मैडम माया की चु@@ई—>मई की उस तपती दोपहर में पूरा शहर जैसे आग उगल रहा था, लेकिन माया मैडम के ड्राइंग रूम में एयर कंडीशनर की ठंडी हवा एक अलग ही सुकून दे रही थी। आर्यन, जो कभी उनका पसंदीदा छात्र हुआ करता था, आज पांच साल बाद उनसे मिलने आया था। आर्यन अब एक गबरू जवान बन चुका था, जिसकी चौड़ी छाती और मजबूत बाजू उसकी मेहनत की गवाही दे रहे थे। माया मैडम सोफे पर बैठी थीं, उनकी उम्र अब बत्तीस के पार थी, लेकिन उनके शरीर का ढाल और निखार पहले से कहीं ज्यादा गहरा और नशीला हो गया था। उन्होंने एक गहरे नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी थी, जो उनके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी।
माया मैडम का शरीर किसी तराशे हुए संगमरमर की मूर्ति जैसा था, जिसमें उनके रेशमी बदन के घुमाव देखते ही बनते थे। साड़ी के पतले कपड़े से उनके बड़े-बड़े रसीले तरबूज साफ़ झलक रहे थे, जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उनके तरबूजों की गोलाई इतनी गहरी थी कि बीच की लकीर किसी को भी मदहोश कर दे। आर्यन की नजरें बार-बार उनके ब्लाउज के भीतर छिपे उन मटरों को ढूँढ रही थीं, जो शायद ठंड की वजह से साड़ी के ऊपर से ही अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे थे। माया का पिछवाड़ा सोफे पर इस तरह फैला हुआ था कि उसकी विशालता देखकर आर्यन के भीतर का तापमान बढ़ने लगा था।
बातों-बातों में पुरानी यादें ताजा होने लगीं और माहौल में एक अजीब सी गर्मी घुलने लगी। आर्यन ने गौर किया कि मैडम की नजरों में अब वो टीचर वाला सख्त अनुशासन नहीं, बल्कि एक औरत की दबी हुई प्यास थी। जब उन्होंने झुककर चाय की प्याली टेबल पर रखी, तो उनके तरबूज साड़ी से बाहर निकलने को बेताब दिखने लगे। आर्यन का खीरा उनकी पैंट के अंदर अब पूरी तरह से अकड़ चुका था, जिसे संभालना उसके लिए मुश्किल हो रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि मैडम भी उसकी बढ़ती हुई उत्तेजना और उसके भारी होते खीरे को अपनी तिरछी नजरों से देख रही थीं और मुस्कुरा रही थीं।
आर्यन ने हिम्मत जुटाई और अपना हाथ धीरे से मैडम के गोरे हाथ पर रख दिया। एक पल के लिए जैसे समय रुक गया, दोनों की सांसें तेज हो गईं। माया ने अपना हाथ हटाया नहीं, बल्कि आर्यन की उंगलियों को अपने हाथ में भींच लिया। उनकी आंखों में एक गहरा संघर्ष था, जो धीरे-धीरे समर्पण में बदल रहा था। आर्यन ने उनके करीब सरकते हुए अपनी उंगलियां उनके चेहरे पर फेरीं, जिससे उनके बदन में एक सिहरन दौड़ गई। मैडम के चेहरे पर शर्म की लाली दौड़ गई, लेकिन उनकी सांसों की बढ़ती रफ्तार बता रही थी कि उनके भीतर की खाई अब गीली होने के लिए तड़प रही है।
आर्यन ने धीरे से अपने होंठ मैडम के होंठों के पास लाए और हमारी पत्तियों का स्पर्श हुआ। मैडम ने अपनी आँखें बंद कर लीं और आर्यन के गले में अपनी बाहें डाल दीं। यह स्पर्श इतना गहरा था कि दोनों के भीतर बरसों से दबी हुई आग भड़क उठी। आर्यन ने अपनी उंगलियों से उनके साड़ी के पल्लू को धीरे से नीचे गिराया, जिससे उनके दोनों विशाल तरबूज अब सिर्फ एक पतले ब्लाउज की कैद में थे। आर्यन ने अपने हाथों से उन तरबूजों को सहलाना शुरू किया, तो मैडम के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। उन्होंने आर्यन के सिर को अपने सीने से लगा लिया, जैसे वो इन तरबूजों को पूरी तरह उसे सौंप देना चाहती हों।
