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मखमली रात की प्यासी खुदाई

मखमली रात की प्यासी खुदाई —> रात के ग्यारह बज चुके थे और पूरे घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। समीर अपने कमरे में लेटा हुआ खिड़की से बाहर देख रहा था, लेकिन उसका मन कहीं और ही भटक रहा था। उसकी भाभी, रीना, जिसकी उम्र लगभग 34 वर्ष थी, आज घर में अकेली थी क्योंकि समीर के बड़े भाई एक बिज़नेस ट्रिप पर शहर से बाहर गए हुए थे। रीना भाभी की शारीरिक बनावट किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थी। उनके शरीर का हर अंग जैसे सांचे में ढला हुआ था। उनकी ऊँचाई मध्यम थी, लेकिन उनके शरीर के घुमाव बहुत ही गहरे और उत्तेजक थे। जब वह चलती थीं, तो उनके भारी और सुडौल पिछवाड़े की थिरकन समीर की धड़कनें बढ़ा देती थी। रीना अक्सर घर में पतली सूती साड़ियाँ पहनती थीं, जिनमें से उनके उभरे हुए और रसीले तरबूज साफ़ झलकते थे। उन तरबूजों की गोलाई इतनी मुकम्मल थी कि समीर अक्सर उन्हें घंटों निहारने का सपना देखता था।

समीर और रीना के बीच हमेशा से एक अनकहा सा रिश्ता था। रीना उसे बहुत प्यार करती थी, लेकिन उस प्यार में धीरे-धीरे एक अलग ही कशिश पैदा होने लगी थी। समीर 24 साल का एक गबरू जवान था, जिसके कंधे चौड़े थे और शरीर में जवानी का उबाल था। वह अक्सर रीना भाभी की मदद के बहाने उनके करीब जाने की कोशिश करता था। रीना को भी समीर का इस तरह उसके करीब आना पसंद था, हालांकि वह इसे कभी ज़ाहिर नहीं होने देती थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ जाती थी जब समीर उसके पल्लू को ठीक करने में मदद करता या रसोई में उसके करीब खड़ा होता। वह आकर्षण अब केवल भावनात्मक नहीं रह गया था, बल्कि उसमें जिस्मानी भूख भी शामिल हो चुकी थी।

उस रात समीर प्यास के बहाने रसोई की ओर गया, लेकिन उसका असली मकसद रीना के कमरे के पास से गुजरना था। उसने देखा कि रीना के कमरे का दरवाज़ा हल्का सा खुला हुआ था। अंदर ज़ीरो वाट का मद्धम नीला बल्ब जल रहा था। समीर ने धीरे से झाँक कर देखा, रीना भाभी बिस्तर पर करवट लेकर लेटी हुई थीं। उन्होंने एक बहुत ही पतली और पारदर्शी नाइटी पहनी हुई थी, जो उनके शरीर से चिपकी हुई थी। नाइटी के ऊपर से ही उनके भारी तरबूजों का उभार और उनके ऊपर मौजूद नन्हे मटर साफ़ दिखाई दे रहे थे। समीर का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और उसके पजामे के अंदर उसका खीरा धीरे-धीरे सिर उठाने लगा। वह वहीं जम सा गया, उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि अंदर जाए, लेकिन उसकी वासना उसे पीछे हटने नहीं दे रही थी।

अचानक रीना ने करवट बदली और उसकी नज़र दरवाज़े पर खड़े समीर पर पड़ी। समीर सकपका गया और पीछे हटने लगा, लेकिन रीना ने उसे आवाज़ दी, “समीर? तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” समीर की आवाज़ जैसे गले में ही फंस गई थी। वह हकलाते हुए बोला, “भाभी… वो… पानी पीने आया था… बस आपको देख लिया…” रीना मुस्कुराई और धीरे से उठकर बैठ गई। नाइटी का गला थोड़ा ढीला था, जिससे उसके तरबूजों की गहरी खाई समीर को साफ़ नज़र आने लगी। रीना ने अपनी उँगलियों से अपने बिखरे बालों को पीछे किया और समीर को अंदर आने का इशारा किया। समीर के पैर काँप रहे थे, लेकिन वह जैसे किसी जादुई खिंचाव में खिंचा चला गया। कमरे में पहुँचते ही रीना ने धीरे से दरवाज़ा बंद कर दिया और समीर की आँखों में आँखें डालकर देखने लगी।

