मेरा नाम अमित है, और मैं अपने नए अपार्टमेंट में शिफ्ट हुए अभी कुछ ही महीने हुए थे। शहर के बीचो-बीच एक छोटी सी, शांत गली में मेरा घर था, और मेरी पड़ोसन थी रिया। रिया, जो अपने पति के साथ रहती थी, इतनी खूबसूरत थी कि उसे देखकर ही दिल में एक अजीब सी हलचल मच जाती थी। वो मुझसे उम्र में शायद दो-तीन साल छोटी होगी, पर उसकी चाल-ढाल और बात करने का तरीका इतना सधा हुआ था कि वो मुझे अक्सर अपनी ओर खींचता रहता था। हम सुबह-शाम लिफ्ट में मिलते, कभी कभार बालकनी में खड़े होकर हेलो-हाय हो जाती। रिया की आवाज़ में एक अजीब सी मिठास थी, जो मेरे कानों में शहद घोल देती थी। उसके होंठों पर हमेशा एक प्यारी सी मुस्कान रहती थी, जो मेरी नींदें उड़ाने के लिए काफी थी। मैं अक्सर उसे अपने काम पर जाते हुए या शाम को लौटते हुए देखता था, और हर बार उसकी एक झलक भर मुझे पूरे दिन तरोताज़ा कर देती थी। मेरा मन करता कि उससे और बात करूं, उसके साथ थोड़ा और वक़्त बिताऊं, पर पड़ोसियों के बीच की उस अदृश्य दीवार को तोड़ना मुश्किल लगता था।
रिया का कद सामान्य था, पर उसका शरीर हर लिहाज़ से मनमोहक था। जब वो साड़ी पहनती थी, तो उसके वक्र ऐसे उभर कर आते थे कि उन्हें देखकर दिल थम सा जाता था। खासतौर पर, जब वो हल्के रंग की साड़ी पहनती, तो उसके तरबूज का उभार स्पष्ट दिखाई देता था, जो हर आदमी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए काफी था। उसकी कमर इतनी पतली थी कि मेरा मन करता था कि मैं उसे अपनी बाहों में भरकर कस लूं। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी और गहरी थीं, जिनमें अक्सर एक शरारती चमक दिखती थी, जैसे वो कोई राज़ छिपाए बैठी हो। उसके बाल लंबे, काले और घने थे, जो अक्सर उसकी पीठ पर लहराते रहते थे। उसकी त्वचा गेहुंआ थी, और धूप में अक्सर एक सुनहरी चमक आती थी। रिया की चाल में एक गज़ब की नज़ाकत थी, हर कदम पर एक अजीब सी लचक, जो मेरे अंदर एक अलग ही तरह की आग जला देती थी। वह अपने काम को लेकर बहुत समर्पित थी, और शायद यही वजह थी कि उसका आत्मविश्वास उसके व्यक्तित्व में चार चांद लगा देता था। मैं कई बार सोचता कि उसका पति कितना भाग्यशाली होगा, जिसे ऐसी पत्नी मिली है। उसकी हर अदा में एक ऐसी मादकता थी, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था।
धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ने लगी। कभी दूध वाले को लेकर, तो कभी बिजली के बिल को लेकर। इन छोटी-छोटी बातों में भी मुझे रिया के करीब आने का बहाना मिल जाता था। एक दिन मैं घर पर अकेला था और अचानक मेरे घर का नल खराब हो गया। मैंने हिम्मत करके रिया को आवाज़ दी, क्योंकि उसके पति घर पर नहीं थे। रिया झट से मेरी मदद के लिए आ गई। वो इतनी सहज थी कि उसने खुद ही प्लंबर को बुलाकर सब ठीक करवा दिया। उस दिन मैंने उसे पहली बार इतनी करीब से देखा। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदे चमक रही थीं, और उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे। मेरी नज़रें उसके तरबूज पर टिक गईं, जो उसके ढीले टॉप में भी साफ दिख रहे थे। उसने जब मेरी ओर देखा, तो मैंने झट से नज़रें झुका लीं, पर मेरे दिल की धड़कनें तेज़ हो चुकी थीं। उस दिन से हमारे बीच एक अनकहा रिश्ता बन गया था। जब भी हम मिलते, तो हमारी आँखें एक दूसरे से कुछ कहने की कोशिश करती थीं। मुझे महसूस होता था कि रिया भी मुझे पसंद करती है, पर हम दोनों ही इस बात को ज़ाहिर करने से डरते थे। एक बार लिफ्ट में लाइट चली गई और हम दोनों कुछ देर के लिए वहीं फंस गए। उस अँधेरे में हमारे कंधे एक दूसरे से छू रहे थे, और मुझे उसके शरीर की धीमी खुशबू महसूस हो रही थी। वो पल मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक था। मुझे लगा कि जैसे वक़्त थम सा गया हो, और मैं बस उसी पल में रहना चाहता था।
