रात के बारह बज चुके थे और पूरे ऑफिस में सन्नाटा पसरा हुआ था सिवाय उस कोने वाले केबिन के जहाँ से हल्की रोशनी छनकर बाहर आ रही थी। आकाश अपनी मेज पर झुका हुआ था और कुछ फाइलों को अंतिम रूप दे रहा था लेकिन उसका ध्यान बार-बार सामने बैठी उसकी सेक्रेटरी नैना पर जा रहा था। नैना की उम्र करीब छब्बीस साल रही होगी और उसका शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था जो उस काली साड़ी में और भी ज्यादा कयामत ढा रहा था। उसकी लंबी गर्दन और उस पर गिरती हुई जुल्फें आकाश के मन में हलचल पैदा कर रही थीं और उसे अपने काम पर ध्यान लगाना मुश्किल हो रहा था। आकाश ने महसूस किया कि उसकी धड़कनें तेज हो रही हैं और केबिन की ठंडी ए.सी. में भी उसे पसीना आने लगा था।
नैना की शारीरिक बनावट बहुत ही आकर्षक थी उसकी कमर का घेरा इतना पतला था कि उसे एक हाथ में भरा जा सके और उसके ऊपर उभरे हुए दो बड़े-बड़े रसीले तरबूज साड़ी के ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जब भी वह सांस लेती तो वे तरबूज ऊपर-नीचे होते और उनकी गहराई आकाश की आँखों को सुकून देती थी। उसके पिछवाड़े का घेरा भी काफी भारी था जो साड़ी के कपड़े में बहुत ही खूबसूरती से फिट बैठा हुआ था। आकाश जानता था कि नैना भी उसे कुछ खास निगाहों से देख रही है क्योंकि कई बार उनकी आँखें आपस में मिली थीं और नैना ने अपनी नजरें तुरंत झुका ली थीं लेकिन उसकी मुस्कुराहट में एक अलग ही निमंत्रण था जो आकाश को अपनी ओर खींच रहा था।
इन दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों से एक अनकहा भावनात्मक जुड़ाव बन गया था जो सिर्फ काम तक सीमित नहीं था। वे एक-दूसरे की छोटी-छोटी आदतों को जानने लगे थे और अक्सर लंच के समय घंटों बातें करते थे जिसमें हँसी-मजाक के साथ-साथ एक-दूसरे के प्रति सम्मान भी था। आज रात का सन्नाटा उस जुड़ाव को एक नई दिशा दे रहा था क्योंकि ऑफिस में उनके अलावा और कोई नहीं था और बाहर की दुनिया सो चुकी थी। आकाश के मन में एक अजीब सी तड़प उठ रही थी वह नैना के करीब जाना चाहता था उसे महसूस करना चाहता था और अपनी बाहों में भरकर उसे बताना चाहता था कि वह उसे कितना पसंद करता है लेकिन पेशेवर मर्यादा उसे रोक रही थी।
अचानक नैना उठी और पानी की बोतल लेने के लिए आकाश की मेज की तरफ बढ़ी तभी उसका पैर मेज के कोने से टकराया और वह लड़खड़ाकर आकाश की गोद में जा गिरी। उस पल के लिए समय जैसे थम गया हो आकाश ने उसे गिरने से बचाने के लिए उसकी पतली कमर को अपनी मजबूत बाहों में जकड़ लिया। उनके शरीर एक-दूसरे से इतनी गहराई से सटे हुए थे कि आकाश को नैना के तरबूजों की नरमी अपनी छाती पर महसूस हो रही थी। नैना की सांसें तेज हो गई थीं और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और झिझक का मिश्रण था। आकाश ने उसकी आँखों में देखा और उसे वहाँ सिर्फ समर्पण नजर आया जिसने उसके मन के सारे बांध तोड़ दिए।