कमरे का वातावरण एकदम बोझिल और कामुक हो गया था। रीना समीर के एकदम करीब आई, इतनी करीब कि समीर को उसकी तेज़ साँसों की गर्मी और उसके बदन की भीनी-भीनी खुशबू महसूस होने लगी। समीर ने हिम्मत जुटाकर रीना की कमर पर हाथ रखा। जैसे ही उसके हाथों ने रीना की मखमली खाल को छुआ, रीना के पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। उसने अपनी आँखें मूँद लीं और एक ठंडी आह भरी। समीर ने धीरे-धीरे अपने हाथ ऊपर बढ़ाए और रीना के रेशमी कंधों को सहलाने लगा। दोनों के बीच की झिझक अब धुएँ की तरह उड़ चुकी थी। समीर ने अपने होंठ रीना के माथे पर रखे और फिर धीरे से नीचे की ओर बढ़ते हुए उसके गुलाबी होंठों को चूसना शुरू कर दिया। यह उनके बीच का पहला स्पर्श था जो वासना और प्यार की आग को भड़काने के लिए काफी था।

समीर की जीभ अब रीना के मुँह के अंदर सैर कर रही थी, और रीना भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दे रही थी। समीर ने धीरे से रीना की नाइटी के स्ट्रैप्स को नीचे गिराया, जिससे उसके दोनों विशाल तरबूज आज़ाद होकर बाहर निकल आए। समीर की आँखें उन पर टिक गईं। वह इतने गोरे और गोल थे कि समीर का मन किया कि उन्हें कच्चा ही खा जाए। उसने अपने दोनों हाथों में उन तरबूजों को भर लिया और उन्हें हल्के-हल्के दबाने लगा। रीना की कराहें अब पूरे कमरे में गूँजने लगी थीं। समीर ने अपना मुँह नीचे झुकाया और एक तरबूज के ऊपर मौजूद सख्त मटर को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। रीना ने समीर का सिर अपने सीने से ज़ोर से चिपका लिया और उसके बालों में अपनी उँगलियाँ फँसा दीं।

अब समीर ने रीना को पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया था। रीना का शरीर चाँदनी की तरह चमक रहा था। उसके जाँघों के बीच की गहरी खाई अब समीर के सामने थी, जहाँ काले मखमली बाल उगे हुए थे। समीर ने धीरे से अपनी उँगलियाँ उस खाई की ओर बढ़ाईं। जैसे ही उसकी उँगलियों ने उस गीली खाई को छुआ, रीना उछल पड़ी। उसकी खाई से निकलता हुआ प्राकृतिक रस अब समीर की उँगलियों पर लग चुका था। समीर ने अपनी उँगलियों से उस खाई को खोदना शुरू किया। रीना अपनी कमर ऊपर उठाने लगी और समीर के नाम की सिसकियाँ भरने लगी। “ओह समीर… और तेज़… प्लीज… रुकना मत…” समीर अब रुकने वाला नहीं था। उसने अपना पजामा उतारा और अपना लंबा और लोहे जैसा सख्त खीरा बाहर निकाला।

जब रीना ने समीर के उस विशाल खीरे को देखा, तो उसकी आँखें विस्मय से भर गईं। उसने अपने काँपते हाथों से उस खीरे को पकड़ा और उसे सहलाने लगी। वह खीरा इतना गरम और कड़क था कि रीना की उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुँच गई। उसने धीरे से उस खीरे को अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगी। समीर की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा, उसे इतनी ज़बरदस्त खुशी मिल रही थी कि उसका मन कर रहा था कि अभी अपना सारा रस छोड़ दे। लेकिन उसने खुद पर काबू पाया और रीना को बिस्तर पर लिटा दिया। उसने रीना की दोनों टाँगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे की नोक को उसकी गीली और तंग खाई के मुहाने पर टिका दिया।

