सोनिया के साथ रसीली चु@@ई—>उस दोपहर की गर्मी और भी बढ़ गई थी जब सोनिया ने अपने नए फ्लैट का दरवाजा खोला और मुझे अंदर आने का इशारा किया। सोनिया मेरी नई पड़ोसी थी जो करीब एक हफ्ता पहले ही इस अपार्टमेंट में रहने आई थी और उसकी खूबसूरती पूरे फ्लोर पर चर्चा का विषय बनी हुई थी। वह लगभग बत्तीस साल की थी लेकिन उसके शरीर का रखरखाव ऐसा था कि कोई भी जवान लड़का उसे देखते ही अपना आपा खो दे। उसके गोरे चेहरे पर हमेशा एक हल्की सी मुस्कान रहती थी जो उसके व्यक्तित्व को और भी आकर्षक बनाती थी। मैंने उसे देखते ही महसूस किया कि मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं और मेरा मन उसकी ओर खींचा चला जा रहा है।
सोनिया के शरीर की बनावट किसी तराशी हुई मूर्ति जैसी थी जो हर तरफ से भरी हुई और सुडौल थी। जब उसने मुड़कर अलमारी की तरफ इशारा किया, तो उसकी साड़ी के नीचे से उभरते हुए उसके भारी और रसीले तरबूज साफ़ झलक रहे थे जो उसकी चोली को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। उसके तरबूजों का आकार इतना बड़ा और सुडौल था कि मेरी नजरें वहीं टिक गईं और उन पर लगे छोटे-छोटे मटरों की कल्पना मात्र से मेरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। सोनिया का पिछवाड़ा भी काफी चौड़ा और मांसल था जो चलते समय बड़ी खूबसूरती से हिलता था, जिससे उसकी हर हरकत में एक अलग ही नशा महसूस होता था।
उस दिन सोनिया ने मुझसे मदद मांगी थी क्योंकि उसे अपने कमरे की भारी अलमारी को दूसरी दीवार की तरफ खिसकाना था। जब मैं उसके करीब खड़ा हुआ, तो उसके शरीर से आने वाली धीमी-धीमी इत्र की खुशबू ने मेरे दिमाग को सुन्न कर दिया। हम दोनों ने मिलकर अलमारी को धक्का देना शुरू किया, लेकिन कमरे की तंग जगह की वजह से हमारे शरीर बार-बार एक-दूसरे से टकरा रहे थे। सोनिया की सांसें तेज हो रही थीं और उसकी गर्म सांसें मेरे कंधों पर महसूस हो रही थीं, जिससे मेरे मन में एक अजीब सा द्वंद्व चल रहा था कि यह सब महज एक इत्तेफाक है या उसकी तरफ से कोई इशारा।
जैसे ही अलमारी अपनी जगह पर पहुंची, सोनिया अचानक लड़खड़ा गई और उसने अपना संतुलन बनाए रखने के लिए मेरे बाजुओं को कसकर पकड़ लिया। उस पल हमारा पहला वास्तविक शारीरिक स्पर्श हुआ और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे पूरे शरीर में बिजली का करंट दौड़ गया हो। सोनिया ने अपनी नजरें नीची कर लीं, लेकिन उसकी उंगलियां अभी भी मेरे मजबूत बाजुओं को सहला रही थीं। कमरे की खामोशी में हमारी धड़कनों की आवाज साफ सुनी जा सकती थी और वह शर्म जो उसके चेहरे पर आई थी, उसने मेरी दबी हुई इच्छाओं को और भी ज्यादा भड़का दिया।
सोनिया ने धीरे से अपना सिर उठाया और उसकी आंखों में एक ऐसी चमक थी जिसे मैं पढ़ नहीं पा रहा था, लेकिन उसमें प्यास साफ झलक रही थी। उसने धीमी आवाज में कहा कि बहुत गर्मी लग रही है और पसीने से उसका ब्लाउज उसके बदन से चिपक गया था। पसीने की बूंदें उसके गले से होकर उसके तरबूजों की गहरी घाटी में समा रही थीं, जिसे देखकर मेरा खीरा अपनी जगह पर जोर-जोर से फड़कने लगा। झिझक का वह पर्दा धीरे-धीरे गिर रहा था और आकर्षण की वह डोर हमें एक-दूसरे के और करीब खींच रही थी।
