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करीब दस साल बाद प्रिया और समीर की मुलाकात एक शहर के बाहर एक कॉफी शॉप में हुई। समय ने दोनों को काफी बदल दिया था, लेकिन बचपन की मासूमियत और एक-दूसरे के प्रति वो खास खिंचाव कहीं गहरे में अब भी मौजूद था। प्रिया, जो कभी दुबली-पतली थी, अब एक सुडौल, आकर्षक महिला बन चुकी थी, जिसका हर अंग अपनी जगह पर भरा हुआ और मनमोहक था। उसके गालों पर अब हल्की लाली छाई रहती थी और उसकी आंखें पहले से कहीं अधिक गहरी और बोलती हुई लग रही थीं। समीर ने भी अपनी कद-काठी पर काम किया था और एक मजबूत, गठीले बदन वाला नौजवान बन गया था, जिसकी चौड़ी छाती और मजबूत बाजुओं को देखकर कोई भी महिला मोहित हो सकती थी। उनकी नजरें मिलीं और एक पल के लिए जैसे समय ठहर सा गया, पुरानी यादों का एक बवंडर उनके मन में उठ खड़ा हुआ, जिसमें बचपन की अटूट दोस्ती की खुशबू घुली हुई थी।
कॉफी पीते हुए, उनकी बातचीत बचपन की शरारतों से लेकर कॉलेज के दिनों तक पहुंची। समीर की नजरें बार-बार प्रिया के बदन पर ठहर जाती थीं, जो उसकी सफेद कुर्ती में और भी आकर्षक लग रहा था। कुर्ती के भीतर प्रिया के तरबूज कसकर बंधे हुए थे, जो हर मामूली हरकत पर भी थोड़ा-सा उछलते और समीर के मन में एक अनकही इच्छा जगाते। वह कल्पना कर रहा था कि उनके भीतर छुपे मटर कितने रसीले होंगे। प्रिया भी समीर की चौड़ी छाती और मजबूत बाजुओं को निहार रही थी, जिनके भीतर छुपी ताकत का आभास उसे एक मीठी गुदगुदी दे रहा था। प्रिया की कमर पतली थी, लेकिन उसके पिछवाड़े का उभार एक सुडौल, पका हुआ फल की तरह दिख रहा था, जो हर पल समीर को अपनी ओर खींच रहा था, मानो कोई अनकहा आमंत्रण दे रहा हो।
जैसे-जैसे शाम गहराती गई, उनकी बातों में और अधिक गहराई आती गई। उन्होंने अपने सुख-दुख, अपनी उम्मीदें और अपने डर एक-दूसरे से साझा किए, जैसे वर्षों से एक-दूसरे के लिए इंतजार कर रहे हों। बचपन की दोस्ती की वो मजबूत नींव अब एक नए, अनजाने रिश्ते की ओर इशारा कर रही थी। उनके बीच एक अजीब सी शांति थी, जिसमें अनकही बातें तैर रही थीं, और उनके दिलों की धड़कनें एक अजीब ताल में बज रही थीं। प्रिया समीर की आंखों में अपने लिए एक खास चमक देख पा रही थी, और समीर को प्रिया की मुस्कान में एक मदहोश कर देने वाली गर्माहट महसूस हो रही थी। उनकी आत्माएं एक-दूसरे से फिर जुड़ रही थीं, जैसे दो पुराने प्रेमी वर्षों के बिछोह के बाद मिले हों, जिनके लिए समय का कोई मोल नहीं था।
