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निशा की चु@@ई

निशा की चु@@ई—>निशा और साहिल का रिश्ता बरसों पुराना था, लेकिन आज उस रिश्ते में एक अजीब सी गर्माहट और कशिश महसूस हो रही थी जो पहले कभी नहीं थी। साहिल अपनी पुरानी ट्यूशन टीचर निशा के घर लगभग पांच साल बाद आया था, वह अब एक परिपक्व और हट्टा-कट्टा नौजवान बन चुका था जबकि निशा की खूबसूरती में वक्त के साथ एक ठहराव और गहरा नशा आ गया था। कमरे में हल्की मद्धम रोशनी थी और बाहर सन्नाटा छाया हुआ था, दोनों सोफे पर पास-पास बैठे पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे लेकिन साहिल की नजरें बार-बार निशा के बदलते हुए हाव-भाव और उसके शरीर के उतार-चढ़ाव पर टिक जा रही थीं। निशा की आवाज में एक थरथराहट थी जैसे वह भी इस अनकहे तनाव को महसूस कर रही हो, उसकी सांसों की गति धीरे-धीरे बढ़ रही थी और वह अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार अपनी उंगलियों से मरोड़ रही थी।

निशा की उम्र लगभग पैंतीस साल थी, लेकिन उसका बदन आज भी किसी कमसिन कली की तरह खिला हुआ था और साड़ी के नीचे से झाँकते हुए उसके भारी-भरकम तरबूज किसी भी मर्द का ईमान डगमगा देने के लिए काफी थे। जब वह हिलती थी, तो उसके पिछवाड़े की थिरकन और उन रसीले तरबूजों का हल्का सा डोलना साहिल के मन में कामुक तूफान पैदा कर देता था। निशा की कमर की गोलाई और उसके ब्लाउज के भीतर दबे मटर जैसे उभार साफ़ झलक रहे थे, जो कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। उसकी सुराहीदार गर्दन और उस पर चमकता हुआ पसीना उसकी कामुकता को और बढ़ा रहा था, साहिल का जी चाह रहा था कि वह बस उस बदन की खुशबू में खो जाए और उन रसीले अंगों का स्वाद चखे। नीचे उसकी रेशमी साड़ी के भीतर छिपी वह रहस्यमयी खाई अब धीरे-धीरे गीली होने लगी थी, जिसका अहसास निशा को अपनी जांघों के बीच बढ़ती हुई चिपचिपाहट से हो रहा था।

बातों-बातों में साहिल का हाथ गलती से निशा के घुटने को छू गया, और उस स्पर्श ने जैसे दोनों के शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ दी हो। निशा ने अपना हाथ नहीं हटाया, बल्कि उसकी आंखों में एक अजीब सी प्यास तैरने लगी जो बरसों की तन्हाई का नतीजा थी। साहिल ने धीरे से अपना हाथ ऊपर खिसकाया और निशा की जांघों को महसूस करने लगा, उसकी सांसें अब भारी हो चुकी थीं और कमरे की हवा में एक नशीली महक घुल गई थी। निशा ने धीरे से अपनी आँखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी, उसका पूरा बदन थरथरा रहा था जैसे वह सदियों से इसी पल का इंतजार कर रही हो। साहिल ने हिम्मत जुटाई और धीरे से निशा के चेहरे को अपने हाथों में लिया, उसकी धड़कनें इतनी तेज थीं कि निशा को अपने सीने पर महसूस हो रही थीं।

धीरे-धीरे साहिल की उंगलियां निशा के ब्लाउज के हुक तक पहुँचीं, और जैसे ही उसने पहला हुक खोला, निशा के भीतर की झिझक जैसे हवा में उड़ गई। उसने खुद आगे बढ़कर साहिल के शर्ट के बटन खोलने शुरू किए, उसकी उंगलियां साहिल की छाती पर रेंग रही थीं जिससे साहिल का खीरा अपनी पैंट के भीतर अंगड़ाइयां लेने लगा था। निशा ने जैसे ही साहिल के खीरे की सख्ती को अपनी जांघों पर महसूस किया, उसके मुँह से एक दबी हुई कराह निकल गई। दोनों एक-दूसरे के बदन को पागलों की तरह टटोलने लगे, जैसे कोई खोया हुआ खजाना ढूंढ रहे हों। साड़ी फर्श पर गिर चुकी थी और अब निशा सिर्फ अपने अंतःवस्त्रों में खड़ी थी, उसका गोरा बदन दूधिया रोशनी में किसी अप्सरा जैसा चमक रहा था।

