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नई सौतेली माँ की चु@@ई

नई सौतेली माँ की चु@@ई—>उस दोपहर की खामोशी में एक अजीब सी भारीपन थी, जैसे हवा भी किसी अनकही इच्छा के बोझ तले दबी हो। आर्यन अपने कमरे में बैठा था, लेकिन उसका ध्यान अपनी किताबों पर नहीं, बल्कि बाहर हॉल में टहलती अपनी सौतेली माँ कविता के कदमों की आहट पर था। कविता, जिसकी उम्र महज़ छत्तीस साल थी, अभी एक साल पहले ही उसके पिता के जीवन में आई थी। उसकी चाल में एक ऐसी मादकता थी जो आर्यन जैसे बाइस साल के नौजवान के खून में उबाल लाने के लिए काफी थी। घर में कोई नहीं था, पिता काम के सिलसिले में शहर से बाहर थे और नौकरों को भी छुट्टी दे दी गई थी।

कविता की शारीरिक बनावट किसी तराशी हुई मूरत जैसी थी, जिसे देखते ही किसी भी मर्द का मन डोल जाए। उसकी मध्यम कद-काठी, चौड़े कूल्हे और मखमली त्वचा पर जब धूप की किरणें पड़तीं, तो वह कुंदन की तरह दमकने लगती थी। उसके सीने पर टिके वो भारी और गोल तरबूज उसकी पतली कमर के साथ एक जबरदस्त विरोधाभास पैदा करते थे। जब वह चलती थी, तो उसके तरबूजों का हल्का सा हिलना आर्यन की धड़कनों को अनियंत्रित कर देता था। उसके रेशमी बालों की महक पूरे घर में फैली रहती थी, जो आर्यन को उसकी तरफ खींचने वाले किसी जादुई सम्मोहन की तरह काम करती थी।

आर्यन और कविता के बीच एक ऐसा भावनात्मक खिंचाव था जो शब्दों से परे था। कविता को पता था कि आर्यन उसे किन नज़रों से देखता है, और शायद वह भी अपने भीतर उठ रहे उस तूफ़ान को दबा नहीं पा रही थी। वे अक्सर एक-दूसरे को देखते और फिर नज़रों को चुरा लेते, लेकिन उन चंद लम्हों की खामोशी में हज़ारों बातें हो जाती थीं। कविता का मातृत्व और उसकी कामुकता के बीच का संघर्ष आर्यन की बढ़ती हुई बेताबी के सामने कमज़ोर पड़ता जा रहा था। उसे आर्यन की नज़रों में अपने लिए जो तड़प दिखती थी, वह उसे अंदर तक झकझोर देती थी और उसकी रूह में एक सिहरन पैदा कर देती थी।

उस दिन आकर्षण का जन्म अपनी चरम सीमा पर था जब कविता रसोई में कुछ काम कर रही थी। आर्यन प्यास के बहाने वहां गया और उसने देखा कि कविता की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ था। उसके सफ़ेद ब्लाउज के भीतर कैद वो भारी तरबूज और उनके ऊपर उभरे हुए छोटे-छोटे मटर साफ झलक रहे थे। आर्यन के शरीर में बिजली सी कौंधी और उसने खुद को उसके बेहद करीब पाया। कविता ने पीछे मुड़कर देखा, उसकी सांसें तेज़ थीं और आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उन दोनों के बीच की दूरी अब महज़ कुछ इंच की रह गई थी, जहाँ एक-दूसरे की गर्म सांसें चेहरे पर महसूस हो रही थीं।

मन में एक पल के लिए झिझक हुई, समाज और रिश्तों की दुहाई दी गई, लेकिन इच्छाओं का सैलाब इतना प्रबल था कि सारे बांध टूट गए। आर्यन ने अपनी कांपती हुई उंगलियों से कविता की कमर को छुआ। उस पहले स्पर्श ने जैसे दोनों के शरीरों में आग लगा दी। कविता की आँखों में एक पल के लिए शर्म आई, लेकिन अगले ही पल उसने अपनी आँखें मूंद लीं और आर्यन के करीब आ गई। आर्यन ने उसकी गर्दन पर अपनी सांसें छोड़ीं, जिससे कविता के शरीर में एक तेज़ कंपकंपी हुई और उसके मुँह से एक धीमी आह निकल गई।

धीरे-धीरे स्पर्श और भी गहरा होता गया, और आर्यन ने अपने होंठ कविता के होंठों पर रख दिए। वह एक ऐसा मिलन था जहाँ दोनों की रूहें एक हो रही थीं। आर्यन ने कविता के भारी तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें हल्के से दबाने लगा। कविता की कराह अब साफ़ सुनी जा सकती थी, वह आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फंसाकर उसे और भी करीब खींच रही थी। कमरे का तापमान बढ़ता जा रहा था और दोनों के शरीर पसीने से भीगने लगे थे। आर्यन ने कविता की साड़ी के बंधनों को एक-एक करके खोलना शुरू कर दिया, जिससे उसकी गहरी खाई और भी साफ़ दिखने लगी।

