रीवा की चु@@ई—>
बाहर सावन की पहली मूसलाधार बारिश हो रही थी और कमरे के भीतर एक अजीब सी खामोशी फैली हुई थी। रीवा, जो रिश्तों में मेरी मौसी लगती थी पर उम्र में मुझसे महज़ कुछ साल बड़ी थी, खिड़की के पास खड़ी बारिश की बूंदों को निहार रही थी। उसकी रेशमी साड़ी के किनारे हवा में हौले-हौले फड़फड़ा रहे थे और उसकी गर्दन पर ठहरी पानी की एक नन्ही बूंद बिजली की चमक में मोती की तरह चमक रही थी। मैं उसे बस देखता ही रह गया, जैसे कोई कलाकार अपनी सबसे खूबसूरत पेंटिंग को देख रहा हो। उसकी आंखों में एक ऐसी गहराई थी जिसमें डूबने का मन करता था और उसका व्यक्तित्व इतना शांत था कि उसके आसपास होने मात्र से रूह को सुकून मिलता था। वह खिड़की से हटकर जब मेरी तरफ मुड़ी, तो उसकी आंखों में एक अनजानी सी बेचैनी थी जिसे वह छुपाने की कोशिश कर रही थी।
रीवा की देह किसी तराशी हुई मूरत जैसी थी, जिसमें शालीनता और आकर्षण का एक अद्भुत संगम था। उसकी साड़ी के भीतर से झलकती उसकी कमर की गोलाई और उसके गहरे रंग के ब्लाउज से झांकते उसके सुडौल कंधे, किसी प्राचीन कविता की पंक्तियों की तरह महसूस होते थे। जब वह हिलती थी, तो उसके पायलों की रुनझुन दिल की धड़कन बढ़ा देती थी। उसके चेहरे की बनावट, उसकी तीखी नाक और उसके रसीले होंठों पर छाई वो हलकी सी मुस्कान, किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थी। उसके बदन से उठती चन्दन और बारिश की मिट्टी की मिली-जुली महक मेरे नथुनों में समाकर मेरी इंद्रियों को झकझोर रही थी, जिससे मेरा मन अशांत होने लगा था। उसकी देह का हर घुमाव एक लयबद्ध संगीत की तरह था जो मुझे अपनी ओर खींच रहा था।
हमारे बीच शब्दों की कमी कभी नहीं रही थी, लेकिन आज वो खामोशी बहुत कुछ कह रही थी। हम घंटों साथ बैठकर साहित्य और कला पर बातें कर सकते थे, और अक्सर हम एक-दूसरे की अधूरी बातों को बिना कहे ही समझ जाते थे। रीवा के प्रति मेरा झुकाव केवल शारीरिक नहीं था, बल्कि एक गहरा रूहानी जुड़ाव था जिसे मैं सालों से अपने दिल के किसी कोने में छिपाए बैठा था। उसने भी शायद मेरी आंखों में उमड़ते उस समंदर को पढ़ लिया था, क्योंकि जब भी हमारी नजरें मिलती थीं, वह अपनी पलकें झुका लेती थी और उसके गालों पर एक गुलाबी सी सिहरन दौड़ जाती थी। वह रिश्ता जो समाज की नजरों में एक नाम लेकर खड़ा था, आज अपनी सीमाओं को लांघने के लिए बेकरार नजर आ रहा था। उसके साथ बिताया हर पल मुझे एक नई दुनिया का अहसास कराता था जहाँ सिर्फ हम थे।
अचानक बिजली कड़की और पूरे घर की रोशनी चली गई, जिससे कमरा घुप अंधेरे में डूब गया। बस खिड़की से आती बिजली की कौंध ही कमरे को बीच-बीच में रोशन कर रही थी। रीवा डर के मारे हल्का सा चिल्लाई और अनजाने में ही उसने मेरा हाथ थाम लिया। उसका हाथ बर्फ जैसा ठंडा था और उसमें एक कंपकंपी थी जो मेरे रोम-रोम में समा गई। मैंने उसका हाथ मजबूती से पकड़ लिया और उसे ढांढस बंधाते हुए कहा, ‘डरो मत रीवा, मैं यहीं हूँ।’ अंधेरे में उसकी सांसों की गति बढ़ गई थी और मुझे उसके दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी। वह मेरे करीब आ गई, इतनी करीब कि मुझे उसकी गर्म सांसें अपनी गर्दन पर महसूस होने लगीं। उस पल समय जैसे थम सा गया था और दुनिया की सारी फिक्रें मिट गई थीं।
