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सौतेली माँ की चु@@ई

आर्यन जब कॉलेज से वापस लौटा तो घर में सन्नाटा पसरा हुआ था, दोपहर की चिलचिलाती धूप ने बाहर की रौनक छीन ली थी लेकिन घर के भीतर का तापमान कुछ और ही कहानी बयां कर रहा था। उसकी सौतेली माँ, कविता, लिविंग रूम में सोफे पर लेटी हुई थी और उनके बदन पर रेशमी साड़ी इस कदर लिपटी थी कि उनके शरीर का हर उतार-चढ़ाव साफ झलक रहा था। कविता की उम्र मात्र पैंतीस वर्ष थी और उनके शरीर की बनावट किसी ढलती उम्र की औरत जैसी नहीं बल्कि एक जवान और रसीली बेल की तरह थी जिसके भारी तरबूज साड़ी के ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे। आर्यन उन्हें देखते ही ठिठक गया, उसके मन में अपनी माँ के प्रति जो सम्मान था, वह धीरे-धीरे वासना की गहरी धुंध में खोने लगा था और उसके पजामे के भीतर उसका खीरा धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने की कोशिश करने लगा था।

कविता ने जैसे ही आर्यन को देखा, उनके चेहरे पर एक मखमली मुस्कान तैर गई और उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा और खिसका दिया जिससे उनके गोरे और मांसल कंधों की चमक आर्यन की आँखों को चौंधियाने लगी। उन्होंने बड़े ही प्यार से कहा, ‘आर्यन बेटा, तुम आ गए? देखो कितनी गर्मी है, मैं तो यहाँ पसीने से तर-बतर हो रही हूँ, जरा कूलर की घास देख लो या शायद मुझे ही पंखा कर दो।’ उनकी आवाज में एक अजीब सी खनक और मिठास थी जो सीधे आर्यन के दिल के पार उतर गई, उसने गौर किया कि पसीने की छोटी-छोटी बूंदें कविता के गले से उतरकर उनके गहरे तरबूजों की घाटी में समा रही थीं। आर्यन का गला सूखने लगा था और उसकी आँखों में एक ऐसी चमक आ गई थी जिसे देखकर कविता भी समझ गई थी कि आज मर्यादा की दीवारें टूटने वाली हैं और एक नई खुदाई का आगाज़ होने वाला है।

आर्यन धीरे-धीरे चलकर उनके पास गया और सोफे के किनारे पर बैठ गया, उसके शरीर की खुशबू और जवानी की तपिश कविता को भी महसूस होने लगी थी। कविता ने अपना हाथ बढ़ाकर आर्यन के गालों को छुआ और धीरे से फुसफुसाया, ‘तुम इतने बड़े कब हो गए आर्यन, तुम्हारी ये चौड़ी छाती और ये सुडौल बदन देखकर मुझे डर लगता है कि कहीं मैं खुद को रोक न पाऊं।’ आर्यन ने उनकी उंगलियों को अपने होंठों से लगा लिया और उनके गोरे हाथों का रसपान करने लगा, उसकी धड़कनें इतनी तेज थीं कि वह खुद उन्हें सुन सकता था। उसने देखा कि कविता की साँसें भी तेज हो रही थीं और उनके तरबूजों पर लगे मटर अब अकड़ने लगे थे, जो इस बात का सबूत थे कि उनके भीतर भी वही आग लगी है जो आर्यन को जला रही थी।

बिना कुछ कहे आर्यन ने कविता को अपनी बाहों में भर लिया और उनके चेहरे के करीब जाकर उनके कानों में धीमे से कहा, ‘आज कोई मर्यादा नहीं रहेगी माँ, आज सिर्फ हम दोनों और हमारी ये अधूरी इच्छाएं होंगी।’ कविता ने भी कोई विरोध नहीं किया बल्कि अपनी आँखें बंद कर लीं और आर्यन के गले में अपनी बाहें डाल दीं, जैसे वह बरसों से इस पल का इंतजार कर रही हों। आर्यन ने धीरे से उनके ब्लाउज की डोरी को ढीला किया और जैसे ही कपड़ा सरका, उसके सामने दो विशाल और सफेद तरबूज आ गए जिनके ऊपर गुलाबी मटर शान से खड़े थे। आर्यन ने झुककर एक तरबूज को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, कविता के मुँह से एक आह निकली और उन्होंने आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फँसा लीं, जैसे वह उसे और करीब बुला रही हों।

धीरे-धीरे आर्यन का हाथ कविता की साड़ी के भीतर गया और उसने उनके रेशमी पिछवाड़े को सहलाना शुरू किया, जो बहुत ही कोमल और गद्देदार महसूस हो रहे थे। कविता मदहोशी में झूम रही थीं और उन्होंने आर्यन के पजामे के ऊपर से ही उसके कड़क खीरे को पकड़ लिया, उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस करते ही उनकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा, ‘आर्यन, तुम्हारा ये खीरा तो बहुत ही ताकतवर लग रहा है, क्या मेरी खाई इसे संभाल पाएगी?’ आर्यन ने जवाब में सिर्फ उनके होंठों को चूम लिया और अपनी उंगली से उनकी खाई को टटोलने लगा, जो पहले से ही पसीने और रस से पूरी तरह भीग चुकी थी और किसी गीली मिट्टी की तरह नरम हो गई थी।

