बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और आसमान में बिजली की कड़कड़ाहट के साथ ठंडी हवाएं चल रही थीं। मैं सालों बाद अपनी पुरानी ट्यूशन टीचर श्वेता मैम के घर उनसे मिलने पहुँचा था। श्वेता मैम की उम्र अब लगभग पैंतीस साल की थी, लेकिन उनकी काया और खूबसूरती किसी बीस साल की युवती को भी मात दे सकती थी। उन्होंने दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर उनके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई। उनकी लाल रंग की शिफॉन की साड़ी बारिश की बूंदों से थोड़ी भीग गई थी, जो उनके जिस्म से इस कदर चिपकी थी कि उनके शरीर का हर उतार-चढ़ाव साफ नज़र आ रहा था। उनके तरबूज साड़ी के ब्लाउज से बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे और उनकी गहरी खाई जैसी नाभि मुझे अपनी ओर खींच रही थी।
श्वेता मैम ने मुझे अंदर बुलाया और ड्राइंग रूम में बैठने को कहा। जैसे ही वह चाय बनाने के लिए मुड़ीं, मेरा ध्यान उनके भारी पिछवाड़े पर गया जो साड़ी में भी अपनी गोलाई और कसावट का एहसास करा रहे थे। कमरे में एक सोंधी सी खुशबू फैली हुई थी जो शायद मैम के परफ्यूम और बारिश की मिट्टी की महक का मिला-जुला रूप था। हम पुराने दिनों की बातें करने लगे, कैसे वह मुझे गणित पढ़ाती थीं और मैं अक्सर उनकी खूबसूरती को निहारने में खो जाता था। मैम की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, शायद वह भी उस अकेलेपन से ऊब चुकी थीं जो उनके पति के विदेश जाने के बाद उनके जीवन में आ गया था। हमारी बातों का सिलसिला गहरा होता जा रहा था और वातावरण में कामुकता की एक अदृश्य चादर बिछने लगी थी।
बिजली अचानक चली गई और पूरे कमरे में अंधेरा छा गया। श्वेता मैम ने एक मोमबत्ती जलाई जिसकी मद्धम रोशनी उनके चेहरे पर एक अद्भुत निखार ला रही थी। मैंने महसूस किया कि मैम की साँसें थोड़ी तेज़ हो रही थीं। मैंने हिम्मत जुटाई और उनका हाथ पकड़ लिया। उनका हाथ रेशम जैसा मुलायम और थोड़ा गर्म था। उन्होंने अपना हाथ हटाया नहीं, बल्कि अपनी उंगलियां मेरी उंगलियों में फंसा लीं। उनकी आँखों में मेरे लिए एक दबी हुई प्यास साफ दिखाई दे रही थी। मैंने उनके करीब जाकर उनके गालों को छुआ, जिससे उनके बदन में एक सिहरन दौड़ गई। वह धीरे से फुसफुसाईं, ‘समीर, यह तुम क्या कर रहे हो?’ लेकिन उनकी आवाज़ में मनाही नहीं, बल्कि एक गहरी चाहत छिपी थी।
मैंने धीरे से उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें शहद की तरह पीने लगा। वह भी मेरा साथ देने लगीं और हम दोनों एक-दूसरे के आगोश में सिमट गए। मेरे हाथ उनकी पीठ पर रेंगते हुए नीचे की ओर गए और उनके रेशमी पिछवाड़े को सहलाने लगे। मैम के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। मैंने अपनी पकड़ और मज़बूत की और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही ब्लाउज ढीला हुआ, उनके सफेद और रसीले तरबूज पूरी तरह आज़ाद होकर मेरे सामने आ गए। उन पर लगे छोटे-छोटे मटर की तरह निप्पल ठंड और उत्तेजना से पूरी तरह सख्त हो चुके थे। मैंने अपनी जीभ से उन मटरों को सहलाया तो मैम का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया और वह अपनी उंगलियां मेरे बालों में फंसाकर मुझे अपने और करीब खींचने लगीं।
