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कोच की चु@@ई

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रीना ने जब कई सालों बाद विशाल को देखा, तो उसकी यादों के पन्ने एक साथ पलट गए। कॉलेज के दिनों में विशाल एक सीधा-सादा लड़का था, जो पढ़ाई में अव्वल आता था। अब वह एक सधे हुए शरीर का, आत्मविश्वास से लबरेज जिम ट्रेनर था, जिसकी हर मांसपेशी मेहनत की कहानी कहती थी। रीना, जो अपने काम के तनाव और खराब जीवनशैली के कारण थोड़ी भारी हो गई थी, जिम में खुद को फिट करने आई थी। विशाल को सामने देखकर उसे अजीब सी खुशी हुई, पर साथ ही थोड़ी शर्मिंदगी भी महसूस हुई। विशाल ने भी उसे तुरंत पहचान लिया, उसकी आंखों में हल्की सी चमक आई और उसने मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया, “अरे रीना! तुम? इतने सालों बाद!”

विशाल की नजरें रीना पर ठहरीं। उसने एक पल के लिए रीना के शरीर को ऊपर से नीचे तक देखा, एक पेशेवर की तरह, जैसे वह उसकी शारीरिक बनावट का आकलन कर रहा हो। रीना के ढीले-ढाले ट्रैकसूट के नीचे भी उसके शरीर के वक्र साफ दिख रहे थे। उसकी कमर पर हल्की सी चर्बी और उसके तरबूज जो पहले से काफी भरे-भरे लग रहे थे, विशाल की निगाहों से ओझल नहीं हुए। रीना को उसकी इस पेशेवर नज़र से भी एक अजीब सी सिहरन महसूस हुई। वह थोड़ी असहज हो गई और अपनी चाल में एक हल्की सी सिकुड़न ले आई, जैसे खुद को उसकी जांचती हुई नज़रों से छुपाना चाहती हो। विशाल ने उसकी हल्की सी घबराहट को भांप लिया और तुरंत अपने चेहरे पर एक सख्त, पेशेवर भाव ले आया।

पहले कुछ हफ्तों तक उनकी बातचीत केवल वर्कआउट, डाइट और कॉलेज के पुराने किस्सों तक सीमित रही। हर दिन, वर्कआउट के दौरान, विशाल रीना को सही पॉस्चर सिखाता, उसके शरीर पर हल्के से हाथ रखकर उसकी मुद्रा ठीक करता। उसके हाथों का हर स्पर्श बिजली की हल्की सी लहर रीना के पूरे शरीर में दौड़ा देता। रीना को याद आता, कैसे कॉलेज में विशाल इतना संकोची था, और आज उसके हाथ इतनी सहजता से उसके शरीर को छू रहे थे। धीरे-धीरे उनकी हँसी-मज़ाक गहरी होती गई, और रीना को विशाल के साथ समय बिताना सिर्फ वर्कआउट का हिस्सा नहीं, बल्कि दिन का सबसे सुखद पल लगने लगा था।

जैसे-जैसे दिन बीते, रीना को महसूस होने लगा कि विशाल की नज़रें अब सिर्फ पेशेवर नहीं रह गई थीं। जब वह ट्रेडमिल पर दौड़ती तो उसकी नज़रें रीना के शरीर पर, खासकर उसके तरबूज पर ठहर जातीं, जो हर कदम के साथ हल्के से हिलते थे। विशाल जब उसे किसी मशीन पर सहारा देता तो उसका हाथ रीना की कमर पर जरूरत से ज्यादा देर तक टिका रहता। एक दिन स्क्वॉट करते हुए, विशाल ने रीना की पीठ को पकड़ा ताकि वह संतुलन न खोए, और उसकी उंगलियां रीना के निचले हिस्से के उभार को धीरे से सहला गईं। रीना के शरीर में एक तेज़ कंपकंपी दौड़ी, उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा और उसने महसूस किया कि उसका निचला हिस्सा गीला हो रहा था।

रीना के मन में अब एक अजीब सा द्वंद्व चल रहा था। एक तरफ उसके मन में समाज की मर्यादाएं और उनके पेशेवर रिश्ते की सीमाएं थीं, तो दूसरी तरफ विशाल का हर स्पर्श उसके शरीर में आग लगा रहा था। वह वर्कआउट के बाद घंटों तक विशाल के बारे में सोचती रहती। विशाल के मन में भी यही तूफान चल रहा था। रीना की वापसी ने उसकी नीरस जिंदगी में एक नया रंग भर दिया था। वह उसे हर तरह से आकर्षित करती थी – उसके खुले बाल, उसके तरबूज की गोलियाँ जो पसीने से भीगने पर ट्रैकसूट से स्पष्ट दिखती थीं, और उसकी आँखें जिनमें अब उसके लिए एक अनकही चाहत साफ झलकती थी।