मेरे मन में एक युद्ध चल रहा था, एक तरफ समाज की मर्यादा थी और दूसरी तरफ वो बेपनाह प्यार जो अब बांध तोड़ने पर आमादा था। रीवा ने धीरे से अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया, उसकी सांसें अब और भी तेज और गहरी हो गई थीं। मैंने धीरे से पुकारा, ‘रीवा…’, उसने जवाब में बस एक गहरी आह भरी और मेरी शर्ट को अपने हाथों में भींच लिया। उसकी इस झिझक में भी एक समर्पण था, एक मौन स्वीकृति थी जो मुझे आगे बढ़ने का हौसला दे रही थी। मुझे पता था कि यह रास्ता कांटों भरा हो सकता है, लेकिन उस पल उसके करीब होने का अहसास इतना प्रबल था कि हर डर छोटा लगने लगा। उसके रेशमी बालों की खुशबू ने मेरी सोचने-समझने की शक्ति को कुंद कर दिया था और मैं बस उसे महसूस करना चाहता था।
मैंने अपनी कांपती हुई उंगलियों से उसके चेहरे को छुआ, मेरी उंगलियां उसकी मखमली त्वचा पर धीरे-धीरे रेंगने लगीं। वह सिहर उठी, उसकी आंखों ने धीरे से बंद होकर उस स्पर्श को अपने भीतर उतारा। मेरा अंगूठा उसके निचले होंठ पर ठहरा, जो अब थरथरा रहे थे। बिजली की एक और चमक में मैंने देखा कि उसकी आंखों में आंसू और प्यास का एक अजीब मेल था। उसने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर रखा और उसे वहीं थाम लिया। वह स्पर्श इतना कोमल और इतना गहरा था कि मुझे महसूस हुआ जैसे हमारे दिल एक ही लय में धड़कने लगे हों। उस एक स्पर्श ने हमारे बीच की सारी दूरियों को एक झटके में खत्म कर दिया था और हम दोनों भावनाओं के उस भंवर में बहने के लिए तैयार थे।
जैसे-जैसे हमारी निकटता बढ़ी, हवा में एक सोंधी सी महक और बढ़ती गर्माहट फैलने लगी। मैंने उसे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया, और उसने भी खुद को पूरी तरह मुझ पर छोड़ दिया। मेरी सांसें उसके कानों के पास टकरा रही थीं, जिससे उसके शरीर में एक मीठी सी लहर दौड़ गई। उसने अपनी आँखें मूँद ली थीं और उसकी पलकें धीरे-धीरे फड़फड़ा रही थीं। मेरा हाथ उसकी पीठ पर धीरे-धीरे नीचे की ओर सरकने लगा, जहाँ साड़ी का रेशमी स्पर्श और उसकी त्वचा की तपिश मिलकर एक नया ही अहसास जगा रहे थे। वह बार-बार गहरी सांसें ले रही थी, जैसे कि वह इस पल को अपने भीतर हमेशा के लिए संजो लेना चाहती हो। कमरे का हर कोना हमारी बढ़ती हुई धड़कनों का गवाह बन रहा था।
अब शब्दों की कोई आवश्यकता नहीं रह गई थी, क्योंकि हमारी देह और रूह आपस में बातें कर रही थीं। मैंने उसे और करीब खींच लिया, यहाँ तक कि हमारे बीच हवा की भी जगह नहीं बची। उसके बदन की गर्मी मुझे अपनी आगोश में ले रही थी। रीवा ने अपना चेहरा ऊपर उठाया, उसकी आँखों में एक समर्पण था जो किसी भी शब्द से ज्यादा प्रभावशाली था। मैंने धीरे से उसके माथे को चूमा, फिर उसकी आँखों को, और अंत में जब हमारे होंठ मिले, तो जैसे पूरी कायनात एक बिंदु पर सिमट गई। वह चुंबन मधुर, गहरा और बहुत ही भावुक था, जिसमें वर्षों की प्यास और तड़प शामिल थी। वह धीरे से कराह उठी, एक ऐसी ध्वनि जो प्रेम और पीड़ा का मिश्रण थी, और उसने अपने हाथ मेरी गर्दन के चारों ओर कस लिए।
