अजनबी पड़ोसी संग चुदाई—>
बारिश की वह रात बहुत ही घनी और डरावनी थी। शहर की पूरी बिजली गुल हो चुकी थी और अपार्टमेंट की लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में ही अटक गई थी। नेहा अपने ऑफिस से थकी-हारी लौट रही थी और उसके साथ उसी की मंजिल पर कुछ दिन पहले ही रहने आया समीर भी फंसा हुआ था। दोनों के बीच पहले कभी कोई बात नहीं हुई थी, लेकिन उस तंग और बंद जगह में एक-दूसरे की सांसों की गर्माहट साफ महसूस हो रही थी। बाहर बारिश का शोर था और अंदर एक भारी सन्नाटा, जिसे सिर्फ उनकी धड़कनें तोड़ रही थीं।
नेहा ने उस दिन बहुत ही महीन और पारभासी साड़ी पहनी थी जो पसीने और नमी की वजह से उसके सुडौल जिस्म से चिपक गई थी। लिफ्ट की हल्की इमरजेंसी लाइट में उसके शरीर के घुमाव उभर कर सामने आ रहे थे। उसके पुष्ट और बड़े-बड़े तरबूज साड़ी के पतले कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे। समीर की नजरें बार-बार नेहा के उन रसीले तरबूजों पर जाकर टिक जाती थीं, जहाँ ठंडक और उत्तेजना के कारण उसके नन्हे मटर साफ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे। नेहा ने भी महसूस किया कि समीर उसे बहुत गहराई से देख रहा है।
लिफ्ट की संकरी जगह में जैसे-जैसे समय बीत रहा था, हवा कम होती जा रही थी और उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। समीर की देह नेहा के कोमल अंगों से बार-बार टकरा रही थी। समीर की मर्दाना खुशबू नेहा के भीतर एक अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी जिसे उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। नेहा ने घबराहट में अपनी निगाहें नीचे झुका लीं, लेकिन तभी समीर का हाथ गलती से नेहा की कमर के खुले और चिकने हिस्से पर जा टिका। वह स्पर्श इतना बिजली जैसा था कि नेहा के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई और उसकी आँखें अपने आप बंद हो गई।
समीर ने देखा कि नेहा ने उसका विरोध नहीं किया, तो उसकी हिम्मत बढ़ गई। उसने धीरे से अपने हाथ को ऊपर की ओर खिसकाया और नेहा के रेशमी तरबूज को हल्के से सहलाया। नेहा के मुँह से एक दबी हुई आह निकली और वह समीर के सीने से सट गई। समीर ने उसके कानों के पास जाकर फुसफुसाया कि तुम बहुत सुंदर हो, और फिर उसके मटर को अपनी उंगलियों से मसलने लगा। नेहा की सांसें तेज हो गईं और उसका शरीर समीर की बाहों में पिघलने लगा। अब शर्म की दीवार धीरे-धीरे ढह रही थी और दबी हुई इच्छाएं बाहर आ रही थीं।
समीर ने बिना देर किए नेहा की साड़ी के पल्लू को कंधे से नीचे गिरा दिया। अब उसके दोनों बड़े तरबूज समीर की आँखों के सामने थे। समीर ने झुककर उन तरबूजों के बीच अपना चेहरा छिपा लिया और अपने होंठों से नेहा के मटर को चूसने लगा। नेहा ने समीर के बालों को मजबूती से पकड़ लिया और अपनी कमर को आगे की ओर धकेलने लगी। समीर का हाथ नीचे की ओर गया जहाँ नेहा की रेशमी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। उसने साड़ी के ऊपर से ही नेहा की खाई को सहलाया तो नेहा के पैर कांपने लगे।
समीर ने अब नेहा को दीवार से सटा दिया और उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठा दिया। नेहा की खाई अब पूरी तरह से बेपर्दा थी, जहाँ काले-काले रेशमी बाल उसे ढकने की कोशिश कर रहे थे। समीर ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना भारी और लंबा खीरा बाहर निकाला। नेहा ने जब उस विशाल खीरे को देखा तो उसकी आँखें फटी रह गई। समीर ने नेहा के हाथों को अपने खीरे पर रखा और उसे महसूस करने को कहा। नेहा ने अपने हाथों से उस गर्म और सख्त खीरे को सहलाया तो समीर की भी आह निकल गई।
समीर अब और इंतजार नहीं कर सकता था। उसने नेहा की एक टांग को अपनी कमर पर लपेटा और अपने खीरे के अगले हिस्से को नेहा की रसीली खाई के द्वार पर टिका दिया। नेहा ने कसकर समीर के कंधे को पकड़ लिया। जैसे ही समीर ने एक गहरा धक्का दिया, उसका खीरा नेहा की तंग खाई के भीतर आधा समा गया। नेहा के मुँह से एक चीख निकली जो समीर के होंठों के भीतर दब गई। समीर ने धीरे-धीरे गहराई से खुदाई करना शुरू किया। हर धक्के के साथ नेहा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और लिफ्ट में थप-थप की आवाज गूँजने लगी थी।
समीर ने अब नेहा को नीचे झुकाया और उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। नेहा अब घोड़ी बनी हुई थी और समीर पीछे से उसके भारी पिछवाड़े पर थप्पड़ मारते हुए अपने खीरे को पूरी ताकत से अंदर-बाहर कर रहा था। नेहा के बाल समीर के चेहरे पर आ रहे थे और वह पूरी तरह से इस आनंद में डूब चुकी थी। समीर ने उसके दोनों तरबूजों को पीछे से पकड़ लिया और अपनी खुदाई की रफ्तार और तेज कर दी। नेहा बार-बार कह रही थी कि समीर मुझे और जोर से खोदो, मुझे पूरा भर दो। समीर ने उसकी मांग पूरी की और पूरी ताकत से खुदाई जारी रखी।
कुछ देर की जबरदस्त खुदाई के बाद दोनों अपने चरम पर पहुँचने वाले थे। समीर ने नेहा को फिर से सीधा किया और उसे सामने से खोदना शुरू किया। नेहा की खाई अब समीर के खीरे को पूरी तरह जकड़ चुकी थी। अचानक नेहा का पूरा शरीर अकड़ गया और उसकी खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा। उसी पल समीर ने भी अपना सारा गर्म रस नेहा की गहराईयों में छोड़ दिया। दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। लिफ्ट की लाइट वापस आ गई थी और लिफ्ट चलने लगी थी, लेकिन उन दोनों की दुनिया हमेशा के लिए बदल चुकी थी। नेहा ने अपनी साड़ी ठीक की और समीर को एक शरारती मुस्कान दी, जैसे यह तो बस एक शुरुआत थी।