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प्रिया मैडम की चु@@ई


प्रिया मैडम की चु@@ई—>

करण आज कई सालों बाद अपनी पुरानी ट्यूशन टीचर प्रिया मैडम के घर जा रहा था। प्रिया मैडम की उम्र अब करीब बत्तीस साल की हो चुकी थी, लेकिन उनकी खूबसूरती में एक अजीब सा ठहराव और गहराई आ गई थी। जब करण उनके घर पहुँचा, तो मैडम ने दरवाजा खोला और उनकी एक झलक देखते ही करण के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने एक गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जो उनके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को बड़ी ही खूबसूरती से उभार रही थी। उनके चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान थी, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी तन्हाई थी जिसे करण ने तुरंत महसूस कर लिया।

प्रिया मैडम के शरीर की बनावट अब पहले से कहीं अधिक मादक हो गई थी। उनकी कमर पतली थी लेकिन उनके दोनों विशाल तरबूज साड़ी के ब्लाउज को फाड़ देने की हद तक कसे हुए थे। जब वह चलती थीं, तो उनके भारी तरबूज हल्के-हल्के हिलते थे, जो किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थे। उनकी साड़ी के पीछे से उनका चौड़ा और सुडौल पिछवाड़ा साफ झलक रहा था, जो हर कदम के साथ एक लय में डोलता था। करण की नजरें बार-बार उनके उन रसीले तरबूजों पर जाकर टिक रही थीं, जिनके ऊपर लगे मटर जैसे उभार ब्लाउज के पतले कपड़े के ऊपर से ही अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे थे।

ड्राइंग रूम में बैठते ही दोनों के बीच पुरानी यादों का सिलसिला शुरू हुआ। प्रिया मैडम ने बताया कि उनके पति के विदेश जाने के बाद वह यहाँ कितनी अकेली महसूस करती हैं। उनकी बातों में एक तड़प थी, जो करण के दिल को छू रही थी। करण ने भी महसूस किया कि उनकी बातों में सिर्फ यादें नहीं, बल्कि एक अधूरी प्यास भी थी। बातों-बातों में करण ने उनका हाथ थाम लिया। प्रिया मैडम ने हाथ हटाया नहीं, बल्कि उनकी उंगलियां करण की हथेलियों में कस गईं। उस स्पर्श में एक करंट था, जिसने दोनों के बीच की झिझक की दीवार को धीरे-धीरे गिराना शुरू कर दिया था।

हवा में एक अजीब सी गर्मी पैदा होने लगी थी, जबकि बाहर मौसम बिल्कुल शांत था। करण धीरे से उठा और मैडम के पीछे जाकर खड़ा हो गया। उसने अपने हाथ उनके कंधों पर रखे और धीरे-धीरे उन्हें सहलाना शुरू किया। प्रिया मैडम ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी। करण के हाथों का स्पर्श उनके रेशमी शरीर पर जैसे जादू कर रहा था। वह धीरे-धीरे नीचे झुका और उनके कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ते हुए बोला, मैडम आप आज भी उतनी ही खूबसूरत हैं जितनी पहले थीं। प्रिया की गर्दन पर करण की सांसें पड़ते ही उनके शरीर में सिहरन दौड़ गई और उन्होंने धीरे से अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया।

करण ने अब अपनी हिम्मत बढ़ाई और उनके कंधे से पल्लू हटाकर उनके गोरे और चिकने बदन को निहारने लगा। उसके हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़े और उन्होंने मैडम के उन भारी तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया। जैसे ही करण के हाथों ने उन रसीले तरबूजों को छुआ, प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली कराह निकल गई। करण ने अपनी उंगलियों से उनके तरबूजों के ऊपर मौजूद मटर को हल्के से दबाया, जिससे प्रिया का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया। वह करण के स्पर्श में पूरी तरह से खो चुकी थीं और उनकी शर्म अब धीरे-धीरे इच्छा की आग में बदल रही थी।

करण उन्हें उठाकर बेडरूम की तरफ ले गया, जहाँ की मद्धम रोशनी उनके बीच की उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। उसने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया और खुद उनके ऊपर झुक गया। उसने धीरे से उनके होठों का रस चखना शुरू किया। प्रिया ने भी अपना मुँह खोल दिया और दोनों की जीभें आपस में उलझने लगीं। करण के हाथ अब उनकी साड़ी की तहों को खोल रहे थे। जैसे ही साड़ी उनके बदन से अलग हुई, उनका दूधिया सफेद शरीर करण की आँखों के सामने था। करण की नजरें उनकी गहरी खाई पर जाकर टिक गईं, जहाँ घने और मुलायम बाल एक रहस्यमयी जंगल की तरह दिख रहे थे।

