अजनबी पड़ोसी संग लिफ्ट में खु@@ई—>
समीरा आज ऑफिस की पार्टी से काफी देर से घर लौट रही थी और रात के करीब दो बज रहे थे जब उसने अपनी सोसाइटी की लिफ्ट का बटन दबाया। उसने गहरे नीले रंग की पतली शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी जिसका गला काफी गहरा था और उसके उभरे हुए तरबूज उस तंग ब्लाउज में जैसे कैद होने के लिए छटपटा रहे थे। तभी लिफ्ट में एक अजनबी युवक दाखिल हुआ जिसका नाम विहान था और वह इसी सोसाइटी में नया आया था। विहान काफी लंबा और गठीले बदन का मालिक था जिसने सफेद शर्ट पहनी थी जिसके ऊपर के दो बटन खुले हुए थे। लिफ्ट ऊपर की ओर बढ़ने लगी और उन दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी लेकिन हवा में एक अलग ही तनाव महसूस हो रहा था जो कामुकता से भरा हुआ था।
समीरा के शरीर से आने वाली इत्र की खुशबू विहान के नथुनों से टकरा रही थी और वह अपनी नजरें समीरा के उन भारी तरबूज पर टिकने से नहीं रोक पा रहा था जो साड़ी के पल्लू के नीचे से साफ झलक रहे थे। समीरा ने भी महसूस किया कि विहान उसे बड़ी ही प्यासी नजरों से देख रहा है जिससे उसके शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई और उसके सीने पर मौजूद मटर जैसे अकड़ने लगे थे। अचानक एक तेज झटके के साथ लिफ्ट बीच में ही रुक गई और सारी लाइटें गुल हो गईं जिससे समीरा घबराकर जोर से चिल्लाई और विहान की बाहों में जा गिरी। विहान ने तुरंत उसे अपनी मजबूत बाहों में थाम लिया और उसकी कमर के पतले घेरे को अपनी उंगलियों से भींच दिया जिससे समीरा की सांसें तेज चलने लगीं।
अंधेरे में उन दोनों के शरीर एक-दूसरे से पूरी तरह सटे हुए थे और समीरा को विहान की गर्म सांसें अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थीं जो उसे मदहोश कर रही थीं। विहान ने धीमी आवाज में कहा कि घबराओ मत मैं यहाँ हूँ और उसके हाथ धीरे से समीरा की पीठ पर रेंगने लगे जहाँ से ब्लाउज की डोरी ढीली थी। समीरा की झिझक अब धीरे-धीरे कम हो रही थी और उसकी जगह एक तीव्र इच्छा जन्म ले रही थी क्योंकि उसे विहान के शरीर की गर्माहट बहुत सुकून दे रही थी। उसने विहान के मजबूत कंधों पर अपने हाथ रख दिए और अपना सिर उसके सीने पर टिका दिया जिससे उसे विहान के दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी जो काफी तेज थी।
विहान ने अब अपनी हिम्मत बढ़ाई और अपना एक हाथ समीरा के पल्लू के अंदर ले गया जहाँ उसने उन रेशमी तरबूज को अपने हाथों के घेरे में ले लिया जो बहुत ही कोमल और गर्म थे। समीरा के मुँह से एक दबी हुई आह निकली और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं क्योंकि उसे वह स्पर्श बहुत ही सुखद और उत्तेजक लग रहा था। विहान ने अपनी उंगलियों से उन तरबूज के ऊपर मौजूद नन्हे मटर को धीरे से सहलाया और फिर उन्हें अपनी चुटकी में भर लिया जिससे समीरा का पूरा शरीर कांप उठा। उसने अपनी कमर को विहान के शरीर की ओर धकेला जिससे विहान को महसूस हुआ कि समीरा भी अब इस खेल में पूरी तरह से शामिल होना चाहती है और उसका मन भी प्यासा है।
विहान ने धीरे से समीरा के चेहरे को ऊपर उठाया और उसके होंठों का रसपान करने लगा जो बहुत ही रसीले और मीठे थे जैसे कोई परिपक्व फल हो। उन दोनों के बीच अब कोई पर्दा नहीं रहा था और कामुकता की आग पूरी तरह से भड़क चुकी थी जिसने उन दोनों को अपनी चपेट में ले लिया था। समीरा ने विहान की शर्ट के बटन खोलने शुरू किए और उसके चौड़े सीने पर अपनी उंगलियां घुमाने लगी जिससे विहान और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया। विहान ने समीरा की साड़ी की प्लेट्स को धीरे-धीरे खोलना शुरू किया और उसकी रेशमी त्वचा को अपनी उंगलियों से टटोलने लगा जिससे समीरा की कामवासना चरम पर पहुँचने लगी थी।
