रीना अपने नए अपार्टमेंट में सामान व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन भारी सोफे को खिसकाना उसके बस की बात नहीं थी। दोपहर की तपती धूप खिड़की से छनकर अंदर आ रही थी और पसीने की नन्ही बूंदें उसके माथे से फिसलकर उसके रेशमी ब्लाउज के अंदर समा रही थीं। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और उसने देखा कि बगल वाले फ्लैट का समीर खड़ा था, जिसकी कद-काठी किसी एथलीट जैसी थी और आँखों में एक अजीब सी चमक थी। समीर ने अपनी गहरी आवाज में मदद की पेशकश की, जिसे रीना मना नहीं कर पाई, क्योंकि उसे वास्तव में एक मजबूत सहारे की जरूरत थी।
समीर जब सोफे को धकेलने के लिए झुका, तो रीना की नजरें उसके सुडौल शरीर और उभरते हुए बाइसेप्स पर टिक गईं, जो उसके टी-शर्ट से बाहर झांक रहे थे। वहीं दूसरी ओर, समीर की नजरें रीना के शरीर के उतार-चढ़ाव पर थीं, जहाँ उसकी साड़ी के नीचे से उसके गोल-मटोल और रसीले तरबूज साफ झलक रहे थे। रीना के तरबूज इतने उभरे हुए थे कि साड़ी का पल्लू भी उन्हें पूरी तरह ढक नहीं पा रहा था, और समीर के मन में हलचल मच गई। उसे महसूस हुआ कि रीना का शरीर किसी प्यासी धरती की तरह है जो बस एक स्पर्श का इंतजार कर रहा है।
रीना ने जब पानी देने के लिए हाथ बढ़ाया, तो समीर की उंगलियां उसके हाथ से छू गईं, जिससे एक बिजली सी दौड़ गई। रीना की गहरी और काली आँखों में एक अनकही इच्छा साफ देखी जा सकती थी, जिसे समीर ने तुरंत भांप लिया। उसके शरीर की बनावट बहुत ही मदहोश करने वाली थी, विशेषकर उसका भारी पिछवाड़ा जो हर कदम पर थिरकता हुआ समीर के धैर्य की परीक्षा ले रहा था। उन दोनों के बीच एक गहरा और भावनात्मक खिंचाव पैदा होने लगा था, जहाँ शब्द कम पड़ रहे थे और साँसें तेज होने लगी थीं।
कमरे का तापमान अचानक बढ़ गया था और रीना की घबराहट अब साफ झलक रही थी, वह अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार उंगलियों से मरोड़ रही थी। समीर धीरे से उसके करीब आया और उसकी गर्दन के पास अपनी गरम साँसें छोड़ीं, जिससे रीना के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। समीर ने अपनी उंगलियों से रीना के चेहरे के पास लटकती हुई बालों की लट को पीछे किया, तो रीना की आँखें धीरे से बंद हो गईं। उसे लगा कि समीर का स्पर्श उसके दिल की धड़कनों को बेकाबू कर रहा है और वह खुद को रोकने की शक्ति खो रही है।
समीर ने अब और इंतजार न करते हुए रीना को अपनी बाहों में भर लिया और उसे दीवार से सटा दिया। उसके हाथ रीना की पीठ पर फिसलते हुए नीचे की ओर गए और उसके भरे हुए पिछवाड़े को मजबूती से भींच लिया। रीना के मुँह से एक दबी हुई कराह निकली और उसने अपनी बाहें समीर के गले में डाल दीं, मानो वह उसे खुद में विलीन कर लेना चाहती हो। समीर ने धीरे से उसके ब्लाउज की डोरियों को खोला, जिससे रीना के दोनों तरबूज अपनी पूरी गरिमा के साथ बाहर आ गए, और उनके ऊपर छोटे-छोटे मटर ठंडक और उत्तेजना से सख्त हो चुके थे।
समीर ने अपनी जीभ से उन रसीले तरबूजों पर बने मटरों को सहलाना शुरू किया, जिससे रीना के पूरे बदन में एक मीठा दर्द और प्यास जाग उठी। वह समीर के सिर को अपने सीने से और जोर से सटाने लगी, उसकी उंगलियां समीर के बालों में फंस गई थीं और वह बस और अधिक की मांग कर रही थी। समीर ने अब रीना की साड़ी को पूरी तरह से उतार दिया, जिससे उसकी गहरी और रहस्यों से भरी खाई अब उसके सामने थी। उस खाई के आसपास उगे हुए रेशमी बाल समीर की आँखों को अपनी ओर खींच रहे थे, और वह उस नजारे को देखकर पूरी तरह बावला हो गया।
