बचपन की यादोंवाली चु@@ई—बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और कमरे के अंदर की खामोशी समीर और उसकी पुरानी क्रश मीनाक्षी के बीच की अनकही तड़प को और भी गहरा कर रही थी। समीर ने दस साल बाद मीनाक्षी को देखा था, लेकिन उसका रूप अब एक परिपक्व और बेहद आकर्षक औरत का हो चुका था जिसे देखकर समीर के दिल की धड़कनें बेकाबू हो रही थीं। मीनाक्षी ने नीले रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी जो उसके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को बड़ी बेरहमी से उभार रही थी और समीर की नजरें उसके यौवन की चमक पर टिकी हुई थीं। कमरे की मद्धम रोशनी में मीनाक्षी का गोरा रंग और भी निखर कर आ रहा था और उसके शरीर से उठने वाली भीनी-भीनी खुशबू समीर के दिमाग पर नशा चढ़ा रही थी। उन दोनों के बीच एक अजीब सा खिंचाव था जो बरसों पुरानी दोस्ती और उस दबे हुए आकर्षण का नतीजा था जो आज अचानक ज्वालामुखी बनकर फूटने को तैयार था।
मीनाक्षी का शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा लग रहा था जहाँ उसके उभार यानी उसके रसीले तरबूज साड़ी के ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे और उनकी गोलाई इतनी मुकम्मल थी कि समीर का हाथ उन्हें थामने के लिए तड़प उठा। उसकी कमर की ढलान और उसके भारी पिछवाड़े का घेराव साड़ी के कपड़े में साफ झलक रहा था जिसे देखकर समीर के भीतर की मर्दानी चाहत हिलोरे मारने लगी थी। मीनाक्षी जब सांस ले रही थी तो उसके तरबूजों की हरकत और उन पर उभरे हुए छोटे-छोटे मटर जैसे निशान समीर को साफ दिखाई दे रहे थे जो ठंड या उत्तेजना की वजह से अकड़ गए थे। उसके शरीर की बनावट में एक खास तरह की कसावट थी जो उसकी उम्र के साथ और भी ज्यादा कामुक हो गई थी और समीर को लग रहा था कि अगर उसने आज इसे नहीं छुआ तो वो पागल हो जाएगा। मीनाक्षी की गहरी नाभि और उसके आस-पास की मुलायम त्वचा समीर को अपनी ओर खींच रही थी जैसे कोई भंवर उसे अपने अंदर समा लेने के लिए बुला रहा हो।
समीर धीरे से मीनाक्षी के करीब आया और उसकी आँखों में झांकते हुए बोला, ‘मीनाक्षी, क्या तुम्हें अंदाजा भी है कि तुम कितनी हसीन लग रही हो और मैंने इन सालों में तुम्हें कितना याद किया है?’ मीनाक्षी की पलकें झुक गईं और उसकी भारी सांसें समीर के सीने से टकराने लगीं जिससे माहौल में उत्तेजना का पारा और भी बढ़ गया। उसने धीमी आवाज में कहा, ‘समीर, ये सब ठीक नहीं है, हम सिर्फ दोस्त हैं, लेकिन मेरा मन भी आज मेरी बात नहीं सुन रहा है।’ समीर ने हिम्मत जुटाई और अपना हाथ उसकी नंगी कमर पर रखा जहाँ उसकी उंगलियों की हरकत ने मीनाक्षी के पूरे बदन में बिजली सी दौड़ा दी और वो सिहर उठी। समीर ने उसे अपनी ओर खींचा और उसके कानों के पास जाकर फुसफुसाया, ‘आज की रात सिर्फ हमारी है, कोई मर्यादा नहीं, सिर्फ तुम और मैं और हमारे बीच की ये बेतहाशा बढ़ती हुई चाहत।’ मीनाक्षी ने कोई विरोध नहीं किया बल्कि अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर समीर के मजबूत कंधे पर टिका दिया जिससे उसकी गर्दन का गोरापन समीर के सामने पूरी तरह नुमाया हो गया।