एक शाम मैं अपनी बालकनी में खड़ा था और रिया अपनी बालकनी में कपड़े सुखा रही थी। उसके कुछ कपड़े हवा से उड़कर मेरी बालकनी में आ गिरे। मैंने उन्हें उठाया और उसे वापस देने गया। जब मैंने उसे कपड़े वापस दिए, तो उसके हाथ गलती से मेरे हाथ से छू गए। वो स्पर्श एक साधारण स्पर्श नहीं था। उस पल मेरे पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। रिया की आँखों में भी मैंने वही चमक देखी, वही घबराहट जो मेरे अंदर थी। हमारे हाथ एक पल के लिए रुके रहे, जैसे कोई अदृश्य शक्ति उन्हें जोड़े हुए हो। उसकी उंगलियाँ मेरी उंगलियों को छू रही थीं, और मुझे लगा जैसे मेरे रोम-रोम में आग लग गई हो। हमारे होंठों पर हल्की मुस्कान थी, पर हमारी आँखें एक-दूसरे से बहुत कुछ कह रही थीं। मैंने उसके हाथ को धीरे से थाम लिया और उसने भी अपना हाथ नहीं खींचा। वो पल हमारे बीच की सारी दूरियां मिटा गया। उस दिन मुझे यकीन हो गया कि हम दोनों एक ही कश्ती के मुसाफिर हैं, बस राहें अलग थीं। मैंने उसके हाथ को थोड़ा और कस कर पकड़ा, और वो भी मेरे करीब आ गई। उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, और मैं उसकी धड़कनों को अपनी हथेली पर महसूस कर सकता था। उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे, जैसे वो किसी आमंत्रण का इंतज़ार कर रही हो। उस क्षण, हम दोनों जानते थे कि अब वापसी का कोई रास्ता नहीं है।
उस स्पर्श के बाद, हम दोनों एक दूसरे से नज़रें चुरा रहे थे, पर दिल में एक नया तूफ़ान उठ रहा था। अगले कुछ दिनों तक, हम एक-दूसरे को देखते ही मुस्कुरा देते, पर कोई बात नहीं करते। फिर एक दिन, रिया का पति शहर से बाहर गया था। उसने मुझे फ़ोन करके कहा कि उसे मेरे घर के कुछ सामान की ज़रूरत है, क्या मैं थोड़ी देर के लिए उसके घर आ सकता हूँ? मेरे दिल में ढोल बजने लगे। मैं तुरंत उसके घर पहुंचा। जैसे ही मैं अंदर गया, उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। उसके चेहरे पर एक अजीब सी लज्जा और उत्तेजना थी। “मुझे लगा कि तुम कभी नहीं आओगे,” उसने धीरे से कहा। मैंने उसके इस साहस पर एक गहरी सांस ली, और महसूस किया कि वह भी मेरे जितना ही उत्सुक थी। मैं उसके करीब गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। हमारे होंठ एक-दूसरे से मिल गए और हमारी सारी ख्वाहिशें एक पल में बाहर आ गईं। हम एक दूसरे को पागलपन की हद तक चाट रहे थे। उसके होंठों का स्वाद इतना मीठा था कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मेरी जीभ उसके मुँह के हर कोने को तलाश रही थी, और उसके दाँत मेरी निचली होंठ पर हल्के से कट रहे थे, जिससे एक अजीब सा सुख महसूस हो रहा था।
मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी पीठ पर गए, और फिर धीरे से उसके तरबूज को सहलाने लगे। रिया ने एक आह भरी और मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया। उसके बदन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी, जिसे मैं महसूस कर सकता था। मैंने उसके टॉप को उतार दिया और उसके तरबूज मेरे सामने थे, जैसे दो रसीले फल जो अभी-अभी पक कर तैयार हुए हों। उनके उभार, उनकी कोमलता मेरे हाथों को अपनी ओर खींच रही थी। उसके मटर, जो गुलाबी रंग के थे और उत्तेजना से खड़े हो चुके थे, मेरी आँखों के सामने नाच रहे थे। मैंने धीरे से उसके एक मटर को अपने मुँह में लिया और उसे चाटना शुरू कर दिया। रिया मेरे सर को अपने तरबूज पर कसकर दबाने लगी और उसके मुँह से मीठी सिसकारियां निकलने लगीं। उसकी साँसें बेकाबू हो चुकी थीं, और उसके शरीर में एक कंपन था। वो मदहोश हो चुकी थी, सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे स्पर्श के लिए तरस रही थी। मैं एक मटर को चाटता और दूसरे को अपनी उंगलियों से सहलाता, बारी-बारी से उन्हें अपनी ज़ुबान का स्वाद चखा रहा था। उसके शरीर में एक अजीब सी बिजली दौड़ रही थी।
मैंने उसके सलवार को भी उतार दिया। उसके नीचे की पैंटी भी गीली हो चुकी थी, जिसमें से उसकी खाई की हल्की सी खुशबू आ रही थी। मैंने उसे भी हटा दिया और उसकी खाई मेरे सामने थी, गुलाबी, रसीली और थोड़ी-थोड़ी फूली हुई, जैसे वह मेरे लिए ही खुल कर इंतज़ार कर रही हो। मैंने धीरे से अपनी उंगली उसकी खाई में डाली। खाई में उंगली करते ही रिया की आँखों में चमक आ गई। वह खुशी से झूम उठी और अपने कूल्हों को ऊपर उठा लिया। मैं उसकी खाई को धीरे-धीरे अपनी उंगलियों से खोद रहा था, और रिया की हर आह मेरे अंदर एक नई आग लगा रही थी। वो अपने कूल्हों को ऊपर उठा-उठाकर मुझे इशारा कर रही थी कि मैं उसे और तेज खोदूं, और गहराई तक जाऊं। मैंने अपनी दो उंगलियां उसकी खाई में डालीं और उसे और गहराई तक खोदने लगा। रिया पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी, उसके शरीर में एक अजीब सी ललक दौड़ रही थी। उसकी आँखें बंद थीं और उसके होंठों से सिर्फ़ मेरे नाम की फुसफुसाहट निकल रही थी। मैंने उसकी खाई को और जोर-जोर से खोदना शुरू किया, उसकी हर नस को अपनी उंगलियों से छूने की कोशिश की, और फिर कुछ ही देर में उसके शरीर से रस निकल गया। वह बिस्तर पर ढीली पड़ गई, पर उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं और उसका शरीर अभी भी कांप रहा था।
वह थोड़ी देर बाद उठी और मेरे कपड़े उतारने लगी। उसके हाथों में अब एक अलग ही आत्मविश्वास था। मेरा खीरा उसके सामने तनकर खड़ा था, पूरा लाल और कठोर, अपनी पूरी शक्ति में। उसने मेरे खीरे को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगी। उसकी उंगलियां मेरे खीरे पर जादू कर रही थीं, जैसे उसे पहले से पता हो कि मेरे खीरे को क्या पसंद है। फिर उसने धीरे से मेरे खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चाटना शुरू कर दिया। मेरे शरीर में एक झनझनाहट दौड़ गई, एक ऐसी झनझनाहट जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। रिया इतनी अच्छी तरह से मेरे खीरे को चाट रही थी कि मुझे लगा मैं अभी रस निकाल दूंगा। उसके होंठों की गरमाहट और उसकी जीभ का स्पर्श मुझे सातवें आसमान पर पहुंचा रहा था। वह धीरे-धीरे मेरे खीरे को अपने गले तक ले जाती और फिर बाहर खींचती, एक अजीब सी लय में। उसने मेरे खीरे को काफी देर तक चाटा, उसे अपने लार से पूरी तरह से भिगो दिया, और फिर उसे अपनी खाई के द्वार पर रख दिया। मैंने उसकी आँखों में देखा, और उसने मुझे धीरे से अंदर आने का इशारा किया। उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, सिर्फ़ एक अटूट वासना और प्यार का मिश्रण था।