आकाश ने बहुत ही कोमलता से नैना के गालों को छुआ और उसकी उंगलियां उसके कानों के पीछे रेंगने लगीं जिससे नैना के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने धीरे से अपना चेहरा नैना के पास लाया और उसकी गर्दन पर अपनी गर्म सांसें छोड़ीं जिससे नैना ने एक धीमी आह भरी और उसकी आँखें अपने आप बंद हो गई। आकाश का हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा और उसने साड़ी के पल्लू को खिसकाकर उन रसीले तरबूजों को अपनी हथेलियों में भर लिया। जैसे ही उसने उन तरबूजों को हल्का सा दबाया नैना के मुंह से एक सिसकारी निकली और उसने आकाश के बालों में अपनी उंगलियां फँसा दीं।
आकाश अब और रुकने के मूड में नहीं था उसने नैना को धीरे से मेज पर लिटा दिया और उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही ब्लाउज खुला नैना के दूध जैसे सफेद तरबूज पूरी तरह आजाद हो गए और उनके ऊपर के छोटे-छोटे दाने जैसे मटर ठंड और उत्तेजना से सख्त हो गए थे। आकाश ने झुककर उन मटरों को अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें धीरे-धीरे सहलाने लगा जिससे नैना का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया। वह अपने दोनों हाथों से आकाश के सिर को दबाने लगी ताकि वह उसके तरबूजों का रस और गहराई से चख सके। नैना की कराहें अब केबिन की दीवारों से टकराकर वापस आ रही थीं।
अब आकाश का हाथ नैना की साड़ी के अंदर गया और वह उसकी जांघों को सहलाते हुए उस गहरी खाई की तरफ बढ़ा जो रेशमी बालों से ढकी हुई थी। जैसे ही उसकी उंगलियां उस नम खाई के पास पहुँचीं उसने महसूस किया कि वह पहले से ही गीली और तैयार थी। आकाश ने अपनी एक उंगली को धीरे से उस खाई के अंदर डाला जिससे नैना ने अपना पिछवाड़ा ऊपर की ओर झटका और एक लंबी आह भरी। वह उंगली से उस खाई के अंदर खुदाई करने लगा जिससे नैना का शरीर बेकाबू होने लगा और वह जोर-जोर से हांफने लगी। उसके शरीर का हर हिस्सा अब सिर्फ और सिर्फ स्पर्श की मांग कर रहा था।
आकाश ने अपनी पतलून खोली और अपना कड़क और गरम खीरा बाहर निकाला जो अब तक पूरी तरह से तैयार हो चुका था। नैना ने जैसे ही उस विशाल खीरे को देखा उसकी आँखें फटी की फटी रह गई लेकिन अगले ही पल उसने अपनी जीभ से अपने होंठों को भिगोया। आकाश ने उसे इशारा किया और नैना ने धीरे से झुककर उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया। वह बड़ी ही सफाई से उस खीरे को चूसने लगी जैसे वह दुनिया की सबसे स्वादिष्ट चीज हो। उसके मुंह की गर्माहट और जीभ की रगड़ ने आकाश को पागल कर दिया था और वह अपने रस को निकलने से रोकने की भरपूर कोशिश कर रहा था।
कुछ देर बाद आकाश ने नैना को मेज पर ही सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। यह सामने से खुदाई का सबसे बेहतरीन तरीका था। उसने अपने खीरे के अगले हिस्से को नैना की नम खाई के द्वार पर रखा और धीरे से दबाव डाला। नैना ने अपनी आँखें भींच लीं और जैसे ही वह पूरा खीरा एक ही झटके में उस खाई के अंदर समा गया उसके मुंह से एक तीखी चीख निकली जो सुख और हल्के दर्द का मिला-जुला अहसास थी। आकाश ने उसे संभलने का समय दिया और फिर धीरे-धीरे अपनी कमर को चलाना शुरू किया जिससे उस बंद केबिन में गीली टकराने की आवाजें गूँजने लगीं।
