिर पड़ा।

हम तीनों एक-दूसरे से लिपटे लेटे रहे, पसीने से तर, सांसें तेज। मामी ने मेरे कान में फुसफुसाया, “धन्यवाद बेटा… आज मैं फिर से जी उठी हूं।” भाभी ने मामी के माथे पर चु@#@न किया। वो रात हमारी सबसे गहरी, सबसे भावुक और सबसे लंबी रात थी – जहां सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि दिल भी एक हो गए थे।

उसके बाद हर रात ऐसी ही होती, लेकिन हर बार पहले लंबी बातें, पहले वो भावनाओं का आदान-प्रदान, फिर वो धीमी, गहरी निकटता। छुट्टियां खत्म हुईं, लेकिन वो यादें, वो स्पर्श, वो कराहें और वो प्यार हमेशा साथ रहेंगे।

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