श्वेता मैम की उत्तेजना अब चरम पर थी। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतार दी और अब वह केवल अपने छोटे से अंतर्वस्त्र में मेरे सामने खड़ी थीं। उनके पेट पर जमे हल्के बाल और उनकी जाँघों के बीच छिपी गहरी खाई मुझे पागल कर रही थी। मैंने अपना पजामा नीचे किया और मेरा कड़क खीरा पूरी ताकत के साथ बाहर निकल आया। जब मैम ने उस मोटे और लंबे खीरे को देखा, तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने धीरे से अपने हाथ से उस खीरे को थामा और उसे ऊपर-नीचे सहलाने लगीं। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी खाई के पास पहुँच गया। वहाँ के बाल बहुत ही करीने से तराशे हुए थे और उनकी खाई से रस निकलकर उसे पूरी तरह गीला कर चुका था।
मैंने अपनी जीभ से उनकी खाई को चाटना शुरू किया, जिससे वह बिस्तर पर तड़पने लगीं। ‘उह्ह समीर… ऐसे मत करो… मैं पागल हो जाऊँगी,’ वह कराहते हुए बोलीं। लेकिन मैंने रुकने के बजाय अपनी उंगली से खोदना शुरू कर दिया। मेरी उंगलियां उनकी रसीली खाई के अंदर-बाहर हो रही थीं और हर बार एक गीली आवाज़ गूंज रही थी। मैम का रस अब उबल रहा था। फिर मैंने अपना खीरा उनके मुँह के पास किया और वह उसे पूरे चाव से चूसने लगीं। उनका खीरा चूसना इतना आनंददायक था कि मुझे लगा मेरा रस अभी निकल जाएगा। मैंने उन्हें रोका और उन्हें सामने से खोदने के लिए तैयार किया।
जैसे ही मैंने अपने खीरे का सिरा उनकी तंग खाई पर रखा, उन्होंने कसकर बिस्तर की चादर पकड़ ली। मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और मेरा पूरा खीरा उनकी खाई की गहराई को नापने लगा। वह ज़ोर से चिल्लाईं, लेकिन वह दर्द की नहीं, बल्कि अपार सुख की चिल्लाहट थी। मैं धीरे-धीरे सामने से खोदना जारी रखा, हर धक्के के साथ हमारा शरीर एक-दूसरे से टकराता और पसीने की बूंदें आपस में मिल जातीं। मैम के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और मैं उन्हें अपने हाथों से भींच रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी तेज़ साँसों और खुदाई की आवाज़ें गूंज रही थीं।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें पलटने को कहा और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। यह तरीका उन्हें और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा था। उनके पिछवाड़े के भारीपन और मेरी खुदाई की गति ने माहौल को पूरी तरह कामुक बना दिया था। मैं अपनी पूरी ताकत से उन्हें खोद रहा था और वह ‘और तेज़ समीर, और तेज़’ चिल्ला रही थीं। हमारा पसीना एक हो चुका था और कमरे की हवा में कामुकता की गंध रच-बस गई थी। अचानक मुझे महसूस हुआ कि मेरा रस छूटने वाला है और ठीक उसी समय मैम की खाई भी जोर-जोर से सिकुड़ने लगी। उनका भी रस निकल रहा था और हम दोनों एक साथ चरम सुख के सागर में डूब गए। मेरा सारा गर्म रस उनकी खाई की गहराई में समा गया।
खुदाई खत्म होने के बाद हम दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे थे। मैम की आँखें बंद थीं और उनके चेहरे पर एक असीम शांति और संतुष्टि का भाव था। वह मेरी छाती पर अपना सिर रखकर मेरी धड़कनों को सुन रही थीं। मैंने उनके माथे पर एक प्यार भरा स्पर्श किया। वह रात हमारे लिए सिर्फ शारीरिक मिलन नहीं, बल्कि दो रूहों के एक होने की रात थी। हमने पूरी रात उसी मदहोशी में बिताई, और बाहर बारिश अब भी थमने का नाम नहीं ले रही थी, मानो प्रकृति भी हमारे इस मिलन का जश्न मना रही हो।