जिम की ठंडी हवा और मशीनों की हल्की गड़गड़ाहट के बीच रोहित अपनी पुरानी यादों में खोया हुआ था। रात के ग्यारह बज चुके थे और जिम लगभग खाली हो चुका था, तभी दरवाज़ा खुला और मीनाक्षी अंदर आई। मीनाक्षी, जो कॉलेज के दिनों में रोहित का पहला क्रश थी, आज सालों बाद उससे जिम में ट्रेनिंग लेने आई थी। उसने काले रंग की बेहद कसी हुई लेगिंग और एक छोटा सा स्पोर्ट्स ब्रा पहना हुआ था, जिसमें से उसके शरीर का हर उतार-चढ़ाव साफ झलक रहा था। मीनाक्षी के आते ही जिम का तापमान जैसे बढ़ गया और रोहित की धड़कनें तेज़ हो गईं।
मीनाक्षी का शरीर अब पहले से कहीं ज्यादा सुडौल और आकर्षक हो गया था। उसके सीने पर लदे दो बड़े और रसीले तरबूज उसकी कसी हुई ब्रा को फाड़ने की कोशिश कर रहे थे, और हर सांस के साथ वे ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसके तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे मटर की आकृति साफ़ उभर कर आ रही थी, जो शायद जिम की ठंडक की वजह से सख्त हो गए थे। जब वह ट्रेडमिल पर चलने लगी, तो उसका भारी पिछवाड़ा बड़े ही लयबद्ध तरीके से हिल रहा था, जिसे देखकर रोहित के मन में गहरी इच्छाएं जागने लगीं और उसका अपना खीरा धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने लगा।
रोहित उसके पास गया और पुरानी बातों का सिलसिला शुरू हुआ। मीनाक्षी ने बताया कि उसकी शादीशुदा जिंदगी में वो उत्साह नहीं रहा जो वह चाहती थी। बातों ही बातों में उनके बीच का भावनात्मक खिंचाव बढ़ने लगा। रोहित ने उसे स्ट्रेचिंग कराने का फैसला किया और उसे मैट पर लिटा दिया। जैसे ही रोहित ने उसके पैरों को पकड़ा, उसे मीनाक्षी की रेशमी त्वचा का अहसास हुआ। मीनाक्षी की आंखों में एक अजीब सी चमक और प्यास थी, जो रोहित को अपनी ओर खींच रही थी। दोनों की सांसें एक-दूसरे के चेहरे से टकरा रही थीं, जिससे माहौल और भी कामुक हो गया था।
रोहित ने धीरे से अपना हाथ उसकी कमर पर रखा और उसे करीब खींच लिया। मीनाक्षी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी। रोहित का हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा और उसने मीनाक्षी के एक तरबूज को हल्के से सहलाया। मीनाक्षी के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली और उसने रोहित की गर्दन को अपनी बाहों में भर लिया। अब उनके बीच की झिझक पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। रोहित ने झुककर उसके होंठों का रस पीना शुरू किया, जैसे कोई प्यासा बरसों बाद पानी की एक बूंद पा गया हो।
मीनाक्षी की उंगलियां रोहित के बालों में फंस गईं और वह उसे और भी जोर से अपनी ओर खींचने लगी। रोहित ने धीरे से उसकी ब्रा के हुक को खोला, जिससे उसके दोनों विशाल तरबूज आज़ाद होकर बाहर आ गिरे। वे इतने बड़े और गोरे थे कि रोहित की आंखें वहीं जम गईं। उसने बारी-बारी से दोनों तरबूजों के ऊपर लगे मटर को अपने मुंह में लिया और उन्हें चूसने लगा। मीनाक्षी अपनी कमर को ऊपर की ओर उठा रही थी और उसकी कराहें अब पूरे जिम में गूंजने लगी थीं। वह बार-बार रोहित का नाम लेकर उसे पुकार रही थी।