एक शाम, जिम लगभग खाली हो चुका था। रीना अपने अंतिम स्ट्रेच कर रही थी, और विशाल उसे देख रहा था। जिम के शांत माहौल में सिर्फ उनके साँसों की आवाज़ें थीं। रीना एक खास स्ट्रेच कर रही थी जिसमें उसे अपनी कमर को मोड़ना था। विशाल उसके पास आया, और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला, “थोड़ा और खींचो, रीना।” उसकी उंगलियाँ रीना के कंधे से होती हुई उसकी गर्दन पर टिक गईं। एक क्षण के लिए, विशाल ने अपनी उंगलियों से उसकी गर्दन के पास के रेशमी बालों को छुआ। रीना की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, विशाल की उंगलियों का स्पर्श उसकी त्वचा पर एक मीठी पीड़ा दे रहा था।

विशाल का स्पर्श अब और गहरा होता जा रहा था। अगले दिन, जब वे एब्स का वर्कआउट कर रहे थे, रीना फर्श पर लेटी थी और विशाल उसके सामने झुका हुआ था। उसके चेहरे और रीना के चेहरे के बीच बस कुछ इंच का फासला था। रीना ने उसकी गहरी साँसों को अपने चेहरे पर महसूस किया। विशाल ने अपने हाथ रीना की कमर पर रखे, उसे ऊपर उठाने में मदद करते हुए। उसके हाथों ने धीरे से रीना के निचली कमर को सहलाया, फिर उसकी उंगलियाँ हल्की सी फिसल कर उसके पिछवाड़े के उभार पर टिक गईं। रीना के पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई। वह अब अपनी भावनाओं को दबा नहीं पा रही थी, उसका शरीर विशाल के हर स्पर्श का इंतज़ार कर रहा था।

रात के खाने के बहाने वे एक-दूसरे से बाहर मिलने लगे। अब उनकी बातचीत में सिर्फ कॉलेज के किस्से नहीं, बल्कि एक-दूसरे की अधूरी ख्वाहिशें और छुपी हुई इच्छाएं भी शामिल थीं। एक ऐसी ही मुलाकात में, जब वे देर रात विशाल की कार में बैठे थे, माहौल में एक अजीब सी उत्तेजना थी। विशाल ने धीरे से रीना का हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी उंगलियों को सहलाने लगा। रीना की आँखों में एक गहरी चमक थी। विशाल ने हिम्मत करके उसका चेहरा अपनी ओर मोड़ा। उसके होंठ रीना के होंठों के करीब आए, और धीरे-धीरे उसने रीना के रसीले होंठों का शहद चूसना शुरू कर दिया। यह स्पर्श सिर्फ होंठों का नहीं था, यह दो आत्माओं का मिलन था, एक लंबे इंतज़ार का अंत था।

उनके होंठों का शहद चूसना गहरा होता गया, और रीना ने अपनी आँखें बंद करके खुद को विशाल को सौंप दिया। विशाल का एक हाथ उसकी गर्दन पर था, और दूसरा उसकी कमर से फिसलकर उसके तरबूज पर आ गया। रीना के ट्रैकसूट के कपड़े पतले थे और विशाल के गर्म हाथ का स्पर्श उसके तरबूज पर सीधे महसूस हो रहा था। उसने अपने तरबूज को हल्के से दबाया, और रीना के मुंह से एक धीमी सी आह निकली। विशाल का शहद चूसना अब और तेज़ हो गया था, उसकी जीभ रीना के मुंह में गहरे उतर गई, और रीना की जीभ ने भी उसका पूरा साथ दिया। रीना का शरीर पूरी तरह से उसकी पकड़ में था।

विशाल ने अपने हाथों को रीना के तरबूज पर और मज़बूती से दबाया। रीना की साँसें तेज़ हो चुकी थीं, और वह अपनी कमर को विशाल की ओर धकेल रही थी। विशाल ने अपने होंठों को रीना की गर्दन से नीचे सरकाया, उसकी गर्म त्वचा पर शहद चूसते हुए वह तरबूज की ओर बढ़ने लगा। रीना ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं, उसके शरीर में एक मीठी तड़प उठ रही थी। विशाल ने उसके कपड़ों के बटन खोले और उसके तरबूज को पूरी तरह से आज़ाद कर दिया। गुलाबी मटर उसके सामने आकर तन गए, जो विशाल की गर्म साँसों से और भी कठोर हो गए।

विशाल ने बिना किसी देरी के अपने होंठ रीना के गुलाबी मटर पर रख दिए और उन्हें प्यार से शहद चूसना शुरू किया। रीना के शरीर में एक तेज़ झटका लगा, उसके हाथों ने विशाल के बालों को कसकर पकड़ लिया। वह अपनी सारी सुध-बुध खो चुकी थी, उसके शरीर का हर अंग विशाल के स्पर्श के लिए तड़प रहा था। विशाल एक मटर को चूस रहा था, जबकि उसके दूसरे हाथ की उंगलियाँ दूसरे मटर को हल्के से घुमा रही थीं। रीना के मुंह से अब गहरी आहें निकल रही थीं, वह खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। उसका निचला हिस्सा पूरी तरह से गीला हो चुका था, खाई अब पूरी तरह से खुलने को बेताब थी।