आर्यन ने अब पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर अपना विशाल खीरा बाहर निकाला और कविता की आँखों के सामने ले आया, जिसे देखकर उनकी साँसें रुक सी गईं। उन्होंने धीरे से अपना मुँह खोला और उस गरम खीरे को अपने मुँह में ले लिया, उसे चूसते हुए उनके चेहरे पर जो संतुष्टि के भाव थे, उन्हें देखकर आर्यन का संयम जवाब देने लगा था। कविता ने बड़ी महारत से उसे अपने हलक तक उतारा और जब आर्यन ने अपने हाथ उनकी खाई में उंगली से खोदना शुरू किया, तो वह पूरी तरह से कामुकता के चरम पर पहुँच गईं। उनकी खाई से निकलने वाला रस अब आर्यन की उंगलियों पर चिपक रहा था और पूरा कमरा एक मादक खुशबू से भर गया था जो केवल दो शरीरों के मिलन से पैदा होती है।

अब समय आ गया था उस असली खुदाई का जिसके लिए दोनों तड़प रहे थे, आर्यन ने कविता को सोफे पर ही पिछवाड़े से खोदने वाली पोजीशन (डॉग स्टाइल) में खड़ा कर दिया। उनके भारी पिछवाड़े आर्यन की आँखों के सामने किसी पहाड़ की तरह थे और उनके बीच छिपी वह तंग खाई उसे अपनी ओर खींच रही थी। आर्यन ने अपने खीरे की नोक को खाई के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में उसे आधा भीतर उतार दिया, कविता के मुँह से एक जोर की चीख निकली लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि उस सुख की थी जिसका वह बरसों से इंतजार कर रही थीं। उन्होंने अपने दोनों हाथों से सोफे को मजबूती से पकड़ लिया और अपने पिछवाड़े को पीछे की ओर धकेलने लगीं ताकि खीरा पूरी गहराई तक समा सके।

खुदाई की प्रक्रिया अब बहुत ही तेज और दमदार हो गई थी, हर धक्के के साथ एक थप-थप की आवाज गूँज रही थी जो आर्यन के जोश को और बढ़ा रही थी। कविता जोर-जोर से कराह रही थीं और कह रही थीं, ‘हाँ आर्यन, और तेज खोदो, अपनी सौतेली माँ की इस बंजर खाई को आज पूरी तरह से जोत डालो, तुम्हारा ये खीरा मेरी रूह तक पहुँच रहा है।’ आर्यन भी पूरी लय में था, उसने कविता के बालों को पकड़कर पीछे खींचा और पूरी ताकत से उन्हें सामने से खोदना (मिशनरी) शुरू कर दिया। उनके पसीने से लथपथ शरीर एक दूसरे से टकरा रहे थे और हर टक्कर के साथ उनके दिलों की धड़कनें एक नया संगीत पैदा कर रही थीं, जिससे पूरा माहौल और भी ज्यादा उत्तेजक हो गया था।

तकरीबन आधे घंटे की कड़ी खुदाई के बाद दोनों का शरीर कांपने लगा, आर्यन को महसूस हुआ कि उसके खीरे के मुहाने पर गरम रस जमा हो रहा है और कविता की खाई भी तेजी से सिकुड़ने लगी थी। कविता ने आर्यन को कसकर जकड़ लिया और चिल्लाईं, ‘आर्यन, मेरा रस निकलने वाला है, मुझे पूरी तरह से भर दो!’ और तभी आर्यन ने अपनी सारी ताकत झोंकते हुए एक आखिरी धक्का मारा और अपना सारा गरम रस कविता की खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। कविता का शरीर भी झटकों के साथ शांत होने लगा और उनका रस भी बाहर निकलकर आर्यन के अंगों को भिगोने लगा, दोनों एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े और उनकी साँसें सामान्य होने में काफी समय लगा।

खुदाई के बाद की वह शांति बहुत ही सुकून भरी थी, आर्यन कविता के सीने पर सिर रखकर लेटा हुआ था और कविता उसके बालों को सहला रही थीं। दोनों का शरीर पसीने से नहाया हुआ था और उनके बीच की वह झिझक अब हमेशा के लिए खत्म हो गई थी, उनके चेहरे पर एक ऐसी तृप्ति थी जो केवल एक संपूर्ण मिलन के बाद ही हासिल होती है। कविता ने आर्यन के माथे को चूमा और कहा, ‘आज तुमने मुझे एक नई जिंदगी दी है आर्यन, ये अहसास मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी।’ आर्यन ने भी मुस्कुराते हुए उन्हें और कसकर पकड़ लिया, उसे पता था कि अब उनके बीच यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है और यह खुदाई अक्सर उनके घर की बंद दीवारों के पीछे होती रहेगी।

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