मैंने धीरे से अपना हाथ सोनिया की कमर पर रखा, जहां साड़ी थोड़ी सरक गई थी और उसकी मखमली त्वचा का स्पर्श पाकर मैं कांप उठा। सोनिया ने विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी। मैंने उसे अपनी ओर खींचा और हमारे होंठ एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए। जब हमारे होंठों का संगम हुआ, तो ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया ठहर गई हो। वह स्पर्श इतना गहरा और भावुक था कि हम दोनों के मन की सारी बंदिशें एक झटके में टूट गईं और हम एक-दूसरे के आगोश में समाते चले गए।
सोनिया के हाथ अब मेरे बालों में थे और वह पागलों की तरह मेरे होंठों के रस को पी रही थी। मैंने धीरे से उसके ब्लाउज के हुक खोलना शुरू किया और जैसे ही उसके गोरे और भारी तरबूज आजाद हुए, मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। उनके बीच की लकीर बहुत गहरी थी और उन पर लगे मटर अब कड़े हो चुके थे। मैंने झुककर एक तरबूज को अपने मुंह में भर लिया और उसे बड़े चाव से चूसने लगा। सोनिया के मुंह से एक कराह निकली और उसने मेरा सिर अपने सीने से और जोर से सटा लिया, जैसे वह इसी पल का सालों से इंतजार कर रही हो।
सोनिया की उत्तेजना अब चरम पर थी और उसने मेरे कपड़े उतारने में मेरी मदद की। जब मेरा फन फैलाता हुआ खीरा उसके सामने आया, तो उसकी आंखों में हैरानी और चाहत का मिला-जुला भाव था। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और मेरे खीरे को अपनी हथेलियों में थाम लिया। उसके रेशमी हाथों का स्पर्श पाते ही मेरा रस निकलने को बेताब होने लगा। सोनिया ने अपना चेहरा नीचे झुकाया और अपने रसीले होंठों से मेरे खीरे को चूमना शुरू किया। फिर उसने धीरे-धीरे उसे अपने मुंह में ले लिया और उसे ऐसे चूसने लगी जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा टॉफी चूसता है।
खीरा चूसने की उस प्रक्रिया ने मुझे पागल कर दिया था और मेरा पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो चुका था। सोनिया की जीभ मेरे खीरे के ऊपरी हिस्से पर बड़े प्यार से घूम रही थी और बीच-बीच में वह उसे गहराई तक अपने गले में उतार लेती थी। मैंने उसके बालों को पकड़कर उसे और भी गहराई तक जाने का इशारा किया। कुछ देर बाद, मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी साड़ी और पेटीकोट को पूरी तरह से हटा दिया। अब सोनिया पूरी तरह से बिना कपड़ों के मेरे सामने थी, उसकी गहरी खाई के चारों ओर काले बाल एक घने जंगल की तरह फैले हुए थे जो किसी को भी रास्ता भटकने पर मजबूर कर दें।
मैंने अपनी उंगलियों को उसकी खाई की गीली लकीरों पर घुमाया, तो उसने अपनी कमर ऊपर उठा दी। सोनिया की खाई पूरी तरह से रस से भीगी हुई थी और उसमें से एक अजीब सी मदहोश कर देने वाली गंध आ रही थी। मैंने अपना चेहरा नीचे किया और उसकी खाई को चाटना शुरू कर दिया। सोनिया जोर-जोर से कराहने लगी और मेरे सिर को अपनी जांघों के बीच भींच लिया। खाई चाटने के दौरान जब मेरी जीभ उसके मटर जैसे दाने से टकराती, तो वह बिस्तर पर तड़प उठती थी। रस का सैलाब अब रुकने का नाम नहीं ले रहा था और सोनिया पूरी तरह से खुदाई के लिए तैयार हो चुकी थी।