समीर ने अपनी उंगलियों से मीनाक्षी की गर्दन को सहलाना शुरू किया और धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उसकी साड़ी के पल्लू को खिसका दिया जिससे उसके भारी तरबूज अब और भी साफ नजर आने लगे थे। उसने धीरे से अपने होंठों को मीनाक्षी के होंठों से मिलाया और उन दोनों ने एक-दूसरे के वजूद को महसूस करना शुरू कर दिया जहाँ उनकी सांसें एक-दूसरे में घुल रही थीं। समीर के हाथ अब मीनाक्षी के तरबूजों को हल्के से दबाने लगे थे और उनकी नरमी और गर्माहट महसूस करके समीर के अंदर का जानवर जाग उठा था। मीनाक्षी के मुँह से भारी सांसें निकलने लगीं और उसने समीर के बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं जैसे वो उसे अपने और भी करीब बुला रही हो। समीर ने अपनी उंगलियों की हरकत को नीचे की ओर बढ़ाया और मीनाक्षी के पेट को सहलाते हुए साड़ी की गांठ तक पहुँच गया जहाँ उसके हाथों की गर्मी मीनाक्षी को पागल कर रही थी। उसने मीनाक्षी के ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले और जैसे ही उसके तरबूज आजाद हुए, समीर की नजरें उन पर जम गईं जो किसी कुदरती करिश्मे से कम नहीं थे।
समीर ने नीचे झुककर मीनाक्षी की गहरी खाई को महसूस करने की कोशिश की और उसके हाथों ने साड़ी और साये को पूरी तरह से हटा दिया जिससे वो अब पूरी तरह निर्वस्त्र खड़ी थी। मीनाक्षी के बदन की बनावट को देखकर समीर दंग रह गया जहाँ उसकी खाई के पास छोटे-छोटे बाल बड़ी खूबसूरती से बिखरे हुए थे और वहां से उठने वाली एक नैसर्गिक गंध उसे मदहोश कर रही थी। समीर ने अपनी उंगलियों से मीनाक्षी की खाई में उंगली करना शुरू किया जिससे मीनाक्षी की कमर हवा में धनुष की तरह मुड़ गई और उसके मुँह से टूटी हुई आवाजें निकलने लगीं। वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसके रस की फिसलन समीर की उंगलियों पर साफ महसूस हो रही थी जो इस बात का सबूत थी कि वो भी उतनी ही तड़प रही है। समीर ने अब मीनाक्षी की खाई चाटना शुरू किया और उसके रस के स्वाद ने समीर को और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया जिससे वो पूरी तरह बेकाबू होने लगा था। मीनाक्षी ने समीर का सिर अपने दोनों हाथों से थाम लिया और उसे अपनी गहराई में और भी ज्यादा धकेलने लगी जैसे वो अपनी पूरी प्यास आज ही बुझा लेना चाहती हो।
अब बारी मीनाक्षी की थी, उसने समीर के कपड़े उतारे और जैसे ही उसका सख्त और लंबा खीरा बाहर आया, मीनाक्षी की आँखें फटी की फटी रह गईं क्योंकि उसकी लंबाई और मोटाई अविश्वसनीय थी। उसने कांपते हाथों से समीर के खीरे को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी जिससे समीर के मुँह से एक सिसकारी निकल गई। मीनाक्षी ने नीचे झुककर समीर का खीरा मुंह में लेना शुरू किया और उसे बड़ी कोमलता और प्यास के साथ चूसने लगी जैसे वो कोई अमृत का घूंट पी रही हो। खीरा चूसना जारी रखते हुए वो समीर की आँखों में देख रही थी और उसकी ये अदा समीर को पागल बना देने के लिए काफी थी। समीर ने उसके सिर को पकड़कर अपनी लय तेज की और मीनाक्षी ने भी पूरी लगन से उसके खीरे की सेवा की जिससे समीर को जन्नत का अहसास होने लगा था। समीर का खीरा अब पूरी तरह से तन चुका था और वो किसी भी वक्त अपना रस छोड़ने को तैयार था, लेकिन समीर चाहता था कि वो पहले मीनाक्षी की गहराई को पूरी तरह से नाप ले।
समीर ने मीनाक्षी को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर आकर उसे सामने से खोदना शुरू किया जहाँ उसका खीरा मीनाक्षी की संकरी खाई में धीरे-धीरे समाने लगा। मीनाक्षी ने दर्द और आनंद की मिली-जुली एक चीख मारी और समीर के कंधों पर अपने नाखून गड़ा दिए क्योंकि वो गहराई बहुत ज्यादा थी। समीर ने अपनी रफ्तार बढ़ाई और हर धक्के के साथ वो मीनाक्षी के दिल तक पहुँचने की कोशिश कर रहा था जहाँ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज कमरे में गूंज रही थी। ‘समीर, मुझे और गहराई से खोदो, मुझे पूरी तरह अपना बना लो,’ मीनाक्षी ने सिसकते हुए कहा और समीर ने उसकी मांग पूरी करते हुए और भी जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसके भारी तरबूज हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे और समीर उन्हें अपने हाथों में भरकर मसल रहा था जिससे मीनाक्षी का आनंद चरम पर पहुँच रहा था। उनका ये मिलन इतना गहरा और भावुक था कि दोनों को दुनिया की कोई खबर नहीं थी, बस एक-दूसरे की सांसों और जिस्मानी गर्मी का अहसास था।
