होटल वाली अजनबी चु@@ई—>
उस रात शहर के सबसे आलीशान होटल ‘द रॉयल हेरिटेज’ की लॉबी में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। समीर अपनी बिजनेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर अपने कमरे की तरफ बढ़ रहा था कि तभी उसकी नजर मीरा पर पड़ी। मीरा वहां खड़ी अपने कमरे की चाबी को लेकर कुछ परेशान दिख रही थी। समीर ने जब पास जाकर देखा तो पता चला कि होटल के सिस्टम में कुछ खराबी आने की वजह से उसके कमरे का लॉक काम नहीं कर रहा था और होटल पूरी तरह से बुक था। समीर ने सभ्यता दिखाते हुए अपना बड़ा सुइट साझा करने का प्रस्ताव दिया, जिसे मीरा ने झिझकते हुए स्वीकार कर लिया क्योंकि बाहर आधी रात का समय था और कहीं और जाना मुमकिन नहीं था।
कमरे में दाखिल होते ही एक अजीब सी गर्माहट का एहसास हुआ। समीर ने गौर किया कि मीरा की कद-काठी बेहद आकर्षक थी; उसका शरीर किसी तराशी हुई मूर्ति की तरह लग रहा था। उसकी रेशमी साड़ी के नीचे दबे हुए उसके भारी और गोल तरबूज हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे, जो किसी भी मर्द का मन डोलने के लिए काफी थे। मीरा की कमर पतली थी और उसके पिछवाड़े का घेरा इतना गठीला था कि वह चलते समय एक मादक लय पैदा कर रहा था। समीर की नजरें बार-बार उसके उन उभरे हुए तरबूजों पर जाकर टिक रही थीं, जिनकी गोलाई साड़ी के ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रही थी।
दोनों के बीच शुरू में औपचारिक बातें हुईं, लेकिन धीरे-धीरे माहौल में एक भावनात्मक जुड़ाव महसूस होने लगा। मीरा ने बताया कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी में कितनी अकेली है और कैसे उसका पति उसे वह समय और प्यार नहीं दे पाता जिसकी वह हकदार है। समीर ने उसकी बातों को बड़ी सहानुभूति से सुना, जिससे मीरा के मन में उसके प्रति एक भरोसा और आकर्षण पैदा होने लगा। कमरे की मद्धम रोशनी में मीरा का चेहरा और भी ज्यादा चमक रहा था। उसकी आंखों में एक ऐसी प्यास थी जिसे वह सालों से दबाए बैठी थी और समीर की मौजूदगी उस प्यास को हवा दे रही थी।
बातों-बातों में कब दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए, उन्हें पता ही नहीं चला। समीर ने अपना हाथ मीरा के कंधे पर रखा, तो उसने कोई विरोध नहीं किया बल्कि उसकी तरफ और झुक गई। समीर ने धीरे से उसके चेहरे को छुआ और उसकी रेशमी त्वचा को महसूस किया। मीरा के मन में एक गहरा संघर्ष चल रहा था—एक तरफ समाज की मर्यादा थी और दूसरी तरफ उसकी अपनी दबी हुई इच्छाएं। लेकिन जब समीर ने उसके करीब जाकर उसकी गर्दन पर अपनी गर्म सांसें छोड़ीं, तो उसकी सारी झिझक पिघलने लगी। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और समीर के मजबूत सीने से चिपक गई, जिससे उसके नरम तरबूज समीर के बदन में धंसने लगे।
समीर ने अब और इंतजार न करते हुए मीरा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके बीच एक गहरा संगम शुरू हुआ। वह उसे बड़े प्यार से चख रहा था, जैसे कोई दुर्लभ शहद पी रहा हो। उसके हाथ मीरा की पीठ पर रेंगने लगे और साड़ी के पल्लू को धीरे से नीचे गिरा दिया। अब समीर की नजरों के सामने मीरा के वह अनमोल तरबूज थे, जिनकी गहराई और गोलाई देखकर वह दंग रह गया। उसने अपने हाथों में उन बड़े तरबूजों को भर लिया और उन्हें धीरे-धीरे सहलाने लगा। तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे दाने जैसे मटर अब सख्त होने लगे थे, जो मीरा की बढ़ती हुई उत्तेजना का साफ संकेत दे रहे थे।
