रीना की उम्र अभी मुश्किल से बत्तीस साल रही होगी, लेकिन उसके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उसे एक बार देख ले तो बस देखता ही रह जाए। उसका रंग दूध जैसा सफेद और बदन पूरी तरह से भरा हुआ था। उसकी कमर पतली थी लेकिन उसके ऊपर सजे दो बड़े और रसीले तरबूज हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेते थे। जब वह चलती थी तो उसके पीछे का भारी पिछवाड़ा एक अजीब सी लय में डोलता था, जिसे देख मोहल्ले के जवान लड़के अपनी आहें भरने लगते थे। रीना का पति अक्सर काम के सिलसिले में शहर से बाहर रहता था, जिसकी वजह से वह घर में बिल्कुल अकेली और उदास महसूस करती थी। उसके शरीर की प्यास दिनों-दिन बढ़ती जा रही थी, लेकिन उसे बुझाने वाला कोई नहीं था।
उसी बिल्डिंग के सामने वाले फ्लैट में समीर नाम का एक चौबीस साल का नौजवान रहने के लिए आया था। समीर काफी लंबा, चौड़ा और कसरती बदन का मालिक था। उसकी मूंछें और गहरी आँखें किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकती थीं। समीर ने पहले ही दिन जब रीना को बालकनी में कपड़े सुखाते हुए देखा था, तभी से उसके मन में रीना के उन भारी तरबूजों को सहलाने की इच्छा जाग गई थी। रीना की नीली साड़ी में उसकी गहरी नाभि और कमर की गोलाई साफ दिखाई दे रही थी। समीर अक्सर अपनी खिड़की से रीना को निहारता रहता और मन ही मन कल्पना करता कि काश उसे एक बार उस खाई की गहराई नापने का मौका मिल जाए जिसके बारे में वह रातों को सपने देखता था।
एक दोपहर की बात है, जब पूरी बिल्डिंग में सन्नाटा पसरा हुआ था और सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था। रीना अपने घर में अकेली सोफे पर लेटी हुई थी, उसकी पतली नाइटी उसके शरीर से चिपकी हुई थी। अचानक उसके घर की डोरबेल बजी। जब उसने दरवाजा खोला तो सामने समीर खड़ा था, जिसने बस एक हाफ टी-शर्ट पहनी थी जिसमें उसके उभरे हुए सीने की मांसपेशियां साफ दिख रही थीं। समीर ने बहाना बनाया कि उसके घर की लाइट चली गई है और उसे कुछ औजारों की जरूरत है। रीना ने उसे अंदर बुला लिया। जैसे ही समीर अंदर आया, कमरे में एक अजीब सी गर्माहट फैल गई। दोनों की नज़रें मिलीं और रीना को महसूस हुआ कि समीर की नज़रें उसके गले से नीचे उतरकर उसके उभरे हुए तरबूजों पर टिकी हुई हैं।
रीना औजार खोजने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नाइटी का गला थोड़ा ढीला हो गया, जिससे उसके दूधिया तरबूजों के बीच की गहरी लकीर समीर को साफ दिखने लगी। समीर की सांसें तेज हो गईं और उसके पेंट के अंदर उसका लंबा खीरा करवट लेने लगा। रीना को भी समीर की गर्म सांसों का अहसास अपनी गर्दन पर हो रहा था। उसने मुड़कर देखा तो समीर बिल्कुल उसके करीब खड़ा था। झिझक और चाहत के बीच एक पल का संघर्ष हुआ, लेकिन फिर समीर ने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ रीना की कमर पर रख दिया। रीना के शरीर में जैसे बिजली का करंट दौड़ गया। उसने मना नहीं किया, बल्कि अपनी आँखें मूंद लीं और समीर के मजबूत सीने से सट गई। समीर ने धीरे से उसके चेहरे को ऊपर उठाया और उसके होंठों का रसपान करने लगा।