कुछ देर बाद समीर ने मीनाक्षी को घुमाया और उसे बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया ताकि वो उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू कर सके। पीछे से मीनाक्षी का दृश्य और भी ज्यादा कामुक लग रहा था जहाँ उसके भारी कूल्हों के बीच का रास्ता समीर को आमंत्रित कर रहा था। समीर ने पीछे से वार किया और उसका खीरा एक बार फिर मीनाक्षी की गहराई में समा गया जिससे वो पूरी तरह से टूट गई और उसका शरीर कांपने लगा। समीर के हर धक्के के साथ मीनाक्षी के मुँह से भारी सांसें और ‘ओह समीर’ की आवाजें निकल रही थीं जो इस बात का प्रमाण थीं कि वो सुख के सातवें आसमान पर है। समीर ने उसे कसकर पकड़ रखा था और उसकी पीठ पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं जो उनके कठिन परिश्रम और बेपनाह मोहब्बत की गवाह थीं। समीर को अब महसूस होने लगा था कि उसका रस निकलने वाला है और मीनाक्षी भी अपने चरम के बेहद करीब थी जहाँ उसका पूरा बदन बुरी तरह थरथरा रहा था।
अचानक मीनाक्षी ने एक लंबी सांस ली और उसका शरीर पूरी तरह ढीला पड़ गया क्योंकि उसका रस छूट गया था और उसी के साथ समीर ने भी अपना सारा गरम रस उसकी गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और उनकी सांसें इतनी तेज थीं जैसे वो अभी-अभी कोई लंबी दौड़ पूरी करके आए हों। समीर ने मीनाक्षी को अपनी बाहों में भर लिया और उसके माथे को चूमते हुए कहा, ‘ये पल मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल है, मीनाक्षी।’ मीनाक्षी की आँखों में आंसू थे, लेकिन वो खुशी के आंसू थे क्योंकि उसने आज वो सब महसूस किया था जो उसने बरसों से अपने दिल में दबा रखा था। बाहर बारिश अब भी जारी थी, लेकिन कमरे के अंदर की आग अब एक शांत और मीठी गर्माहट में तब्दील हो चुकी थी जहाँ दो रूहें और दो जिस्म एक हो चुके थे। समीर और मीनाक्षी घंटों तक वैसे ही एक-दूसरे से लिपटे रहे, मानों वो इस पल को हमेशा के लिए कैद कर लेना चाहते हों जहाँ सिर्फ प्यार और सुकून का वास था।
अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण कमरे में आई, तो समीर ने देखा कि मीनाक्षी उसकी बाहों में सुकून से सो रही है और उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। उसने उसके बिखरे हुए बालों को सहलाया और महसूस किया कि ये सिर्फ एक रात का शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि दो पुराने दोस्तों का रूहानी मिलन था। मीनाक्षी ने अपनी आँखें खोलीं और समीर को देखकर मुस्कुराई, उसकी मुस्कान में वो सारी बातें थीं जो शायद शब्द कभी बयां नहीं कर सकते थे। समीर ने उसे फिर से अपने सीने से लगा लिया और उसे अहसास कराया कि अब वो कभी उसे खुद से दूर नहीं जाने देगा। उनकी ये कहानी जो बरसों पहले अधूरी रह गई थी, आज एक मुकम्मल मोड़ पर पहुँच चुकी थी जहाँ भविष्य की नई उम्मीदें और गहरा प्यार छिपा था। समीर के हाथ अब भी मीनाक्षी के रेशमी बदन को सहला रहे थे और मीनाक्षी भी उसी स्पर्श में खोई हुई अपनी नई जिंदगी के सपने देख रही थी।