समीर ने एक गहरा धक्का दिया और उसका खीरा आधा उस गहरी खाई के अंदर समा गया। रीना के मुँह से एक दर्दभरी लेकिन सुखद चीख निकली। उसकी खाई बहुत तंग थी, क्योंकि काफी समय से वहां कोई खुदाई नहीं हुई थी। समीर ने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया। हर धक्के के साथ उसका खीरा और गहराई तक जाने लगा। अब पूरा का पूरा खीरा उस खाई के अंदर समा चुका था। रीना ने अपनी टाँगें समीर की कमर के चारों ओर कस लीं। अब शुरू हुई असली खुदाई। कमरे में सिर्फ जिस्मों के टकराने की आवाज़ और उनकी तेज़ होती साँसों का शोर था। समीर अपनी पूरी ताकत से रीना की खाई को खोद रहा था और रीना हर वार को बड़े ही चाव से झेल रही थी।

खुदाई के दौरान समीर ने रीना को उल्टा लेटा दिया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। पीछे से रीना के भारी पिछवाड़े के बीच जब समीर का खीरा अंदर-बाहर हो रहा था, तो नज़ारा बहुत ही कामुक था। रीना अपने दोनों हाथों से बिस्तर की चादर को कस कर पकड़े हुए थी और उसका सिर तकिये में धंसा हुआ था। वह बस मदहोश होकर चिल्ला रही थी। समीर की रफ्तार अब बेकाबू हो चुकी थी। उसे महसूस हो रहा था कि अब उसका रस निकलने ही वाला है। रीना भी अपने रस के छूटने के करीब थी। उसने पीछे मुड़कर समीर को देखा और बोली, “समीर… मैं जा रही हूँ… मेरा रस निकलने वाला है… डाल दो पूरा…” समीर ने आखिरी कुछ ज़ोरदार धक्के मारे और अपना सारा गरम रस रीना की खाई के अंदर उड़ेल दिया।

कुछ ही पलों बाद रीना का शरीर भी बुरी तरह से काँपने लगा और उसकी खाई से भी रसों की धारा बह निकली। दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कमरे की हवा में एक अजीब सी गंध फैल गई थी जो प्यार और तृप्ति की गंध थी। समीर ने रीना के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में भर लिया। रीना के चेहरे पर एक असीम शांति थी, जैसे उसे बरसों बाद अपनी प्यास बुझाने का मौका मिला हो। दोनों काफी देर तक वैसे ही लेटे रहे, उनकी धड़कनें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। उस रात की खुदाई ने न केवल उनके जिस्मों को मिलाया था, बल्कि उनकी आत्माओं के बीच के उस पर्दे को भी हटा दिया था जो समाज की पाबंदियों ने खड़ा किया था।

अगली सुबह जब सूरज की किरणें कमरे में आईं, तो रीना समीर की बाहों में ही सोई हुई थी। उसकी नाइटी ज़मीन पर पड़ी थी और उसका खुला हुआ शरीर समीर की मर्दानगी की गवाह दे रहा था। समीर ने उसे जगाया और दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में वह इज़हार देखा जो अब तक अनकहा था। उन्हें पता था कि यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है। यह उनकी पहली खुदाई थी, लेकिन आखिरी नहीं। उस मखमली रात ने उन्हें एक ऐसी दुनिया में पहुँचा दिया था जहाँ सिर्फ उनकी इच्छाएँ और उनकी जिस्मानी ज़रूरतें ही मायने रखती थीं। भाभी और देवर का यह रिश्ता अब एक नए मोड़ पर खड़ा था, जहाँ हर रात एक नई खुदाई का इंतज़ार कर रही थी।

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