पुरानी दोस्त संग चु@@ई —>
रोहन और मेघा पूरे दस साल बाद मिले थे। कॉलेज के दिनों में वे एक-दूसरे के सबसे करीबी दोस्त हुआ करते थे, लेकिन फिर जिंदगी की भागदौड़ में दोनों अलग हो गए। आज शहर के एक पॉश होटल में कॉलेज रीयूनियन की पार्टी थी, जहाँ दोनों की नज़रें एक बार फिर मिलीं। मेघा ने गहरे लाल रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसमें उसकी कमर का घेरा और उसके शरीर की बनावट किसी अप्सरा जैसी लग रही थी। रोहन उसे देखते ही रह गया, क्योंकि मेघा अब पहले से कहीं ज़्यादा परिपक्व और आकर्षक लग रही थी। उन दोनों ने पूरी शाम पुरानी यादें ताज़ा कीं, लेकिन उन यादों के पीछे एक अनकही चाहत साफ झलक रही थी जो शायद कॉलेज के दिनों में अधूरी रह गई थी।
मेघा के शरीर की बनावट अब काफी बदल चुकी थी; उसकी छाती पर उभरे हुए बड़े-बड़े तरबूज साड़ी के ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जब वह हँसती, तो उसके वे रसीले तरबूज धीरे-धीरे हिलते, जिससे रोहन की धड़कनें तेज हो जाती थीं। उसकी कमर पतली थी और उसका पिछवाड़ा काफी मांसल और सुडौल हो गया था, जो साड़ी की हर सिलवट के साथ अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहा था। रोहन ने महसूस किया कि मेघा की आँखों में भी वही पुरानी चमक और एक अजीब सी भूख थी। पार्टी खत्म होने के बाद, मेघा ने रोहन को अपने पास के अपार्टमेंट में कॉफी पीने के लिए आमंत्रित किया, जिसे रोहन मना नहीं कर पाया क्योंकि उसके मन में भी एक गहरी हलचल शुरू हो चुकी थी।
अपार्टमेंट में पहुँचते ही माहौल और भी गहरा और मादक हो गया। धीमी रोशनी में मेघा की त्वचा सोने की तरह चमक रही थी। रोहन ने सोफे पर बैठते हुए मेघा को देखा, जो अपनी सैंडल उतार रही थी। उनके बीच की बातचीत अब केवल शब्दों तक सीमित नहीं थी; हर शब्द में एक खिंचाव था, एक प्यास थी। रोहन ने धीरे से मेघा का हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा। मेघा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने रोहन की आँखों में देखते हुए कहा, ‘रोहन, क्या तुम्हें पता है कि मैंने इन दस सालों में तुम्हें कितना याद किया है?’ रोहन ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसकी आँखों में छिपे उस पुराने प्यार और नई कामुकता को महसूस किया।
धीरे-धीरे आकर्षण की वह चिंगारी अब एक आग में बदलने लगी थी। रोहन ने अपनी उँगलियों को मेघा के कंधों से नीचे उतारा, जहाँ उसके ब्लाउज की डोरी बँधी हुई थी। मेघा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उसकी आँखें आधी बंद हो गईं। रोहन ने उसके गले पर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं, जिससे मेघा के शरीर का रोम-रोम जाग उठा। झिझक का वह आखिरी बाँध अब टूटने ही वाला था। मेघा ने रोहन के गले में अपनी बाहें डाल दीं और उसे और भी करीब खींच लिया। उन दोनों के शरीर एक-दूसरे के इतने करीब थे कि वे एक-दूसरे के दिल की धड़कनें साफ सुन सकते थे। कमरे का तापमान जैसे एकदम से बढ़ गया था और दोनों के मन में वर्षों की दबी हुई इच्छाएँ उफान मारने लगी थीं।
रोहन का पहला स्पर्श मेघा की नंगी कमर पर पड़ा, जहाँ से उसकी साड़ी थोड़ी हटी हुई थी। उसकी उँगलियों के स्पर्श ने मेघा को काँपने पर मजबूर कर दिया। वह मदहोशी में रोहन का नाम पुकारने लगी। रोहन ने धीरे से उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए, और जैसे ही कपड़ा ढीला हुआ, मेघा के भारी और रसीले तरबूज आज़ाद हो गए। उन तरबूजों के बीच का गहरा अहसास और उनके ऊपर उभरे हुए गुलाबी मटर की तरह सख्त निप्पल देखकर रोहन की आँखों में कामुकता का सैलाब आ गया। उसने अपने हाथों से उन तरबूजों को सहलाना शुरू किया, जिससे मेघा के मुँह से एक हल्की आह निकली। वह अपने शरीर को रोहन की ओर धकेल रही थी, जैसे वह उसके हर स्पर्श को अपनी आत्मा में उतार लेना चाहती हो।