समीर के हाथों ने धीरे-धीरे नीचे उतरकर रीना के भारी तरबूजों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। वह उन्हें हल्के से दबाने लगा, जिससे रीना के मुंह से एक धीमी कराह निकल गई। समीर ने रीना की नाइटी के बटन खोले तो उसके सामने दो बड़े, गोल और सफेद तरबूज आ गए, जिनके बीच में गुलाबी मटर के दाने की तरह निप्पल उभरे हुए थे। समीर ने अपनी जुबान से उन मटर के दानों को सहलाना शुरू किया, जिससे रीना उत्तेजना से कांपने लगी। वह समीर के बालों में अपनी उंगलियां फंसाकर उसे और करीब खींचने लगी। कमरे की हवा में अब सिर्फ उनकी तेज सांसों और प्यार की महक घुली हुई थी। समीर ने रीना को उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर झुक गया।
बिस्तर पर लेटने के बाद समीर ने रीना के नीचे के कपड़े भी उतार दिए। अब रीना उसके सामने पूरी तरह से निर्वस्त्र थी, उसकी टांगों के बीच की खाई गुलाबी और रेशमी बालों से ढकी हुई थी। समीर ने अपनी उंगलियों से उस खाई को सहलाना शुरू किया। रीना की खाई से अब धीरे-धीरे प्राकृतिक रस निकलने लगा था, जो समीर की उंगलियों को गीला कर रहा था। समीर ने अपना चेहरा नीचे झुकाया और उस गहरी खाई को अपनी जुबान से चाटना शुरू कर दिया। रीना बिस्तर पर अपने हाथ-पैर पटकने लगी, उसकी उत्तेजना चरम पर थी। उसने समीर के पेंट की चेन खोली और उसका फन फैलाता हुआ लंबा और सख्त खीरा बाहर निकाल लिया। वह खीरा इतना मजबूत था कि रीना की हथेली में भी पूरा नहीं आ रहा था।
रीना ने समीर के उस सख्त खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया। समीर को ऐसा सुख मिल रहा था जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। उसने रीना को सीधा लेटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। अब समीर का खीरा रीना की खाई के मुहाने पर था। समीर ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका आधा खीरा रीना की तंग खाई के अंदर समा गया। रीना के मुंह से एक तीखी लेकिन सुखद आह निकली। समीर ने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की और कमरे में खुदाई की आवाजें गूँजने लगीं। वह रीना को पूरी ताकत से खोद रहा था। रीना के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और समीर हर धक्के के साथ उन मटर के दानों को अपने हाथों से मसल रहा था।
कुछ देर सामने से खुदाई करने के बाद, समीर ने रीना को बिस्तर पर घुटनों के बल झुका दिया। अब वह पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार था। रीना का भारी पिछवाड़ा समीर के सामने था, जिसे देखकर उसकी उत्तेजना और बढ़ गई। उसने अपने खीरे को फिर से रीना की गीली खाई में उतारा और पीछे से जोर-जोर से धक्के मारने लगा। रीना चिल्ला रही थी, ‘समीर, और तेज… मुझे पूरी तरह से खोदो।’ समीर की रफ्तार अब बेकाबू हो चुकी थी। वह पूरी गहराई तक जाकर रीना के अंदर के हर कोने को छू रहा था। दोनों के शरीरों से पसीना बह रहा था और वे एक-दूसरे की खुशबू में पूरी तरह डूब चुके थे। अंत में, समीर ने अपना पूरा खीरा अंदर तक धंसा दिया और उसका सारा गर्म रस रीना की खाई के अंदर छूट गया।
खुदाई खत्म होने के बाद दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए बिस्तर पर ढीले पड़ गए। रीना का शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था और उसका चेहरा गुलाबी हो चुका था। उसे अपनी जिंदगी में पहली बार इतना संतोष मिला था। समीर ने रीना के माथे को चूमा और उसे अपनी छाती से सटा लिया। रीना ने महसूस किया कि यह सिर्फ शारीरिक जरूरत नहीं थी, बल्कि एक गहरा जुड़ाव था जो उस दोपहर की खामोशी में पैदा हुआ था। वे दोनों काफी देर तक बिना कुछ बोले लेटे रहे, बस एक-दूसरे की धड़कनों को महसूस करते रहे। उस दिन के बाद से, उनके बीच का यह गुप्त रिश्ता एक खूबसूरत कहानी बन गया, जो सिर्फ उन दोनों के बीच ही सिमटी रही।