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सिमरन भाभी की खुदाई


सिमरन भाभी की खुदाई—>

शहर की उस तपती दोपहर में घर के भीतर एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। राहुल अपने बड़े भाई के घर पिछले दो महीनों से रह रहा था, लेकिन आज का दिन कुछ अलग था। घर के सभी बड़े सदस्य एक पारिवारिक शादी में शामिल होने के लिए दूसरे शहर गए हुए थे और घर पर केवल राहुल और उसकी जवान भाभी सिमरन ही अकेले थे। सिमरन की उम्र लगभग 32 वर्ष थी, लेकिन उसकी काया किसी बीस साल की नवयौवना को भी मात देती थी। उसका शरीर सुडौल और गठा हुआ था, जिसकी बनावट किसी कुशल मूर्तिकार की कलाकृति जैसी लगती थी। राहुल अक्सर चोरी-छिपे भाभी के उस निखरे हुए बदन को निहारा करता था, जो हर रोज़ साड़ियों के अलग-अलग रंगों में लिपटा हुआ उसके सामने से गुजरती थीं।

सिमरन भाभी का कद मध्यम था और उनकी चाल में एक ऐसी मादकता थी जो राहुल के मन में हलचल पैदा कर देती थी। उनकी कमर पतली थी, लेकिन उनके कूल्हे काफी चौड़े और भारी थे, जो चलते समय धीरे-धीरे हिलते थे। उनके रेशमी बालों का जूड़ा हमेशा उनकी गर्दन के पिछले हिस्से को ढक कर रखता था, जहाँ पसीने की छोटी-छोटी बूंदें अक्सर चमकती रहती थीं। उनके तरबूज जैसे बड़े और पुष्ट स्तन उनकी चोली के भीतर जैसे कैद होने के लिए छटपटा रहे थे। जब भी वह झुककर काम करतीं, उनके तरबूजों की गहराई और उनके ऊपरी हिस्से की सफेदी राहुल की धड़कनों को अनियंत्रित कर देती थी। राहुल उनकी आँखों की गहराई और उनके होंठों की लाली को देखकर अक्सर कल्पनाओं के सागर में डूब जाया करता था।

उस दिन सिमरन रसोई में दोपहर का खाना बना रही थीं। गर्मी की वजह से उनकी सूती साड़ी उनके पसीने से भीग कर उनके बदन से चिपक गई थी। राहुल पानी पीने के बहाने रसोई में पहुँचा, तो उसकी नज़र सिमरन की नग्न पीठ पर पड़ी जो ब्लाउज की डोरी के खुले होने के कारण थोड़ी ज़्यादा ही उजागर हो रही थी। सिमरन ने जैसे ही राहुल को देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक और थोड़ी सी झिझक उभरी। दोनों के बीच पिछले कुछ हफ़्तों से एक अनकहा आकर्षण बढ़ रहा था। राहुल ने धीरे से सिमरन के पास जाकर उनकी कमर पर हाथ रखा, जिससे सिमरन के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उन्होंने राहुल को मना नहीं किया, बल्कि उनकी साँसें तेज़ हो गईं, जिससे उनके तरबूज ऊपर-नीचे होने लगे।

राहुल ने सिमरन के कानों के पास जाकर धीरे से फुसफुसाया, ‘भाभी, आज आप बहुत सुंदर लग रही हैं।’ सिमरन ने अपनी आँखें बंद कर लीं और राहुल की बाहों में ढह गईं। उनके बीच की झिझक जैसे उस एक स्पर्श से पिघल कर बह गई थी। राहुल ने सिमरन को अपनी ओर घुमाया और उनके चेहरे को अपने हाथों में भर लिया। सिमरन की धड़कनें अब राहुल को अपनी छाती पर महसूस हो रही थीं। राहुल ने धीरे से सिमरन के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके मुँह के मीठे रस को पीने लगा। सिमरन ने भी अपनी बाहें राहुल के गले में डाल दीं और इस मिलन का भरपूर साथ देने लगीं। उन दोनों के बीच अब कोई पर्दा नहीं रहा था, बस एक तीव्र इच्छा थी जो उन्हें एक-दूसरे की ओर खींच रही थी।

वे दोनों धीरे-धीरे बेडरूम की ओर बढ़े। राहुल ने सिमरन की साड़ी की परतों को धीरे-धीरे खोलना शुरू किया। जैसे-जैसे कपड़ा शरीर से अलग हो रहा था, सिमरन का गोरा और बेदाग बदन राहुल की आँखों के सामने उभर रहा था। सिमरन की जाँघों के पास के घने बाल राहुल की उत्तेजना को और बढ़ा रहे थे। जब सिमरन पूरी तरह से निर्वस्त्र हुईं, तो राहुल ने उनके तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया। वे तरबूज इतने मुलायम और गर्म थे कि राहुल उन्हें बार-बार सहलाने लगा। सिमरन के मटर जैसे सख्त निप्पल राहुल की उंगलियों के स्पर्श से और भी उभड़ आए थे। राहुल ने झुककर उन मटरों को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा, जिससे सिमरन के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं।