साड़ी के नीचे समीरा ने सिर्फ एक पतला पेटीकोट पहना था जिसे विहान ने नीचे की ओर सरका दिया और अब समीरा की रेशमी और मखमली खाई पूरी तरह से उसके सामने थी। विहान ने अपनी उंगलियों को उस गहरी और गीली खाई के पास ले जाकर धीरे से सहलाया जिससे समीरा के शरीर में बिजली सी दौड़ गई और उसने विहान के बालों को कसकर पकड़ लिया। उस खाई के ऊपर छोटे-छोटे बाल थे जो रेशम की तरह मुलायम लग रहे थे और वहाँ से निकलने वाला प्राकृतिक रस विहान की उंगलियों को भिगो रहा था। विहान ने अपनी एक उंगली को धीरे से खाई के अंदर डाला और उंगली से खोदना शुरू किया जिससे समीरा जोर-जोर से कराहने लगी और उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं।
समीरा ने अब विहान की पेंट की चैन खोली और उसके अंदर छुपे हुए विशाल और तने हुए खीरा को बाहर निकाला जो काफी गर्म और सख्त हो चुका था। उस खीरा की लंबाई और मोटाई देखकर समीरा की आँखें फटी की फटी रह गईं लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जैसे उसे अपनी मंजिल मिल गई हो। उसने अपने नन्हे हाथों से उस खीरा को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे ऊपर-नीचे सहलाने लगी जिससे विहान के मुँह से भी सिसकारी निकल गई। समीरा ने अब उस खीरा को अपने मुँह में लेना शुरू किया और उसे बड़े ही प्यार से चूसने लगी जैसे वह दुनिया की सबसे स्वादिष्ट चीज का स्वाद ले रही हो।
विहान अब और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था इसलिए उसने समीरा को लिफ्ट की दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया और उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर के चारों ओर लपेट लिया। उसने अपने मजबूत खीरा को समीरा की उस गहरी और मदहोश कर देने वाली खाई के मुहाने पर सेट किया और एक ही जोरदार झटके में उसे अंदर उतार दिया। समीरा के मुँह से एक लंबी और तीखी आह निकली क्योंकि वह खीरा काफी बड़ा था और उसकी खाई को पूरी तरह से भर चुका था। विहान ने अब सामने से खोदना शुरू किया और हर धक्के के साथ वह समीरा की गहराई को नाप रहा था जिससे लिफ्ट की दीवारों से टकराने की आवाजें आने लगीं।
खुदाई का यह सिलसिला अब बहुत तेज हो गया था और उन दोनों के शरीर पसीने से पूरी तरह तर-बतर हो चुके थे लेकिन कोई भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था। विहान ने समीरा को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने के लिए झुका दिया जिससे समीरा के भारी तरबूज नीचे की ओर लटकने लगे और वे आपस में टकरा रहे थे। विहान ने पीछे से हमला जारी रखा और उसका खीरा बार-बार समीरा की खाई की दीवारों से टकराकर उसे बेहाल कर रहा था जिससे समीरा बस विहान का नाम पुकार रही थी। समीरा को अब महसूस हो रहा था कि उसका रस निकलने वाला है क्योंकि उसकी उत्तेजना अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच चुकी थी और उसका पूरा शरीर थरथरा रहा था।
अंत में विहान ने कुछ और जोरदार धक्के लगाए और उसका भी रस छूटना शुरू हो गया जो समीरा की खाई की गहराइयों में जाकर जमा होने लगा जिससे समीरा को एक असीम सुख की प्राप्ति हुई। वे दोनों एक-दूसरे को पकड़कर काफी देर तक वहीं खड़े रहे और अपनी तेज होती सांसों को काबू में करने की कोशिश करने लगे जो लिफ्ट के छोटे से केबिन में गूंज रही थीं। कुछ देर बाद लिफ्ट की लाइटें वापस आ गईं और लिफ्ट अपने आप ऊपर की ओर बढ़ने लगी जैसे उसे भी उनकी तृप्ति का अहसास हो गया हो। समीरा ने अपनी साड़ी ठीक की और विहान ने अपनी शर्ट के बटन बंद किए लेकिन उनकी आँखों में एक नया रिश्ता जन्म ले चुका था।
जब लिफ्ट का दरवाजा खुला तो वे दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए और बिना कुछ कहे अपने-अपने फ्लैट की ओर बढ़ गए लेकिन उनकी धड़कनें अभी भी उस खुदाई की याद में तेज थीं। समीरा जब अपने बेड पर लेटी तो उसे अभी भी अपनी खाई में उस खीरा की गर्माहट महसूस हो रही थी जो उसे एक अलग ही सुकून दे रही थी। उस रात की वह अजनबी मुलाकात अब एक सुनहरी याद बन चुकी थी जिसे वे दोनों ही कभी भूल नहीं पाएंगे क्योंकि उस बंद लिफ्ट में उन्होंने प्यार की नई परिभाषा लिखी थी। विहान भी अपनी खिड़की के पास खड़ा होकर उस रात के बारे में सोच रहा था और उसके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी क्योंकि उसने आज एक बहुत ही हसीन गहराई को छुआ था।