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ऑफिस वाली गरम चु@@ई

रात के ग्यारह बज चुके थे और ऑफिस की विशाल इमारत में सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ हमारी केबिन की लाइट्स जल रही थीं क्योंकि प्रोजेक्ट की डेडलाइन सुबह की थी। प्रिया मेरे बगल वाली मेज पर बैठी लगातार टाइपिंग कर रही थी। वह आज बहुत ही आकर्षक लग रही थी, उसने एक तंग सफेद रंग की फॉर्मल शर्ट और काली पेंसिल स्कर्ट पहनी हुई थी। उसकी शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे, जहाँ से उसके उभरे हुए गोरे तरबूज साफ झलक रहे थे। जब भी वह सांस लेती, उसके तरबूज ऊपर-नीचे होते और मेरी धड़कनें बढ़ा देते। वह अपनी पीठ को आराम देने के लिए जब पीछे की ओर झुकती, तो उसकी स्कर्ट उसके सुडौल पैरों पर और ऊपर चढ़ जाती, जिससे उसके गोरे बदन की चमक मेरे दिल में आग लगा देती थी।

प्रिया का शरीर किसी अप्सरा से कम नहीं था, उसकी कमर इतनी पतली थी कि कोई भी उसे एक हाथ से थाम ले। उसके शरीर का हर अंग जैसे तराशा हुआ था, खासकर उसके भारी तरबूज जो उसकी शर्ट को फाड़ने की कोशिश कर रहे थे। मैं देख सकता था कि उसकी शर्ट के पतले कपड़े के नीचे उसके मटर जैसे निप्पल उभरे हुए थे, शायद एसी की ठंडक की वजह से या फिर किसी अनकही उत्तेजना के कारण। उसका चेहरा पसीने की हल्की बूंदों से चमक रहा था, जो उसकी गर्दन से होते हुए उसके तरबूजों के बीच की गहरी घाटी में जा रही थीं। वह अपनी गर्दन पर गिरते बालों को बार-बार पीछे करती, जिससे उसकी खुशबू मेरी नाक तक पहुँचती और मेरे अंदर के सोए हुए शैतान को जगा देती थी।

हम पिछले दो साल से साथ काम कर रहे थे, लेकिन आज की रात कुछ अलग थी। हमारे बीच हमेशा एक अनकहा आकर्षण रहा था, जिसे हम दोनों ने ही काम की व्यस्तता के पीछे छुपा रखा था। जब भी हमारी नजरें मिलतीं, एक बिजली सी दौड़ जाती थी। आज रात सन्नाटे में हमारी सांसों की आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी। मैंने उसे कॉफी का कप पकड़ाया, तो हमारी उंगलियाँ एक-दूसरे से छुईं। उस स्पर्श में एक करंट था, प्रिया ने तुरंत अपनी नजरें झुका लीं लेकिन उसने अपना हाथ नहीं हटाया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो डर और चाहत का मिश्रण लग रही थी। मुझे महसूस हुआ कि मेरा खीरा अपनी जगह बनाने के लिए तड़प रहा है, पैंट के अंदर वह पूरी तरह से अकड़ चुका था।

वह आकर्षण अब धीरे-धीरे एक बेकाबू प्यास में बदल रहा था। प्रिया ने अपनी फाइल बंद की और मेरी तरफ मुड़ी, उसकी गहरी आँखों में एक सवाल था और एक दावत भी। उसने धीमे स्वर में कहा, ‘समीर, बहुत थकान हो रही है, क्या हम थोड़ी देर ब्रेक ले सकते हैं?’ उसकी आवाज में एक अजीब सी थरथराहट थी। मैंने उसके करीब जाते हुए अपना हाथ उसकी कुर्सी के हत्थे पर रखा। मेरा चेहरा उसके चेहरे के इतना पास था कि मैं उसकी गर्म सांसें अपनी गालों पर महसूस कर सकता था। उसके होंठ गुलाबी और रसीले थे, जैसे किसी मीठे फल का इंतजार कर रहे हों। कमरे का तापमान अचानक बढ़ गया था, और हमारे बीच की झिझक अब पिघलने लगी थी।