खुदाई की गति अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी और आकाश हर धक्के के साथ उस खाई की गहराई को नाप रहा था। नैना की आवाजें अब और भी बुलंद हो गई थीं वह बार-बार आकाश को और जोर से खोदने के लिए कह रही थी। उसने आकाश की पीठ पर अपने नाखूनों से निशान बना दिए थे और उसके शरीर का पसीना आकाश के पसीने से मिल रहा था। हर धक्के पर उसके तरबूज पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आकाश कभी उन्हें पकड़ता तो कभी अपने मुंह में भर लेता। केबिन का माहौल पूरी तरह से कामुकता और जुनून से भर चुका था जहाँ सिर्फ दो जिस्मों की प्यास बुझ रही थी।
आकाश ने अब नैना की पोजीशन बदली और उसे घुटनों के बल खड़ा कर दिया ताकि वह पिछवाड़े से खुदाई कर सके। यह स्थिति नैना को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी क्योंकि अब आकाश का खीरा उसकी खाई के उन कोनों तक पहुँच रहा था जहाँ पहले नहीं पहुँच पाया था। आकाश ने उसके भारी पिछवाड़े को अपने हाथों में जकड़ा और पूरी ताकत के साथ धक्के लगाने शुरू किए। हर प्रहार के साथ नैना का शरीर आगे की ओर झुक जाता और वह जोर-जोर से चिल्लाने लगती। उसके पिछवाड़े की मांसपेशियों की पकड़ आकाश के खीरे पर इतनी मजबूत थी कि उसे लग रहा था उसका रस बस अब छूटने ही वाला है।
नैना अब पूरी तरह से चरम सीमा पर थी उसका पूरा शरीर कांप रहा था और उसकी खाई से भारी मात्रा में तरल पदार्थ निकल रहा था जो खुदाई को और भी सुगम बना रहा था। उसने चिल्लाकर कहा “आकाश… और तेज… मुझे खत्म कर दो!” यह सुनकर आकाश ने अपनी गति और बढ़ा दी और कुछ ही पलों में उसे महसूस हुआ कि उसका खीरा फटने को तैयार है। उसने एक आखिरी जोरदार धक्का दिया और अपना सारा गर्म रस नैना की गहरी खाई के अंदर उड़ेल दिया। उसी वक्त नैना का भी रस निकल गया और वह बेदम होकर मेज पर ही ढेर हो गई। दोनों की सांसें इतनी तेज थीं जैसे वे किसी लंबी दौड़ से लौटे हों।
खुदाई खत्म होने के बाद कुछ देर तक दोनों वहीं लिपटे रहे एक-दूसरे की धड़कनों को महसूस करते हुए। कमरे में अब एक अजीब सी शांति थी लेकिन वह शांति सुकून देने वाली थी। आकाश ने नैना के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में समेट लिया। नैना की आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी बल्कि एक तृप्ति थी जो उसके चेहरे पर साफ चमक रही थी। उन्होंने धीरे-धीरे अपने कपड़े ठीक किए लेकिन उनके बीच का वह पेशेवर रिश्ता अब हमेशा के लिए बदल चुका था। उस रात ऑफिस की उन दीवारों ने एक ऐसी कहानी देखी थी जो शब्दों से परे थी और जिसमें सिर्फ दो रूहों का मिलन हुआ था।
अगली सुबह जब वे ऑफिस आए तो सब कुछ सामान्य लग रहा था लेकिन जब भी उनकी नजरें मिलतीं उनके चेहरों पर एक गुप्त मुस्कान आ जाती जो सिर्फ उन्हें ही पता थी। उस रात की वह खुदाई उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गई थी जिसने उन्हें न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया था। उन्होंने जान लिया था कि काम के तनाव के बीच भी प्रेम और वासना का यह सुंदर तालमेल उनके जीवन को और भी हसीन बना सकता है और उनकी यह छोटी सी दुनिया अब पहले से कहीं ज्यादा रंगीन और उत्साहपूर्ण हो गई थी।