पड़ोसन माया की चुदाई—>उस शाम आसमान से बादलों की गड़गड़ाहट के साथ मूसलाधार बारिश हो रही थी और पूरा शहर जैसे थम सा गया था। मैं अपने फ्लैट की खिड़की के पास खड़ा बाहर के नजारे को देख रहा था तभी अचानक डोरबेल बजी और जब मैंने दरवाजा खोला तो सामने नई पड़ोसन माया खड़ी थी। वह पूरी तरह भीगी हुई थी और उसकी साड़ी उसके शरीर से इस तरह चिपकी थी कि उसके शरीर का हर एक उतार-चढ़ाव साफ नजर आ रहा था। उसके चेहरे पर एक अजीब सी घबराहट थी लेकिन उसकी आँखों में एक अनकही चमक भी थी जिसने मेरे दिल की धड़कन को अचानक ही बढ़ा दिया।
माया अभी कुछ दिन पहले ही बगल वाले फ्लैट में शिफ्ट हुई थी और हम दोनों के बीच बस औपचारिकता वाली ही बातें होती थीं। उसकी कद-काठी किसी अप्सरा जैसी थी जिसका शरीर पूरी तरह से सुडौल और कामुकता से भरा हुआ था। उसकी साड़ी के भीगने की वजह से उसके उभरे हुए बड़े-बड़े तरबूज साफ झलक रहे थे जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसके ब्लाउज का गला काफी गहरा था जिससे उसके तरबूजों की गहरी घाटी साफ दिख रही थी जिसे देखकर मेरे मन में अजीब सी हलचल होने लगी।
उसने सहमी हुई आवाज में कहा कि उसके फ्लैट की लाइट चली गई है और उसे डर लग रहा है इसलिए क्या वह थोड़ी देर मेरे यहाँ रुक सकती है। मैंने बिना देरी किए उसे अंदर आने को कहा और उसे तौलिया दिया ताकि वह खुद को सुखा सके। जब वह अपने बालों को सुखा रही थी तो उसके बदन से उठने वाली भीनी-भीनी खुशबू और बारिश की सोंधी महक ने कमरे के माहौल को पूरी तरह से रूमानी बना दिया था। हम दोनों सोफे पर बैठे थे और हमारे बीच की दूरी धीरे-धीरे सिमटने लगी थी क्योंकि बिजली न होने के कारण मोमबत्ती की मद्धम रोशनी हमें करीब ला रही थी।
बातों-बातों में माया ने बताया कि वह बहुत अकेली महसूस करती है और उसे एक सच्चे साथी की तलाश है जो उसे समझ सके और प्यार दे सके। उसकी बातों में जो दर्द और तड़प थी उसने मेरे दिल को छू लिया और मैंने अनजाने में ही अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया। जैसे ही मेरा स्पर्श उसके शरीर से हुआ वह एक बार को कांप गई लेकिन उसने अपना हाथ हटाया नहीं बल्कि मेरी ओर और करीब सरक आई। उसकी साँसें अब तेज होने लगी थीं और उसकी छाती के तरबूज तेजी से धड़क रहे थे जिससे माहौल में कामुकता का जहर घुलने लगा था।
मैंने धीरे से उसके चेहरे को अपनी ओर मोड़ा और उसकी आँखों में झाँका जहाँ सिर्फ और सिर्फ गहरी चाहत और समर्पण का भाव भरा हुआ था। मैंने उसके होंठों की ओर हाथ बढ़ाया और अपनी उंगलियों से उसके गुलाबी होंठों को छुआ तो उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी आह भरी। वह पल ऐसा था जहाँ सारी दुनिया पीछे छूट गई थी और सिर्फ हम दोनों की धड़कनें ही सुनाई दे रही थीं। मैंने उसके माथे को छुआ और फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए उसकी गर्दन पर अपनी सांसों की तपिश छोड़ने लगा।
माया ने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया जिससे उसके रेशमी कंधे और भीगे हुए तरबूज पूरी तरह से मेरे सामने उजागर हो गए। उसके तरबूज इतने बड़े और सख्त थे कि उन्हें देखते ही मेरे शरीर का तापमान बढ़ने लगा और मेरा खीरा अपनी जगह पर पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया। मैंने धीरे से अपने हाथ बढ़ाए और उसके तरबूजों को अपनी हथेलियों में भर लिया। जैसे ही मैंने उन्हें दबाया माया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली सिसकी निकली जिसने मुझे और भी ज्यादा उत्साहित कर दिया।
उसके तरबूजों के बीच जो मटर जैसे निप्पल थे वे अब पूरी तरह से सख्त हो चुके थे जिन्हें मैंने अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया। माया ने अपनी पीठ को धनुष की तरह मोड़ लिया और उसकी आहें अब तेज कराहों में बदलने लगी थीं। वह बार-बार मेरा नाम पुकार रही थी और मुझे अपने और करीब खींच रही थी। मैंने धीरे से उसके ब्लाउज की डोरियां खोल दीं और उसके हुस्न का पूरा खजाना मेरी आँखों के सामने था जिसे देख कर मेरा जी ललचाने लगा और मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया।
वह बार-बार अपनी जांघों को आपस में रगड़ रही थी जिससे मुझे समझ आ गया कि उसकी खाई अब पूरी तरह से प्यासी है और रस छोड़ने के लिए बेताब है। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाला और उसके रेशमी बालों वाले हिस्से को सहलाया जहाँ उसकी खाई पूरी तरह से गीली और गर्म हो चुकी थी। जब मैंने अपनी उंगली से उसकी खाई में खुदाई शुरू की तो वह पूरी तरह से मेरे बाहों में पिघल गई और उसके मुँह से सिर्फ बेतहाशा सिसकियां ही निकल रही थीं जो कमरे की खामोशी को चीर रही थीं।
मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटाया और उसके सारे कपड़े एक-एक करके उतार दिए अब वह मेरे सामने कुदरत की सबसे सुंदर रचना की तरह नग्न लेटी हुई थी। मैंने अपना खीरा बाहर निकाला जो अब पूरी तरह से अपनी पूरी लंबाई और मोटाई में खड़ा था और लोहे की तरह सख्त हो चुका था। माया ने जब मेरे खीरे को देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उसने धीरे से उसे अपने हाथों में थाम लिया। उसने मेरे खीरे को बड़े प्यार से सहलाया और फिर उसे अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
खीरा चूसने के दौरान वह जिस तरह से अपनी जुबान का इस्तेमाल कर रही थी उससे मुझे जन्नत का अहसास हो रहा था और मुझे लगा कि मेरा रस अभी निकल जाएगा। मैंने उसे रोका और उसकी जांघों को फैलाकर उसकी खाई के पास बैठ गया जो अब रस से पूरी तरह से सराबोर हो चुकी थी। मैंने अपनी जुबान से उसकी खाई को चाटना शुरू किया जिससे वह बिस्तर पर तड़पने लगी और उसके हाथ चादर को कसकर जकड़ चुके थे। वह पागलों की तरह अपना सिर इधर-उधर मार रही थी और उसकी कामुकता चरम पर पहुँच चुकी थी।
अब मुझसे और सब्र नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उसे सामने से खोदने की मुद्रा में लिया और अपने खीरे का सिरा उसकी गीली खाई पर टिका दिया। जैसे ही मैंने एक जोर का धक्का दिया मेरा आधा खीरा उसकी तंग खाई के अंदर समा गया और माया के मुँह से एक तेज चीख निकली जो दर्द और आनंद का मिला-जुला रूप थी। उसकी खाई इतनी तंग थी कि मुझे लग रहा था जैसे वह मेरे खीरे को हर तरफ से जकड़ रही हो। मैंने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई और गहरी खुदाई शुरू कर दी।
हर धक्के के साथ मेरे अंडकोष उसके पिछवाड़े से टकरा रहे थे जिससे एक तालबद्ध आवाज पैदा हो रही थी जो माहौल को और भी उत्तेजक बना रही थी। माया अब पूरी तरह से लय में आ चुकी थी और वह भी नीचे से अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थी। वह बार-बार कह रही थी कि मुझे और गहराई तक खोदो मुझे पूरी तरह से अपनी बना लो। उसके तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे जिन्हें मैं अपने हाथों से पकड़कर अपनी खुदाई की रफ्तार को और तेज करता जा रहा था।
कुछ देर सामने से खोदने के बाद मैंने उसे घुमाया और पिछवाड़े से खोदने वाली पोजीशन में कर दिया जिसे डॉगी स्टाइल कहते हैं। उसका पिछवाड़ा देखने में बहुत ही आकर्षक और भरा हुआ था जिसे देखकर मेरी कामुकता और भी बढ़ गई। मैंने पीछे से अपना खीरा फिर से उसकी खाई में उतारा और तेज धक्के लगाने शुरू किए। इस पोजीशन में मेरा खीरा उसकी खाई की गहराई तक जा रहा था और वह हर धक्के पर जोर-जोर से कराह रही थी। उसके शरीर से पसीना बह रहा था जो हमारे मिलन को और भी ज्यादा फिसलन भरा बना रहा था।
खुदाई की प्रक्रिया अब अपने चरम पर पहुँच चुकी थी और हम दोनों ही रस छोड़ने के करीब थे। मैंने अपनी गति को और भी बढ़ा दिया और छोटे-छोटे लेकिन बहुत ही दमदार धक्के मारने लगा। माया पूरी तरह से बेसुध हो चुकी थी और उसके शरीर में एक अजीब सी थराहट होने लगी थी। तभी अचानक उसका रस निकलना शुरू हुआ और उसकी खाई की दीवारें मेरे खीरे को कसकर भींचने लगीं। उसके रस की गर्मी को महसूस करते ही मेरा भी सब्र टूट गया और मैंने अपना पूरा गर्म रस उसकी गहराई में उड़ेल दिया।
हम दोनों ही पसीने में तरबतर होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और हमारी साँसें बहुत तेज चल रही थीं। कमरे में सिर्फ हमारी भारी साँसों की आवाज थी और बाहर बारिश अभी भी जारी थी। वह पल बहुत ही सुकून भरा था जहाँ हम दोनों ने एक-दूसरे की रूह को छू लिया था। माया ने मुझे कसकर गले लगा लिया और मेरे माथे को चूमते हुए कहा कि उसने आज तक ऐसा आनंद कभी महसूस नहीं किया था। वह पूरी तरह से तृप्त नजर आ रही थी और उसकी आँखों में अब एक अलग ही सुकून और प्यार की चमक थी।
काफी देर तक हम वैसे ही लिपटे रहे और एक-दूसरे के जिस्म की गर्मी को महसूस करते रहे। उस रात की वह खुदाई सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं थी बल्कि दो तड़पते हुए शरीरों का एक भावनात्मक मिलन था जिसने हमें हमेशा के लिए एक-दूसरे से जोड़ दिया था। माया के बिखरे हुए बाल और उसका थका हुआ चेहरा मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज लग रहे थे। हमने पूरी रात एक-दूसरे की बाहों में बिताई और अगले दिन की सुबह हमारे लिए एक नई शुरुआत लेकर आई जहाँ अब हम सिर्फ पड़ोसी नहीं बल्कि बहुत करीब आ चुके थे।