मेरे मन में एक पल के लिए डर आया कि कहीं यह पेशेवर मर्यादा के खिलाफ तो नहीं, लेकिन प्रिया के झुके हुए पलकों और उसकी बढ़ती हुई सांसों ने मुझे यकीन दिला दिया कि वह भी वही चाहती है। मैंने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ उसकी रेशमी कमर पर रखा। उसने एक गहरी ठंडी सांस भरी और अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरा हाथ धीरे-धीरे उसकी स्कर्ट के ऊपर से उसके कूल्हों की तरफ बढ़ा। उसके बदन की गर्मी मेरे हाथ की हथेलियों को जला रही थी। मैंने अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास ले जाकर उसकी खुशबू को गहराई से महसूस किया। वह कांपने लगी थी, उसकी उंगलियाँ मेरी शर्ट की आस्तीन को कसकर पकड़ने लगी थीं।

मैंने धीरे से उसके होंठों को अपने होंठों से छुआ। वह एक हल्का सा स्पर्श था, लेकिन इसने हमारे बीच के सारे बांध तोड़ दिए। उसने अपनी बाहें मेरी गर्दन के चारों ओर डाल दीं और मुझे अपनी ओर खींच लिया। हमारे होंठों के बीच एक गहरा रस भरा युद्ध शुरू हो गया, हम एक-दूसरे के मुंह का रस ऐसे पी रहे थे जैसे सदियों के प्यासे हों। मेरा हाथ अब उसकी शर्ट के बटनों तक पहुँच चुका था। मैंने एक-एक करके बटन खोले और उसके गोरे, विशाल तरबूज मेरे सामने आ गए। वे सफेद ब्रा के अंदर कैद थे, लेकिन उनकी मटर जैसी चोटियाँ ब्रा के कपड़े को भेदकर बाहर झांक रही थीं। मैंने अपनी उंगलियों से उन मटरों को सहलाना शुरू किया, जिससे प्रिया के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली।

उसकी कराह ने मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुँचा दिया। मैंने उसे ऑफिस की मेज पर ही बिठा दिया और उसकी स्कर्ट को ऊपर सरका दिया। उसकी रेशमी जांघें चाँदनी की तरह चमक रही थीं। जब मेरा हाथ उसकी दोनों जांघों के बीच पहुँचा, तो मुझे उसकी गहरी और नम खाई का अहसास हुआ। उसकी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, पेंटी पूरी तरह से भीग गई थी। मैंने पेंटी को किनारे किया और अपनी उंगली से उसकी खाई में उंगली करना शुरू किया। प्रिया ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया और जोर-जोर से सांसें लेने लगी। वह बुदबुदा रही थी, ‘ओह समीर… और… और गहराई से।’ उसकी खाई से निकलने वाला रस मेरी उंगलियों को और भी चिकना बना रहा था।

अब सब्र का बांध टूट चुका था। मैंने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना कड़ा और गरम खीरा बाहर निकाला। वह पूरी तरह से तनाव में था और अपनी मंजिल पाने के लिए बेताब था। प्रिया ने जब मेरे खीरे को देखा, तो उसकी आँखें फैल गईं, उसने अपना हाथ बढ़ाकर उसे धीरे से सहलाया। उसका स्पर्श इतना सुखद था कि मुझे लगा मेरा रस अभी निकल जाएगा। उसने मेरे खीरे को अपने नाजुक हाथों में लेकर सहलाना शुरू किया और फिर उसे अपने मुंह में ले लिया। खीरा मुंह में लेते ही उसने उसे चूसना शुरू किया, उसकी जीभ की हरकतों ने मुझे स्वर्ग का अहसास कराया। मैं उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फंसाकर उसे और गहराई तक ले जाने लगा।

काफी देर तक खीरा चूसने के बाद, मैंने उसे मेज पर लेटने के लिए कहा। उसने अपने पैर फैला दिए और अपनी खाई को पूरी तरह से मेरे सामने खोल दिया। मैंने अपने खीरे को उसकी रसीली खाई के मुहाने पर रखा। वहां के बाल एकदम मुलायम थे और रस से लथपथ थे। मैंने धीरे से धकेला और मेरा खीरा उसकी तंग खाई में आधा समा गया। प्रिया ने एक तीखी आह भरी और उसकी आँखों से खुशी के आंसू झलक आए। ‘बहुत तंग है प्रिया…’ मैंने फुसफुसाते हुए कहा। मैंने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा खीरा उसकी खाई की गहराई तक धंस गया। वह जोर से चिल्लाई, लेकिन उसकी आवाज ऑफिस की दीवारों के बीच ही दबकर रह गई।