पूरी घनिष्ठता के उस शिखर पर पहुँचते हुए, हमारा मिलन किसी पवित्र अनुष्ठान की तरह था। हर स्पर्श में एक गहराई थी, हर हरकत में एक सम्मान और असीमित प्यार था। वह मेरे नीचे फूलों की तरह बिखरी हुई थी, उसकी साड़ी कहीं अस्त-व्यस्त हो चुकी थी और उसके बदन पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था। जब मैं उसके और करीब आया, उसने धीरे से अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके होंठों से एक सुरीली आह निकली जो सीधे मेरे दिल में उतर गई। वह पल ऐसा था जहाँ दो शरीर नहीं, बल्कि दो आत्माएं एक-दूसरे में विलीन हो रही थीं। उसके शरीर की कोमलता और उसकी सांसों की तपिश ने मुझे एक ऐसी दुनिया में पहुँचा दिया था जहाँ सिर्फ आनंद और प्रेम का साम्राज्य था।
उस गहरी आत्मीयता के दौरान, हर हलचल एक संगीत की तरह थी। रीवा का शरीर मेरे नीचे एक वीणा की तरह बज रहा था, और मैं उसे बहुत ही संजीदगी और धीमेपन के साथ महसूस कर रहा था। उसकी कराहें, उसकी छोटी-छोटी सांसें और उसकी उंगलियों का मेरी पीठ पर कसना, सब कुछ इतना प्राकृतिक और सुंदर था। उसके बदन से उठती वो खुशबू अब और भी तीखी हो गई थी। हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह खो चुके थे, जैसे समंदर की लहरें किनारे से टकराकर उसमें विलीन हो जाती हैं। उस समय कोई झिझक नहीं थी, कोई शर्म नहीं थी, बस एक-दूसरे को पाने की वो तीव्र इच्छा थी जो अब शांत हो रही थी। उसकी आँखों से खुशी के दो आंसू निकलकर उसके गालों पर लुढ़क गए, जिन्हें मैंने अपने होंठों से समेट लिया।
सब कुछ शांत होने के बाद, वह मेरी बाहों में सिमट कर लेटी हुई थी। बाहर बारिश अब भी हो रही थी, पर अब उसकी आवाज सुकून देने वाली लग रही थी। रीवा की सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, और उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया था। मुझे अपनी छाती पर उसकी धड़कनें महसूस हो रही थीं। उस पल में एक अजीब सी तृप्ति थी, एक ऐसा मानसिक सुकून जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन था। मैंने उसके गीले बालों को सहलाया और उसे और भी कसकर पकड़ लिया। हम दोनों के बीच अब एक ऐसा अटूट बंधन बन चुका था जिसे दुनिया की कोई भी ताकत नहीं तोड़ सकती थी। उसके चेहरे पर एक अलौकिक शांति थी, जैसे उसे उसकी मंजिल मिल गई हो।
उस रात के बाद हम दोनों के लिए सब कुछ बदल गया था। वह केवल एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि हमारी भावनाओं का चरमोत्कर्ष था। रीवा अब मेरी आंखों में आँखें डालकर देख सकती थी, और उसकी मुस्कान में अब एक नया आत्मविश्वास था। वह रिश्ता जिसे लोग सिर्फ एक नाम से जानते थे, अब हमारे लिए पूरी दुनिया बन चुका था। जब भी हम अकेले होते, वह रात हमारी यादों में ताज़ा हो जाती और हम एक-दूसरे के स्पर्श में वही पुरानी सिहरन महसूस करते। प्यार जब रूहानी और जिस्मानी दोनों स्तरों पर मिलता है, तो वह अमर हो जाता है। रीवा और मेरा प्यार भी उसी श्रेणी में था, जो समय की कसौटी पर खरा उतरने के लिए तैयार था।