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माँ बेटे की चुदाई की वो काली रात

Mom Sex Lover Story Hindi

सबसे पहले मैं अपनी माँ के बारे में बता दूँ। मेरी माँ का नाम सुधा है और उनकी उम्र लगभग 38 साल होगी। उनका फिगर एकदम परफेक्ट था। मेरे पिता एक गवर्नमेंट ऑफिस में क्लर्क थे और वो दारू बहुत पीया करते थे। हम तीन लोगों का परिवार था जिसमें मेरी माँ, बाप और मैं रहते थे। Mom Sex Lover Story Hindi

हम लोग मुंबई नगरी में एक छोटे से फ्लैट में रहते थे। हमारे घर में एक ड्रॉइंग रूम और एक बेडरूम था। बेडरूम बहुत ही छोटा था जिसमें एक पलंग ही आ सकता था। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरे पिता दारू बहुत पीया करते थे। दारू पीकर मेरी माँ को मारते थे।

ये बात उस समय की है जब मैं क्लास 10 में पढ़ा करता था। एक दिन रात को मेरे पिता रात को दारू पीकर आए और दरवाज़े को जोर-जोर से मारने लगे। मैं और मेरी माँ डर गए और मेरी माँ ने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो पिता ने मेरी माँ को मारने लगे और कहने लगे दरवाज़ा खोलने में इतनी देर क्यों लगी।

मेरी माँ कुछ बोलती उससे पहले मेरे पिता ने गालियाँ देना शुरू कर दिया। कहने लगे बहन की लोड़ी, कुतिया, हरामजादी। मेरी माँ संभाल पाती, मेरे पिता ने मेरी माँ पर हमला बोल दिया और उसका ब्लाउज़ फाड़ दिया और बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगे।

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मेरी माँ एक मर्द आदमी के सामने रेसिस्ट नहीं कर पाई और इतने में पिता ने उनकी ब्रा निकालकर फेंक दी और बूब्स को अपने होंठों में लेकर चूसने लगे। कुछ देर बाद मेरी माँ का चेहरा लाल हो गया और वो सिसकारियाँ भरने लगी। मैं रूम में से ये सब कुछ देख रहा था।

कुछ ही देर बाद मेरा पिता मेरी माँ के बूब्स चूसते-चूसते वहीं पर ही सो गया। मेरी माँ अर्धनग्न होकर रात भर वहीं बैठकर रोती रही और वो भी वहीं पर सो गई। सुबह मेरी माँ जल्दी उठी और अपने आप को संभालकर घर के काम में लग गई। अगले दिन मेरी माँ बहुत उदास थी पर वो अपने आप को मैनेज कर रही थी। ज़िंदगी बस यहीं ही चल रही थी।

कुछ हफ्तों बाद शाम को मेरी माँ टेलरिंग कर रही थी कि दो पड़ोसियों ने आकर बताया कि पिता का एक्सीडेंट हो गया है और वो मर गए हैं। मेरी माँ सुनकर बेहोश हो गई। कुछ देर बाद होश आया तो वो फूट-फूटकर रोने लगी। सारे रिश्तेदार आए और सारे क्रिया-करम पूरे किए।

कुछ टाइम तो माँ भी उदास रही पर वो जल्द ही संभल गई और ज़िंदगी पहले की तरह ही चलने लगी। मेरी माँ को ज्यादा अफसोस नहीं था। मेरी माँ टेलरिंग करके घर चला लेती थी। पिता के ऑफिस से 7-8 लाख मिले, उनको बैंक में डिपॉज़िट करवा दिया।

मेरे पिता के मरने के बाद मैंने देखा कि मेरी माँ मेरा कुछ ज्यादा ही खयाल रखती है। मुझे कहीं पर बाहर नहीं जाने देती। सारा दिन अपने साथ ही रखती है। मैं और मेरी माँ एक साथ पलंग पर सोया करते थे। मैं अपनी माँ के ऊपर हाथ रखकर सोया करता था।

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हाथ रखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाया करता था पर मुझे कुछ सेक्स ज्ञान नहीं था। मेरा लंड मेरी माँ की गांड से टकराया करता था। मेरी माँ भी अपनी गांड मेरे लंड से रगड़ा करती थी और सो जाया करती थी। ज़िंदगी बस यहीं ही कट रही थी। एक दिन मैं स्कूल गया था।

पीछे से मेरी माँ की तबीयत खराब हो गई तो माँ डॉक्टर को दिखाकर आई तो डॉक्टर ने कुछ दिनों तक काम न करने को कहा। मेरी माँ फोन करके मेरी मौसी की लड़की को बुला लिया। मेरे स्कूल से घर पहुँचने से पहले ही वो आ चुकी थी। उसका नाम उमा था। वो बहुत ही तेज़ लड़की थी और वो कॉलेज में पढ़ती थी।