विशाल ने रीना के कपड़ों को एक झटके में हटा दिया। रीना अब पूरी तरह से विशाल के सामने नग्न थी। उसका शरीर चाँदनी में चमक रहा था, हर वक्र और हर उभार विशाल को और अधिक उत्तेजित कर रहा था। विशाल ने अपनी आँखों से रीना के शरीर को स्कैन किया – उसके भरे हुए तरबूज, उसकी पतली कमर और उसके नीचे की गहरी खाई, जो अब बालों के जंगल से झाँक रही थी। रीना को थोड़ी झिझक महसूस हुई, पर विशाल की आँखों में सिर्फ प्यार और चाहत थी, कोई निर्णय नहीं। उसने रीना को धीरे से बेड पर धकेला और उसके ऊपर आ गया।

विशाल ने अपने कपड़े उतारे और उसका तंदुरुस्त खीरा अब रीना की आँखों के सामने था। रीना ने अपने जीवन में ऐसा बड़ा और रसदार खीरा पहले कभी नहीं देखा था। वह खीरा उत्तेजना से तनकर खड़ा था, जैसे वह भी रीना की खाई में जाने को बेताब हो। विशाल ने रीना के पैरों को फैलाया और उसकी रसीली खाई पर प्यार से हाथ फेरा। उसने बालों को हटाया और अपनी उंगली से उसकी खाई में हल्का सा प्रवेश किया। रीना के मुंह से एक मीठी चीख निकली, जैसे वह इस स्पर्श का ही इंतज़ार कर रही थी। विशाल ने अपनी उंगली से खाई को थोड़ा और खोदा, और रीना के शरीर में एक अजीब सी खुशी दौड़ गई।

विशाल ने रीना के होठों पर एक और गहरा शहद चूसा, और धीरे-धीरे अपने खीरे को उसकी खाई के मुहाने पर ले आया। रीना ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं, उसका पूरा शरीर अब एक तेज़ कंपन में था। उसने विशाल की कमर को कसकर पकड़ लिया और अपने पैरों को उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिया। विशाल ने एक गहरा साँस लिया और एक झटके में अपने खीरे को रीना की गहरी खाई में धकेल दिया। रीना के मुंह से एक तेज़, दर्द भरी चीख निकली, पर यह दर्द एक मीठी खुशी में बदल रहा था। खीरा पूरी तरह से खाई में समा चुका था, और दोनों के शरीर एक हो गए थे।

विशाल ने धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू किया। पहले धीमी गति से, फिर धीरे-धीरे उसने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। रीना की चीखें अब आहों और कराहों में बदल चुकी थीं। उसके तरबूज हर झटके के साथ उछल रहे थे और विशाल उन्हें अपनी हथेलियों में भरकर दबा रहा था। उनका पसीना एक-दूसरे में मिल रहा था, और कमरे में सिर्फ उनके प्यार की आवाज़ें गूँज रही थीं। रीना अपनी कमर को ऊपर उठाकर विशाल का पूरा साथ दे रही थी, जैसे वह उसके खीरे को अपनी खाई में और गहरा उतारना चाहती हो। “और तेज़, विशाल… और तेज़,” रीना ने हांफते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेताबी थी।

विशाल ने उसकी बात सुनी और अपनी खुदाई की गति और बढ़ा दी। उसके खीरे ने रीना की खाई को पूरी तरह से भर दिया था, और हर धक्का रीना को आसमान में उड़ा रहा था। रीना ने अपनी पीठ को मोड़ा, और अपने तरबूज को ऊपर उठा दिया ताकि विशाल उन्हें और आसानी से पकड़ सके। उनकी साँसें अब पूरी तरह से अनियमित हो चुकी थीं, और दोनों जानते थे कि वे रस निकलने के करीब थे। विशाल ने एक अंतिम, ज़ोरदार धक्का दिया, और रीना के मुंह से एक तेज़ चीख निकली, उसका शरीर काँप उठा। रस छूटना शुरू हो गया था, और रीना ने अपनी सारी ऊर्जा विशाल की कमर में समा दी।

विशाल के खीरे से भी रस निकलना शुरू हो गया था, और उसने खुद को रीना के ऊपर ढीला छोड़ दिया। दोनों के शरीर एक-दूसरे पर पसीने से भीगे हुए पड़े थे, पूरी तरह से थके हुए पर परम संतुष्टि की भावना से भरे हुए। रीना ने विशाल को अपनी बाहों में कसकर पकड़ रखा था, जैसे उसे कभी जाने नहीं देना चाहती हो। विशाल ने उसके माथे पर एक प्यार भरा शहद चूसा। वे एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे, उनकी आँखों में अब सिर्फ प्यार और एक अनकहा वादा था। यह सिर्फ खुदाई नहीं थी, यह उनके अधूरे प्यार की एक नई शुरुआत थी, जिम के उन शुरुआती, हिचकिचाते स्पर्शों का एक सुखद अंत था।

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