मैंने धीरे-धीरे अपने खीरे को उसकी खाई में डाला। पहली बार में थोड़ी मुश्किल हुई, क्योंकि उसकी खाई अभी भी थोड़ी तंग थी, पर धीरे-धीरे मेरा पूरा खीरा उसकी गर्म और गीली खाई में समा गया। रिया ने एक गहरी आह भरी और अपने कूल्हों को ऊपर उठा लिया, जैसे वह मुझे अपने अंदर पूरी तरह से समा लेना चाहती हो। हम एक दूसरे से कसकर चिपक गए। मैंने धीरे-धीरे उसे खोदना शुरू किया। हर खुदाई पर रिया के मुँह से मीठी आवाज़ें निकल रही थीं, “और… और तेज़… अमित…”। हम दोनों उस पल में पूरी तरह खो चुके थे। उसकी तरबूज मेरे सीने से दबे हुए थे, और उसके मटर मेरी त्वचा को छू रहे थे, एक अजीब सी संवेदना पैदा कर रहे थे। मैंने अपनी गति बढ़ाई और उसे और तेज़ खोदना शुरू किया। कमरा हमारी साँसों की आवाज़ से गूंज रहा था, हमारे शरीरों के टकराने की आवाज़ से भर गया था। हम दोनों एक दूसरे को इतनी शिद्दत से खोद रहे थे, जैसे यह हमारी ज़िंदगी का आखिरी पल हो, जैसे हमें सारी दुनिया भूल चुकी हो। रिया ने अपने पैर मेरी कमर के चारों ओर कस लिए और मुझे अपने अंदर और गहराई तक खींचने लगी, उसकी खाई मेरे खीरे को कसकर जकड़े हुए थी। मैंने उसे और ज़ोर से खोदना शुरू किया, हर खुदाई पर एक गहरी संतुष्टि महसूस कर रहा था। हर खुदाई पर हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते, और हमारी आँखों में प्यार और वासना का एक अजीब मिश्रण था, एक ऐसा मिश्रण जो हमें एक-दूसरे से पूरी तरह जोड़ रहा था। हम दोनों एक दूसरे को लगातार खोदते रहे, अपनी सारी ऊर्जा, अपनी सारी वासना को एक दूसरे में उड़ेलते रहे, जब तक कि हम दोनों का रस एक साथ नहीं निकल गया। रिया ने मेरे नाम की चीख मारी, “अमित!”, और मेरे शरीर पर ढीली पड़ गई, उसका शरीर थरथरा रहा था। मेरा खीरा उसकी खाई में ही था, और हम दोनों एक दूसरे से कसकर चिपके हुए थे, हमारी साँसें तेज़ थीं और शरीर पसीने से भीगा हुआ था। हमारे होठ एक दूसरे से जुड़े हुए थे, और हम एक दूसरे की आत्माओं को चूम रहे थे।
हम दोनों कुछ देर तक यूँ ही पड़े रहे, एक-दूसरे की बाहों में। हमारे दिल की धड़कनें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, पर हमारे बीच एक अजीब सी शांति और सुकून फैल गया था। रिया ने अपना सर मेरे सीने पर रखा हुआ था, और मैं उसके बालों को सहला रहा था। हमने एक-दूसरे से कोई बात नहीं की, पर हमारी आँखों में एक गहरा प्रेम और संतुष्टि झलक रही थी। उस पल में, हमें किसी शब्द की ज़रूरत नहीं थी। सब कुछ हमारे स्पर्श में था, हमारी साँसों में था। रिया ने धीरे से अपना सर उठाया और मेरी आँखों में देखा। उसकी आँखों में एक नई चमक थी, एक ऐसी चमक जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। उसने धीरे से मेरे होंठों पर एक चुंबन किया, एक ऐसा चुंबन जो सिर्फ़ आभार और प्रेम से भरा था। मैं जानता था कि यह सिर्फ़ एक रात की बात नहीं थी। यह हमारे बीच एक नए रिश्ते की शुरुआत थी, एक ऐसा रिश्ता जो समाज की बंदिशों से परे था। हम दोनों ने एक दूसरे से एक अनकहा वादा किया था कि हम इस पल को हमेशा याद रखेंगे, और शायद और ऐसे पल बनाएंगे। बाहर सूरज धीरे-धीरे डूब रहा था, और कमरे में हल्की सी रोशनी आ रही थी, जो हमारे इस पवित्र और अंतरंग पल को और भी खूबसूरत बना रही थी। मैंने उसे फिर से कसकर गले लगा लिया, और हम दोनों ने एक गहरी साँस ली, जैसे हमने अभी-अभी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सफ़र तय किया हो।