मैं और उमा अच्छे दोस्त की तरह थे। मैं उमा से मिला और उसके कॉलेज के बारे पूछा तो उसने कहा कि बाद में बताऊँगी, मैं कहीं भागे-भागे जा रही हूँ। मेरी माँ कमरे में बेड रेस्ट पर थी। उमा ने रात का खाना बनाया और खाकर सोने की तैयारी करने लगे। मेरी माँ ने कहा कि मैं और उमा साथ ड्रॉइंग रूम में सो जाएँ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं और उमा साथ सो गए। मैंने अपना हाथ उमा पर रखा तो उमा कह रही थी ये क्या कर रहे हो। मैंने कहा मैं ऐसे ही सोता हूँ तो उमा जवाब देती है बेटा तुम अब बड़े हो गए, तुम्हारा औज़ार ही मेरे अंदर घुसने को बेताब हो रहा है। तो मैंने कहा कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा तो उमा कहती अभी समझा देती हूँ।

उसने पलटकर मेरे होंठों पर किस करना शुरू कर दिया और मेरे लंड को पकड़ लिया। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं उमा को चूमने लगा और उमा मेरे और अपने कपड़े उतारकर 69 की पोज़िशन में होने को कहा। तो मैंने पूछा इससे क्या होगा तो उसने कहा कि जल्दी जैसा मैं कहती वैसा करो और बातें मत करो नहीं तो तुम्हारी माँ जाग जाएगी।

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कुछ देर उसने अपना पानी मेरे मुँह और मैंने अपना स्पर्म उसके मुँह छोड़ दिया और वो फिर से मेरे लंड को चूसने लगी और मेरा लंड फिर से गरम रॉड की तरह खड़ा हो गया और वो कहती वाह क्या लंबा लंड है तेरा। उमा टाँगें फैलाकर बैठ गई और मुझे अपना लंड चूत के अंदर डालने को बोला।

मैंने अपना लंड जैसे उसकी चूत पर रख धक्का मारा तो मेरा लंड स्लिप होकर उसकी चूत से साइड से निकल गया। उसकी चूत बहुत ही टाइट थी। उसने कहा रुक और बाथरूम से जाकर तेल की बॉटल ले आई और अपनी चूत को लगाया और मेरे लंड की भी मालिश कर।

उसके बाद फिर मैंने धक्का मारा तो वो चिल्ला उठी। ये मेरी माँ ने आवाज़ दी क्या हुआ उमा तो उमा ने कहा कुछ नहीं कॉकरोच था मौसी। इतने में मेरा लंड आधा उसकी चूत में जा चुका था। उमा दर्द से काँप उठी थी और अपने होंठ मेरे होंठों पर रखकर चूस रही थी।

इतने में मैंने तीन-चार धक्के लगाए और मेरा लंड उसकी चूत में गुम हो गया था। उमा अपनी गांड उठा-उठाकर आनंद ले रही थी। कुछ ही देर में उमा झड़ गई और ढीली पड़ गई। और मैं भी कुछ ही देर उसकी चूत में झड़ गया। और कुछ देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे और बाद में उमा ने अपने कपड़े ठीक किए और मुझे भी अपने कपड़े ठीक करने को कहा। हम दोनों रात को सो गए।

सुबह उठकर मैं अपने कॉलेज चला गया और जब शाम को आया तो उमा मेरा इंतज़ार कर रही थी। आते ही पूछा कैसी लगी रात को जन्नत की सैर। मैंने कहा अब रात को रोज़ की जन्नत में ही कटेगी कहकर वो मेरे चाय बनाने चली। इस प्रकार एक हफ्ते तक इसी तरह से चुदाई चलती रही।

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एक हफ्ते बाद मेरी मौसी भी मेरी माँ का हाल पूछने आई और उमा को अपने साथ घर ले गई। उमा बहुत ही उदास हो गई थी। अब मेरी माँ भी ठीक हो चुकी थी। शाम को खाना खाने के बाद मैंने पूछा माँ आपको कौन सी बीमारी हो गई थी तो उनका चेहरा लाल हो गया।

पहले तो कुछ नहीं बोली, बाद में उन्होंने हिम्मत करके सारी बात बता दी। उन्होंने बताया कि उनकी एमसी ढंग से नहीं आ रही थी और एमसी में खून भी ज्यादा बह गया था। तो मैंने पूछा ये क्या होती है तो वो पहले हँसने लगी और बाद में सारे वुमन डिसॉर्डर को समझा दिया।

