वंदना की पुरानी चु@@ई—>
आकाश लगभग दस साल बाद अपने पुराने शहर वापस लौटा था और उसकी यादों में सबसे ऊपर वंदना का चेहरा था जो कभी उसकी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी। वंदना अब शादीशुदा थी लेकिन जब वे दोनों मिले तो उनकी आँखों में वही पुरानी चमक और एक अनकहा आकर्षण आज भी बरकरार था जिसे वक्त की धूल भी कम नहीं कर पाई थी। बारिश का मौसम था और आकाश उसके घर पहुँचा जहाँ वह अकेली थी क्योंकि उसके पति किसी काम से शहर से बाहर गए हुए थे और पूरा माहौल एकांत की चादर ओढ़े खामोश खड़ा था।
वंदना ने जब दरवाजा खोला तो वह उसे देखती ही रह गई और उसकी साँसें जैसे थम सी गई थीं क्योंकि आकाश अब पहले से कहीं ज्यादा सुडौल और आकर्षक लग रहा था। उसने एक गहरी नीली साड़ी पहनी थी जिसमें उसके शरीर का हर उभार किसी मादक कविता की तरह उभर कर सामने आ रहा था और उसके सीने पर सजे दो रसीले तरबूज ब्लाउज की सीमा को लांघने के लिए बेचैन नजर आ रहे थे। आकाश की नजरें उन भारी तरबूजों पर टिक गई थीं जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे और वंदना की आँखों में एक अजीब सी चमक दौड़ गई जिसने आकाश के भीतर की सोई हुई इच्छाओं को एक झटके में जगा दिया था।
दोनों ड्राइंग रूम में बैठे थे लेकिन उनके बीच की खामोशी शब्दों से कहीं ज्यादा शोर मचा रही थी और वंदना का बार-बार अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करना उसकी बेचैनी को साफ जाहिर कर रहा था। आकाश ने धीरे से अपना हाथ उसकी हथेली पर रखा तो वंदना का पूरा शरीर एक अनजानी थरथराहट से कांप उठा और उसने अपनी पलकें झुका लीं जिससे उसकी लंबी पलकें उसके गालों पर साया करने लगी थीं। वंदना के गोरे बदन से उठती हुई एक भीनी-भीनी खुशबू आकाश के दिमाग पर नशा करने लगी थी और उसे महसूस हुआ कि सालों की दबी हुई प्यास अब बाहर निकलने के लिए तड़प रही है।
आकाश धीरे से उठकर उसके करीब सोफे पर बैठ गया और उसकी गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए उसके कान के पास फुसफुसाया कि वह उसे आज भी उतना ही चाहता है जितना पहले चाहता था। वंदना ने कोई विरोध नहीं किया बल्कि उसकी आँखों में छाई नमी और चेहरे की लाली ने यह संकेत दे दिया था कि वह भी इसी पल का वर्षों से इंतजार कर रही थी। आकाश ने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उसके रेशमी बालों को सहलाते हुए उसके चेहरे को अपनी ओर मोड़ा तो वंदना की भारी साँसें उसके होंठों को छूने लगी थीं।
बिना किसी और देरी के आकाश ने वंदना के उन रसीले तरबूजों पर अपना हाथ रख दिया और जैसे ही उसने उन्हें धीरे से दबाया वंदना के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकल गई। ब्लाउज के कपड़े के ऊपर से ही उन तरबूजों की नरमी और उनके बीच दबे उन छोटे मटर जैसे निप्पलों की कठोरता आकाश को पागल कर रही थी और वह उन्हें बेतहाशा सहलाने लगा। वंदना ने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया और अपनी आँखें बंद कर लीं जिससे उसके उभरे हुए गले की नसें साफ दिखाई दे रही थीं और उसका पूरा शरीर कामवासना की आग में तपने लगा था।
आकाश ने धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के हुक खोलना शुरू किया और जैसे ही कपड़ा अलग हुआ वंदना के वे दो विशाल और गोरे तरबूज पूरी तरह से आजाद होकर उसकी आँखों के सामने झूलने लगे। उन तरबूजों के शिखर पर सजे हुए गुलाबी मटर अब पूरी तरह से तन चुके थे और आकाश ने बारी-बारी से उन दोनों मटर को अपने होंठों में भरकर उन्हें चूसना शुरू किया। वंदना के हाथों ने आकाश के बालों को कसकर पकड़ लिया और वह सिसकते हुए अपना सीना आगे की ओर तानने लगी ताकि वह उन अंगों का पूरा आनंद ले सके जो अब तक प्यार के लिए तरस रहे थे।
धीरे-धीरे आकाश ने अपना हाथ वंदना की साड़ी के नीचे सरकाया और उसकी रेशमी जांघों को सहलाते हुए उस गुप्त स्थान की ओर बढ़ा जिसे खाई कहा जाता है जहाँ से जीवन का रस फूटता है। जैसे ही उसकी उंगलियों ने उस नम और गर्म खाई को छुआ वंदना का शरीर धनुष की तरह मुड़ गया और उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं जो कमरे की खामोशी को चीर रही थीं। आकाश ने महसूस किया कि उसकी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहाँ के बाल उसकी उंगलियों में उलझ रहे थे जो इस बात का सबूत था कि वह चरम सीमा तक उत्तेजित हो चुकी है।
