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दिल्ली की बस में मिली प्यासी भाभी

Teen Boy Aunty Sex Story

मैं अजय हूँ, दिल्ली से। उम्र 18 साल। ये बात ठीक एक हफ्ते पहले की है। मैं सेक्स स्टोरीज़ पढ़कर घर जाने के लिए बस पकड़ने वाला था। बस को आने में अभी आधा घंटा था, दोपहर के साढ़े तीन बज रहे थे। स्टोरी पढ़ने की वजह से मैं पूरी तरह गरम हो चुका था, लंड पैंट में खड़ा होकर तंबू बना रहा था। Teen Boy Aunty Sex Story

तभी सामने से एक भाभी को आता देखा। उम्र करीब 30 साल होगी। कद 5 फुट 8 इंच, फिगर 36-32-36। गोरा रंग, टाइट सलवार-कमीज़ में उनके गोल-गोल बूब्स उछल रहे थे। वो मेरे बगल में आकर खड़ी हो गईं। मैं बार-बार उनके बूब्स देख रहा था। उन्होंने मुझसे बस के बारे में पूछा।

मैंने कहा, “15 मिनट में आ जाएगी।”

उनसे बात करके मैं बहुत खुश हो गया। फिर बस आई। बस में बहुत भीड़ थी। भाभी पहले चढ़ीं, मैं उनके पीछे चढ़ गया। बस शुरू हुई तो उनकी गांड मेरे लंड से सट गई। मैंने जहाँ खंभा पकड़ा था, वहाँ उनके बूब्स मेरे हाथ को लग रहे थे। भाभी कुछ नहीं बोलीं, बल्कि जान-बूझकर अपने बूब्स हाथों पर और गांड लंड पर रगड़ने लगीं।

अब तो साफ़ लग रहा था कि भाभी भी मेरे साथ मज़े ले रही हैं। थोड़ी देर बाद बस का लास्ट स्टॉप आने वाला था। स्टॉप आते ही मैं और भाभी उतर गए। भाभी ने मुझे एक हल्की-सी मुस्कान दी। मैं समझ गया और उनके पीछे-पीछे चलने लगा। पाँच मिनट चलने के बाद मैं उनके बगल में आ गया और बोला, “अभी आपके घर कॉफ़ी पीने आ सकता हूँ क्या?”

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भाभी बोलीं, “क्यों नहीं, चलो।”

घर पहुँचते ही वो मुझे सीधा बेडरूम में ले गईं और अपनी साड़ी-पेटीकोट उतार दिया। अब वो सिर्फ़ ब्लैक ब्रा और छोटी-सी ब्लैक पैंटी में थीं। उनका गोरा बदन बहुत सुंदर लग रहा था। चूचियाँ ब्रा के ऊपर से भी निकल रही थीं और फूली हुई चूत पैंटी में साफ़ दिख रही थी। मुझसे रहा नहीं गया। मैं उनसे जाकर लिपट गया।

मैंने उनका नाम पूछा तो बोलीं, “जुबैदा।”

मैंने तुरंत उनकी ब्रा खींचकर निकाल दी। एकदम गोरी-गोरी मक्खन जैसी चूचियाँ बाहर आ गईं। दोनों निप्पल काले-काले और एकदम तने हुए। मैं भी तैयार हो गया। जैसे ही मैंने अंडरवियर निकाला तो जुबैदा आँखें फाड़कर देखने लगीं और बोलीं, “इतना बड़ा!”

मेरा 7 इंच का लंड देखकर वो बहुत खुश हो गईं। मैं तो खुशी से उन पर टूट पड़ा। उन्हें चूमना शुरू किया। चूमते-चूमते जीभ उनके मुँह में डाल दी। फिर उनकी चूचियों में जीभ डालकर चूसने लगा। वाह! क्या गज़ब का स्वाद था, मानो चीनी खिलाई हो। मैं रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। धीरे-धीरे मैंने उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए। वाह, क्या बूब्स थे! मैं तो पागल हो गया।

नीचे मेरा 7 इंच का लंड झटके मारने लगा। अचानक वो मेरे नीचे बैठ गईं और मेरा खड़ा लंड अपने हाथ में लेकर ऊपर-नीचे करने लगीं। मेरी तो जान ही निकलने लगी। कितने मुलायम हाथ थे! मज़ा आ गया। वो बस हिला रही थीं, मैं आसमान की सैर कर रहा था। मुझे लगा मेरा पानी निकलने वाला है। मैंने कहा, “भाभी बस करो, मेरा पानी निकलने वाला है।”

जुबैदा बोलीं, “रुको, मैं तुम्हारा पानी अपने मुँह में लेना चाहती हूँ।”

फिर क्या था! झट से मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं। मेरी तो जान निकलने लगी। “हाय भाभी, क्या कर रही हो… संभालो… मैं निकलने वाला हूँ…”

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पर वो और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगीं। एक ही झटके में मेरा पानी तूफ़ान की तरह छूट गया। नज़ारा ऐसा था कि जैसे ही मैं झड़ा, उनका मुँह भी उस झटके के साथ ऊपर उठ गया। मेरा सारा पानी उन्होंने चाट-चाटकर साफ़ कर दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

“हाय भाभी, तुम्हारा पानी पीकर दिल खुश हो गया।”

मैंने कहा, “भाभी, मैं भी तुम्हें वैसा ही मज़ा देना चाहता हूँ।”

वो बोलीं, “रोका किसने है?”

