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नेहा मां की चु@@ई


नेहा मां की चु@@ई—>

उस उमस भरी रात में घर की हवा जैसे ठहर सी गई थी, और मेरे कमरे की खिड़की से आती हल्की सी सरसराहट भी दिल की धड़कनें बढ़ाने के लिए काफी थी। नेहा, मेरी सौतेली मां, जो उम्र के उस पड़ाव पर थीं जहाँ एक औरत का शरीर पूरी तरह से खिलकर निखर आता है, उस रात सोफे पर अधलेटी होकर कोई मैगजीन पढ़ रही थीं। उनकी उम्र 38 साल थी, लेकिन उनके शरीर की बनावट और उनकी त्वचा की चमक देखकर कोई भी उन्हें 25-26 साल की युवती समझ सकता था। उन्होंने काले रंग की शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी, जो उनके गोरे रंग पर किसी कहर की तरह लग रही थी। साड़ी का पल्लू बार-बार उनके भारी-भरकम और उभरे हुए तरबूजों से फिसल रहा था, जिससे उनके गहरे और मखमली बदन की झलक मुझे रह-रहकर बेचैन कर रही थी। उनके तरबूज इतने बड़े और सुडौल थे कि ब्लाउज की तंग फिटिंग उन्हें मुश्किल से थामे हुए थी, और उनकी गोलाई देखकर मेरा मन बार-बार मचल रहा था।

नेहा मां के शरीर का निचला हिस्सा भी किसी अजूबे से कम नहीं था; उनके चौड़े और भारी पिछवाड़े साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से अपनी मौजूदगी का एहसास दिला रहे थे। जब वह चलती थीं, तो उनका पिछवाड़ा एक खास लय में हिलता था, जो मेरी नसों में बिजली दौड़ा देता था। उनकी कमर बहुत ही पतली और सुराहीदार थी, जिस पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। कमरे में सन्नाटा था, लेकिन हम दोनों के बीच एक अनकहा सा तनाव तैर रहा था, जो सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि जज्बाती भी था। मैंने उन्हें हमेशा एक मां के सम्मान से देखा था, लेकिन उस रात उनके जिस्म की खुशबू और उनकी नशीली आंखों ने मेरे सारे बांध तोड़ दिए थे। उनकी आंखों में एक अजीब सी तड़प और अकेलापन था, जो मुझे अपनी ओर खींच रहा था, जैसे वह भी उस रात किसी सहारे की तलाश में हों।

मैं उनके पास जाकर बैठ गया, और हम दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातें होने लगीं, लेकिन बातों का रुख धीरे-धीरे गहरा और निजी होता गया। उन्होंने मुझसे कहा कि आज उनके कंधों में बहुत दर्द है, शायद थकान की वजह से, और क्या मैं उन्हें थोड़ा सा सहला सकता हूँ। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा, और जब मैंने अपना हाथ उनके नर्म कंधे पर रखा, तो उनकी त्वचा की कोमलता ने मुझे सुन्न कर दिया। जैसे ही मेरा हाथ उनकी गर्दन के पीछे गया, उन्होंने एक गहरी आह भरी और अपनी आंखें मूंद लीं। मेरी उंगलियां उनके रेशमी बालों को छूते हुए उनके ब्लाउज की डोरी तक पहुँच गईं, और उस पल हमारी सांसें एक-दूसरे में उलझने लगी थीं। वह गर्मी और वह स्पर्श इतना सजीव था कि मुझे अपनी पैंट के अंदर अपने खीरे की अकड़न महसूस होने लगी, जो अब बेकाबू हो रहा था।

नेहा मां ने मेरी ओर मुड़कर देखा, और उनकी नजरें सीधे मेरी आंखों में डूब गईं, जहाँ प्यास और शर्म का एक अनोखा संगम था। उन्होंने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने सीने पर ले गईं, जहाँ उनके भारी तरबूज धड़क रहे थे। मैंने महसूस किया कि उनके मटर की तरह सख्त हो चुके निप्पल मेरे हाथ की हथेली को कुरेद रहे थे, जो उनकी उत्तेजना का साफ संकेत था। ‘आर्यन, यह गलत है…’ उन्होंने बहुत धीमी आवाज में कहा, लेकिन उनके हाथ मुझे और करीब खींच रहे थे। मैंने उनके कानों के पास जाकर फुसफुसाते हुए कहा कि प्यार और चाहत कभी गलत नहीं होते, और फिर मैंने उनके होंठों का रस चखना शुरू कर दिया। हमारा वह पहला मिलन इतना गहरा था कि जैसे सदियों की प्यास एक पल में बुझने वाली हो, और उनकी लंबी आहें पूरे कमरे में गूंजने लगी थीं।

