दोपहर की चिलचिलाती धूप में घर के सन्नाटे ने एक अजीब सी मादकता घोल दी थी। रोहित अपने कमरे में लेटा हुआ था, लेकिन उसकी आँखों में नींद के बजाय सामने वाले कमरे में काम कर रही अपनी सविता मामी की छवि तैर रही थी। सविता मामी की उम्र करीब चौंतीस वर्ष रही होगी, लेकिन उनका यौवन किसी ढलती हुई शाम की तरह नहीं, बल्कि खिलते हुए गुलाब की तरह था। उनकी साड़ी के पल्लू से झांकते हुए उनके पुष्ट और गोल तरबूज रोहित की धड़कनों को अनियंत्रित कर रहे थे। वह जब भी झुकती थीं, उनके ब्लाउज की तंग सीमा को चीरकर बाहर आने को बेताब उन तरबूजों की गहराई रोहित को अपनी ओर खींचती थी। उनके बदन की सौंधी महक पूरे घर के गलियारे में इस कदर बिखरी हुई थी कि रोहित का मन व्याकुल होने लगा था।
सविता मामी का शरीर किसी अनुभवी मूर्तिकार की उत्कृष्ट कृति जैसा था। उनके चौड़े और उभरे हुए पिछवाड़े जब साड़ी के महीन कपड़े के नीचे से थिरकते थे, तो रोहित की नसों में खून का बहाव तेज हो जाता था। उनके चेहरे की मासूमियत और उनकी आँखों की गहराई में एक ऐसी प्यास छिपी थी, जिसे शायद उन्होंने सालों से दबा रखा था। रोहित ने गौर किया था कि मामी अक्सर उसे तिरछी निगाहों से देखती थीं और जब उनकी नज़रें मिलती थीं, तो वह झेंपकर अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करने लगती थीं। उनके मखमली बदन की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उन्हें देखकर अपने होश खो बैठे। उनके पेट की हल्की सी गोलाई और उस पर दिखती नाभि की गहराई किसी जादुई खाई की तरह प्रतीत होती थी।
उस दिन रोहित ने हिम्मत जुटाकर मामी के पास जाने का फैसला किया। वह रसोई में पानी पीने के बहाने गया, जहाँ मामी फ्रिज से बोतल निकाल रही थीं। जैसे ही रोहित उनके करीब पहुँचा, उनके शरीर की गर्मी उसे साफ़ महसूस होने लगी। अनजाने में रोहित का हाथ मामी की कमर के नाजुक हिस्से से टकरा गया। मामी एक पल के लिए ठिठक गईं, उनकी साँसें तेज हो गईं और उन्होंने रोहित की तरफ एक गहरी, अर्थपूर्ण नज़र डाली। उस एक स्पर्श ने उनके बीच की झिझक की दीवार को गिरा दिया था। रोहित ने देखा कि मामी के चेहरे पर हल्की सी लाली छा गई थी और उनके मटर जैसे कोमल उभार ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे।
मामी ने धीरे से कहा, ‘रोहित, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?’ लेकिन उनकी आवाज़ में मनाही नहीं, बल्कि एक आमंत्रण था। रोहित ने बिना कुछ कहे मामी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया। उसका हाथ उनके भारी तरबूजों पर जा टिका, जिन्हें छूते ही रोहित को एक असीम सुख का अनुभव हुआ। मामी ने अपनी आँखें मूंद लीं और एक गहरी आह भरी। रोहित ने उनके गर्दन के पीछे के मखमली हिस्से को अपनी पंखुड़ियों जैसे होंठों से सहलाया। उनके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। मामी का पिछवाड़ा अब रोहित के बढ़ते हुए तनावपूर्ण खीरे से सटने लगा था, जिससे माहौल में कामुकता की आग भड़क उठी थी। वह अब खुद को रोक नहीं पा रही थीं और उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू खुद ही नीचे गिरा दिया।