मैं झट से उठा, नीचे बैठ गया और उनकी साड़ी-पेटीकोट फाड़कर निकाल दिया।

भाभी बोलने लगीं, “क्या कर रहे हो?”

मैंने कहा, “भाभी अब मुझे रोक मत करना वरना मैं मर जाऊँगा।”

मैंने झट से उनके पैरों के बीच आया, पैर फैलाए और उनकी चूत को देखता ही रह गया। क्या चूत थी! गुलाबी रंग की, लाल दाना चमक रहा था। मैं तो उनकी चूत देखकर पागल हो गया। मुझसे रहा नहीं गया। झुककर उनकी चूत को कुत्ते की तरह चाटने लगा।

 क्या खुशबू थी! मैं तो बस चाटे जा रहा था और ऊपर उनकी हालत मछली जैसी हो गई थी। वो तड़प रही थीं और कह रही थीं, “क्या कर रहे हो… मेरी तो जान जा रही है…” लगता था उनके पति ने कभी उनकी चूत चाटी ही नहीं थी। मैं तो उन्हें झटका मज़ा देना चाहता था।

मैं पागलों की तरह चूस रहा था और तभी वो इतने ज़ोर से झड़ीं कि मेरा पूरा मुँह नमकीन पानी से भर गया। मैंने ये कीमती पानी ज़ाया नहीं किया, सारा का सारा पी गया। जुबैदा इतनी खुश हुईं कि मुझे चूमने लगीं और कहने लगीं, “हाय राजा, क्या चूसा है तूने! आज तक मेरे पति ने भी नहीं चूसा। जिस तरह चूसते हो, मैं तो सड़क पर चली जाऊँगी।”

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थोड़ी देर बाद हम बाथरूम में नहा-धोकर वापस बिस्तर पर आए। फिर जुबैदा ने कहा, “क्या तुम मुझे चोदना चाहते हो?”

मैंने कहा, “अरे भाभी, इतना होने के बाद भी पूछ रही हो? मैं तो तुम्हें हर दिन चोदना चाहता हूँ।”

तो बोलीं, “तो ये बात है तो आज से मुझे भाभी मत कहो, जुबैदा कहो।”

मैंने कहा, “ओके जुबैदा जान, अब तो चुदाई करते हैं, क्या ख्याल है?”

“क्यों नहीं मेरी जान!”

फिर जुबैदा ने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। फिर मैंने आव देखा न ताव, सीधा उनके ऊपर चढ़ गया। उन्हें किस करने लगा, बूब्स दबाने और चूसने लगा। वो पागल हो रही थीं। मेरा लंड हाथ में लेकर खुद ही अपनी चूत पर रगड़ने लगीं। उनसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

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“हाय, अब देर मत करो, अपना लंड चूत में डाल दो वरना मैं मर जाऊँगी।”

मैंने कहा, “नहीं जुबैदा रानी, तुम मर नहीं सकती। एक चुदाई से कोई मरता है क्या?”

“नहीं राजा, तुम्हारा लंड इतना बड़ा है कि मेरी चूत ही फाड़ डालेगा। प्लीज़ अब घुसा दो ना।”

मैंने उन्हें और तड़पाया नहीं। अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा और एक ज़ोर का झटका दिया। वो चीख उठीं, “आराम से राजा, क्या मेरी जान लोगे?” फिर मैंने धीरे-धीरे झटके देने शुरू किए। उन्हें दर्द हो रहा था। मैंने उनके मुँह पर मुँह रखा और किस करने लगा।

तभी नीचे से ऐसा झटका मारा कि पूरा का पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। उनकी चीख मेरे मुँह में ही दब गई। फिर मैंने उन्हें मौका दिए बिना चोदता ही गया। कम से कम 30 मिनट तक चोदता रहा और जुबैदा की चूत में ही झड़ गया। वो इतनी खुश हो गईं कि अब तक वो मुझसे चुदवाती हैं। कभी भी मौका मिलता है, मुझसे चुदे बिना नहीं जातीं। अब तो हम दोनों का रोज़ का प्रोग्राम है। कभी उनके घर, कभी मेरे फ्लैट पर, कभी होटल में। जुबैदा कहती हैं, “अजय, तूने मेरी सूखी चूत में जान डाल दी। अब तू मेरे बिना और मैं तेरे बिना नहीं रह सकती।”

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