आकाश ने अब अपनी उंगली से उस खाई में खुदाई शुरू की और जैसे-जैसे वह गहराई में जा रहा था वंदना की कमर ऊपर की ओर उठती जा रही थी और वह बेतहाशा अपनी जांघें रगड़ने लगी थी। वंदना ने तड़पते हुए आकाश की पैंट की बेल्ट खोली और उसके भीतर छिपे हुए उस सख्त और लंबे खीरे को बाहर निकाला जो काफी देर से बाहर आने के लिए बेकरार था। उसने उस गर्म खीरे को अपने नाजुक हाथों में पकड़ा और उसकी कठोरता को महसूस करते हुए उसे चूमने लगी जिससे आकाश के पूरे बदन में बिजली सी दौड़ गई।
वंदना ने आकाश के खीरे को धीरे से अपने मुँह में लिया और उसे चूसना शुरू किया जैसे वह किसी कीमती टॉफी का स्वाद ले रही हो और उसकी जीभ की हर हरकत आकाश को पागल बना रही थी। खीरा चूसने की उस प्रक्रिया ने आकाश के धैर्य की परीक्षा ले ली थी और उसने वंदना को बिस्तर पर लिटाया और उसकी दोनों जांघों को चौड़ा करके अपनी खुदाई की तैयारी शुरू की। उसने अपने खीरे की नोक को उस रेशमी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से भीतर धकेला जिससे वंदना की आँखों से पानी की एक बूंद छलक पड़ी लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि असीम सुख की थी।
जैसे ही पूरा खीरा उस तंग खाई के भीतर समा गया वंदना ने आकाश को अपनी बाहों में कस लिया और उसके कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए ताकि वह अपनी चीख को दबा सके। आकाश ने अब धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू किया और हर धक्के के साथ वंदना के वे भारी तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे जो एक अद्भुत दृश्य पेश कर रहे थे। ‘ओह आकाश… और जोर से… मुझे पूरी तरह से खोदो…’ वंदना की ये बातें आकाश के भीतर के जोश को और भी ज्यादा बढ़ा रही थीं और वह पूरी ताकत से खुदाई करने लगा।
कमरे में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाज और वंदना की सिसकारियां गूँज रही थीं और पसीने से लथपथ दोनों शरीर एक-दूसरे में पूरी तरह से विलीन हो चुके थे। आकाश ने अब उसे पलटा और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया जिससे गहराई और भी ज्यादा महसूस होने लगी थी और वंदना अपने घुटनों के बल बैठकर इस खुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। हर धक्के के साथ आकाश का खीरा उसकी खाई की दीवारों को रगड़ता हुआ भीतर जा रहा था और वंदना का रोम-रोम इस सुखद अहसास से कांप रहा था।
खुदाई की गति अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी और दोनों का सांस फूलने लगा था लेकिन उनकी प्यास अभी भी बुझने का नाम नहीं ले रही थी। वंदना की खाई से अब चिपचिपा रस निकलने लगा था जो उनके मिलन को और भी ज्यादा सुगम और मदहोश बना रहा था। आकाश को महसूस हुआ कि अब उसका रस छूटने वाला है और उसने वंदना की कमर को कसकर पकड़ा और आखिरी कुछ धक्के इतनी जोर से मारे कि वंदना पूरी तरह से निढाल हो गई।
अंततः आकाश का सारा गरम रस वंदना की गहरी खाई के भीतर जमा हो गया और वंदना ने भी अपना पूरा रस छोड़ते हुए आकाश को अपनी जांघों के बीच जकड़ लिया। दोनों काफी देर तक उसी अवस्था में एक-दूसरे से लिपटे रहे और उनकी तेज चलती हुई धड़कनें धीरे-धीरे शांत होने लगी थीं। वंदना के चेहरे पर एक असीम संतुष्टि का भाव था और आकाश उसे अपनी बाहों में भरकर उस पल को हमेशा के लिए अपने दिल में कैद कर लेना चाहता था।
इस अद्भुत खुदाई के बाद कमरे में एक शांति छा गई थी लेकिन वह शांति खालीपन वाली नहीं बल्कि पूर्णता वाली थी जो दो पुराने प्रेमियों के मिलन से पैदा हुई थी। वंदना ने आकाश के माथे को चूमा और मुस्कुराते हुए उसकी छाती पर अपना सिर रख दिया जबकि आकाश उसके रेशमी बालों के साथ खेलता रहा। उस बारिश वाली रात ने उन दोनों की जिंदगी में एक ऐसा अध्याय लिख दिया था जिसे वे कभी नहीं भूल सकते थे और उनके बीच का यह रिश्ता अब पहले से कहीं ज्यादा गहरा और अटूट हो चुका था।