उस दिन से मेरी माँ का नज़रिया मुझसे बात करने बदल ही गया था। शाम को एक कस्टमर का डीप कट ब्लाउज़ पहनकर मुझसे पूछा राज ये ब्लाउज़ कैसे लग रहा है तो मैं चकित ही रह गया। मेरी माँ के बूब्स ब्लाउज़ से बाहर आ रहे थे। मैंने कहा माँ तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो। तुम एकदम हीरोइन लग रही हो।

मेरी माँ कहती हट बेशर्म। मेरी माँ ने कहा मैं कहाँ हीरोइन कहाँ। उसके बाद मेरी माँ ने मेरे सामने ही ब्लाउज़ चेंज किया। मैं सब कुछ देखकर अपने आप को काबू में नहीं रख पाया और पैंट अंदर ही डिस्चार्ज हो गया। मेरी माँ का मुझसे बातें करने का नज़रिया ही बदल गया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं बहुत खुश था। अब मैं और मेरी माँ खुलकर बातें करते थे। मेरी माँ मुझसे अपने व्हिस्पर (कोटेक्स, स्टेफ्री, पैड) मँगवाया करती थी। एक रात को जब मैं और मेरी माँ साथ सो रहे थे तो मैं अपना लंड माँ की गांड से रगड़ रहा था। माँ कुछ नहीं बोल रही थी।

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मैंने अपना हाथ उनकी बूब्स पर फेरने लगा। मेरी माँ की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं था, वो सोने का नाटक कर रही थी। मैंने ब्लाउज़ खोल दिया और बूब्स को ब्रा से बाहर निकाल अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे बोब को जोर से दबाने लगा।

मैंने बूब्स पर जोर से काटा तो मेरी माँ जाग गई और मुझ पर बनावटी गुस्सा करने लगी पर मैंने अपनी माँ की एक भी न सुनी और बूब्स को मुँह में लेकर उनका दूध पीने लगा। मेरी माँ के मुँह से सिसकारियों की आवाज़ आ रही थी। कुछ ही देर में वो अपना विरोध छोड़कर साथ देने लग गई और मेरे होंठों को किस करने लग गई।

मैंने कहा आई लव यू मॉम तो मेरी माँ ने जवाब दिया आई लव यू टू माय सन। मैंने माँ को पूरी तरह नंगा कर दिया और खुद भी अपने कपड़े उतार फेंके। माँ की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपना लंड माँ की चूत पर रगड़ना शुरू किया। माँ सिसकारियाँ भर रही थीं – आह्ह्ह राज बेटा, कर ना… जल्दी डाल अंदर।

मैंने धीरे से अपना लंड माँ की चूत में घुसाया। माँ की चूत बहुत टाइट और गरम थी। माँ ने अपनी टाँगें फैला दीं और मैंने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड माँ की चूत में समा गया। माँ चिल्लाई – आआह्ह्ह बेटा… कितना बड़ा है तेरा… फाड़ डालेगी मेरी चूत को। लेकिन अब माँ खुद कमर उठा-उठाकर साथ दे रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं तेज़-तेज़ धक्के मारने लगा। कमरे में फच-फच की आवाज़ गूँज रही थी। माँ की बड़ी-बड़ी चुचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। मैं उन्हें मसलता हुआ चूस रहा था। माँ बोल रही थीं – आह्ह्ह राज… चोद मुझे… अपनी माँ को चोद… कितने दिनों से तरस रही हूँ मैं… जोर से बेटा… फाड़ दे मेरी चूत।

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मैंने स्पीड बढ़ा दी और माँ को डॉगी स्टाइल में कर लिया। माँ की गांड बहुत मस्त थी। मैंने पीछे से लंड डाला और गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदने लगा। माँ पागल हो रही थीं – हाँ बेटा… ऐसे ही… मार थप्पड़… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद अपनी माँ रंडी को। कुछ देर बाद माँ झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कसकर जकड़ लिया और पानी छोड़ दिया। मैं भी अब नहीं रुक पाया। मैंने माँ को फिर सीधा लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर तेज़ धक्के मारने लगा। माँ की आँखें बंद थीं और वो आनंद में डूबी हुई थीं। आखिर मैं झड़ने वाला था।

मैंने कहा – माँ… मैं आने वाला हूँ। माँ बोलीं – अंदर ही छोड़ दे बेटा… अपनी माँ के अंदर… भर दे मुझे अपने बीज से। मैंने जोरदार झटके मारते हुए सारा माल माँ की चूत में छोड़ दिया। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। माँ ने मुझे किस किया और बोलीं – बेटा, आज से मैं सिर्फ तेरी हूँ। तू जब चाहे मुझे चोदना। मैंने मुस्कुराकर कहा – आई लव यू मॉम। उस रात के बाद हमारी ज़िंदगी बदल गई। अब हर रात माँ और मैं एक-दूसरे के शरीर का आनंद लेते थे। माँ मेरी पत्नी की तरह हो गई थीं और मैं उनका पति।

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