आर्यन अब रुकने वाला नहीं था, उसने धीरे से ब्लाउज के हुक खोले और मैडम के दूधिया तरबूज पूरी तरह आजाद हो गए। उनके बीच के गुलाबी मटर अब पूरी तरह सख्त हो चुके थे। आर्यन ने अपना मुँह एक मटर पर रखा और उसे धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, जबकि दूसरे हाथ से दूसरे तरबूज को मसलने लगा। मैडम की कराहें अब कमरे की खामोशी को चीर रही थीं, वो अपना पिछवाड़ा आर्यन की जांघों पर रगड़ने लगीं। आर्यन ने महसूस किया कि मैडम की रेशमी खाई से अब रस निकलने लगा है, जिसने उनकी पेन्टी को पूरी तरह भिगो दिया था। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर उनकी खाई के बालों को छुआ और फिर अपनी उंगली से खोदना शुरू किया।
मैडम की हालत अब बेकाबू हो रही थी, उन्होंने आर्यन की पैंट की चेन खोली और उसका गरम और लंबा खीरा बाहर निकाल लिया। आर्यन का खीरा अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ उनके सामने खड़ा था, जिसे देखकर मैडम की आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने बिना देर किए उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं। खीरा चूसने के उस अहसास ने आर्यन के पूरे शरीर में बिजली दौड़ा दी। वो उनके सिर को पकड़कर अपने खीरे को उनके हलक तक उतारने लगा। मैडम बड़े चाव से उस खीरे का रस चख रही थीं, उनकी जीभ खीरे के हर कोने को सहला रही थी।
अब समय आ गया था उस असली खेल का जिसके लिए दोनों तड़प रहे थे। आर्यन ने मैडम को सोफे पर ही उल्टा लेटा दिया और उनके भारी पिछवाड़े को ऊपर उठाया। पीछे से देखने पर उनकी खाई और पिछवाड़े का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं था। आर्यन ने अपने खीरे को उनकी गीली खाई के द्वार पर रखा और एक ही झटके में आधा खीरा अंदर उतार दिया। मैडम के मुँह से एक चीख निकली, लेकिन वो दर्द की नहीं बल्कि चरम आनंद की थी। आर्यन ने पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ उसके खीरे की जड़ मैडम की खाई से टकरा रही थी और एक थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।
मैडम अपनी हथेलियां सोफे पर टिकाए हुए हर धक्के को गहराई से महसूस कर रही थीं। वो चिल्ला रही थीं, “हाँ आर्यन, और तेज… अपनी मैडम को आज पूरी तरह खोद डालो, मेरा सारा रस निकाल दो!” आर्यन की रफ्तार अब तूफानी हो चुकी थी, पसीने से लथपथ दोनों के शरीर एक दूसरे से चिपक रहे थे। उसने मैडम को सीधा किया और सामने से खोदना शुरू किया। मैडम ने अपनी टांगें आर्यन की कमर पर लपेट लीं ताकि वो उसके खीरे को अपनी कोमल खाई की गहराई तक महसूस कर सकें। आर्यन के हर प्रहार पर मैडम के तरबूज पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके मटर और भी लाल हो गए थे।
खुदाई की यह प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर थी। आर्यन का खीरा अब फटने को तैयार था और मैडम की खाई भी पूरी तरह से रस से लबालब भर चुकी थी। आर्यन ने अपनी गति और तेज कर दी, मैडम के बदन में जोर-जोर से झटके लगने लगे और अचानक उन्होंने आर्यन को कसकर जकड़ लिया। मैडम का रस छूटने लगा, उनकी खाई की मांसल दीवारें आर्यन के खीरे को कसने लगीं। ठीक उसी पल आर्यन ने भी अपना सारा गरम रस मैडम की खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक दूसरे की बाहों में ढह गए, उनकी सांसें तेज थीं और शरीरों से भाप निकल रही थी।
कुछ देर तक दोनों खामोश लेटे रहे, उस दिव्य सुख को महसूस करते हुए जो अभी-अभी उन्होंने पाया था। मैडम का चेहरा गुलाबी पड़ चुका था और उनकी आंखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी। आर्यन ने उनके माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में समेट लिया। अब वो सिर्फ एक टीचर और स्टूडेंट नहीं थे, बल्कि दो ऐसे रूह बन चुके थे जिन्होंने जिस्मानी भूख और प्यार की उस दहलीज को पार कर लिया था जहाँ शर्म का कोई वजूद नहीं रहता। कमरे में फैली वो मदहोश कर देने वाली गंध उनके बीच हुई उस भीषण खुदाई की गवाही दे रही थी, जिसने उनके रिश्ते को हमेशा के लिए बदल दिया था।