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तन्हा रातों में भाभी की प्यारी चु@@ई

तन्हा रातों में भाभी की प्यारी चु@@ई—>घर की दीवारों में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसे केवल रेनू भाभी की चूड़ियों की खनक ही तोड़ती थी। अमित जब अपने करियर की नाकामियों का बोझ लेकर घर लौटा, तो उसने भाभी की आँखों में भी वैसी ही तन्हाई देखी जो उसके अपने दिल में थी। उनके पति काम के सिलसिले में महीनों दूर रहते थे, जिससे उनकी जवानी बस चूल्हे-चौके की भेंट चढ़ रही थी।

अमित को घर आए हफ्ता बीत चुका था, और इस बीच उसने महसूस किया कि भाभी की नज़रें अक्सर उस पर टिकी रहती थीं। रात के वक्त जब वे दोनों बरामदे में बैठते, तो हवा में एक अनकही बेचैनी और उत्तेजना तैरने लगती थी। भाभी का सांवला रंग और उनकी सुडौल देह अमित के मन में हलचल पैदा कर रही थी। उनकी साड़ी का पल्लू अक्सर सरक जाया करता था।

उस शाम गर्मी बहुत ज्यादा थी, और बिजली भी गुल हो गई थी। अमित छत पर टहल रहा था जब भाभी वहाँ ठंडी हवा लेने आईं। उनके बदन से पसीने और मोगरे के तेल की मिली-जुली खुशबू आ रही थी। अंधेरे में भाभी के उभरे हुए तरबूज साफ नजर आ रहे थे, जो सांस लेने के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। अमित की धड़कनें तेज होने लगी थीं।

भाभी ने धीरे से अमित के कंधे पर हाथ रखा और उसकी परेशानी पूछी। अमित ने उनके करीब जाकर उनकी आँखों में देखा, जहाँ दर्द और प्यार का संगम था। उस छुअन ने अमित के शरीर में बिजली दौड़ा दी। उसने धीरे से भाभी के हाथ को थाम लिया। भाभी ने हाथ हटाया नहीं, बल्कि अपनी उंगलियां अमित की उंगलियों में फंसा दीं, जैसे कोई सहारा ढूँढ रही हों।

अमित ने धीरे से भाभी को अपनी बाहों में भर लिया। उनके जिस्म की गर्माहट अमित को मदहोश कर रही थी। उसने महसूस किया कि भाभी के तरबूज उसके सीने से बुरी तरह दब रहे थे। भाभी ने एक गहरी आह भरी और अपना सिर अमित के कंधे पर टिका दिया। उनके बीच की खामोशी अब शब्दों की मोहताज नहीं थी, बल्कि जिस्मों की पुकार बन चुकी थी।

कमरे में पहुँचते ही अमित ने धीरे से भाभी के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। जैसे ही कपड़ा हटा, उनकी गोरी पीठ और फिर सामने के दो रसीले तरबूज आजाद हो गए। उन तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे मटर जैसे दाने ठंड और उत्तेजना से सख्त हो चुके थे। अमित ने अपनी उंगलियों से उन मटर को सहलाया, जिससे भाभी के मुँह से एक सिसकारी निकल गई।

भाभी ने शर्माते हुए अपनी आँखें मूंद ली थीं, लेकिन उनकी साँसें बहुत तेज चल रही थीं। अमित ने नीचे झुककर उन तरबूजों को चूमना शुरू किया और अपनी जीभ से उन मटर को सहलाया। भाभी का पूरा शरीर कांपने लगा था और उन्होंने अमित के बालों को अपनी मुट्ठियों में कस लिया था। उस पल में शर्म और हया के सारे बांध धीरे-धीरे टूट रहे थे।

अमित ने धीरे से भाभी की साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। अब वे पूरी तरह निर्वस्त्र थीं। उनकी जांघों के बीच की गहरी खाई अमित को अपनी ओर खींच रही थी। उस खाई के आस-पास काले रेशमी बाल थे जो उनकी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। अमित ने अपनी उंगलियों से उस खाई को छुआ, तो पाया कि वह पहले से ही गीली और गरम हो चुकी थी।