रोहित उन्हें धीरे से बेडरूम की तरफ ले गया, जहाँ धूप की हल्की किरणें खिड़की से छनकर आ रही थीं। बिस्तर पर लेटते ही मामी का पूरा बदन रोहित के सामने खुला हुआ था। उनके शरीर के अनचाहे बाल भी उस समय किसी जंगल की सुंदरता की तरह लग रहे थे। रोहित ने उनके तरबूजों पर अपनी पकड़ मजबूत की और उनके मटर जैसे सिरों को अपने मुंह में लेकर धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। मामी के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं, ‘ओह रोहित, तुम बहुत सता रहे हो।’ उन्होंने रोहित के खीरे को अपने कोमल हाथों में थाम लिया और उसे सहलाने लगीं। खीरा अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ उनके हाथों में धड़क रहा था, मानो वह उस गहरी खाई में उतरने के लिए बेकरार हो।
रोहित ने नीचे झुककर मामी की जांघों के बीच मौजूद उस रहस्यमयी खाई का निरीक्षण किया। वह खाई पूरी तरह से गीली और रसीली हो चुकी थी। रोहित ने अपनी जीभ से उस खाई को चाटना शुरू किया, जिससे मामी के शरीर में झटके लगने लगे। उन्होंने रोहित के बालों को अपनी उंगलियों में कसकर पकड़ लिया और उनकी कराहें तेज होती गईं। ‘हाँ… वहीं… और तेज…’ मामी चिल्ला उठीं। रोहित ने अपनी उंगली से खाई में खुदाई की कोशिश की, तो उसे महसूस हुआ कि वहाँ कितनी गर्मी और फिसलन है। वह मदहोश कर देने वाली नमी रोहित को पूरी तरह पागल कर चुकी थी। अब समय आ गया था कि वह अपनी प्यास को पूरी तरह शांत करे।
रोहित ने अपने भारी और सख्त खीरे को मामी की खाई के मुहाने पर सेट किया। मामी ने अपनी टांगें रोहित की कमर के चारों ओर लपेट लीं। जैसे ही रोहित ने सामने से खुदाई शुरू की और अपना आधा खीरा उस संकरी खाई के अंदर धकेला, मामी के मुँह से एक दर्द भरी लेकिन सुखद चीख निकल गई। खाई इतनी तंग थी कि हर इंच अंदर जाने पर रोहित को जबरदस्त घर्षण महसूस हो रहा था। उसने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई और पूरी गहराई तक खुदाई करने लगा। हर धक्के के साथ मामी का पिछवाड़ा बिस्तर से ऊपर उठता और फिर धड़ाम से गिरता। उनके तरबूज हवा में उछल रहे थे और उनके मटर पूरी तरह सख्त होकर चमक रहे थे।
खुदाई की यह प्रक्रिया अब अपने चरम पर पहुँच रही थी। रोहित ने मामी को उल्टा घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। यह मुद्रा मामी को बहुत पसंद आ रही थी, क्योंकि हर प्रहार उनके जी-स्पॉट को छू रहा था। कमरे में केवल उनके शरीर के टकराने की आवाज़ और भारी साँसों का शोर था। ‘और जोर से रोहित, मुझे पूरा भर दो!’ मामी के शब्दों ने रोहित की उत्तेजना को चरम पर पहुँचा दिया। कुछ ही मिनटों की धुआंधार खुदाई के बाद, रोहित को महसूस हुआ कि उसके खीरे से गरम लावा निकलने वाला है। ठीक उसी समय मामी का भी रस छूट गया और वह पूरी तरह ढीली पड़ गईं। रोहित ने अपना सारा रस उनकी खाई की गहराइयों में छोड़ दिया।
सब कुछ शांत होने के बाद, दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। पसीने से तरबतर उनके शरीर एक-दूसरे की गर्मी महसूस कर रहे थे। मामी का चेहरा आत्मसंतुष्टि की चमक से दमक रहा था। उन्होंने रोहित के माथे पर एक प्यार भरा स्पर्श किया और धीरे से मुस्कुराईं। वह दोपहर उनके जीवन की सबसे यादगार दोपहर बन चुकी थी, जहाँ उन्होंने मर्यादा की सीमाओं को लांघकर रूहानी और जिस्मानी सुकून पाया था। उनकी साँसें अब भी तेज थीं, लेकिन मन पूरी तरह शांत था, जैसे किसी तूफान के बाद समंदर की लहरें शांत हो जाती हैं।