रीना मौसी की चु@@ई—>
रीना मौसी मेरी माँ की सबसे छोटी और सबसे खूबसूरत बहन थीं जिनकी उम्र करीब अड़तीस साल थी लेकिन उनके शरीर की बनावट को देखकर कोई भी उनकी उम्र का सही अंदाजा नहीं लगा सकता था। उनका रंग एकदम कंचन जैसा साफ था और उनके शरीर के घुमाव किसी भी पुरुष को पागल करने के लिए काफी थे विशेषकर उनके बड़े-बड़े तरबूज जो हमेशा उनकी साड़ी के ब्लाउज को फाड़कर बाहर निकलने की कोशिश करते महसूस होते थे। मैं जब भी उनके घर जाता तो मेरा ध्यान अक्सर उनके उन रसीले तरबूजों पर ही टिक जाता था और मन ही मन मैं उनकी खुदाई करने के सपने देखने लगता था क्योंकि उनकी चाल में एक ऐसी मादकता थी जो मेरे खीरे में अजब सी हलचल पैदा कर देती थी।
उस दिन दोपहर का वक्त था और घर में मौसा जी किसी काम से शहर से बाहर गए हुए थे जिसके कारण पूरा घर एकदम शांत था और सिर्फ कूलर की ठंडी हवाओं की आवाज गूँज रही थी। मौसी सोफे पर लेटी हुई कोई किताब पढ़ रही थीं और उनकी साड़ी उनके पेट से सरक कर नीचे गिर गई थी जिससे उनकी गोरी कमर और गहरी नाभि साफ दिखाई दे रही थी जो मुझे अपनी ओर खींच रही थी। उनकी कमर का वो हिस्सा इतना मुलायम और चमकदार था कि मेरा मन हुआ कि मैं अभी जाकर वहां अपने होंठ रख दूँ और उनके बदन की उस खुशबू को अपने अंदर उतार लूँ जो उनकी त्वचा से छनकर आ रही थी।
मैं उनके पास जाकर बैठ गया और धीरे से बात शुरू की लेकिन मेरी नजरें बार-बार उनके ब्लाउज के अंदर कैद उन मटरों को ढूंढ रही थीं जो साड़ी के पतले कपड़े के पीछे से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे। मौसी ने मेरी नजरों की गहराई को भांप लिया था और उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई जो न तो पूरी तरह से मनाही थी और न ही पूरी तरह से आमंत्रण लेकिन उसमें एक छिपा हुआ आकर्षण जरूर था। उन्होंने अपनी किताब बंद की और मेरी तरफ देखते हुए कहा कि समीर तुम आज कुछ बदले हुए लग रहे हो तुम्हारी आँखों में आज एक अजीब सी चमक और प्यास दिखाई दे रही है जो मुझे थोड़ा बेचैन कर रही है।
उनकी यह बात सुनकर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और मैंने अपनी झिझक को पीछे छोड़ते हुए अपना हाथ धीरे से उनकी मखमली जांघों पर रख दिया जो साड़ी के नीचे दबी हुई थीं। मेरा हाथ लगते ही उनके शरीर में एक बिजली सी कौंधी और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं जिससे मुझे यह संकेत मिल गया कि वो भी अंदर ही अंदर इसी स्पर्श का इंतजार काफी समय से कर रही थीं। मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ ऊपर की ओर बढ़ाना शुरू किया और उनकी रेशमी त्वचा को महसूस करने लगा जिससे उनकी सांसें तेज होने लगीं और उनका सीना ऊपर-नीचे होने लगा जिससे उनके तरबूज भी बुरी तरह उछलने लगे थे।
मैंने साहस जुटाकर उनके होंठों का रस पीना शुरू किया और जैसे ही हमारे होंठ मिले मौसी ने अपनी बाहें मेरी गर्दन के चारों तरफ लपेट लीं और मुझे अपनी ओर पूरी ताकत से खींच लिया। हमारे बीच की दूरियां अब खत्म हो रही थीं और उनकी सांसों की गर्मी मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी जो मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी और मेरा खीरा अब पूरी तरह से अकड़कर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा था। मौसी ने सिसकते हुए कहा कि समीर ये तुम क्या कर रहे हो अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा लेकिन उनके शब्दों में कमजोरी थी और उनके हाथ मेरे बालों में बुरी तरह फंसे हुए थे।
