गर्मियों की वह दोपहर बहुत ही शांत और बोझिल थी, सूरज की तपिश खिड़कियों के पर्दों को चीरकर अंदर आने की कोशिश कर रही थी। आर्यन अपने कमरे में लेटा हुआ था, लेकिन उसका मन कहीं और ही भटक रहा था। घर में सिर्फ वह और उसकी सौतेली माँ, निशा, अकेले थे। आर्यन के पिता एक हफ्ते के लिए बिजनेस ट्रिप पर शहर से बाहर गए थे। निशा की उम्र अभी सिर्फ पैंतीस साल थी, और वह आर्यन से मुश्किल से बारह साल बड़ी थी। उनके बीच एक अजीब सी खामोशी और खिंचाव हमेशा बना रहता था, जिसे आज आर्यन बहुत गहराई से महसूस कर रहा था।
निशा का शरीर किसी ढली हुई मूरत जैसा था, उसकी कमर पतली और कूल्हे चौड़े थे जो चलते समय एक लय में डोलते थे। उसके तरबूज इतने उभरे हुए और सुडौल थे कि सूती साड़ी के ब्लाउज से बाहर झाँकने को बेताब लगते थे। जब भी वह आर्यन के सामने से गुजरती, आर्यन की नजरें अनचाहे ही उसके उन भारी तरबूजों पर टिक जातीं। उसके चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक थी और आँखों में एक ऐसी गहराई थी जो आर्यन को अपनी ओर खींचती थी। आज उसने हल्के नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी थी, जो उसके गोरे बदन पर किसी मखमली चादर की तरह लिपटी हुई थी।
आर्यन प्यास लगने के बहाने किचन की ओर गया, जहाँ निशा रात के खाने की तैयारी शुरू करने वाली थी। किचन में उमस ज्यादा थी और निशा के माथे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से थोड़ा खिसक गया था, जिससे उसके मखमली तरबूजों की गहरी घाटी साफ नजर आ रही थी। आर्यन की धड़कनें तेज हो गईं जब उसने देखा कि पसीने की एक बूंद उसके गले से होती हुई उन तरबूजों के बीच जा गिरी है। निशा ने मुड़कर आर्यन को देखा और मुस्कुराई, उसकी उस मुस्कान में एक अजीब सा आमंत्रण था जिसे आर्यन भांप गया था।
बातों-बातों में आर्यन निशा के करीब चला गया और उसने धीरे से निशा के हाथ पर अपना हाथ रखा। निशा ने हाथ हटाया नहीं, बल्कि उसकी सांसें थोड़ी तेज हो गईं। आर्यन ने फुसफुसाते हुए कहा, “निशा, आज आप बहुत सुंदर लग रही हैं, यह गर्मी आपको और भी निखार रही है।” निशा ने अपनी नजरें झुका लीं और उसकी उंगलियां किचन के स्लैब पर कांपने लगीं। उसने धीरे से कहा, “आर्यन, तुम यह क्या कह रहे हो? हम इस तरह बात नहीं कर सकते।” लेकिन आर्यन ने उसके कांपते हाथों को कसकर पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया।
निशा की पीठ अब आर्यन के सीने से सटी हुई थी और आर्यन को उसके शरीर की तपिश साफ महसूस हो रही थी। आर्यन ने अपना एक हाथ धीरे-धीरे ऊपर उठाया और निशा के पेट पर फेरते हुए उसके तरबूजों के ठीक नीचे ले गया। निशा के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। आर्यन ने उसके कान के पास झुककर कहा, “मैं कब से इस पल का इंतजार कर रहा था, आपकी यह खामोशी मुझे पागल कर रही है।” निशा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि पीछे झुककर अपना सिर आर्यन के कंधे पर टिका दिया।
आर्यन ने धीरे से निशा को घुमाया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उन दोनों के बीच फूलों का मिलन इतना गहरा था कि कमरे की हवा भी गर्म हो गई। आर्यन के हाथ अब निशा की पीठ पर फिसल रहे थे और वह उसके ब्लाउज की डोरियों को टटोल रहा था। जैसे ही डोरियां खुलीं, निशा के भारी और सख्त तरबूज आजाद होकर आर्यन के हाथों में आ गए। आर्यन ने उन्हें अपनी हथेलियों में भरकर दबाया, जिससे निशा के मुंह से तेज सिसकारी निकली। उसके मटर जैसे निप्पल अब पूरी तरह से अकड़ चुके थे और आर्यन के अंगूठे के स्पर्श से और भी संवेदनशील हो गए थे।
निशा की साड़ी अब फर्श पर गिर चुकी थी और वह सिर्फ अपने अंतःवस्त्रों में आर्यन के सामने खड़ी थी। आर्यन ने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद भी अपने कपड़े उतारने लगा। जब आर्यन पूरी तरह निर्वस्त्र हुआ, तो उसका विशाल खीरा गर्व से ऊपर की ओर उठा हुआ था। निशा की नजरें आर्यन के खीरे पर टिक गईं और उसने अपनी जीभ से अपने होंठों को भिगोया। आर्यन ने उसके करीब आकर उसके रेशमी बदन को चूमना शुरू किया, उसके हाथ निशा की गहरी और रसीली खाई की ओर बढ़ रहे थे।