कॉफी शॉप बंद होने लगी तो उन्होंने बाहर निकलने का फैसला किया। चलते-चलते समीर का हाथ ‘गलती से’ प्रिया के हाथ से टकराया। एक बिजली सी दौड़ी दोनों के भीतर, जिसने उनके पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर दी। प्रिया ने अपना हाथ नहीं हटाया, बल्कि हल्की-सी उंगलियां समीर की हथेली में फंसा लीं, जैसे वह इस स्पर्श को और गहरा करना चाहती हो। समीर ने भी धीरे से अपनी उंगलियां उसकी उंगलियों में पिरो लीं, उनके हाथों का मिलन एक अनकही दास्तान लिख रहा था। यह पहला अनकहा, सचेत स्पर्श था, जिसने उनके भीतर दबी हुई कामुक इच्छाओं को जगा दिया। प्रिया के होंठों पर हल्की सी मुस्कान फैल गई और समीर के दिल की धड़कनें एक तेज ढोल की तरह बजने लगीं। उन्हें महसूस हुआ कि यह सिर्फ दोस्ती से बढ़कर कुछ और है, एक गहरा, रहस्यमयी आकर्षण।
समीर ने प्रिया को उसके घर तक छोड़ने की पेशकश की, जो प्रिया ने तुरंत स्वीकार कर ली। कार में सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसे केवल उनके दिल की धड़कनें और बाहरी सड़क का शोर तोड़ रहा था। प्रिया की नजरें खिड़की के बाहर थीं, पर उसका मन समीर के हर स्पर्श और उसकी हर नजर को महसूस कर रहा था, जो उसके शरीर पर मंडरा रही थी। समीर की सोच में भी यही द्वंद्व था – क्या यह सही है? क्या उन्हें बचपन की इस पवित्र दोस्ती की सीमा को पार करना चाहिए? बचपन की मासूमियत और अब की बढ़ती हुई कामुक इच्छा के बीच उनका मन संघर्ष कर रहा था, जैसे दो विरोधी धाराएं एक ही नदी में मिल रही हों। प्रिया को महसूस हो रहा था कि समीर का हाथ उसकी जांघों के करीब आ रहा था, पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी, केवल अपनी सांसों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही थी।
घर पहुंचते ही समीर ने कार रोकी, पर दोनों में से कोई बाहर नहीं निकला, जैसे दोनों ही इस पल को और लंबा खींचना चाहते हों। समीर ने हिम्मत करके अपना हाथ बढ़ाया और प्रिया के गाल को हल्के से छुआ। प्रिया ने आंखें बंद कर लीं, उसके पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, जैसे किसी ठंडी हवा का झोंका आया हो। “प्रिया,” समीर ने फुसफुसाया, उसकी आवाज इतनी गहरी थी कि प्रिया के भीतर तक उतर गई। प्रिया ने अपनी आंखें खोलीं और उसकी आंखों में देखा। उसकी पलकें झुकी हुई थीं, उसकी सांसें तेज हो रही थीं, उसके होंठ हल्के से कांप रहे थे। समीर का अंगूठा प्रिया के गालों पर घूम रहा था, धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उसकी गर्दन तक पहुंचा, जहां उसने हल्की सी खुजली की। प्रिया ने एक गहरी सांस ली, उसकी देह समीर के इस स्पर्श को और गहराई से महसूस करना चाह रही थी।
धीरे-धीरे समीर का चेहरा प्रिया के करीब आया, उसकी गर्म सांसें प्रिया के होंठों पर पड़ रही थीं, जिससे उसके रोंगटे खड़े हो गए। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं, उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे, जैसे किसी मीठे आम के लिए इंतजार कर रहे हों। समीर ने धीरे से अपने होंठ प्रिया के होंठों पर रखे। यह एक हल्का, कोमल आम चूसना था, जिसमें वर्षों की दबी हुई इच्छा और गहरा प्यार छिपा था। प्रिया ने जवाब में अपने होंठों को थोड़ा और खोला और समीर के होंठों का रसपान किया, उसकी जीभ समीर की जीभ से टकराई, एक मीठी नोंक-झोंक शुरू हो गई। उनकी सांसें एक हो गईं, और दुनिया उनके इर्द-गिर्द घूमना बंद कर चुकी थी, केवल उनके आम चूसने की आवाज और दिलों की धड़कनें सुनाई दे रही थीं। इस आम चूसने में एक ऐसी मिठास थी, जो उन्हें कहीं गहरे तक भिगो रही थी, एक ऐसा नशा जो उन्हें अपनी गिरफ्त में ले रहा था।