भाभी की उत्तेजना अब चरम पर थी। उन्होंने अमित की पैंट की ज़िप खोली और उसके अंदर छिपे हुए कड़क खीरा को बाहर निकाला। खीरा अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ उनके सामने था। भाभी ने अपनी कोमल हथेलियों से उस खीरा को सहलाया और फिर धीरे से नीचे झुककर खीरा चूसना शुरू कर दिया। अमित की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और वह आनंद के सागर में डूब गया।

काफी देर तक खीरा चूसना जारी रखने के बाद, अमित ने भाभी को बिस्तर पर लेटा दिया। उसने उनके दोनों पैरों को फैलाया और उस मखमली खाई के मुहाने पर अपना खीरा टिका दिया। भाभी ने अमित की कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा। अमित ने एक झटके में उस खाई की गहराई को नाप लिया। भाभी के मुँह से एक लंबी आह निकली और उनकी आँखें ऊपर चढ़ गईं।

अमित ने अब लयबद्ध तरीके से सामने से खोदना शुरू कर दिया था। हर धक्के के साथ उनके शरीर एक-दूसरे से टकराते और पसीने की बूंदें एक-दूसरे में मिल जाती थीं। भाभी के तरबूज हवा में झूल रहे थे, जिन्हें अमित बारी-बारी से अपने मुँह में भर रहा था। यह khudayi सिर्फ हवस नहीं थी, बल्कि दो अकेले दिलों का मिलन था जो बरसों से प्यासे थे।

जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था, अमित की रफ्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में थप-थप की आवाजें गूँज रही थीं। भाभी भी पूरी तरह सहयोग दे रही थीं, अपनी कमर को ऊपर उठा-उठा कर khudayi का आनंद ले रही थीं। उनकी खाई से अब एक लसलसा सा तरल पदार्थ निकल रहा था, जो उस रास्ते को और भी चिकना और सुखद बना रहा था।

अमित ने अब भाभी को पलट दिया और उन्हें घुटनों के बल बैठने को कहा। पीछे से देखने पर उनका पिछवाड़ा किसी सुंदर पहाड़ की तरह लग रहा था। अमित ने पीछे से अपनी जगह बनाई और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। यह पोजीशन भाभी को बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रही थी। वे बेड के सिरहाने को पकड़कर जोर-जोर से सिसकारियां भर रही थीं और अमित को और तेज करने को कह रही थीं।

भाभी की आवाज अब तेज होने लगी थी, “हाँ अमित, और तेज… मुझे अपनी पूरी ताकत से खोदो।” अमित भी अब नियंत्रण खो चुका था। उसने अपनी पकड़ और मजबूत की और पिछवाड़े से खोदना जारी रखा। पसीने से लथपथ दोनों शरीर एक-दूसरे में पूरी तरह समा चुके थे। उस अंधेरे कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों की रगड़ और भारी सांसों की आवाजें गूँज रही थीं।

अमित ने फिर से उन्हें सीधा लेटाया और उनके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। इस बार वह सामने से खोदना बहुत गहराई तक कर रहा था। भाभी का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया था। उन्हें महसूस हो रहा था कि अब उनका रस निकलना करीब है। उनकी खाई की दीवारें अमित के खीरा को चारों तरफ से जकड़ रही थीं और जोर-जोर से धड़क रही थीं।

अमित का भी बुरा हाल था, उसकी नसों में खून बहुत तेजी से दौड़ रहा था। अगले ही पल, भाभी ने जोर से अमित को भींचा और उनका शरीर थरथराने लगा। उनके अंदर से गर्म रस निकलना शुरू हो गया। उसी पल अमित ने भी अपना सारा सत्व उनकी खाई की गहराइयों में उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए बिस्तर पर ढेर हो गए, साँसें बेकाबू थीं और दिल जोरों से धड़क रहे थे।

कुछ देर तक सन्नाटा छाया रहा, फिर अमित ने धीरे से भाभी के माथे को चूमा। भाभी की आँखों में अब एक संतुष्टि और शांति थी। उन्होंने अमित को अपने सीने से लगा लिया और उसके बालों को सहलाने लगीं। उस रात की उस khudayi ने उनके बीच के सारे फासले मिटा दिए थे। अब वे सिर्फ देवर-भाभी नहीं, बल्कि दो ऐसी आत्माएं थीं जिन्होंने एक-दूसरे के अधूरेपन को पूरा किया था।