अब बेताबी और भी बढ़ चुकी थी। रोहन ने मेघा की साड़ी और पेटीकोट को धीरे-धीरे नीचे सरका दिया, जिससे उसकी गहरी और रहस्यों से भरी खाई पूरी तरह से उजागर हो गई। उस खाई के आसपास हल्के सुनहरे बाल थे जो उसकी सुंदरता को और भी बढ़ा रहे थे। रोहन ने नीचे झुककर मेघा की उस रेशमी खाई को निहारना शुरू किया और अपनी जीभ से उस खाई को चाटना शुरू कर दिया। मेघा का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वह रोहन के बालों को अपनी उँगलियों में जकड़ने लगी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि रोहन उसे इस तरह से महसूस कराएगा। उसकी खाई अब पूरी तरह से रसीली और गीली हो चुकी थी, जो रोहन के अगले कदम का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी।
रोहन ने भी अपने कपड़े उतार फेंके और उसका विशाल और लोहे जैसा सख्त खीरा गर्व से खड़ा होकर अपनी ताकत दिखा रहा था। मेघा ने जब उस विशाल खीरे को देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उस गर्म खीरे को अपनी मुट्ठी में भर लिया। वह उसे ऊपर-नीचे सहलाने लगी, जिससे रोहन की आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा। मेघा ने फिर उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया, जैसे वह किसी मीठे फल का आनंद ले रही हो। रोहन के मुँह से कराहें निकलने लगीं और वह मेघा के सिर को सहलाते हुए उसे और गहराई तक ले जाने के लिए प्रोत्साहित करने लगा।
अंततः वह पल आ गया जिसका दोनों को वर्षों से इंतज़ार था। रोहन ने मेघा को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उसने मेघा की दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और अपने सख्त खीरे को उसकी रसीली और तंग खाई के मुहाने पर रखा। जैसे ही उसने पहला धक्का मारा, मेघा की एक तेज चीख निकल गई, ‘ओह रोहन, तुम बहुत बड़े हो!’ रोहन ने धीरे-धीरे उसे पूरा अंदर उतारा, और पूरी खुदाई शुरू कर दी। हर धक्के के साथ रोहन का खीरा मेघा की खाई की गहराइयों को नाप रहा था। कमरे में मांस से मांस टकराने की आवाज़ और उनकी साँसों का शोर गूँज रहा था। मेघा ने अपने दोनों पैरों को रोहन की कमर पर लपेट लिया ताकि वह और भी गहराई तक खुदाई कर सके।
खुदाई की यह प्रक्रिया बहुत ही तीव्र और भावुक थी। रोहन कभी सामने से खोदता, तो कभी मेघा को घुमाकर उसके उभरे हुए पिछवाड़े से खोदना शुरू कर देता। जब वह उसे पिछवाड़े की तरफ से खोदता, तो मेघा के तरबूज नीचे लटक जाते और रोहन उन्हें अपने हाथों से ज़ोर-ज़ोर से मसलता। मेघा के मुँह से बस गंदी और कामुक बातें निकल रही थीं, ‘हाँ रोहन, और तेज़… मुझे पूरी तरह से अपनी इस खुदाई से भर दो!’ रोहन भी जोश में अपना सब कुछ झोंक रहा था। उसका खीरा अब पूरी तरह से मेघा के रस में भीग चुका था और हर धक्के के साथ मेघा के भीतर एक अजीब सी तड़प पैदा हो रही थी। दोनों का पसीना एक-दूसरे में मिल चुका था और वे पूरी तरह से एक-दूसरे के वश में थे।
काफी देर तक चलने वाली इस भीषण खुदाई के बाद, वह चरम बिंदु आ गया जहाँ दोनों का नियंत्रण जवाब दे गया। रोहन ने अपनी गति को और तेज़ कर दिया और मेघा की खाई के एकदम अंदर तक गहरे धक्के मारने लगा। अचानक मेघा का पूरा शरीर थरथराने लगा और उसकी खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा। रोहन ने भी एक ज़ोरदार धक्का मारा और अपना सारा गरम रस मेघा की खाई की गहराइयों में उड़ेल दिया। वे दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए बिस्तर पर गिर पड़े। दोनों की साँसें उखड़ रही थीं और शरीर पसीने से तर-बतर था, लेकिन उनके चेहरों पर एक असीम शांति और संतुष्टि का भाव था, जो केवल बरसों की दबी हुई प्यास बुझने के बाद ही मिलता है।
खुदाई खत्म होने के बाद, वे दोनों काफी देर तक एक-दूसरे की बाँहों में सिमटे रहे। मेघा ने अपना सिर रोहन की छाती पर रखा हुआ था और वह उसके बालों को सहला रही थी। रोहन ने महसूस किया कि उनके बीच का रिश्ता अब केवल दोस्ती का नहीं रह गया था, बल्कि एक रूहानी जुड़ाव बन चुका था। मेघा की हालत अभी भी वैसी ही थी, उसकी आँखों में तृप्ति की चमक थी और उसका शरीर पूरी तरह से ढीला पड़ चुका था। उसने धीरे से रोहन के कान में फुसफुसाया, ‘तुमने आज मुझे वह सब कुछ दे दिया जिसकी मुझे तलाश थी।’ रात काफी बीत चुकी थी, लेकिन उस कमरे में फैली हुई उस प्यार और कामुकता की खुशबू अब हमेशा के लिए उनकी यादों में बस जाने वाली थी।