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कविता मामी की चु@@ई

कविता मामी की चु@@ई—>गर्मियों की उन तपती दोपहरियों में जब सूरज की तपिश से सारा शहर झुलस रहा था, मैं अपने मामा के घर छुट्टियां बिताने पहुँचा था। मामा अपने काम के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर रहते थे और घर पर सिर्फ कविता मामी अकेली होती थीं। मामी की उम्र करीब पैंतीस साल रही होगी, लेकिन उनका शरीर किसी कसी हुई जवान लड़की की तरह ही मोहक और आकर्षक था। उनकी रेशमी साड़ी के भीतर से उभरते हुए उनके भारी-भरकम और रसीले तरबूज किसी का भी मन डोलने के लिए काफी थे। जब भी वो चलतीं, उनके तरबूजों की हल्की थरथराहट मेरे दिल की धड़कनें बढ़ा देती थी। वह अक्सर घर में पतली सूती साड़ियाँ पहनती थीं, जिनसे उनकी कमर का घेरा और गोरा बदन साफ झलकता था।

मामी का स्वभाव बहुत ही शांत और ममता भरा था, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी प्यास और अकेलापन अक्सर तैरता दिखाई देता था। दोपहर के समय जब घर के काम खत्म हो जाते, तो हम दोनों अक्सर ड्राइंग रूम में बैठकर बातें करते थे। एक दिन रसोई में काम करते समय उनकी साड़ी का पल्लू खिसक गया और मेरे सामने उनके गोरे और पुष्ट तरबूजों का आधा हिस्सा और उन पर मौजूद नन्हे मटर के दाने साफ झलक उठे। मेरा मन अंदर ही अंदर मचल उठा, और उस दिन के बाद से मेरा नजरिया उनके प्रति बदलने लगा। उनके शरीर की सुगंध, जो चमेली और पसीने का एक मदहोश कर देने वाला मिश्रण थी, मुझे उनकी ओर खींचने लगी थी।

उस शाम बाहर तेज बारिश होने लगी थी और ठंडी हवाओं ने घर के भीतर की गर्मी को एक अजीब सी मादकता में बदल दिया था। मामा घर पर नहीं थे और बिजली भी गुल हो गई थी। हम दोनों सोफे पर पास-पास बैठे थे। तभी बातों-बातों में मामी ने अपना हाथ मेरे घुटने पर रखा और धीरे से कहा, ‘आर्यन, तुम अब बड़े हो गए हो, क्या तुम्हें कभी किसी की कमी महसूस नहीं होती?’ उनकी आवाज में एक थरथराहट थी जो सीधे मेरे सीने में उतर गई। मैंने उनका हाथ थाम लिया और उनके करीब सरक गया। अंधेरे में उनके चेहरे की चमक और उनके तरबूजों की उठती-गिरती हरकतें मुझे पागल कर रही थीं।

मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी पतली कमर पर रखा और उन्हें अपनी ओर खींच लिया। मामी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी। मैंने उनके होंठों के रस का पान करना शुरू किया, और फिर धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उनके भारी तरबूजों के बीच अपनी उंगलियां फँसा दीं। उन्होंने अपनी कमर उचका दी और मेरे बालों में अपनी उंगलियां डाल दीं। ‘आर्यन, ये क्या कर रहे हो?’ उन्होंने लड़खड़ाती आवाज में पूछा, लेकिन उनके हाथों ने मुझे और भी जोर से अपनी ओर भींच लिया। मैंने उनकी साड़ी के ब्लाउज के हुक धीरे-धीरे खोल दिए और उनके गुलाबी मटर को अपने मुंह में भर लिया।