हमने सामने से खोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ मेरे तरबूज जैसे भारी हाथ उसके शरीर को जकड़ लेते। ऑफिस की मेज हर धक्के के साथ चरमरा रही थी, लेकिन हमें किसी बात की परवाह नहीं थी। खुदाई की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी। मैं अपने खीरे को पूरा बाहर निकालता और फिर पूरी ताकत से उसकी खाई की गहराई में उतार देता। प्रिया के पैरों ने मेरी कमर को कस लिया था और वह अपने नाखूनों से मेरी पीठ पर निशान बना रही थी। उसकी कराहें अब सिसकियों में बदल गई थीं। ‘हाँ समीर… और जोर से… मुझे पूरी तरह से खोद दो…’ वह चिल्ला रही थी। उसकी खाई का मांस मेरे खीरे को चारों तरफ से जकड़ रहा था, जैसे वह उसे कभी छोड़ना न चाहती हो।

कुछ देर बाद मैंने उसे मेज पर हाथ टिकाकर झुकने को कहा। अब मैं उसे पिछवाड़े से खोदने लगा। यह पोजीशन और भी ज्यादा उत्तेजक थी क्योंकि यहाँ से मैं उसके हिलते हुए पिछवाड़े और झूलते हुए तरबूजों को एक साथ देख पा रहा था। मैंने उसके एक तरबूज को कसकर पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके पिछवाड़े पर थपकी दी। हर धक्के के साथ मेरा खीरा उसकी खाई की दीवारों से टकरा रहा था, जिससे एक गीली सी आवाज गूंज रही थी। प्रिया का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था और वह बेतहाशा अपनी कमर को पीछे की ओर धकेल रही थी ताकि मेरा खीरा और गहराई तक पहुँच सके। खुदाई अब अपने चरम पर पहुँच रही थी।

मेरा शरीर अब जवाब देने लगा था, मुझे महसूस हुआ कि मेरा रस अब छूटने ही वाला है। प्रिया भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी, उसकी खाई की दीवारें मेरे खीरे को कसकर जकड़ रही थीं और वह कांप रही थी। ‘समीर… मैं… मेरा रस निकल रहा है…’ वह चिल्लाई। मैंने भी अंतिम कुछ जोरदार धक्के मारे और अपना सारा गरम रस उसकी गहराई में छोड़ दिया। उसी समय प्रिया का भी रस छूटा और वह निढाल होकर मेज पर ही गिर पड़ी। हम दोनों देर तक एक-दूसरे से चिपके रहे, हमारी सांसें एक-दूसरे की धड़कनों से मुकाबला कर रही थीं। ऑफिस के सन्नाटे में अब सिर्फ हमारी भारी सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।

खुदाई खत्म होने के बाद कमरे में एक अजीब सी शांति छा गई थी। प्रिया के बाल बिखरे हुए थे, उसकी शर्ट खुली थी और उसका चेहरा संतुष्टि की चमक से दमक रहा था। मैंने धीरे से उसे उठाया और उसके माथे को चूमा। वह मेरी बाहों में सिमट गई। उसके शरीर की गर्माहट और पसीने की खुशबू मुझे बहुत सुकून दे रही थी। हमने धीरे-धीरे अपने कपड़े ठीक किए। प्रिया ने अपनी शर्ट के बटन बंद किए और अपनी स्कर्ट को झाड़ा। उसकी चाल में अब एक अलग ही लचक थी, जैसे वह किसी भारी बोझ से मुक्त हो गई हो। वह मेरी ओर देखकर धीरे से मुस्कुराई, वह मुस्कान हमारे बीच के एक नए, गहरे और गुप्त रिश्ते की शुरुआत थी।

हमने बाकी बचा काम जल्दी-जल्दी खत्म किया, लेकिन अब हमारे बीच कोई तनाव नहीं था। हम जानते थे कि इस ऑफिस की दीवारों ने आज एक ऐसी कहानी देखी है जिसे हम कभी भूल नहीं पाएंगे। लिफ्ट में नीचे जाते समय, उसने धीरे से मेरा हाथ थामा और मेरे कान में फुसफुसाया, ‘कल फिर से लेट नाइट काम करना है न?’ मैं बस मुस्कुरा दिया। बाहर ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन हमारे अंदर की आग अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। वह रात हमारे जीवन की सबसे यादगार रातों में से एक बन गई थी, जहाँ हमने न केवल काम खत्म किया था, बल्कि एक-दूसरे की आत्माओं की गहराई तक खुदाई की थी।

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