मैंने सोनिया को सामने से खोदने की स्थिति में किया और अपने खीरे की नोक को उसकी गीली खाई के मुहाने पर रखा। सोनिया ने अपनी जांघें पूरी तरह फैला दीं और मुझसे अंदर आने की गुहार लगाने लगी। जैसे ही मैंने एक झटके के साथ अपने खीरे को उसकी खाई के अंदर उतारा, सोनिया की एक चीख निकल गई और उसने मेरे कंधों पर अपने नाखून गड़ा दिए। उसकी खाई बहुत तंग थी और मेरा खीरा बड़ी मुश्किल से रास्ता बना रहा था। हर इंच अंदर जाते ही मुझे एक अद्भुत सुख का अनुभव हो रहा था और सोनिया की तंग दीवारें मेरे खीरे को चारों तरफ से जकड़ रही थीं।
धीरे-धीरे मैंने अपनी गति बढ़ाई और खुदाई की प्रक्रिया को तेज कर दिया। कमरे में थप-थप की आवाजें गूंजने लगीं और हमारे शरीर पसीने के कारण एक-दूसरे से चिपक रहे थे। सोनिया की आहें अब चीखों में बदल रही थीं और वह हर धक्के के साथ मेरा नाम पुकार रही थी। मैंने उसके भारी तरबूजों को अपने हाथों में पकड़कर उन्हें जोर-जोर से मसलना शुरू किया ताकि उसे और भी ज्यादा आनंद मिले। सोनिया का चेहरा लाल हो चुका था और उसकी आंखें चढ़ी हुई थीं, वह पूरी तरह से सुख के सागर में गोते लगा रही थी।
खुदाई के बीच में मैंने उसे घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया। सोनिया अपने घुटनों के बल बैठ गई और उसने अपना भारी पिछवाड़ा मेरी तरफ कर दिया। उस कोण से उसकी खाई और भी आकर्षक लग रही थी। मैंने पीछे से अपना खीरा फिर से उसकी खाई में घुसाया और लंबी-लंबी खुदाई शुरू की। यह स्थिति सोनिया को बहुत पसंद आ रही थी क्योंकि हर धक्के के साथ मेरा खीरा उसकी गहराई को छू रहा था। वह अपने हाथों से बिस्तर की चादर को मुट्ठियों में भींच रही थी और उसका पूरा बदन थरथरा रहा था।
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद अब हम दोनों ही थकने लगे थे, लेकिन मजा अभी खत्म नहीं हुआ था। मैंने सोनिया को वापस सीधा लिटाया और अपनी पूरी ताकत के साथ आखिरी दौर की खुदाई शुरू की। सोनिया की सांसें बहुत तेज हो गई थीं और उसने महसूस किया कि उसका रस निकलने वाला है। उसने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं और मुझे और भी गहराई तक खींचने लगी। अचानक सोनिया का शरीर अकड़ गया और उसकी खाई से रसों का फव्वारा छूटने लगा, वह पूरी तरह से शांत हो गई और सुख के चरम पर पहुंच गई।
सोनिया के रस निकलते ही मेरा भी सब्र जवाब दे गया और मैंने अपने खीरे का सारा गरम रस उसकी गहराई में उड़ेल दिया। वह अहसास इतना सुकून भरा था कि हम दोनों काफी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे। सोनिया की हालत ऐसी थी कि वह हिलने के लायक भी नहीं बची थी, उसकी आंखें आधी बंद थीं और उसके चेहरे पर एक संतोष की लकीर थी। कुछ देर बाद उसने मेरी ओर देखा और मंद सा मुस्कुराते हुए मुझे अपने गले लगा लिया। उस दोपहर की वह खुदाई हमारे बीच एक ऐसा अटूट रिश्ता बना गई जिसे शब्द बयान नहीं कर सकते थे।