मैंने उनके ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए और जैसे ही आखिरी हुक खुला उनके दोनों विशाल तरबूज आज़ाद होकर मेरे सामने आ गए जिनकी खूबसूरती देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। उन तरबूजों के बीच के गहरे रास्ते में मेरा हाथ फिसल रहा था और उनके गुलाबी मटर अब पूरी तरह से खड़े हो चुके थे जिन्हें देखकर मेरी भूख और भी ज्यादा बढ़ गई थी। मैंने एक मटर को अपने मुंह में ले लिया और उसे धीरे से चूसना शुरू किया जिससे मौसी के मुंह से एक लंबी आह निकली और उन्होंने अपना पिछवाड़ा सोफे पर रगड़ना शुरू कर दिया जिससे उनकी बेचैनी साफ झलक रही थी।
अब मेरा हाथ उनकी साड़ी के नीचे जाकर उनकी रेशमी और गीली खाई की तलाश करने लगा था जहाँ से कामोत्तेजना का मीठा रस बहकर बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि वो पूरी तरह से तैयार थीं। जैसे ही मेरी उंगली उनकी उस रेशमी खाई के बालों को पार करते हुए अंदर गई मौसी ने जोर से अपनी कमर ऊपर उठाई और मेरी गर्दन पर अपने नाखून गड़ा दिए जिससे मुझे एक मीठा सा दर्द महसूस हुआ। उनकी खाई इतनी गर्म और तंग थी कि मुझे अपनी उंगली से खोदना बहुत ही आनंददायक लग रहा था और मौसी बार-बार मेरा नाम लेकर मुझे और भी ज्यादा उकसा रही थीं कि मैं उन्हें वो सुख दूँ जिसका उन्हें बरसों से इंतजार था।
मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना फन फैलाया हुआ खीरा बाहर निकाला जिसे देखकर मौसी की आँखें विस्मय से भर गईं और उन्होंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उस गर्म खीरे को पकड़ लिया। उन्होंने उसे सहलाते हुए अपने करीब लाया और धीरे से उसे अपने मुंह में ले लिया और उसे चाटना शुरू किया जिससे मुझे जन्नत का एहसास होने लगा और मेरा पूरा शरीर कांपने लगा। उनके मुंह की गर्मी और उनकी जीभ का वो मखमली अहसास मेरे खीरे की नसों में खून का बहाव इतना तेज कर रहा था कि मुझे लग रहा था कि अभी मेरा रस निकल जाएगा लेकिन मैंने खुद पर काबू पाया और उन्हें बिस्तर की तरफ ले गया।
बिस्तर पर लेटाकर मैंने उन्हें सामने से खोदना शुरू करने का मन बनाया और अपना खीरा उनकी गीली खाई के मुहाने पर टिका दिया जो अब पूरी तरह से उनके रस से लथपथ हो चुकी थी। जैसे ही मैंने धीरे से दबाव डाला मौसी ने एक दर्द भरी लेकिन सुखद कराह छोड़ी और उनके हाथों ने चादर को कसकर पकड़ लिया क्योंकि मेरा खीरा उनकी तंग खाई को चीरता हुआ अंदर समा रहा था। हर इंच अंदर जाते ही उनकी आँखों से ख़ुशी के आंसू छलक रहे थे और वो बार-बार कह रही थीं कि हाँ समीर मुझे और खोदो मुझे आज पूरी तरह से अपना बना लो और मेरे अंदर अपना सारा प्यार भर दो।