करण ने अब अपने कपड़े उतारे और उसका विशाल और कड़क खीरा पूरी शान से खड़ा हो गया। प्रिया ने जब उस लंबे और मोटे खीरे को देखा, तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने अपने कांपते हाथों से उस खीरे को छुआ और उसकी गर्माहट महसूस की। करण ने धीरे से उन्हें नीचे से पकड़ा और अपनी जीभ से उनकी खाई को सहलाना शुरू किया। प्रिया बिस्तर पर तड़पने लगीं, जब करण की जीभ उनकी खाई के हर कोने का रस ले रही थी। वह बार-बार करण का सिर अपनी खाई की ओर और जोर से दबा रही थीं, जैसे वह पूरी तरह से उसमें समा जाना चाहती हों।

अब करण ने प्रिया को सामने से खोदने की स्थिति में किया। उसने अपने खीरे की नोक को उनकी गीली और तंग खाई के मुहाने पर रखा। प्रिया ने करण के गले में अपनी बाहें डाल दीं और फुसफुसाते हुए कहा, करण, मुझे पूरा भर दो। करण ने एक जोरदार धक्का लगाया और उसका आधा खीरा उनकी तंग खाई के अंदर समा गया। प्रिया के मुँह से एक तेज चीख निकली, जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी। उनकी खाई इतनी तंग थी कि करण को अंदर जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी, लेकिन वह धीरे-धीरे उस गहराई को नापने लगा।

प्रिया की खाई में करण का खीरा अब पूरी तरह से अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ उनके भारी तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके बीच के मटर करण की छाती से रगड़ खा रहे थे। कमरे में सिर्फ उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ और प्रिया की सिसकियाँ गूँज रही थीं। करण ने उनकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह और गहराई से खोद सके। प्रिया का चेहरा पसीने से भीग चुका था और उनकी आँखें आनंद के चरम पर पहुँचने के कारण बंद थीं। वह बार-बार करण को अपने करीब खींच रही थीं और उनके बीच की गर्मी अब अपने चरम पर थी।

कुछ देर बाद करण ने प्रिया को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने की पोजीशन में कर दिया। प्रिया के झुके हुए पिछवाड़े को देखकर करण का जोश और बढ़ गया। उसने पीछे से अपने खीरे को फिर से उनकी खाई में उतारा। इस पोजीशन में खीरा और भी गहराई तक जा रहा था, जिससे प्रिया बेतहाशा चिल्लाने लगीं। करण के हाथ उनके तरबूजों को पीछे से ही जोर-जोर से मसल रहे थे। हर धक्के के साथ प्रिया का पूरा शरीर हिल रहा था। वह करण के धक्कों की लय में खुद को ढाल चुकी थीं और उनके बीच की यह रसीली खुदाई अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही थी।

करण की गति अब बहुत तेज हो गई थी। उसे महसूस हो रहा था कि अब उसका रस निकलने वाला है। उधर प्रिया भी अपनी चरम सीमा के करीब थीं, उनकी खाई अब अत्यधिक गीली हो चुकी थी और वह करण के खीरे को अंदर ही अंदर जकड़ रही थीं। अचानक प्रिया का शरीर कांपने लगा और उनकी खाई से रसीला पानी बहने लगा, वह जोरों से चिल्लाईं और करण ने भी अपना सारा रस उनकी खाई की गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े, उनकी सांसें तेज थीं और शरीरों से पसीना बह रहा था।

खुदाई खत्म होने के बाद कमरे में एक सुकून भरी शांति छा गई। करण ने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया और उनके माथे को चूमा। प्रिया के चेहरे पर एक तृप्ति और संतुष्टि का भाव था जो करण ने पहले कभी नहीं देखा था। उन्होंने करण के सीने पर अपना सिर रखा और धीरे से कहा कि आज उन्हें सालों बाद खुद के एक औरत होने का अहसास हुआ है। करण ने उन्हें और कसकर पकड़ लिया, वह जानते थे कि यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि दो तन्हा दिलों का एक-दूसरे में समा जाना था। उस रात की वह रसीली यादें अब हमेशा के लिए उनके दिलों में दर्ज हो गई थीं।

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