आम चूसना गहरा होता गया, दोनों की इच्छाएं एक-दूसरे में समाती जा रही थीं। समीर के होंठ प्रिया के होंठों को धीरे-धीरे चूस रहे थे, जैसे शहद की मिठास ले रहे हों, हर बूंद का स्वाद ले रहे हों। प्रिया ने भी अपना पूरा सहयोग दिया, उसकी जीभ समीर की जीभ से मिली और दोनों एक-दूसरे का स्वाद लेने लगे, एक गहन कामुक नृत्य में खो गए। समीर का एक हाथ प्रिया की कमर पर सरक गया, और दूसरा उसके सिर के पीछे उसकी उंगलियां उसके रेशमी बालों में उलझा रहा था, उसे अपनी ओर और खींच रहा था। प्रिया ने अपनी बाहें समीर की गर्दन में डाल लीं, उसे और करीब खींचते हुए, जैसे उसे कभी छोड़ना ही न चाहती हो। उनकी सांसें गर्म और तेज हो रही थीं, और उनके शरीर की गर्मी एक-दूसरे में समा रही थी, एक अटूट बंधन बना रही थी।
समीर ने आम चूसना छोड़ते हुए प्रिया की गर्दन पर अपने होंठों को उतारा, उसकी कोमल त्वचा को चूमते हुए नीचे उतरने लगा। प्रिया की एक सिसकी निकली, जब समीर ने उसकी मुलायम त्वचा को आम चूसना शुरू किया और अपनी जीभ से हल्की सी खुजली की। समीर का हाथ उसकी कमर से नीचे सरक कर प्रिया के पिछवाड़े पर पहुंचा। उसने धीरे से उसे अपनी हथेली में लेकर सहलाया, उसके गोल-मटोल उभार को महसूस किया। प्रिया के शरीर में एक बिजली का करंट दौड़ गया। वह समीर के करीब और कसकर चिपक गई, उसकी उत्तेजना स्पष्ट रूप से महसूस हो रही थी। समीर ने उसके कानों में फुसफुसाया, “प्रिया, तुम कितनी खूबसूरत हो, मेरा मन करता है तुम्हें पूरी तरह से चूस लूँ।” प्रिया ने जवाब में बस एक आह भरी और समीर के बालों को कसकर पकड़ा, उसकी इच्छा अब बेकाबू हो रही थी।
समीर के हाथ धीरे-धीरे प्रिया की कमर से होते हुए उसके तरबूजों तक पहुंच गए। उसने पहले तरबूजों को अपनी हथेलियों में लिया, उनके भारीपन और कोमलता को महसूस किया, जैसे वह दो रसीले फल हों। प्रिया के शरीर में एक तीव्र कंपकंपी छूट गई। उसकी आंखें बंद थीं, और उसके होंठों से एक धीमी, मदहोश कर देने वाली कराह निकल रही थी, जो समीर को और उत्तेजित कर रही थी। समीर ने धीरे से उसके तरबूजों को दबाया, उनकी गोल-मटोल आकृति को महसूस करते हुए। प्रिया ने अपनी कमर को हल्का सा उठाया, समीर के स्पर्श को और गहरा करने के लिए, जैसे वह उसे अपनी पूरी देह सौंप रही हो। समीर ने उसके तरबूजों को सहलाते हुए, कपड़े के ऊपर से ही मटरों को अपनी उंगलियों से हल्के से मलना शुरू किया, जिससे प्रिया के भीतर की आग और भड़क उठी।
