कॉलेज वाली क्रश की रेशमी चु@@ई —> दस साल बीत चुके थे, लेकिन मीरा की उन नशीली आँखों का जादू आज भी रोहन के दिल पर वैसे ही कायम था जैसे कॉलेज के दिनों में हुआ करता था। आज जब वह उसके सामने सोफे पर बैठी थी, तो पुरानी यादें किसी कोहरे की तरह उसके कमरे में तैरने लगी थीं। उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार कंधे से फिसल रहा था, जिसे वह बड़ी नज़ाकत से संभाल रही थी।
मीरा की हल्की मुस्कुराहट में एक अजीब सी तड़प थी, जो रोहन की धड़कनों को बेकाबू कर रही थी। बचपन की वह दोस्ती और जवानी की वह अधूरी चाहत आज फिर से परवान चढ़ने को बेताब थी। कमरे में चारों तरफ सन्नाटा था, बस उन दोनों की सांसों की हल्की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। रोहन का मन किया कि वह आगे बढ़कर उसका हाथ थाम ले और उसे अपनी बाहों में भर ले।
धीरे-धीरे बातों का सिलसिला बढ़ता गया और यादों की गलियों से गुजरते हुए वे एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए। रोहन ने हिम्मत जुटाई और मीरा के मखमली हाथ पर अपनी उंगलियां रख दीं। मीरा के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई, उसने अपनी पलकें झुका लीं लेकिन हाथ पीछे नहीं खींचा। उसके चेहरे पर फैली लाली रोहन को दावत दे रही थी कि वह अपनी हदें पार कर दे।
रोहन ने अपना हाथ मीरा के कंधे पर रखा और धीरे से उसे अपनी ओर खींच लिया। मीरा का सिर अब रोहन के सीने पर था, जहाँ उसे रोहन के दिल की तेज़ धड़कनें साफ़ सुनाई दे रही थीं। उसने गहरी सांस ली और रोहन की शर्ट को कसकर मुट्ठी में भींच लिया। हवा में एक कामुक सुगंध फैल गई थी, जो उनकी उत्तेजना को और अधिक हवा दे रही थी।
मीरा की सांसें अब गर्म होने लगी थीं, जो रोहन की गर्दन को सहला रही थीं। रोहन ने अपनी उंगलियां मीरा के बालों में डालीं और उसके चेहरे को ऊपर उठाया। उनकी निगाहें मिलीं और उस एक पल में सारी दूरियां मिट गईं। रोहन ने झुककर मीरा के होठों को चूम लिया, जो शहद की तरह मीठे और नर्म थे। यह चुंबन उनकी दबी हुई इच्छाओं का विस्फोट था।
जैसे-जैसे चुंबन गहरा होता गया, रोहन के हाथ मीरा के पीठ पर रेंगने लगे। साड़ी के नीचे उसकी त्वचा मखमली और गर्म महसूस हो रही थी। मीरा ने भी रोहन की गर्दन के पीछे अपने हाथ डाल दिए और उसे अपनी ओर और ज़ोर से खींचा। उनके जिस्मों के बीच की गर्मी अब असहनीय होती जा रही थी। कमरे की रोशनी कम थी, जिससे माहौल और भी मादक हो गया था।
रोहन ने धीरे से मीरा के ब्लाउज की हुकें खोलनी शुरू कीं। उसकी उंगलियां कांप रही थीं, लेकिन इरादे बुलंद थे। जैसे ही ब्लाउज ढीला हुआ, मीरा के उभरे हुए तरबूज उसकी नज़र के सामने आ गए। वे गोल, सफ़ेद और बेहद आकर्षक थे, जिन पर छोटे-छोटे मटर की तरह दाने उभरे हुए थे। रोहन ने उन तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें हल्के से दबाया।
मीरा के मुँह से एक दबी हुई आह निकली और उसने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुका ली। रोहन के होंठ अब उसके तरबूजों पर थे, और वह उन मटर को अपनी जुबान से सहला रहा था। मीरा का पूरा शरीर थरथरा रहा था। उसने रोहन के बालों को अपनी उंगलियों में फंसा लिया और उसे अपने करीब खींचती रही। उनकी सांसें अब एक लय में चल रही थीं।
रोहन ने धीरे से मीरा की साड़ी के पल्लू को पूरी तरह हटा दिया और अब वह उसके सामने अधनंगी अवस्था में थी। उसके पेट की गोलाई और कमर का उतार-चढ़ाव किसी अप्सरा से कम नहीं लग रहा था। रोहन ने अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया, जहाँ उसकी रेशमी साड़ी के नीचे वह गहरी खाई छिपी हुई थी। मीरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उत्तेजना में कांपने लगी।
जब रोहन का हाथ मीरा की जांघों के बीच पहुँचा, तो उसे वहां गीलापन महसूस हुआ। उसकी खाई पूरी तरह से तैयार थी, और वहां उगे हुए कोमल बाल रोहन की उंगलियों को सहला रहे थे। रोहन ने अपनी उंगलियां उस खाई के अंदर डालीं, जिससे मीरा की कमर ऊपर की ओर उठ गई। वह धीरे-धीरे अपनी उंगलियों से उस गहराई को नापने लगा, जिससे मीरा बेहाल हो गई।