धीरे-धीरे मैंने उनके बदन से उस काली साड़ी को अलग कर दिया, और अब वह मेरे सामने अपने पूरे यौवन के साथ मौजूद थीं। उनके तरबूज अब आज़ाद थे, और उनके बीच की गहरी घाटी मुझे अपनी ओर आमंत्रित कर रही थी। मैंने झुककर उनके मटरों को अपने मुंह में लिया और उन्हें धीरे-धीरे सहलाने लगा, जिससे नेहा मां के बदन में एक सिहरन दौड़ गई और वह अपने हाथों से मेरा सिर कसकर पकड़ने लगीं। उनकी सांसें अब तेज और गर्म हो चुकी थीं, और वह बार-बार मेरा नाम लेकर कराह रही थीं। मैंने अपनी उंगलियों को नीचे की ओर ले जाकर उनकी रेशमी खाई को छुआ, जो पहले से ही गीली और चिकनी हो चुकी थी। वहां के बाल बहुत ही करीने से कटे हुए थे, जो उनकी सफाई और सुंदरता को और बढ़ा रहे थे।

मैंने अपनी उंगली से खाई को खोदना शुरू किया, तो वह अपने पिछवाड़े को ऊपर-नीचे करने लगीं और उनकी आवाज़ में एक अजीब सी बेताबी आ गई। ‘आर्यन, मुझे और चाहिए… प्लीज…’ उनकी यह पुकार मेरे लिए किसी आदेश की तरह थी। मैंने अपने कपड़े उतार फेंके और मेरा सख्त खीरा अब पूरी तरह से बाहर था, जो नेहा मां की आंखों के सामने अपनी ताकत का मुजाहिरा कर रहा था। उन्होंने झिझकते हुए अपना हाथ बढ़ाया और मेरे खीरे को पकड़ लिया, उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस करते हुए उनकी आंखों में चमक आ गई। फिर उन्होंने धीरे से अपना मुंह खोला और मेरे खीरे को मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू कर दिया, उनकी जीभ का वह स्पर्श मुझे चरम सुख की ओर ले जा रहा था।

काफी देर तक खीरा चूसने के बाद, मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटाया और उनके दोनों पैरों को चौड़ा करके उनकी गहरी खाई के द्वार पर अपना खीरा टिका दिया। हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे, जहाँ अब सिर्फ और सिर्फ समर्पण था। मैंने एक जोरदार धक्के के साथ अपने खीरे को उनकी खाई के अंदर उतार दिया, और नेहा मां के मुंह से एक चीख निकल गई, जो दर्द और बेपनाह आनंद का मिश्रण थी। वह पहली खुदाई इतनी गहरी थी कि मुझे महसूस हुआ जैसे मैं उनके अस्तित्व के सबसे गहरे हिस्से तक पहुँच गया हूँ। मैंने धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू किया, और हर धक्के के साथ उनके तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे, जो एक अद्भुत दृश्य पेश कर रहे थे।

जैसे-जैसे खुदाई की गति बढ़ती गई, कमरे में पसीने और कामुकता की एक खास महक फैल गई। नेहा मां के शरीर से निकलने वाला पसीना उन्हें और भी ज्यादा उत्तेजक बना रहा था, और वह अपनी कमर को ऊपर उठाकर मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थीं। हमारे जिस्मों के टकराने की आवाज उस शांत रात में संगीत की तरह गूंज रही थी। मैंने उन्हें पलट दिया और अब हम पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में थे। उनके भारी पिछवाड़े पर जब मेरे हाथों के निशान पड़ रहे थे, तो वह और भी ज्यादा उग्र होकर कराह रही थीं। उनकी खाई अब पूरी तरह से मेरे रस और उनकी उत्तेजना से लबालब हो चुकी थी, जिससे हर धक्के के साथ एक मधुर ध्वनि निकल रही थी।

खुदाई का वह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा, और हम दोनों ही अब थककर चूर होने वाले थे, लेकिन प्यास थी कि बुझने का नाम नहीं ले रही थी। मैंने उन्हें फिर से सीधा लेटाया और उनकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि मैं और भी गहराई तक खोद सकूँ। नेहा मां की आंखें अब चढ़ चुकी थीं और वह बस बेतहाशा हिल रही थीं। अचानक, मुझे महसूस हुआ कि मेरा खीरा फटने वाला है, और ठीक उसी पल नेहा मां ने भी जोर से चिल्लाते हुए मुझे कसकर जकड़ लिया। उनका शरीर कांपने लगा और उनकी खाई से रस छूटने लगा, जिसने मेरे खीरे को पूरी तरह भिगो दिया। मैंने भी अपना सारा रस उनकी खाई के सबसे गहरे कोने में छोड़ दिया, और हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढह गए।

उस गहरी खुदाई के बाद, हम दोनों काफी देर तक बिना कुछ बोले बस एक-दूसरे की धड़कनें सुनते रहे। नेहा मां का चेहरा शर्म और संतुष्टि की लाली से चमक रहा था, और उन्होंने धीरे से अपना सिर मेरी छाती पर रख दिया। उनके बिखरे हुए बाल और वह मदहोश कर देने वाली हालत यह बता रही थी कि उस रात हमने न केवल जिस्मों का मिलन किया था, बल्कि एक-दूसरे की आत्माओं को भी छुआ था। वह शांति, वह सुकून और वह थकावट इतनी सुखद थी कि हमें दुनिया के किसी भी नियम या बंधन की परवाह नहीं थी। नेहा मां ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा, ‘आज तुमने मुझे फिर से जिंदा कर दिया आर्यन,’ और मैंने उनके माथे को चूमते हुए उन्हें अपने और करीब खींच लिया।

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