प्रिया के तरबूजों पर समीर का स्पर्श उसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था। मटरों पर उसकी उंगलियों का दबाव एक मीठा दर्द दे रहा था, जो उसे और अधिक की चाहत में धकेल रहा था, जैसे वह इस दर्द को कभी खत्म नहीं होने देना चाहती हो। प्रिया ने अपनी आंखें खोलीं और समीर की आंखों में देखा, उसकी आंखों में गहरे समर्पण और तीव्र इच्छा का भाव था। “समीर, अब और इंतजार नहीं होता,” उसने फुसफुसाया, उसकी आवाज कामुकता से भरी हुई थी। समीर ने उसके होंठों पर फिर से आम चूसना किया, यह आम चूसना पहले से कहीं अधिक गहरा और जोशीला था, एक ऐसा आम चूसना जो उनकी आत्माओं को जोड़ रहा था। प्रिया के भीतर की आग अब तेजी से भड़क रही थी, और उसकी हर नस समीर के स्पर्श के लिए तड़प रही थी।
समीर ने प्रिया को अपनी बाहों में उठाया और उसे कार से बाहर निकाल कर उसके घर के दरवाजे तक ले गया, प्रिया उसके शरीर से लिपटी हुई थी। प्रिया ने दरवाजा खोला और समीर को अंदर खींच लिया, जैसे अब एक पल की भी देरी बर्दाश्त नहीं थी। घर के अंदर घुसते ही समीर ने प्रिया को दीवार से सटा दिया और उसके होंठों पर फिर से आम चूसना शुरू कर दिया, उनकी जीभें फिर से एक दूसरे का स्वाद लेने लगीं। प्रिया के हाथ समीर की शर्ट के बटनों पर पहुंच गए और उसने उन्हें तेजी से खोलना शुरू किया, जैसे कोई बाधा हटा रही हो। समीर ने अपनी शर्ट उतारी और प्रिया ने उसे ज़मीन पर फेंक दिया। अब उनके बीच कोई कपड़ा नहीं था। समीर का मजबूत बदन प्रिया के कोमल बदन से चिपक गया, उनकी त्वचा एक-दूसरे की गर्माहट को महसूस कर रही थी।
प्रिया ने समीर के गठीले शरीर पर अपने हाथ फेरे, उसकी पीठ और बाजुओं की मांसपेशियों को महसूस किया, उसकी उंगलियां उसकी त्वचा पर चल रही थीं। समीर ने अपने होंठ प्रिया की गर्दन से नीचे उतारकर उसके तरबूजों पर रख दिए। उसने धीरे से एक तरबूज को अपने मुंह में लिया और मटर को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया, जैसे वह किसी रसीले फल का स्वाद ले रहा हो। प्रिया की एक जोर की चीख निकली, और उसके शरीर में एक तीव्र कंपन दौड़ गया, उसके पैर कांपने लगे। वह अपने सिर को पीछे की ओर झुकाकर समीर के बालों को कसकर पकड़ रही थी, उसकी देह सुख के चरम पर थी। समीर ने एक तरबूज को चूसा और फिर दूसरे तरबूज पर अपने होंठों को उतारा, मटर को जीभ से टटोलते हुए, हर स्पर्श से प्रिया को मदहोश कर रहा था।
प्रिया की सांसें अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं, उसके होंठों से मदहोश कर देने वाली आहें निकल रही थीं। उसके शरीर की हर नस कामुकता से तड़प रही थी, हर कोशिका समीर के स्पर्श के लिए भूखी थी। समीर ने धीरे-धीरे प्रिया की कुर्ती और सलवार को उतारना शुरू किया, हर कपड़े को एक-एक करके हटाया। प्रिया ने भी उसकी मदद की, उसके हाथ कांप रहे थे, और कुछ ही पलों में दोनों एक-दूसरे के सामने पूरी तरह से नग्न खड़े थे, उनके शरीर की सुंदरता एक-दूसरे को मोहित कर रही थी। प्रिया के पूरे शरीर पर बाल नहीं थे, बल्कि वह पूरी तरह से चिकनी और मुलायम थी। समीर की आंखें उसकी खाई पर टिकी थीं, जहां के बाल बेहद मुलायम और घने थे, जो उसे एक रहस्यमयी आभा दे रहे थे। समीर का खीरा अपनी पूरी ताकत में था, और प्रिया की आंखों में एक गहरी चमक आ गई, जो उसकी इच्छा को बयां कर रही थी।