मीरा ने अब रोहन की पैंट की बेल्ट खोली और उसके खीरा को आज़ाद कर दिया। वह खीरा अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ बाहर आ गया, जो उसकी उत्तेजना का साफ़ सबूत था। मीरा ने उसे अपने हाथों में लिया और उसकी गरमाहट को महसूस किया। उसने अपनी आँखें ऊपर उठाईं और रोहन की ओर एक शरारती मुस्कान के साथ देखा, जिससे रोहन का संयम टूट गया।
मीरा ने झुककर उस गरम खीरा चूसना शुरू कर दिया। उसकी जुबान उस पर ऐसे फिर रही थी जैसे कोई प्यासा पानी पी रहा हो। रोहन को लगा जैसे उसके शरीर का सारा खून उस एक जगह इकट्ठा हो गया है। उसने मीरा के सिर को पकड़ा और उसे गहराई तक महसूस करने लगा। खीरा चूसना का वह आनंद रोहन को सातवें आसमान पर ले जा रहा था।
जल्द ही रोहन ने मीरा को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके पैरों को फैला दिया। वह अब सामने से खोदना की स्थिति में था। उसने अपने खीरा के सिरे को मीरा की गीली खाई के द्वार पर रखा। मीरा ने एक गहरी सांस ली और अपनी टांगें रोहन की कमर के चारों ओर लपेट लीं। रोहन ने एक जोरदार धक्का दिया और खीरा पूरी तरह से खाई के अंदर समा गया।
मीरा के मुँह से एक तीखी चीख निकली, जो दर्द की नहीं बल्कि चरम सुख की थी। रोहन ने उसे बाहों में कस लिया और धीरे-धीरे अपनी कमर चलाने लगा। हर धक्के के साथ मीरा के तरबूज हवा में उछल रहे थे और उनके टकराने की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। सामने से खोदना का यह दृश्य अत्यंत कामुक और उत्तेजक था, जिसमें दोनों पूरी तरह डूब चुके थे।
पसीना उनके शरीरों पर चमक रहा था और कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की ‘थप-थप’ की आवाज़ थी। रोहन अब अपनी रफ़्तार बढ़ा चुका था। वह पूरी ताकत के साथ मीरा की खाई को खोद रहा था। मीरा भी अपने पिछवाड़ा को ऊपर उठाकर हर धक्के का पूरा साथ दे रही थी। उसकी सिसकारियां अब तेज़ हो गई थीं और वह रोहन का नाम पुकार रही थी।
रोहन ने मीरा को पलटा और अब वह पिछवाड़े से खोदना की स्थिति में आ गया। मीरा अपने घुटनों के बल थी और उसका पिछवाड़ा हवा में उभरा हुआ था। रोहन ने पीछे से अपना खीरा फिर से उसकी गहरी खाई में उतार दिया। इस मुद्रा में वह मीरा के दोनों तरबूजों को पीछे से पकड़कर मरोड़ रहा था। मीरा उत्तेजना के चरम पर पहुँच चुकी थी और उसका पूरा जिस्म कांप रहा था।
खुदाई का यह दौर अब अपने अंतिम चरण में था। रोहन को महसूस हुआ कि मीरा का शरीर अब अकड़ने लगा है। उसकी खाई के अंदर की मांसपेशियां रोहन के खीरा को कसकर जकड़ रही थीं। मीरा ने एक लंबी आह भरी और उसका रस निकलना शुरू हो गया। उसी पल रोहन ने भी अपनी सारी ताकत झोंक दी और उसका रस भी मीरा की गहराई में जा गिरा।
दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। उनकी धड़कनें अभी भी तेज़ थीं और कमरे में छाई शांति उनके बीच हुए उस मिलन की गवाह थी। रोहन ने मीरा के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में समेट लिया। यह सिर्फ जिस्मानी खुदाई नहीं थी, बल्कि दो रूहों का मिलन था जो बरसों से एक-दूसरे की तलाश में भटक रहे थे।
कुछ देर बाद मीरा ने अपनी आँखें खोलीं और रोहन की ओर प्यार से देखा। उसके चेहरे पर एक संतोष था जो पहले कभी नहीं दिखा था। उसने रोहन के कान में फुसफुसाकर कहा, “तुमने आज मुझे पूरा कर दिया।” रोहन ने कुछ नहीं कहा, बस उसे और कसकर थाम लिया। वे जानते थे कि यह रात उनकी ज़िंदगी की सबसे हसीन और यादगार रात बन चुकी थी।
चादरें बिखरी हुई थीं और कमरे में उनकी महक बसी हुई थी। धीरे-धीरे वे नींद की आगोश में समाने लगे, लेकिन उनके हाथ अभी भी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। कॉलेज की वह पुरानी मोहब्बत आज एक नए मुकाम पर पहुँच गई थी, जहाँ कोई पर्दा नहीं था, सिर्फ और सिर्फ बेपनाह प्यार और जिस्मानी जुड़ाव था।
अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण कमरे में दाखिल हुई, तो रोहन ने मीरा को सोते हुए देखा। उसके बिखरे हुए बाल और अधखुले होठों को देखकर उसे फिर से उस पर प्यार आने लगा। उसने तय कर लिया था कि अब वह उसे कभी खुद से दूर नहीं जाने देगा। यह खुदाई उनके रिश्ते की एक नई और मज़बूत नींव बन चुकी थी।