मामी की सिसकारियां अब पूरे कमरे में गूंजने लगी थीं। मैंने उन्हें उठाकर बिस्तर पर लिटाया और उनके सारे कपड़े धीरे-धीरे उतार दिए। उनके गोरे बदन पर काले बाल एक अलग ही उत्तेजना पैदा कर रहे थे। उनकी जांघों के बीच की गीली और गहरी खाई अब पूरी तरह से मेरे सामने थी, जिससे एक मदहोश कर देने वाली गंध आ रही थी। मैंने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, तो वो पूरी तरह से पानी-पानी हो गईं। उनकी खाई से निकलता हुआ चिपचिपा तरल मेरी उंगलियों को और भी चिकना बना रहा था। वो बार-बार अपना पिछवाड़ा हिला रही थीं और मुझसे और भी गहरे उतरने की मांग कर रही थीं।

अब मेरा सब्र का बांध टूट चुका था। मैंने अपना सख्त और लंबा खीरा बाहर निकाला, जिसे देखकर मामी की आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने धीरे से मेरे खीरे को छुआ और फिर उसे अपने मुंह में ले लिया। ‘आर्यन, तुम्हारा खीरा तो बहुत बड़ा और जानदार है,’ उन्होंने बुदबुदाते हुए खीरा चूसना शुरू किया। उनके मुंह की गर्मी और जीभ की हलचल ने मुझे स्वर्ग का अहसास करा दिया। कुछ देर बाद मैंने उन्हें सीधा लिटाया और सामने से खोदना शुरू करने के लिए तैयार हो गया। जैसे ही मेरा खीरा उनकी तंग खाई के मुहाने पर लगा, उन्होंने एक लंबी आह भरी और मुझे जोर से पकड़ लिया।

मैंने एक गहरे धक्के के साथ अपने खीरे को उनकी रेशमी और तंग खाई के भीतर उतार दिया। मामी के मुंह से एक चीख निकल गई, ‘उफ़्फ़ आर्यन… मर गई… बहुत बड़ा है ये… धीरे से खोदो।’ मैंने अपनी गति धीमी रखी और उनके होंठों को चूसते हुए उन्हें दिलासा दिया। धीरे-धीरे वो इस आनंद में डूबने लगीं और खुद भी नीचे से धक्के मारने लगीं। कमरे में मांस के टकराने की ‘चप-चप’ की आवाजें गूँजने लगी थीं। मैंने उनकी टांगों को अपने कंधों पर रखा और पूरी ताकत से खुदाई जारी रखी। उनका पूरा बदन पसीने से तर-बतर था और उनके तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे।

मामी अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं। वो बार-बार कह रही थीं, ‘और तेज आर्यन, और जोर से खोदो… अपनी मामी को आज पूरी तरह से तृप्त कर दो।’ मैंने उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। यह पोजीशन उन्हें और भी ज्यादा मजा दे रही थी। मेरा खीरा उनकी खाई की गहराई को हर बार छू रहा था। करीब बीस मिनट तक इस भीषण खुदाई के बाद, मुझे लगा कि मेरा रस निकलने वाला है। मामी भी अपनी चरम सीमा पर थीं। उन्होंने जोर से मेरा नाम पुकारा और उनके शरीर में एक जोरदार कंपन हुआ। उसी पल, मैंने अपना सारा गर्म रस उनकी खाई की गहराई में छोड़ दिया।

खुदाई के बाद हम दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे की बाहों में गिर पड़े। मामी का चेहरा शर्म और संतुष्टि से लाल था। उन्होंने मेरे माथे को चूमा और कहा, ‘आज तुमने मुझे वो सुख दिया है जो शायद मुझे पहले कभी नहीं मिला।’ हम दोनों काफी देर तक वैसे ही लेटे रहे, उस शांति और सुकून को महसूस करते हुए। उनके जिस्म की नरमी और मेरे भीतर की तृप्ति ने उस रात को यादगार बना दिया था। हमारे बीच का वो रिश्ता अब सिर्फ नाम का नहीं रह गया था, बल्कि उसमें एक गहरी जिस्मानी और रूहानी डोर जुड़ चुकी थी।

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