अब रोहित ने धीरे से मीनाक्षी की कसी हुई लेगिंग को नीचे की ओर सरकाया। जैसे ही लेगिंग नीचे उतरी, उसके सामने एक गहरी और घनी खाई थी, जो काले रेशमी बालों से ढकी हुई थी। उस खाई से एक हल्की सी खुशबू और नमी आ रही थी। रोहित ने अपनी उंगलियों से उस खाई को सहलाया, तो मीनाक्षी का शरीर बिजली की तरह कांप उठा। उसने अपनी टांगें फैला दीं और रोहित को निमंत्रण दिया। रोहित ने अपनी उंगली से खाई को खोदना शुरू किया, जिससे मीनाक्षी मदहोश होने लगी और उसका रस धीरे-धीरे बहने लगा।
मीनाक्षी की उत्तेजना अब चरम पर थी। उसने रोहित की पैंट को खोला और उसके अंदर छिपे हुए विशाल खीरे को बाहर निकाला। खीरे की मोटाई और लंबाई देखकर मीनाक्षी की आंखें फैल गईं। उसने झट से उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़े चाव से चूसने लगी। वह खीरे के अगले हिस्से को अपनी जीभ से सहला रही थी, जिससे रोहित को जन्नत का अहसास हो रहा था। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद, मीनाक्षी ने रोहित को अपने ऊपर आने का इशारा किया और उसे अपनी खाई की गहराई नापने के लिए उकसाया।
रोहित ने मीनाक्षी को सामने से खोदना (missionary style) शुरू किया। जैसे ही उसने अपने खीरे को उसकी तंग खाई के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया, खीरा पूरी तरह से खाई के अंदर समा गया। मीनाक्षी के मुंह से एक चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम सुख की थी। दोनों के शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे और पसीने से भीग चुके थे। रोहित हर धक्के के साथ खाई की गहराइयों को छू रहा था। मीनाक्षी के तरबूज पागलों की तरह उछल रहे थे और वह अपनी टांगें रोहित की कमर के चारों ओर कसकर लपेट चुकी थी।
मजा और भी बढ़ाने के लिए रोहित ने मीनाक्षी को पलटा और उसे पिछवाड़े से खोदने (doggy style) की स्थिति में ले आया। मीनाक्षी ने अपने हाथों को मैट पर टिकाया और अपने भारी पिछवाड़े को रोहित की ओर कर दिया। रोहित ने पीछे से अपने खीरे को फिर से उसकी खाई में उतारा और तेज रफ्तार से खुदाई शुरू की। हर धक्के की आवाज जिम की दीवारों से टकरा रही थी। मीनाक्षी के पिछवाड़े के दोनों हिस्से रोहित के झटकों से लाल हो चुके थे। वह पागलों की तरह अपना सिर हिला रही थी और बार-बार कह रही थी, “और तेज रोहित, मुझे आज पूरी तरह खोद डालो।”
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद, दोनों ही अपने चरम पर पहुंच चुके थे। रोहित की रफ्तार और भी तेज हो गई और मीनाक्षी का पूरा शरीर झटके लेने लगा। अचानक मीनाक्षी की खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा और वह ढीली पड़ गई। ठीक उसी पल, रोहित के खीरे ने भी अपना सारा रस मीनाक्षी की खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और काफी देर तक हाफते रहे। उनके शरीर पसीने से लथपथ थे और दिलों की धड़कनें अभी भी आसमान छू रही थीं।
खुदाई खत्म होने के बाद मीनाक्षी ने रोहित को कसकर गले लगा लिया। उसकी आंखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी। उसने रोहित के कान में धीरे से कहा, “आज तुमने मुझे वो सुख दिया है जो सालों से मुझे नहीं मिला था।” रोहित ने उसके माथे को चूमा और दोनों ने धीरे से अपने कपड़े पहने। जिम की खामोशी अब एक सुखद अहसास में बदल चुकी थी। वे दोनों जानते थे कि यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है और हर रात इसी तरह की गहरी खुदाई और तरबूजों का रस पीने का दौर जारी रहेगा। मीनाक्षी जाते-जाते मुड़कर मुस्कुराई, जिससे रोहित का खीरा फिर से करवट लेने लगा।