समीर ने अपना हाथ नीचे बढ़ाकर रीना की गीली खाई को सहलाना शुरू किया, जहाँ से रस की धारा बहने लगी थी। उसने अपनी उंगलियों से उस खाई में खुदाई शुरू की, जिससे रीना का शरीर कमान की तरह मुड़ने लगा और उसकी सिसकियां कमरे के सन्नाटे को चीरने लगीं। रीना ने समीर की पैंट की जिप खोली और उसके विशाल खीरे को आजाद कर दिया, जो अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ बाहर आ गया था। उस खीरे को देखते ही रीना की आँखें फटी की फटी रह गईं, वह खीरा इतना मजबूत और गरम था कि उसे छूते ही रीना का अंग-अंग कांप उठा।
रीना ने उस गरम खीरे को अपने हाथों में पकड़ा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी, जैसे किसी बेशकीमती चीज को सहलाया जाता है। उसने समीर की आँखों में देखते हुए उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया, जिससे समीर के मुँह से आनंद की आहें निकलने लगीं। वह खीरा अब रीना के मुँह की गर्मी पाकर और भी ज्यादा कड़ा हो गया था, और समीर अब और बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं था। उसने रीना को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़कर अपनी भारी और गरम खीरे को उसकी गहरी खाई के मुहाने पर लाकर टिका दिया।
समीर ने धीरे से दबाव बनाया और उसका आधा खीरा रीना की तंग खाई के अंदर समा गया, जिससे रीना के मुँह से एक तीखी कराह निकली। जैसे-जैसे वह खीरा अंदर जा रहा था, रीना को एक साथ दर्द और बेपनाह सुख का अनुभव हो रहा था, उसकी आँखों से खुशी के आंसू झलक आए। समीर ने जब पूरी ताकत से एक धक्का मारा, तो उसका पूरा खीरा रीना की गहराई तक पहुँच गया और खुदाई की यह प्रक्रिया पूरी लय में शुरू हो गई। हर धक्के के साथ रीना के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके टकराने की आवाज कमरे में गूँज रही थी।
रीना अब समीर की लय के साथ अपनी कमर हिला रही थी, वह समीर के हर धक्के का स्वागत अपनी तंग खाई से कर रही थी। समीर ने रीना को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, जिससे उसे और भी गहरा अहसास होने लगा। रीना की कमर झुक गई थी और उसका भारी पिछवाड़ा समीर के सामने था, जिसमें वह अपने खीरे को बार-बार उतार रहा था। दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो चुके थे और कमरे में केवल खुदाई की थप-थप और उनकी भारी साँसों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जो एक अलग ही संगीत पैदा कर रही थीं।
खुदाई की यह प्रक्रिया अब अपने चरम पर पहुँच रही थी, समीर की गति अब किसी बेकाबू घोड़े जैसी तेज हो गई थी। रीना की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था और उसे महसूस हो रहा था कि उसकी खाई से रस अब फव्वारे की तरह निकलने को तैयार है। उसने समीर को और जोर से जकड़ लिया और अपने नाखून उसकी पीठ में गड़ा दिए, जैसे वह उसे कभी छोड़ना नहीं चाहती हो। समीर ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी और कुछ ही क्षणों बाद, एक साथ दोनों के शरीरों से रस की धाराएं छूट पड़ीं, जिससे उनकी आत्मा तक तृप्त हो गई।
सब कुछ शांत होने के बाद, समीर और रीना एक-दूसरे की बाहों में सिमटे हुए बिस्तर पर लेटे थे, उनके शरीरों पर अभी भी पसीने की परतें चमक रही थीं। रीना की हालत ऐसी थी कि वह हिल भी नहीं पा रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग ही सुकून और चमक थी जो पहले कभी नहीं दिखी। समीर ने धीरे से उसके माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में और कस लिया, जैसे वह यह कहना चाह रहा हो कि यह रिश्ता सिर्फ एक शारीरिक जरूरत नहीं बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है। वह दोपहर उन दोनों के लिए जिंदगी भर की याद बन गई थी, जहाँ दो अजनबी एक रूहानी और कामुक बंधन में बंध गए थे।