कॉलेज की अधूरी मोहब्बत और मदहोश कर देने वाली चु@@ई —> दस साल बाद जब आर्यन ने नेहा को कॉलेज रीयूनियन में देखा, तो उसके दिल की धड़कनें बेकाबू हो गईं। शादी की उस भीड़-भाड़ वाली रात में, जहाँ चारों तरफ संगीत और शोर था, उन दोनों की आँखें एक-दूसरे पर आकर ठहर गईं। नेहा की लाल रेशमी साड़ी उसके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी। आर्यन ने महसूस किया कि वक्त के साथ नेहा का आकर्षण और भी गहरा, मादक और परिपक्व हो चुका था।
नेहा आर्यन के करीब आई, उसकी चिर-परिचित खुशबू ने पुराने जख्मों और अधूरी दबी हुई ख्वाहिशों को फिर से ताजा कर दिया। वे दोनों महफ़िल से दूर एक शांत और एकांत कमरे की तरफ बढ़ गए, जहाँ सिर्फ वे और उनकी तेज होती सांसें थीं। कमरा हल्का सा अंधेरा था, सिर्फ खिड़की से छनकर आती चाँदनी फर्श पर पड़ रही थी। आर्यन ने नेहा के चेहरे को अपने कांपते हुए हाथों में थामा, उसके पोरों ने नेहा के चेहरे की मखमली कोमलता को महसूस किया।
नेहा की नशीली आँखों में एक अजीब सी तड़प थी, जो शब्दों से कहीं ज्यादा कह रही थी। आर्यन ने धीरे से उसके कानों के पास जाकर अपनी भारी आवाज में फुसफुसाया, “तुम आज भी वैसी ही हो, नेहा, बिलकुल वैसी ही।” उसकी गर्म सांसें नेहा की गर्दन के संवेदनशील हिस्से को छू रही थीं, जिससे नेहा के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। नेहा ने अपनी मदहोश आँखें बंद कर लीं और आर्यन के मजबूत सीने से लग गई, जहाँ उसकी धड़कनें साफ सुनी जा सकती थीं।
आर्यन ने अपनी पकड़ मजबूत की और नेहा की लचीली कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी ओर जोर से खींच लिया। उनके बीच की जो थोड़ी बहुत दूरी थी, वह अब पूरी तरह से मिट चुकी थी। नेहा ने अपने कोमल हाथ आर्यन के बालों में डाल दिए और उसकी गर्दन को अपनी ओर झुकाया। उस पल में न कोई पुराना बंधन था और न ही कोई दुनियावी डर। बस एक आदिम प्यास थी, जो सालों से दोनों के भीतर सुलग रही थी और आज ज्वालामुखी बनकर फूटने को तैयार थी।
आर्यन की उँगलियाँ धीरे-धीरे नेहा के ब्लाउज के सुनहरे हुक तक पहुँचीं। हर एक हुक के खुलने के साथ, हवा में एक अनकही उत्तेजना और भारी सन्नाटा फैलता जा रहा था। जब नेहा के कंधे से साड़ी का पल्लू सरक कर नीचे गिरा, तो उसके गोल और सुडौल तरबूज आर्यन की आँखों के सामने पूरी शान से नुमाइश कर रहे थे। नेहा लाज से लाल हो गई, लेकिन उसकी आँखों में आर्यन के प्रति पूर्ण समर्पण साफ़ झलक रहा था।
आर्यन ने अपनी उंगलियों के पोरों से उन रसीले तरबूजों को सहलाना शुरू किया, जिससे नेहा की सांसें और भी अनियंत्रित हो गईं। उसके गुलाबी मटर अब ठंड और उत्तेजना से सख्त होने लगे थे, जो आर्यन की उंगलियों के स्पर्श का बेताबी से जवाब दे रहे थे। नेहा ने धीरे से सिसकारी भरी और अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया। आर्यन ने नीचे झुककर उन मटरों को अपने होंठों के घेरे में ले लिया, जिससे नेहा के शरीर में करंट सा दौड़ गया।
नेहा ने आर्यन की शर्ट के बटन एक-एक करके खोल दिए और अपना चेहरा उसके तपते हुए सीने पर रगड़ने लगी। वह आर्यन की मर्दाना खुशबू को अपने अंदर उतार लेना चाहती थी। आर्यन ने नेहा को गोद में उठाया और मखमली बिस्तर पर धीरे से लेटा दिया। बिस्तर की नरमी और नेहा के बदन की गर्मी ने आर्यन के भीतर के संयम को तोड़ दिया। उसने धीरे से नेहा के रेशमी पेट पर अपनी जुबान से प्यार के निशान बनाना शुरू किया।
आर्यन का हाथ जब नीचे की ओर बढ़ा, तो उसे नेहा की रेशमी पेटीकोट के नीचे छिपी हुई गीली खाई का एहसास हुआ। वह खाई प्यार के रस से पूरी तरह भीग चुकी थी, जो इस बात का सबूत था कि नेहा भी उतनी ही प्यासी थी। आर्यन ने अपने हाथों से नेहा के पैरों के बीच के बालों को धीरे से सहलाया, जिससे नेहा ने अपनी कमर ऊपर की ओर झटका दी। उसकी सिसकारियां अब कमरे की दीवारों में गूंजने लगी थीं।