“तुम बहुत सुंदर हो, प्रिया,” समीर ने उसकी खाई की ओर इशारा करते हुए फुसफुसाया, उसकी आवाज में गहरा प्यार और प्रशंसा थी। प्रिया शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी आंखों में एक गहरी इच्छा थी, जो अब और छिपाई नहीं जा सकती थी। समीर ने घुटनों के बल बैठ कर प्रिया की खाई को करीब से देखा, उसकी नाज़ुक बनावट को निहारते हुए। उसने धीरे से अपनी उंगलियों से खाई के बाहरी हिस्सों को सहलाया, उसकी कोमलता को महसूस करते हुए। प्रिया ने अपनी टांगें हल्की सी फैला लीं, समीर के स्पर्श को और गहराई से महसूस करने के लिए, जैसे उसे अंदर आने का आमंत्रण दे रही हो। समीर ने अपनी जीभ निकाली और धीरे से खाई को चाटना शुरू किया, उसके हर कोने को टटोलते हुए। प्रिया ने एक तीव्र आह भरी, उसका शरीर एक धनुष की तरह कमान खींच रहा था, सुख के मारे झटके खा रहा था।
समीर की जीभ प्रिया की खाई को पूरी तरह से चाट रही थी, उसके हर संवेदनशील बिंदु को खोज रही थी, उसे चरम सुख की ओर धकेल रही थी। प्रिया का शरीर झटके खा रहा था, उसके होंठों से मदहोश कर देने वाली कराहें निकल रही थीं, “आह… समीर… और… और तेज़… मुझे और गहराई चाहिए,” प्रिया ने कांपती हुई आवाज में कहा, उसकी सांसें फूल रही थीं। समीर ने उसकी बात सुनी और अपनी चाटने की गति बढ़ा दी, प्रिया की खाई को अपनी जीभ से पूरी तरह से संतुष्ट कर रहा था। प्रिया के भीतर रस छूटना शुरू हो गया था, उसकी खाई से मीठा पानी बह रहा था, जो समीर के होंठों पर लग रहा था। समीर ने उस पानी का स्वाद लिया, वह उसे अमृत के समान लग रहा था, उसे और अधिक उत्तेजित कर रहा था। प्रिया का शरीर अब नियंत्रण से बाहर हो रहा था, वह खुशी और कामुकता के चरम पर थी, पूरी तरह से समीर के हाथों में थी।
समीर ने अपनी जीभ से प्रिया की खाई को तब तक चाटा जब तक प्रिया को पहली बार रस छूटा। उसका शरीर ढीला पड़ गया, और वह समीर के बालों को सहलाने लगी, उसकी उंगलियां उसके सिर में उलझ गईं। “मैं… मैं खत्म हो गई थी, समीर,” उसने हांफते हुए कहा, उसकी आवाज अभी भी कामुकता से भरी हुई थी। समीर ने ऊपर देखा, उसकी आंखों में प्यार और जीत का भाव था, एक गहरा लगाव दिख रहा था। वह उठा और प्रिया को अपने साथ बिस्तर तक ले गया, उसके कोमल शरीर को अपनी बाहों में संभाले हुए। उन्होंने एक-दूसरे को फिर से आम चूसना किया, यह आम चूसना अब और अधिक गहरे और भावुक थे, क्योंकि उनके शरीर की हर सीमा मिट चुकी थी, और वे एक-दूसरे में पूरी तरह से घुल चुके थे।