मीरा की सिसकियां अब कमरे की खामोशी को तोड़ने लगी थीं। समीर ने अपने मुंह से उन मटर को सहलाना और चखना शुरू किया, जिससे मीरा के पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। उसने समीर के बालों को मजबूती से पकड़ लिया और अपने शरीर को उसकी तरफ और जोर से धकेलने लगी। समीर का हाथ अब धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा और वह मीरा की रेशमी साड़ी को पूरी तरह से उतारने लगा। जब मीरा पूरी तरह से निर्वस्त्र हुई, तो समीर की नजर उसके घने बालों के नीचे छिपी उस गहरी और गीली खाई पर पड़ी। वह खाई पूरी तरह से तैयार थी और वहां से प्यार का रस धीरे-धीरे रिसने लगा था।
समीर ने अब अपने कपड़े उतार फेंके और उसका विशाल और सख्त खीरा पूरी तरह से अपनी ताकत दिखा रहा था। जब मीरा ने उस गर्म और मोटे खीरे को देखा, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। उसने धीरे से हाथ बढ़ाकर उस खीरे को छुआ और उसकी गर्मी को महसूस किया। समीर ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी खाई के पास जाकर अपनी जीभ से उसे सहलाना शुरू किया। मीरा बिस्तर पर तड़पने लगी जब समीर की जीभ उसकी खाई के हर कोने को गहराई से चखने लगी। वह बार-बार समीर का सिर अपनी तरफ खींच रही थी, मानो कह रही हो कि अब उसे और बर्दाश्त नहीं होता।
समीर ने अब उस लम्बे खीरे को अपने हाथ में लिया और उसे मीरा की गीली खाई के मुहाने पर टिका दिया। उसने धीरे से दबाव बनाया, जिससे मीरा के गले से एक दर्द भरी लेकिन सुखद आह निकली। जैसे-जैसे वह खीरा उस तंग खाई के अंदर समाने लगा, मीरा का पूरा बदन कांपने लगा। समीर ने अपनी गति बढ़ाई और सामने से खोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ मीरा के वह भारी तरबूज बुरी तरह से हिल रहे थे और उन पर लगे मटर समीर के सीने से रगड़ खा रहे थे। कमरे में केवल उनके जिस्मों के टकराने की आवाज और मीरा की कराहें गूंज रही थीं।
खुदाई की यह प्रक्रिया अब और भी ज्यादा तीव्र और गहरी होती जा रही थी। समीर ने मीरा को बिस्तर पर उल्टा किया और उसके भारी पिछवाड़े को ऊपर उठाकर पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। इस स्थिति में समीर का खीरा मीरा की खाई की गहराइयों को और भी ज्यादा छू पा रहा था। मीरा ने तकिए में अपना मुंह छिपा लिया ताकि उसकी चीखें बाहर न जाएं। वह हर धक्के के साथ समीर के खीरे की मोटाई और लंबाई को अपनी खाई के अंदर महसूस कर रही थी। समीर भी पूरी तरह से जोश में था, उसकी सांसें फूल रही थीं और उसका पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो गया था, लेकिन उसका जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा था।
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद, दोनों अपने चरम आनंद की ओर बढ़ने लगे। समीर की गति अब तूफानी हो चुकी थी और मीरा का शरीर बार-बार धनुष की तरह मुड़ रहा था। अचानक मीरा का पूरा शरीर अकड़ गया और उसकी खाई से प्यार का ढेर सारा रस निकलने लगा। ठीक उसी पल समीर ने भी अपना सारा गरम रस मीरा की गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे की बांहों में निढाल होकर गिर पड़े। उनके जिस्म पसीने से भीगे हुए थे और उनकी धड़कनें किसी दौड़ते हुए घोड़े की तरह तेज थीं। उस अजनबी मुलाकात ने उन दोनों को एक ऐसी तृप्ति दी थी जिसकी कल्पना उन्होंने कभी नहीं की थी।
अगली सुबह जब सूरज की किरणें कमरे में दाखिल हुईं, तो समीर और मीरा एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे। उनके बीच अब वह अजनबीपन नहीं था, बल्कि एक गहरा रूहानी और जिस्मानी एहसास था। मीरा के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी और उसकी आंखों में वह अधूरी प्यास अब शांत नजर आ रही थी। समीर ने उसे फिर से अपनी बांहों में भर लिया और महसूस किया कि यह रात उनकी जिंदगी की सबसे यादगार रात बन चुकी थी। वे जानते थे कि होटल से बाहर निकलते ही उनकी राहें जुदा हो जाएंगी, लेकिन उस रात की गई वह गहरी खुदाई और रसों का वह संगम उनके दिलों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया था।