पड़ोसी सिमरन की कामुक चु@@ई—>
दोपहर का सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था और इस गर्मी में सिमरन का मन भी अजीब सी बेचैनी से भरा हुआ था। उसका पति बिजनेस के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर रहता था और वह इस आलीशान फ्लैट में खुद को एकदम तन्हा महसूस करती थी। सिमरन की उम्र लगभग बत्तीस साल थी और उसका शरीर एक पके हुए आम की तरह रसीला और आकर्षक था। उसके बदन की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उसे एक बार देख ले तो बस देखता ही रह जाए। उसकी कमर पतली थी लेकिन उसके नीचे का पिछवाड़ा काफी भरा हुआ और गोल था जो चलने पर एक मदहोश कर देने वाली लय में हिलता था। उस दिन उसने घर में एक ढीली सी रेशमी साड़ी पहनी थी जिसके नीचे उसने ब्लाउज के अंदर कुछ नहीं पहना था जिससे उसके भारी-भरकम तरबूज अपनी आज़ादी का अहसास करा रहे थे।
तभी दरवाजे की घंटी बजी और सिमरन ने जाकर देखा तो सामने आर्यन खड़ा था जो बगल वाले फ्लैट में अकेले रहता था। आर्यन एक चौबीस साल का गबरू जवान था जिसका शरीर कसरती था और उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। वह सिमरन से अक्सर कुछ न कुछ बहाने से बात करने आता था। आज वह एक किताब लौटाने आया था। सिमरन ने जब दरवाजा खोला तो साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था जिससे उसके गोरे और विशाल तरबूज का ऊपरी हिस्सा और गहरी घाटी साफ नजर आ रही थी। आर्यन की नजरें अनचाहे ही उन तरबूजों पर टिक गईं और उसके गले में जैसे सूखा पड़ गया। सिमरन ने उसकी नजरों की तपिश को महसूस किया और उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट तैर गई जिसने आर्यन की धड़कनें और बढ़ा दीं।
अंदर आ जाओ आर्यन बाहर बहुत गर्मी है सिमरन ने अपनी आवाज को जितना हो सके उतना कोमल बनाते हुए कहा। आर्यन जैसे ही अंदर आया उसे सिमरन के शरीर से आने वाली मोगरे की धीमी खुशबू ने मदहोश कर दिया। दोनों सोफे पर बैठ गए और सिमरन ने जानबूझकर अपने बैठने के अंदाज को ऐसा रखा कि उसकी साड़ी और सरक गई। अब उसके तरबूज के बीच की गहरी खाई आर्यन को साफ दिख रही थी जिसमें पसीने की एक छोटी सी बूंद धीरे-धीरे नीचे सरक रही थी। आर्यन की सांसें तेज होने लगी थीं और उसकी आंखों में सिमरन के प्रति बढ़ती हुई वासना साफ झलक रही थी। सिमरन ने देखा कि आर्यन की नजरें बार-बार उसके बदन को टटोल रही हैं जिससे उसके मन में भी दबी हुई इच्छाएं जागने लगी थीं।
सिमरन ने धीमे से कहा तुम्हें प्यास लगी होगी मैं पानी लाती हूँ। जैसे ही वह खड़ी हुई उसका पिछवाड़ा आर्यन की आंखों के ठीक सामने लहराया जो साड़ी के महीन कपड़े में बहुत ही आकर्षक लग रहा था। जब वह पानी लेकर वापस आई तो उसने जानबूझकर आर्यन के पास बैठकर पानी का गिलास पकड़ाया जिससे उसके हाथ का स्पर्श आर्यन की उंगलियों से हुआ। वह स्पर्श बिजली की तरह दोनों के शरीर में दौड़ गया। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर सिमरन का हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया। सिमरन ने कोई विरोध नहीं किया बल्कि उसकी आंखों में गहरी डूबती हुई नजरों से देखने लगी। उसके होठों के पास आर्यन का चेहरा आते ही दोनों ने एक दूसरे के होंठों का रसपान करना शुरू कर दिया जो बहुत ही गहरा और भावुक था।