बिस्तर पर, प्रिया ने समीर को अपने ऊपर धकेल दिया, उसकी आंखें चमक रही थीं। “समीर… अब और इंतजार नहीं होता,” उसने फुसफुसाया, उसकी आवाज में एक अजीब सी बेचैनी थी। समीर ने उसकी टांगों को थोड़ा और फैलाया, प्रिया ने अपनी कमर को ऊपर उठाया और उसके खीरे को प्रिया की खाई के मुहाने पर रखा। प्रिया ने अपनी कमर को ऊपर उठाया, खीरे को अंदर लेने के लिए तैयार, उसकी आंखों में एक गहरी चमक थी। “तुम तैयार हो, मेरी जान?” समीर ने पूछा, उसकी आवाज गहरी और कामुक थी, उसके होंठ प्रिया के गाल पर टिके थे। प्रिया ने जवाब में सिर्फ एक नोक झोक की, अपनी आंखों से उसे आगे बढ़ने का संकेत देते हुए, उसकी इच्छा अब चरम पर थी।
समीर ने धीरे-धीरे, अत्यंत भावुकता के साथ, अपने खीरे को प्रिया की खाई में धकेलना शुरू किया। यह एक धीमा, भावुक प्रवेश था, जिसमें दोनों की सांसें थम सी गईं, जैसे समय एक पल के लिए रुक गया हो। प्रिया ने एक गहरी सांस ली, उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे – यह दर्द नहीं था, बल्कि इतने सालों की दबी हुई इच्छा का पूरा होना था, एक ऐसा पल जिसे उसने वर्षों से संजोया था। खीरा धीरे-धीरे अंदर जा रहा था, प्रिया की खाई को पूरी तरह से भरते हुए, उसकी गर्माहट और गहराई को महसूस कराते हुए। “आह… समीर… पूरा अंदर तक… मुझे महसूस करने दो,” प्रिया ने कराहते हुए कहा, उसकी देह सुख से कांप रही थी। जब खीरा पूरी तरह से अंदर चला गया, तो दोनों एक पल के लिए ऐसे ही रुके रहे, एक-दूसरे की गर्माहट और गहराई को महसूस करते हुए, जैसे दो आत्माएं एक हो गई हों।
“कितना अच्छा लग रहा है, समीर, तुमने मेरी खाई को पूरी तरह से भर दिया,” प्रिया ने फुसफुसाया, उसकी आंखें बंद थीं, उसके चेहरे पर एक परम सुख का भाव था। समीर ने अपने होंठ प्रिया के होंठों पर रखे और उन्हें गहरा आम चूसना दिया, उनकी जीभें फिर से एक-दूसरे से मिलीं। फिर उसने धीरे-धीरे अपनी कमर को चलाना शुरू किया। पहला धका धीमा और गहरा था, एक मधुर शुरुआत। प्रिया ने अपनी कमर को समीर की ओर उठाया, उसके हर धके को स्वीकार करते हुए, उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। उनके शरीर एक रिदम में मिल गए, जैसे सदियों से एक-दूसरे के लिए बने हों, एक ऐसा नृत्य जिसे वे दोनों ही नहीं छोड़ना चाहते थे। समीर की गति बढ़ती गई, और प्रिया की कराहें अब पूरे कमरे में गूंजने लगीं, जो उनकी तीव्र कामुकता का प्रमाण थीं।
“तेज़… समीर… और तेज़… मुझे और चाहिए! मुझे पूरा खोद दो!” प्रिया ने अपनी बाहें समीर की पीठ पर कसते हुए कहा, उसकी आवाज में एक अजीब सी तड़प थी। समीर ने उसकी बात मानी और अपनी गति को तेज कर दिया, अपने पूरे शरीर को प्रिया के ऊपर धकेलते हुए। उसके खीरे ने प्रिया की खाई को अंदर तक खोदा, और हर धके के साथ एक मीठी सी चीख प्रिया के होंठों से निकलती, उसके सिर के बाल बिखर रहे थे। उनका बिस्तर हिलने लगा, और उनके पसीने से भीगे शरीर एक-दूसरे से चिपक गए, उनकी त्वचा पर नमी और गर्माहट थी। समीर प्रिया के तरबूजों को अपने हाथों में दबा रहा था, और प्रिया अपने पैरों को समीर की कमर के चारों ओर लपेटे हुए थी, उसे अपनी ओर खींचते हुए, जैसे वह कभी अलग न होना चाहती हो।