जैसे-जैसे सुबह की पहली किरण खिड़की से अंदर आई, अमित ने देखा कि भाभी सो रही थीं, उनके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी। उनके बिखरे हुए बाल और खुले हुए तरबूज रात की दास्तां बयां कर रहे थे। अमित जानता था कि यह रिश्ता समाज की नजरों में शायद गलत हो, लेकिन उन दोनों के लिए यह एक पवित्र मरहम जैसा था।

भाभी जब जागीं, तो उन्होंने अमित की आँखों में झाँका। वहाँ कोई पछतावा नहीं था, सिर्फ बेपनाह मोहब्बत थी। अमित ने धीरे से उनके मटर को अपनी उंगलियों से छेड़ा, जिससे वे फिर से मुस्कुरा उठीं। भाभी ने उसे पास खींचकर उसके कान में धीरे से कहा, “शुक्रिया अमित, मुझे फिर से जिंदा महसूस कराने के लिए।”

अगले कुछ दिन अमित और भाभी के लिए किसी सपने जैसे थे। जब भी मौका मिलता, वे एक-दूसरे की बाहों में होते। अमित भाभी के तरबूजों के साथ खेलना और उनकी खाई की सैर करना अपनी दिनचर्या बना चुका था। भाभी भी उसे नए-नए तरीकों से खीरा चूसना सिखातीं और उसे अपनी अदाओं से पागल कर देती थीं।

एक दोपहर जब घर पर कोई नहीं था, भाभी ने अमित को रसोई में ही पकड़ लिया। उन्होंने अपनी साड़ी ऊपर की और अमित को वहीं स्लैब पर बैठाकर सामने से खोदना शुरू करने को कहा। रसोई की गर्मी और मसालों की खुशबू के बीच वह khudayi सबसे ज्यादा रोमांचक थी। अमित ने उनकी कमर पकड़कर उन्हें जोर-जोर से झटके दिए, जिससे रसोई के बर्तन खनखनाने लगे।

अमित ने महसूस किया कि इस रिश्ते ने भाभी के अंदर एक नया आत्मविश्वास भर दिया है। वे अब पहले से कहीं ज्यादा खिल उठी थीं। उनके चलने के अंदाज में अब एक अलग ही लचक थी, जैसे उनका पिछवाड़ा हर कदम पर अमित को दावत दे रहा हो। अमित भी अब अपनी नाकामियों को भूलकर जीवन की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार था।

दिन बीतते गए और अमित के वापस शहर जाने का समय आ गया। विदाई की रात दोनों बहुत भावुक थे। उस रात की khudayi में एक अजीब सी शिद्दत थी, जैसे वे एक-दूसरे के जिस्म को हमेशा के लिए अपने अंदर बसा लेना चाहते हों। भाभी की आँखों से आंसू बह रहे थे, जो अमित के खीरा पर गिरकर उसे और भी नम कर रहे थे।

अमित ने वादा किया कि वह जल्द ही वापस आएगा और भाभी का ख्याल रखेगा। उन्होंने एक आखिरी बार एक-दूसरे को महसूस किया और फिर भारी मन से अलग हुए। स्टेशन तक भाभी उसे छोड़ने आईं, उनकी आँखों के किनारे अभी भी लाल थे। अमित ने उनके हाथ को हल्के से दबाया और ट्रेन में बैठ गया, लेकिन उसका दिल वहीं भाभी के पास रह गया था।

ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए अमित सिर्फ उन पलों को याद कर रहा था—भाभी के वे रसीले तरबूज, उनके शरीर की वह खुशबू, और वह मदहोश कर देने वाली khudayi। वह जानता था कि शहर की भीड़-भाड़ में भी वह भाभी की उन सिसकारियों को कभी नहीं भूलेगा। यह सिर्फ जिस्मानी रिश्ता नहीं था, बल्कि दो रूहों का एक गहरा सफर था।

घर पहुँचकर अमित ने सबसे पहले भाभी को फोन किया। उनकी आवाज सुनते ही अमित के शरीर में फिर से वही सिहरन दौड़ गई। भाभी ने बताया कि वे अभी भी उस रात के असर में हैं। अमित ने मुस्कुराते हुए कहा, “भाभी, अपना ख्याल रखना, आपका खीरा बहुत जल्द वापस आएगा अपनी खाई को फिर से सींचने के लिए।”

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