
गर्मी की उस अलसायी हुई दोपहर में पूरा घर सन्नाटे की चादर ओढ़े सोया हुआ था। सूरज की तीखी किरणें खिड़की के पर्दों को चीरकर कमरे में अपनी जगह बना रही थीं। आर्यन अपनी मामी शारदा के पास सोफे पर बैठा था। शारदा मामी, जो पिछले दो सालों से विधवा का जीवन जी रही थीं, आज कुछ अलग ही रंगत में नजर आ रही थीं। उन्होंने हल्के नीले रंग की सूती साड़ी पहनी थी, जो उनके गोरे बदन पर बिजली की तरह कौंध रही थी। उनकी सांसों की हल्की आवाज कमरे के सन्नाटे को तोड़ रही थी। आर्यन के मन में एक अजीब सी बेचैनी थी, जो उसे बार-बार मामी के शरीर की ढलानों की ओर देखने पर मजबूर कर रही थी।
शारदा मामी का शरीर किसी तराशे हुए पत्थर की तरह था। उनकी साड़ी के पल्लू से झांकते उनके पुष्ट और गोल तरबूज किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थे। जब वह सांस लेतीं, तो वे तरबूज ऊपर-नीचे होते हुए आर्यन की धड़कनें बढ़ा देते थे। उन तरबूजों के बीच का गहरा रास्ता आर्यन को अपनी ओर खींच रहा था। साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से उनके मटर साफ उभरकर दिख रहे थे, जो शायद ठंडक या उत्तेजना की वजह से सख्त हो गए थे। मामी का पिछवाड़ा सोफे की गद्दी पर इस तरह फैला हुआ था कि उनके शरीर का हर मोड़ एक नई प्यास जगा रहा था।
आर्यन ने हिम्मत जुटाकर मामी के कंधे पर हाथ रखा। वह चौंक कर उसकी तरफ देखने लगीं, लेकिन उनकी आंखों में गुस्सा नहीं बल्कि एक गहरा सूनापन और दबी हुई तड़प थी। आर्यन ने धीरे से कहा, ‘मामी, आप बहुत अकेली हो गई हैं न?’ शारदा की आंखों में आंसू की एक बूंद छलक आई। उन्होंने धीरे से आर्यन का हाथ दबाया और कहा, ‘बेटा, इस सूनेपन को शब्दों में बयां करना मुश्किल है।’ उनके बीच का यह भावनात्मक जुड़ाव अब एक शारीरिक खिंचाव में बदलने लगा था। आर्यन के हाथ की उंगलियां अब धीरे-धीरे मामी के कमर की मुलायम त्वचा को छूने लगी थीं।
मामी की त्वचा रेशम की तरह मुलायम थी, जिस पर आर्यन की छुअन एक बिजली की तरह दौड़ गई। उन्होंने अपनी आंखें मूंद लीं और एक गहरी आह भरी। आर्यन का हाथ अब ऊपर की ओर बढ़ते हुए उनके रेशमी तरबूजों के पास पहुंच गया था। जैसे ही आर्यन की उंगलियों ने उन कठोर मटरों को छुआ, शारदा के मुंह से एक दबी हुई कराह निकल गई। उनकी सांसें तेज चलने लगी थीं और पसीने की नन्हीं बूंदें उनके माथे पर चमकने लगी थीं। शर्म और इच्छा का एक भीषण युद्ध उनके मन में चल रहा था, लेकिन शरीर की जरूरत ने मर्यादा की बेड़ियों को कमजोर कर दिया था।
आर्यन ने धीरे से मामी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके होंठों का रस पीने लगा। यह स्पर्श इतना गहरा था कि शारदा के हाथ खुद-ब-खुद आर्यन के बालों में उलझ गए। आर्यन ने अब उनके बदन से साड़ी को धीरे-धीरे अलग करना शुरू किया। जब साड़ी फर्श पर गिरी, तो शारदा का नग्न शरीर किसी अप्सरा की तरह चमक रहा था। आर्यन ने अपनी नजरें उनके निचले हिस्से पर डालीं, जहां घने बालों के बीच उनकी गुलाबी और गीली खाई छिपी हुई थी। उस खाई से आती एक मदहोश कर देने वाली खुशबू ने आर्यन के खीरे को पूरी तरह से उत्तेजित और सख्त कर दिया था।
आर्यन ने अपनी पैंट उतारी और अपने भारी खीरे को बाहर निकाला। शारदा ने जब उस विशाल खीरे को देखा, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। आर्यन ने झुककर पहले उनकी खाई को चाटना शुरू किया। उसकी जीभ जब खाई की गहराई और किनारों पर घूम रही थी, तो शारदा बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींचने लगीं। फिर आर्यन ने धीरे से अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, जिससे खाई और भी ज्यादा गीली और रसीली हो गई। शारदा अब बेकाबू हो रही थीं, उन्होंने आर्यन का सिर पकड़कर नीचे की ओर दबाया और अपनी प्यास जाहिर की।
अगले ही पल, शारदा ने आर्यन के खीरे को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगीं। उन्होंने फिर उस खीरे को अपने मुंह में लिया और उसे बड़ी शिद्दत से चूसने लगीं। खीरा मुंह में लेने की क्रिया इतनी सुखद थी कि आर्यन की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। कुछ देर बाद, आर्यन ने उन्हें बिस्तर पर सीधा लिटाया और सामने से खोदना शुरू करने की तैयारी की। उन्होंने अपने खीरे की नोक को उनकी गीली खाई के द्वार पर रखा और एक झटके में आधा खीरा अंदर उतार दिया। शारदा की एक चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं, बल्कि बरसों की प्यास बुझने की खुशी थी।
खुदाई की प्रक्रिया अब अपनी पूरी लय में आ चुकी थी। आर्यन जोर-जोर से धक्के मारते हुए गहराई तक खोद रहा था। हर धक्के के साथ शारदा के तरबूज बुरी तरह हिल रहे थे और उनके मटर आर्यन की छाती से रगड़ खा रहे थे। कमरे में सिर्फ गोश्त से गोश्त टकराने की और भारी सांसों की आवाजें गूंज रही थीं। आर्यन ने फिर उन्हें पलट दिया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। इस स्थिति में खुदाई और भी ज्यादा गहरी और असरदार लग रही थी। शारदा के पिछवाड़े की गोलाई आर्यन के हाथों में कैद थी और वह पूरी ताकत से उनके अंदर की गहराई नाप रहा था।
अंत में, जब दोनों की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई, तो आर्यन ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। वह पागलों की तरह उनकी खाई को खोद रहा था। अचानक, शारदा का पूरा बदन कांपने लगा और उनकी खाई से रसों का सैलाब उमड़ पड़ा। ठीक उसी समय, आर्यन के खीरे ने भी ढेर सारा सफेद रस छोड़ दिया। दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। उस खुदाई के बाद की शांति बहुत ही सुखद थी। शारदा की आंखों में अब कोई अकेलापन नहीं था, बल्कि एक तृप्ति थी। वे दोनों काफी देर तक इसी तरह लिपटे रहे, जैसे वक्त को वहीं रोक देना चाहते हों।