“मैं… मैं… आ रही हूँ, समीर! आह… हाँ… बस… हाँ!” प्रिया ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, उसकी पूरी देह एक ज्वालामुखी की तरह फट रही थी। समीर ने अपनी गति को और तेज कर दिया, अपने पूरे शरीर को प्रिया के ऊपर धकेलते हुए, अपने खीरे को उसकी खाई में और गहरा घुसते हुए। प्रिया के शरीर में एक तीव्र कंपकंपी छूटी, और उसके भीतर से गर्म रस छूटना शुरू हो गया, उसकी खाई से मीठे पानी की धार निकल पड़ी। समीर ने भी महसूस किया कि वह अपने चरम पर पहुंच रहा है। उसने एक आखिरी जोर का धका दिया, और उसका खीरा प्रिया की खाई में गहरा घुस गया, अपने सारे रस को अंदर उड़ेलते हुए, उसे पूरी तरह से भरते हुए। दोनों एक-दूसरे पर ढीले पड़ गए, उनकी सांसें तेज और भारी थीं, उनके शरीर पूरी तरह से संतुष्ट थे।
खुदाई के बाद, वे कुछ देर तक एक-दूसरे से चिपके रहे, उनके शरीर पसीने से लथपथ थे, लेकिन एक अजीब सी शांति और संतुष्टि उन्हें घेरे हुए थी। प्रिया ने समीर को कसकर पकड़ा हुआ था, उसकी पीठ पर अपना चेहरा दबाए हुए थी, उसकी उंगलियां उसके बालों में उलझी हुई थीं। समीर ने भी प्रिया को अपनी बाहों में भर रखा था, उसके सिर को सहला रहा था। उनके दिल की धड़कनें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, लेकिन उनके भीतर एक गहरी संतुष्टि और शांति छा चुकी थी, जो इस अनुभव की गहराई को बयां कर रही थी। “मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ हमारे बीच हो सकता है, समीर,” प्रिया ने फुसफुसाया, उसकी आवाज अब नरम और शांत थी।
समीर ने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, “मैं भी प्रिया। पर यह खूबसूरत था, नहीं? बिल्कुल जादुई।” प्रिया ने ऊपर देखा, उसकी आंखों में प्यार और खुशी की चमक थी, जो चंद्रमा की रोशनी में और भी सुंदर लग रही थी। “बहुत खूबसूरत,” उसने कहा, और समीर के गाल पर एक हल्का सा आम चूसना किया। उन्होंने एक-दूसरे को फिर से आम चूसना किया, यह आम चूसना अब पहले से कहीं अधिक कोमल और प्रेमपूर्ण था, जिसमें केवल प्यार और अपनापन था। वे जानते थे कि आज रात जो कुछ हुआ, उसने उनकी दोस्ती को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया था, एक ऐसा आयाम जहां उनके दिल और आत्माएं एक हो चुकी थीं। वे एक-दूसरे के भीतर ऐसे खो चुके थे, जैसे दो आत्माएं वर्षों बाद अपने घर लौट आई हों। उन्होंने एक-दूसरे को कसकर गले लगाया और एक साथ सो गए, उनके शरीर एक-दूसरे की गर्माहट में लिपटे हुए थे, एक अटूट बंधन में बंधे हुए, जहां केवल प्रेम और संतुष्टि थी।