राहुल अब नीचे की ओर बढ़ा और सिमरन की गहरी खाई के पास पहुँचा। उस खाई की खुशबू और उसकी नमी ने राहुल को पागल कर दिया था। उसने अपनी जीभ से उस खाई को चखना शुरू किया। सिमरन अपने हाथों से राहुल के बालों को खींच रही थीं और अपनी कमर को ऊपर-नीचे कर रही थीं। राहुल की उंगली अब खाई के भीतर जा चुकी थी और वह उंगली से खोदना शुरू कर चुका था। सिमरन की सिसकारियां अब कमरे की खामोशी को चीर रही थीं। वह बार-बार राहुल का नाम ले रही थीं और उसे अपने और करीब खींच रही थीं। राहुल ने महसूस किया कि सिमरन की खाई अब पूरी तरह से गीली और तैयार हो चुकी है।

तभी सिमरन ने राहुल के कपड़ों को भी हटा दिया और उसके विशाल और सख्त खीरे को अपने हाथों में पकड़ लिया। राहुल का खीरा अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ तना हुआ था। सिमरन ने उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगीं। राहुल को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह स्वर्ग में पहुँच गया हो। सिमरन के मुँह की गर्मी और उनकी जीभ का जादू राहुल को मदहोश कर रहा था। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद सिमरन बिस्तर पर लेट गईं और अपनी टाँगें फैला दीं। उन्होंने राहुल की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘अब और इंतज़ार नहीं होता राहुल, इसे अपनी खाई में उतार दो।’

राहुल ने सिमरन के ऊपर आकर अपने खीरे की नोक को उनकी खाई के द्वार पर रखा। सिमरन ने कसकर राहुल के कंधों को पकड़ लिया। राहुल ने एक ज़ोरदार धक्का दिया और उसका पूरा खीरा सिमरन की तंग खाई के भीतर समा गया। सिमरन की आँखों से आँसू की एक बूंद निकल गई, लेकिन उनके चेहरे पर एक असीम सुख का भाव था। राहुल ने धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ सिमरन के तरबूज हवा में उछल रहे थे। कमरे में केवल उनके शरीर के टकराने की आवाज़ और उनकी भारी साँसों का शोर गूँज रहा था। राहुल ने अब अपनी गति बढ़ा दी थी, वह गहराई तक सिमरन की खाई को खोद रहा था।

कुछ देर बाद राहुल ने सिमरन को पलटने के लिए कहा। सिमरन अब घुटनों के बल आ गईं और राहुल उनके पीछे खड़ा हो गया। इस स्थिति में सिमरन का पिछवाड़ा बहुत ही आकर्षक लग रहा था। राहुल ने पीछे से अपने खीरे को फिर से सिमरन की खाई में डाला और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। सिमरन के कूल्हे राहुल के धक्कों के साथ ताल मिला रहे थे। सिमरन ज़ोर-ज़ोर से आहें भर रही थीं और कह रही थीं, ‘हाँ राहुल, ऐसे ही… और तेज़ खोदो… मुझे पूरा खत्म कर दो।’ राहुल की मेहनत अब रंग ला रही थी, उसे महसूस हो रहा था कि उसका रस अब निकलने ही वाला है।

सिमरन भी अपने चर्मोत्कर्ष के करीब थीं। उनकी खाई की पकड़ राहुल के खीरे पर और भी मजबूत हो गई थी। राहुल ने अंतिम कुछ ज़ोरदार धक्के लगाए और सिमरन के शरीर में एक तेज़ कंपन हुआ। उनका रस छूट गया और वे ढीली पड़ गईं। ठीक उसी क्षण राहुल का खीरा भी अपने रस की गर्म फुहारों को सिमरन की गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, पसीने से लथपथ और पूरी तरह से संतुष्ट। कमरे की हवा में अब एक अजीब सी शांति और तृप्ति की महक थी।

उसके बाद काफी देर तक वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे। सिमरन का सिर राहुल की छाती पर था और वे दोनों धीरे-धीरे सामान्य होने की कोशिश कर रहे थे। सिमरन ने राहुल की आँखों में देखते हुए कहा, ‘आज तुमने मुझे वो सुख दिया है जिसकी मुझे बरसों से तलाश थी।’ राहुल ने उनके माथे को चूम लिया। उनका शरीर अभी भी थकान और सुख के मिश्रण से कांप रहा था। वह शाम उन दोनों के लिए सिर्फ एक शारीरिक संबंध नहीं, बल्कि भावनाओं का एक ऐसा सैलाब था जिसने उनके बीच के रिश्ते को एक नई और गहरी परिभाषा दे दी थी। घर की शांति अब भी बनी हुई थी, लेकिन उन दोनों के मन के भीतर एक नया शोर पैदा हो गया था—एक ऐसा राज़ जो सिर्फ उन दोनों के बीच था।

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