रिया साली की मदहोश चु@@ई—>उस दोपहर की खामोशी में एक अजीब सी गर्माहट थी, जो सिर्फ मौसम की नहीं बल्कि उन एहसासों की थी जो समीर और उसकी साली रिया के बीच पनप रहे थे। रिया पिछले तीन दिनों से समीर के घर रुकी हुई थी क्योंकि उसकी बड़ी बहन यानी समीर की पत्नी कविता एक ऑफिस सेमिनार के सिलसिले में शहर से बाहर गई हुई थी। रिया की उम्र करीब चौबीस साल थी और उसका यौवन इस समय अपने पूरे शबाब पर था। उसका रंग एकदम साफ और दमकता हुआ था, जैसे किसी ने मखमली दूध में गुलाब की पंखुड़ियां घोल दी हों। उस दिन उसने एक बहुत ही हल्का पीले रंग का कॉटन का सूट पहना हुआ था, जो उसके शरीर के उभारों को और भी ज्यादा निखार रहा था। समीर ने देखा कि जब भी वो चलती थी, उसके भारी तरबूज हल्के-हल्के हिलते थे, जिससे समीर के मन में हलचल मच जाती थी। उसके चेहरे की मासूमियत और उसकी आँखों की शरारत समीर को बार-बार अपनी ओर खींच रही थी, जिसे वो चाहकर भी अनदेखा नहीं कर पा रहा था।
समीर सोफे पर बैठा अखबार पढ़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार रिया की पतली कमर और उसके पीछे के भारी पिछवाड़े पर जा रहा था। रिया किचन में नींबू पानी बना रही थी और उसके हिलते हुए बदन को देखकर समीर के शरीर में रक्त का संचार तेज हो गया था। रिया के शरीर की बनावट बहुत ही आकर्षक थी; उसके कंधे सुडौल थे और उसके तरबूज इतने भरे हुए थे कि कमीज के बटन जैसे टूटने को बेताब लग रहे थे। जब वो झुककर फ्रिज से बर्फ निकाल रही थी, तो उसका पिछवाड़ा हवा में उभरा हुआ था, जिसे देखकर समीर को अपने खीरा में एक अजीब सी अकड़न और भारीपन महसूस होने लगा। उसने अपनी नजरें हटाने की कोशिश की, लेकिन रिया का वो मदमस्त रूप उसे बार-बार अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। समीर को लग रहा था कि आज की ये तन्हाई और रिया का ये रूप उसे किसी ऐसी दुनिया में ले जाएगा जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं होगी।
कुछ देर बाद रिया गिलास लेकर समीर के पास आई और सोफे पर उसके बिलकुल करीब बैठ गई। उनके बीच की दूरी इतनी कम थी कि समीर को रिया के शरीर से आने वाली धीमी-धीमी खुशबू महसूस हो रही थी। रिया ने गिलास समीर की ओर बढ़ाया और मुस्कराते हुए कहा, ‘जीजू, आप आज बहुत शांत लग रहे हैं, क्या बात है?’ समीर ने उसकी आँखों में देखा और उसे लगा कि उन आँखों में भी एक दबी हुई प्यास थी। उसने गिलास थामते हुए रिया की उंगलियों को हल्का सा छुआ, जिससे रिया के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। वो सिहरन समीर ने भी महसूस की और उसने धीरे से रिया का हाथ पकड़ लिया। रिया ने अपना हाथ छुड़ाया नहीं, बल्कि उसकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं और उसके चेहरे पर एक हल्की सी गुलाबी शर्म छा गई थी। उस पल में दोनों के बीच एक अनकहा समझौता हो गया था, जो शब्दों से परे था और केवल भावनाओं और शारीरिक आकर्षण पर टिका था।