साहिल ने बिना देर किए निशा के भारी तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें जोर-जोर से मसलने लगा, निशा के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं। वह अपने दोनों मटर को साहिल के मुँह की तरफ धकेल रही थी, और जैसे ही साहिल ने उन मटरों को अपनी जुबान से सहलाया, निशा का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया। उसने साहिल के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ लिया और अपने तरबूजों को उसके चेहरे पर रगड़ने लगी। साहिल अब नीचे की ओर बढ़ा और उसकी रेशमी पेटीकोट को भी हटा दिया, जहाँ उसकी घनी झाड़ियों वाले बाल और उनके बीच छिपी गहरी रसीली खाई उसका स्वागत करने को तैयार थी। साहिल ने अपनी उंगलियों से उस खाई को टटोलना शुरू किया, जो पहले से ही रस से लबालब भरी हुई थी और काफी फिसलन भरी लग रही थी।

निशा की उत्तेजना अब सातवें आसमान पर थी, उसने अपनी टांगें फैला दीं ताकि साहिल उसकी खाई का बेहतर तरीके से जायजा ले सके। साहिल ने नीचे झुककर उस रसीली खाई को चाटना शुरू किया, उसकी जुबान की हर हरकत पर निशा बिस्तर की चादरों को अपने हाथों से भींच रही थी। खाई से निकलने वाला रस साहिल के चेहरे पर लग रहा था, जिसे वह बड़े चाव से पी रहा था। निशा अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, उसने साहिल को ऊपर खींचा और उसके हाथों से उसके खीरे को आजाद किया। साहिल का खीरा अब पूरी तरह से तना हुआ और गर्म था, निशा ने उसे अपने कोमल हाथों में पकड़ा और उसकी लंबाई और मोटाई को देखकर दंग रह गई। उसने धीरे से उस खीरे को अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगी, जैसे वह दुनिया की सबसे कीमती मिठाई हो।

साहिल ने अब निशा को बेड पर लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गया, उसने निशा की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा ताकि उसकी खाई पूरी तरह से खुल जाए। उसने अपने गर्म और सख्त खीरे की नोक को निशा की गीली खाई के द्वार पर टिकाया और धीरे से दबाव डाला। जैसे ही खीरे का सिर अंदर गया, निशा की आँखों से आँसू छलक आए लेकिन वो दर्द के नहीं, बल्कि एक असीम आनंद के थे। साहिल ने एक गहरा धक्का मारा और पूरा का पूरा खीरा निशा की खाई की गहराइयों में समा गया। निशा ने जोर से चिल्लाते हुए साहिल की पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए, उसकी सिसकारी कमरे के सन्नाटे को चीर गई। अब शुरू हुई असली खुदाई, साहिल धीरे-धीरे बाहर-अंदर होने लगा, हर धक्के के साथ निशा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके बीच की रगड़ से एक मीठा सा दर्द पैदा हो रहा था।

जैसे-जैसे खुदाई की गति बढ़ी, कमरे में मांस के मांस से टकराने की आवाज़ें गूँजने लगीं। निशा हर धक्के पर ‘ओह साहिल, और तेज खोदो’ चिल्ला रही थी, उसकी आवाज़ में एक जंगलीपन आ गया था। साहिल ने उसे अब उल्टा लिटा दिया और पिछवाड़े से खोदने वाली मुद्रा में आ गया। निशा के उभरे हुए पिछवाड़े को देख साहिल का जोश और बढ़ गया, उसने पीछे से अपने खीरे को फिर से खाई के भीतर उतारा। यह कोण निशा को और भी ज्यादा सुख दे रहा था, उसकी खाई अब पूरी तरह से रस छोड़ रही थी। साहिल के धक्कों की रफ्तार अब बेकाबू हो चुकी थी, वह किसी मशीन की तरह निशा के भीतर जा रहा था और निशा हर धक्के के साथ अपनी सुध-बुध खोती जा रही थी। दोनों पसीने से तर-बतर थे, और उनकी सांसों की गर्मी एक-दूसरे को जला रही थी।

अंत में, जब साहिल को लगा कि अब उसका रस निकलने वाला है, उसने धक्कों की रफ्तार और तेज कर दी। निशा भी अपने चरम के करीब थी, उसका पूरा बदन कांप रहा था और उसकी खाई की मांसपेशियां साहिल के खीरे को कसकर जकड़ रही थीं। अचानक निशा ने एक लंबी चीख मारी और उसका रस निकल गया, वह पूरी तरह से निढाल हो गई। ठीक उसी पल साहिल ने भी एक गहरा धक्का मारा और अपने खीरे का सारा गरम रस निशा की खाई की गहराई में उड़ेल दिया। दोनों कई मिनटों तक उसी हालत में एक-दूसरे से लिपटे रहे, कमरे में सिर्फ उनकी भारी सांसों की आवाज़ें आ रही थीं। निशा के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था, जैसे बरसों की प्यास आज बुझ गई हो। साहिल ने धीरे से अपना खीरा बाहर निकाला और निशा के बगल में लेट गया, निशा ने अपना सिर उसकी छाती पर रख दिया और वे दोनों उस जादुई अहसास में डूबे रहे जो अभी-अभी उनके बीच घटा था।

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