कविता अब पूरी तरह से बेपर्दा थी, उसकी रेशमी त्वचा और उसकी गहरी खाई से उठती महक आर्यन को पागल कर रही थी। आर्यन ने अपना खीरा बाहर निकाला, जो उत्तेजना के मारे पूरी तरह से अकड़ चुका था। कविता ने जब उस सख्त और विशाल खीरे को देखा, तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। उसने धीरे से हाथ बढ़ाकर उस खीरे को छुआ और फिर उसे अपने मुँह में ले लिया। खीरा चूसने की उस क्रिया ने आर्यन को सुख के सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। कविता की जीभ और उसके होंठों का जादू आर्यन के पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ रहा था।

इसके बाद आर्यन ने कविता को बिस्तर पर लेटाया और उसकी रेशमी गहरी खाई को निहारने लगा। वहां उगे छोटे-छोटे बाल उसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। उसने अपनी उंगली से उस खाई की गहराई को नापना शुरू किया। कविता का शरीर धनुष की तरह तन गया और वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में जकड़ने लगी। आर्यन ने फिर अपनी जीभ का इस्तेमाल किया और खाई चाटना शुरू किया। कविता का रस अब बाहर आने लगा था, जिसकी महक ने आर्यन की कामुकता को और भी बढ़ा दिया। वह बार-बार आर्यन का नाम पुकार रही थी और उससे खुदाई करने की भीख मांग रही थी।

अब समय आ गया था उस असली खुदाई का, जिसका इंतज़ार दोनों को बड़ी बेसब्री से था। आर्यन ने कविता की टांगों को चौड़ा किया और अपने सख्त खीरे को उसकी गहरी खाई के मुहाने पर टिकाया। एक ज़ोरदार धक्के के साथ उसने अपने खीरे को खाई के अंदर उतार दिया। कविता के मुँह से एक चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं, बल्कि अपार सुख की थी। सामने से खोदना जारी रहा, और हर धक्के के साथ कविता के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे। आर्यन के पसीने की बूंदें कविता के बदन पर गिर रही थीं, जिससे एक अजीब सा कामुक अहसास पैदा हो रहा था।

खुदाई की गति अब तेज़ हो चुकी थी। कमरे में सिर्फ उन दोनों के शरीरों के टकराने की और कविता की सिसकारियों की आवाज़ गूँज रही थी। आर्यन ने अब उसे घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। कविता अपने घुटनों के बल थी और उसका पिछवाड़ा आर्यन की तरफ तना हुआ था। आर्यन ने अपने हाथों से उसके तरबूजों को पीछे से पकड़ा और अपनी पूरी ताकत के साथ खुदाई जारी रखी। कविता अब पूरी तरह से चरम सीमा पर थी, उसका शरीर थरथरा रहा था और वह रस छोड़ने के करीब थी। आर्यन ने भी अपनी गति बढ़ा दी और अंत में दोनों का रस एक साथ छूट गया।

खुदाई के बाद दोनों पसीने से तर-बतर बिस्तर पर ढह गए। कविता की साँसें अभी भी तेज़ थीं और उसके चेहरे पर एक संतोष की चमक थी। आर्यन ने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे को चूमा। वह पल बहुत ही भावुक था, जहाँ समाज के सारे कायदे-कानून उस बेपनाह प्यार और जिस्मानी जुड़ाव के सामने छोटे पड़ गए थे। कविता ने आर्यन के सीने पर अपना सिर रखा और महसूस किया कि यह रिश्ता अब सिर्फ नाम का नहीं रह गया था। उन दोनों के बीच का वह गुप्त रहस्य अब हमेशा के लिए उनके दिलों में दफन हो गया था, लेकिन उनकी रूहें अब और भी करीब आ गई थीं।

उस शाम की ढलती हुई धूप उनके कमरे की खिड़की से भीतर आ रही थी, जैसे उनके इस नए रिश्ते को अपनी गवाही दे रही हो। कविता और आर्यन जानते थे कि अब उनके बीच कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा। हर स्पर्श में एक नयी कहानी होगी और हर निगाह में एक नया वादा। उस गहरी खुदाई ने न केवल उनके जिस्मों की प्यास बुझाई थी, बल्कि उनके एकाकीपन को भी ख़त्म कर दिया था। वे दोनों चुपचाप एक-दूसरे की गर्माहट महसूस करते रहे, यह जानते हुए कि यह तो बस एक नई शुरुआत थी उस अंतहीन सुख की यात्रा की।

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