जैसे ही समीर ने उसका हाथ थोड़ा और कसकर पकड़ा, रिया की सांसें और भी भारी होने लगीं। समीर ने धीरे से अपना दूसरा हाथ रिया के कंधे पर रखा और उसे अपनी ओर खींचा। रिया ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर समीर के कंधे पर टिका दिया। समीर ने महसूस किया कि रिया का शरीर कांप रहा था, एक ऐसी थरथराहट जो केवल डर की नहीं बल्कि चरम इच्छा की थी। उसने रिया की ठोड़ी को पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसके चेहरे को जी भरकर निहारा। रिया के होंठ हल्के से खुले हुए थे और उसके मटर जैसे निप्पल उसके पतले कुर्ते के नीचे से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे। समीर ने धीरे से अपना चेहरा उसके करीब लाया और उसकी सांसों की गर्मी को अपने चेहरे पर महसूस किया, जहाँ एक अजीब सी खुशबू और गर्माहट का मिलन हो रहा था।
समीर ने अब और इंतजार नहीं किया और उसने रिया के गर्दन पर अपने होठों का स्पर्श दिया, जिससे रिया के मुँह से एक धीमी कराह निकल गई। उसके हाथ समीर की शर्ट को कसकर पकड़ने लगे और उसकी उंगलियां समीर की पीठ में धंसने लगीं। समीर ने महसूस किया कि रिया भी उतनी ही बेताब थी जितना कि वो खुद था। उसने धीरे से रिया के कुर्ते के ऊपर से ही उसके गोल और सख्त तरबूज को अपनी हथेलियों में भरा। रिया ने एक लंबी सांस खींची और उसका शरीर धनुष की तरह तन गया। समीर ने तरबूज को धीरे-धीरे सहलाना और दबाना शुरू किया, जिससे रिया की सिसकियां और तेज हो गई। उस कमरे की खामोशी अब उनकी भारी सांसों और कपड़ों की सरसराहट से भर गई थी। समीर को अपने खीरा में अब जबरदस्त तनाव महसूस हो रहा था जो बाहर निकलने को व्याकुल था।
धीरे-धीरे समीर ने रिया के कुर्ते के बटन खोलने शुरू किए। जैसे-जैसे एक-एक बटन खुल रहा था, रिया की धड़कनें तेज होती जा रही थीं। जब कुर्ता पूरी तरह खुल गया, तो समीर की आँखों के सामने रिया के दूधिया सफेद तरबूज अपनी पूरी गरिमा के साथ मौजूद थे। उनके ऊपर मौजूद गुलाबी मटर जैसे निप्पल ठंड और उत्तेजना की वजह से बिल्कुल सख्त हो चुके थे। समीर ने अपनी जुबान से उन मटरों को सहलाया, जिससे रिया के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। वो जोर-जोर से समीर का नाम पुकारने लगी और उसके बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं। समीर ने अब रिया की सलवार की नाड़ी ढीली की और उसे धीरे-धीरे नीचे सरका दिया। अब रिया उसके सामने पूरी तरह से प्राकृतिक अवस्था में थी। उसकी रेशमी त्वचा और उसकी खाई के पास मौजूद काले घुंघराले बाल समीर की कामुकता को सातवें आसमान पर ले जा रहे थे।
समीर ने अपना चेहरा नीचे झुकाया और रिया की दोनों जांघों के बीच की खाई को निहारने लगा। वहां से एक भीनी-भीनी गंध आ रही थी जो समीर को पागल कर रही थी। उसने अपनी जुबान से उस खाई को चखना शुरू किया, जिससे रिया बिस्तर पर छटपटाने लगी। उसकी उंगलियां चादर को कसकर पकड़ रही थीं और वो बार-बार ‘ओह जीजू, ये क्या कर रहे हो’ कह रही थी, लेकिन उसकी आवाज़ में मनाही नहीं बल्कि और भी ज्यादा चाहत थी। समीर ने अपनी उंगली से खाई के अंदर की नमी को महसूस किया और धीरे-धीरे उंगली से खोदना शुरू किया। रिया का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था और उसका रस निकलना शुरू हो गया था, जिससे वह जगह पूरी तरह से चिकनी और गीली हो गई थी। समीर ने अब अपने कपड़े उतारे और उसका विशाल खीरा किसी फौलाद की तरह तनकर खड़ा हो गया था।