आर्यन ने बिना देर किए अपने कपड़ों को उतार फेंका और उसका विशाल और कठोर खीरा नेहा की नज़रों के सामने आ गया। नेहा ने अपनी थरथराती उंगलियों से उस गर्म खीरे को छुआ और उसकी कठोरता को महसूस करके दंग रह गई। उसने धीरे से अपना सिर नीचे झुकाया और उस गर्म खीरे को अपने मुँह में ले लिया। खीरा चूसना नेहा के लिए एक नया अनुभव था, लेकिन वह आर्यन को चरम सुख देने के लिए अपनी पूरी जान लगा रही थी।
आर्यन ने नेहा को रोका और उसे बिस्तर के बीचों-बीच सीधा लेटा दिया। वह अब नेहा के ऊपर था, उनका शरीर एक-दूसरे की गर्मी और पसीने से सराबोर था। आर्यन ने नेहा की टांगों को फैलाया और अपनी कठोरता को उसकी भीगी हुई खाई के मुहाने पर टिका दिया। उसने धीरे से दबाव बनाया और सामने से खोदना शुरू किया। नेहा की आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन वे दर्द के नहीं, बल्कि उस परम आनंद के थे जिसका इंतज़ार उसने सालों से किया था।
खुदाई की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी। हर एक धक्के के साथ नेहा के तरबूज हवा में झूल रहे थे और आर्यन उन्हें अपने हाथों में भींच रहा था। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और नेहा की मदहोश सिसकारियां सुनाई दे रही थीं। आर्यन नेहा की गहराई में डूबता जा रहा था, उसे लग रहा था जैसे वह नेहा की रूह तक पहुँच जाना चाहता है। नेहा ने अपनी टांगें आर्यन की कमर के चारों ओर मजबूती से लपेट लीं।
जब आर्यन ने महसूस किया कि नेहा चरम सीमा के करीब है, तो उसने उसे पलट दिया। अब नेहा घुटनों के बल थी और आर्यन उसके पीछे खड़ा था। पिछवाड़े से खोदना शुरू करते ही नेहा के मुँह से एक लंबी आह निकली। आर्यन ने उसके बालों को पीछे से पकड़ा और अपनी खुदाई की रफ़्तार को और भी तेज कर दिया। नेहा का पिछवाड़ा हर धक्के के साथ आर्यन के पेट से टकरा रहा था, जिससे एक लयबद्ध संगीत पैदा हो रहा था।
नेहा ने अपने हाथ बिस्तर की चादर पर कस लिए और उसकी उंगलियां चादर को नोंचने लगीं। उसका पूरा शरीर कांप रहा था और वह बार-बार आर्यन का नाम पुकार रही थी। आर्यन भी अब अपनी सीमा पर था, उसका खीरा नेहा की खाई के भीतर की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसने नेहा के मटरों को पीछे से सहलाया और आखिरी कुछ जोरदार धक्के लगाए, जिससे खुदाई अपने शिखर पर पहुँच गई।
अचानक नेहा का पूरा शरीर अकड़ गया और उसकी खाई से प्रेम का रस निकलना शुरू हो गया। आर्यन ने भी अपना सारा संयम खो दिया और अपना सारा गर्म रस नेहा की गहराई में उड़ेल दिया। वे दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कमरे में अब सिर्फ उनकी भारी सांसों की आवाज़ थी। वह रात सिर्फ शरीर की नहीं, बल्कि दो बिछड़ी हुई रूहों के मिलन की गवाह बनी थी।
काफी देर तक वे एक-दूसरे की बाहों में बंधे रहे, जैसे कि अगर वे एक-दूसरे को छोड़ेंगे तो यह सपना टूट जाएगा। आर्यन ने नेहा के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में और कस लिया। नेहा की आँखों में अब एक संतुष्टि थी, जो उसने पिछले दस सालों में कभी महसूस नहीं की थी। वे जानते थे कि कल की सुबह क्या लाएगी, लेकिन उस रात उन्होंने अपनी अधूरी मोहब्बत को खुदाई के ज़रिए मुकम्मल कर लिया था।
पूरी रात उन्होंने ऐसे ही बिताई, कभी बातों में तो कभी स्पर्श में। हर बार जब उनकी त्वचा एक-दूसरे से टकराती, तो एक नई लहर दौड़ जाती। यह खुदाई सिर्फ शारीरिक सुख के लिए नहीं थी, बल्कि यह उन सभी अनकही बातों का इज़हार था जो वे सालों से एक-दूसरे से कहना चाहते थे। नेहा ने आर्यन के सीने पर अपना सिर रखा और धीरे से सो गई, यह जानते हुए कि आर्यन उसके पास है।
जैसे-जैसे सुबह की पहली किरण कमरे में आई, आर्यन ने नेहा को सोते हुए देखा। उसके चेहरे पर एक दिव्य शांति थी। उसने नेहा को जगाया नहीं, बस उसके गालों पर एक आखिरी चुंबन दिया। वह जानता था कि यह मिलन शायद फिर कभी न हो, लेकिन इस एक रात की चु@@ई ने उनके जीवन भर की तड़प को शांत कर दिया था। उनकी यह कहानी हमेशा उनके दिलों के किसी कोने में एक खूबसूरत राज़ बनकर महकती रहेगी।