अब खुदाई की गति बढ़ने लगी थी और कमरे में हमारे शरीरों के टकराने की चप-चप की आवाज गूँजने लगी थी जो किसी मधुर संगीत की तरह लग रही थी जिसमें सिर्फ वासना और प्रेम का संगम था। मौसी के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और मैं हर धक्के के साथ उनके मटरों को अपने दांतों से सहला रहा था जिससे उनका पूरा बदन धनुष की तरह ऊपर की ओर मुड़ जाता था। हमने कई मुद्राओं में खुदाई की कभी मैंने उन्हें पिछवाड़े से खोदा तो कभी उन्होंने मेरे ऊपर चढ़कर अपनी खाई का पूरा आनंद लिया और उनके चेहरे पर आने वाला वो संतोष मुझे एक अलग ही दुनिया में ले जा रहा था।
काफी देर तक चली इस गहन खुदाई के बाद हम दोनों पसीने से पूरी तरह तर-बतर हो चुके थे और हमारी सांसें किसी थके हुए धावक की तरह चल रही थीं लेकिन प्यास अभी भी बाकी थी। मौसी ने मेरे कानों में धीरे से फुसफुसाते हुए कहा कि समीर अब और बर्दाश्त नहीं होता मेरा रस निकलने वाला है तुम भी अपना सारा प्यार मेरे अंदर ही छोड़ देना और मुझे पूरी तरह से तृप्त कर देना। उनकी यह बात सुनते ही मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी और जोर-जोर से उनके पिछवाड़े पर थप्पड़ मारते हुए उनके अंदर गहरे तक जाने लगा जिससे वो बुरी तरह से तड़पने लगीं और अंत में एक जोरदार चीख के साथ उनका रस छूटने लगा।
जैसे ही उनका रस छूटा मेरा भी सब्र जवाब दे गया और मेरे खीरे ने गरम-गरम रस की पिचकारियां उनकी खाई की गहराइयों में छोड़नी शुरू कर दीं जिससे हम दोनों एक-दूसरे में सिमटकर रह गए। वो लम्हा इतना भावुक और गहरा था कि हम दोनों की आँखों में नमी थी और हम बस एक-दूसरे की धड़कनों को महसूस कर रहे थे जैसे समय वहीं थम गया हो और दुनिया की कोई फिक्र हमें न रही हो। मौसी ने मेरे माथे को चूमते हुए कहा कि आज तुमने मुझे वो एहसास दिया है जिसे मैं कभी भूल नहीं पाऊंगी और तुम हमेशा मेरे दिल के सबसे करीब रहोगे चाहे दुनिया कुछ भी कहे।
कुछ देर बाद जब हमारी सांसें सामान्य हुईं तो हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा और बिना कुछ कहे ही सब समझ गए कि यह सिर्फ शारीरिक जरूरत नहीं थी बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव था जो आज मुकम्मल हुआ था। हमने धीरे-धीरे अपने कपड़े पहने लेकिन उन कपड़ों के अंदर अब एक नई ऊर्जा और एक नया राज छुपा हुआ था जो हमारे बीच एक अटूट बंधन की तरह जुड़ गया था। रीना मौसी के चेहरे पर एक ऐसी चमक थी जो पहले कभी नहीं देखी थी और उनके उन उभरे हुए तरबूजों पर अभी भी मेरे प्यार के निशान बाकी थे जो उन्हें बार-बार उस सुखद खुदाई की याद दिला रहे थे।
शाम होने को थी और सूरज की मद्धम रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी और हम दोनों चाय पीते हुए पुरानी यादों में खोए हुए थे लेकिन रह-रहकर हमारी नजरें एक-दूसरे से टकरातीं और वो सारा मंजर फिर से आँखों के सामने घूम जाता। मौसी ने मेरा हाथ पकड़कर धीरे से दबाया और कहा कि समीर अगली बार जब तुम आओगे तो मैं फिर से तुम्हारी इसी तरह की मेहमाननवाजी का इंतजार करूंगी और इस बार हम और भी गहराई से इस खेल को खेलेंगे। मैंने उनके गालों को सहलाते हुए वादा किया कि मैं जल्द ही लौटूंगा और हमारी यह रसीली कहानी इसी तरह आगे बढ़ती रहेगी और हर बार हम एक नई ऊँचाई को छुएंगे।