रिया ने जब समीर के उस विशाल खीरा को देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गई। उसने धीरे से अपने हाथों से उस खीरा को पकड़ा और उसे चूमने लगी। समीर को ऐसा सुख मिल रहा था जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। रिया ने अब उस खीरा को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी, जिससे समीर की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद, समीर ने रिया को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उसने रिया की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरा की नोक को रिया की गीली खाई के द्वार पर टिका दिया। रिया ने कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर के हाथों को थाम लिया। समीर ने एक गहरे और धीमे धक्के के साथ अपने खीरा को रिया की गहराईयों में उतारना शुरू किया, जिससे रिया के मुँह से एक चीख निकल गई जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी।
जैसे-जैसे समीर गहराई में जा रहा था, उसे रिया की खाई की तंग दीवारें महसूस हो रही थीं जो उसके खीरा को चारों तरफ से जकड़ रही थीं। उसने धीरे-धीरे खुदाई शुरू की, हर धक्के के साथ वो रिया की रूह तक पहुँचने की कोशिश कर रहा था। रिया अब पूरी तरह से इस खेल में डूब चुकी थी और वो अपने पिछवाड़े को ऊपर उठाकर समीर के हर धक्के का स्वागत कर रही थी। कमरे में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाजें और उनकी मदहोश कर देने वाली आहें गूँज रही थीं। समीर ने अब रिया को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। इस स्थिति में समीर को गहराई का और भी ज्यादा अहसास हो रहा था और वो पागलों की तरह खुदाई कर रहा था। रिया के तरबूज नीचे लटककर तेजी से हिल रहे थे, जिन्हें समीर ने अपने हाथों में कसकर पकड़ रखा था।
खुदाई की गति अब बहुत तेज हो चुकी थी। समीर और रिया दोनों ही चरम सीमा के करीब पहुँच रहे थे। समीर के धक्के अब और भी जोरदार और गहरे हो गए थे, जिससे रिया की आवाजें अब चीखों में बदलने लगी थीं। ‘जीजू, और तेज… मुझे खत्म कर दो… आह!’ रिया ने चिल्लाते हुए कहा। समीर ने अपनी पूरी ताकत लगा दी और आखिरी कुछ जोरदार धक्के दिए। अचानक रिया का शरीर पूरी तरह से कांपने लगा और उसकी खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा, जिससे समीर का पूरा खीरा उस रस से नहा गया। ठीक उसी पल समीर का भी सब्र का बांध टूट गया और उसने अपना पूरा रस रिया की गहराईयों में खाली कर दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े, उनकी सांसें इतनी तेज थीं जैसे कि वो अभी-अभी कोई बहुत लंबी दौड़ पूरी करके आए हों।
शांति छा जाने के बाद, दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे हुए थे। समीर ने रिया के माथे को चूमा और उसे अपनी छाती से लगा लिया। रिया के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून और संतुष्टि थी। उसका पूरा बदन पसीने की बूंदों से चमक रहा था और उसकी बिखरी हुई जुल्फें उसके चेहरे पर एक अलग ही सौंदर्य बिखेर रही थीं। उन दोनों को पता था कि उन्होंने आज एक ऐसी सीमा पार कर ली है जिसे समाज की नजरों में गलत माना जा सकता है, लेकिन उस पल में उन्हें केवल अपना प्यार और अपनी शारीरिक जरूरत का अहसास था। रिया ने समीर की ओर देखा और मंद मुस्कान के साथ कहा, ‘जीजू, आज आपने मुझे वो सब महसूस कराया जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था।’ समीर ने बस उसे और कसकर पकड़ लिया, यह जानते हुए कि यह दोपहर उनके जीवन की सबसे यादगार और कामुक दोपहर बन गई थी।