सिमरन की आहें कमरे की खामोशी को चीरने लगी थीं और आर्यन के हाथ अब सिमरन की साड़ी के पल्लू को हटाकर उसके रेशमी और भारी तरबूजों पर पहुंच गए थे। जैसे ही उसने उन विशाल तरबूजों को अपने हाथों में भरा सिमरन के मुंह से एक सिसकारी निकली। उन तरबूजों के बीच मौजूद गुलाबी मटर अब कड़क हो चुके थे जिन्हें आर्यन अपनी उंगलियों से सहलाने लगा। सिमरन ने आर्यन की टी-शर्ट उतार दी और उसके कसरती सीने को चूमने लगी। वह अब पूरी तरह से कामुकता के समंदर में डूब चुकी थी। आर्यन ने धीरे से सिमरन को साड़ी से आज़ाद कर दिया और अब वह केवल अपनी पेटीकोट में खड़ी थी जिसके अंदर से उसके पिछवाड़े का उभार और भी ज्यादा कयामत ढा रहा था।
आर्यन ने सिमरन को बिस्तर पर लेटा दिया और उसके पूरे बदन को अपनी जीभ से सहलाने लगा। जब वह सिमरन की जांघों के बीच पहुंचा तो वहां की खुशबू ने उसे पागल कर दिया। उसने सिमरन की खाई को चूमना और चाटना शुरू किया जिससे सिमरन बिस्तर की चादरों को अपनी उंगलियों में भींचने लगी। उसकी खाई अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और रस टपकने लगा था। सिमरन ने तड़पते हुए आर्यन की पेंट उतारी और उसका विशाल और कड़क खीरा बाहर निकल आया। उस खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर सिमरन की आंखें फटी रह गईं। उसने तुरंत उस खीरे को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगी जैसे वह दुनिया की सबसे स्वादिष्ट चीज हो।
खुदाई की शुरुआत बहुत ही धीमी और अहसासों से भरी हुई थी। आर्यन ने सिमरन की खाई के दरवाजे पर अपना खीरा टिकाया और धीरे से अंदर धकेला। सिमरन ने एक जोर की आह भरी क्योंकि उसकी खाई काफी तंग थी लेकिन जैसे-जैसे खीरा गहराई में जाने लगा उसे एक अजीब सा सुकून मिलने लगा। आर्यन अब सामने से खुदाई कर रहा था और हर धक्के के साथ सिमरन के तरबूज हवा में उछल रहे थे। उनके शरीरों के टकराने की आवाज और सिमरन की सिसकारियां मिलकर एक कामुक संगीत पैदा कर रही थीं। सिमरन के बाल बिस्तर पर बिखरे हुए थे और उसका चेहरा पसीने की बूंदों से चमक रहा था जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था।
आर्यन ने अब सिमरन को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में कर दिया। पीछे से सिमरन का पिछवाड़ा एक पहाड़ की तरह ऊंचा लग रहा था जिसे देख आर्यन का जोश दोगुना हो गया। उसने पीछे से अपना खीरा सिमरन की गरम खाई में उतारा और तेज धक्के लगाने शुरू किए। सिमरन अपने दोनों हाथों से बिस्तर को पकड़े हुए थी और उसके मुँह से बस उह्ह्ह आआआह की आवाजें निकल रही थीं। वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी कि कैसे आर्यन का खीरा उसकी खाई में अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ आर्यन उसके भारी तरबूजों को अपने हाथों से मसल रहा था जिससे सिमरन को बेइंतहा मजा आ रहा था।
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद दोनों का शरीर पसीने से तर-बतर हो चुका था। सिमरन अब चरम सीमा पर थी और उसने आर्यन को कसकर पकड़ लिया। कुछ ही पलों में सिमरन का रस छूटने लगा और उसका पूरा शरीर कांपने लगा। उसी समय आर्यन ने भी अपना सारा गरम रस सिमरन की गहरी खाई के अंदर उड़ेल दिया। दोनों एक दूसरे के ऊपर ढह गए और उनकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं। कमरे में केवल उनके भारी सांसों की आवाज आ रही थी। खुदाई के बाद की वह शांति और शरीर की थकान बहुत ही सुखद थी। सिमरन ने आर्यन के माथे को चूमा और दोनों नग्न अवस्था में ही एक दूसरे की बाहों में सो गए।