जैसे ही आर्यन की उंगलियों ने निशा की खाई को छुआ, वह गीली और चिपचिपी महसूस हुई। आर्यन ने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, जिससे निशा का शरीर बिस्तर पर मछली की तरह तड़पने लगा। वह आर्यन के बाल पकड़कर उसे अपने और करीब खींच रही थी। आर्यन ने अपना सिर नीचे झुकाया और निशा की खाई चाटना शुरू कर दिया। निशा ने अपनी टांगें आर्यन के सिर के चारों ओर लपेट लीं और जोर-जोर से कराहने लगी, “ओह आर्यन… और तेज… मुझे और चाहिए…” उसकी खाई से निकलने वाला रस अब आर्यन के चेहरे पर लग चुका था।
अब निशा की बारी थी, उसने आर्यन को सीधा लेटाया और उसके खीरे को अपने मुंह में ले लिया। वह बड़े ही प्यार और तन्मयता से खीरा चूसना शुरू कर दिया। आर्यन की आँखों के सामने सितारे नाचने लगे जब निशा की जीभ उसके खीरे के ऊपरी हिस्से पर फिर रही थी। कुछ ही मिनटों में आर्यन का सब्र जवाब देने लगा और उसने निशा को खींचकर अपने नीचे ले लिया। उसने निशा की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे की नोक को उसकी रसीली खाई के मुहाने पर टिका दिया।
आर्यन ने एक झटके में अपने खीरे को निशा की खाई के अंदर उतार दिया। निशा के मुंह से एक तीखी चीख निकली जो फिर एक गहरी आह में बदल गई। खाई बहुत तंग थी लेकिन आर्यन के खीरे के लिए पूरी तरह से तैयार थी। आर्यन ने धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ वह निशा की गहराई तक पहुँच रहा था। कमरे में सिर्फ उनके शरीरों के टकराने की आवाज और भारी सांसें सुनाई दे रही थीं। निशा के तरबूज आर्यन के सीने से टकराकर ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन उन्हें बार-बार अपने मुंह में भरकर मटरों को चूस रहा था।
निशा ने आर्यन की कमर में अपनी टांगें फंसा लीं और उसे और भी जोर से धक्के मारने के लिए उकसाने लगी। आर्यन अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका था, उसकी मेहनत से उसके बदन पर पसीने की चादर बिछ गई थी। उसने निशा को पलटा और उसे बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया। पीछे से देखने पर निशा का पिछवाड़ा किसी पहाड़ी की तरह विशाल और आकर्षक लग रहा था। आर्यन ने अपने हाथों से उसके पिछवाड़े को फैलाया और पीछे से खोदना शुरू कर दिया। यह स्थिति निशा को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी और वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींच रही थी।
खुदाई की यह प्रक्रिया बहुत ही रोमांचक और थका देने वाली थी, लेकिन दोनों में से कोई भी रुकना नहीं चाहता था। आर्यन ने फिर से निशा को सीधा किया और उसकी कमर के नीचे एक तकिया रख दिया ताकि खाई और भी ऊपर उठ जाए। अब आर्यन के हर धक्के के साथ निशा का पूरा शरीर कांप रहा था। आर्यन ने महसूस किया कि अब उसका रस निकलने वाला है, और ठीक उसी समय निशा का शरीर भी अकड़ने लगा। उसने आर्यन को कसकर पकड़ लिया और चिल्लाई, “आर्यन, मेरा रस छूट रहा है… मुझे भर दो!” आर्यन ने भी अपना सारा वेग उसके अंदर उड़ेल दिया।
जैसे ही दोनों का रस छूटा, वे एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए। आर्यन निशा के ऊपर ही लेटा हुआ था और उनकी धड़कनें अब भी एक-दूसरे से मुकाबला कर रही थीं। कमरे का तापमान अब भी गर्म था, लेकिन उनके मन को एक असीम शांति मिल चुकी थी। निशा ने आर्यन के माथे को चूमा और उसके बालों में अपनी उंगलियां फेरने लगी। उस पल में उनके बीच का रिश्ता सौतेली माँ और बेटे से कहीं बढ़कर एक प्रेमी और प्रेमिका का हो चुका था, जो समाज की नजरों से दूर अपनी एक अलग ही दुनिया बना चुके थे।
काफी देर तक वे दोनों बिना कुछ बोले एक-दूसरे को निहारते रहे। निशा की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे उसने कोई बहुत बड़ी जंग जीत ली हो। आर्यन ने धीरे से उसके गाल को छुआ और कहा, “क्या आप खुश हैं?” निशा ने बस अपनी आँखें मूंद लीं और उसे गले लगा लिया। वे जानते थे कि बाहर की दुनिया के लिए यह गलत था, लेकिन उस कमरे की चारदीवारी के अंदर, वे सिर्फ दो प्यासे शरीर थे जिन्होंने एक-दूसरे की प्यास बुझाई थी। शाम की परछाइयां अब कमरे में लंबी होने लगी थीं, जो उनके इस राज को अपने अंदर समेट रही थीं।