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भाभी की पानी की टंकी लीक हो गई

यह कहानी है प्रिया की, एक 30 साल की शादीशुदा औरत, जो भरतपुर के एक छोटे से मोहल्ले में रहती थी। प्रिया का पति राजेश एक सरकारी नौकरी करता था और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता। घर में अकेली प्रिया को समय काटना मुश्किल हो जाता था। भरतपुर की गर्मियां और ऊपर से अकेलापन, उसे बेचैन कर देता। मोहल्ले में एक जवान लड़का था, विक्रम, जो पास के कीोलादेव नेशनल पार्क में गाइड का काम करता था। विक्रम 25 साल का था, लंबा-चौड़ा, सांवला रंग लेकिन आंखों में वो चमक जो औरतों को पागल कर देती। वह रोज पार्क से लौटते हुए प्रिया के घर के सामने से गुजरता और मुस्कुरा देता।

एक शाम, प्रिया की छत पर पानी की टंकी लीक हो गई। उसने विक्रम को बुलाया, क्योंकि वो मोहल्ले का हैंडीमैन भी था। विक्रम आया, टूल्स लेकर। “भाभीजी, मैं ठीक कर देता हूं।” प्रिया ने उसे छत पर ले जाकर दिखाया। गर्मी में पसीने से तर विक्रम की शर्ट चिपक गई थी, उसके सीने की मांसपेशियां साफ दिख रही थीं। प्रिया की नजरें उस पर टिक गईं। विक्रम झुककर काम कर रहा था, और प्रिया उसके पास खड़ी थी। अचानक हवा का झोंका आया, प्रिया की साड़ी का पल्लू सरक गया। उसने नीचे सिर्फ एक पतली ब@@उज पहनी थी, बिना ब@@ा के। विक्रम की आंखें उसके उभरे हुए स्तनों पर पड़ गईं। “भाभीजी, आपका पल्लू…” विक्रम ने शरमाते हुए कहा।

प्रिया ने जानबूझकर देर से ठीक किया। “ओह, सॉरी विक्रम। गर्मी में ऐसे ही रहती हूं।” विक्रम का मन डोल गया। वह काम खत्म करके नीचे आया, लेकिन प्रिया ने उसे चाय के लिए रोक लिया। “बैठो ना, थक गए होगे।” दोनों ड्राइंग रूम में बैठे। बातों-बातों में विक्रम ने बताया कि पार्क में कितने जोड़े आते हैं, छिपकर रोमांस करते हैं। प्रिया की आंखों में चमक आ गई। “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?” विक्रम ने नजरें झुका लीं। “नहीं भाभीजी, बस काम में व्यस्त।” प्रिया ने हिम्मत जुटाई और उसके कंधे पर हाथ रखा। “अकेले हो, मैं भी अकेली। क्यों ना हम दोनों…”

विक्रम चौंका, लेकिन प्रिया के होंठ उसके होंठों पर आ गए। दोनों का च@@बन शुरू हो गया। विक्रम के हाथ प्रिया की कमर पर सरक गए, उसे अपनी गोद में खींच लिया। प्रिया की सांसें तेज हो गईं। “विक्रम… धीरे…” लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने प्रिया की साड़ी खींच ली। अब प्रिया सिर्फ पेटीकोट और ब@@उज में थी। विक्रम ने ब@@उज के हुक खोले, और प्रिया के गोरे स्तन बाहर आ गए – बड़े, गोल, निप्पल सख्त हो चुके। विक्रम ने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया सिसक उठी – “आह… विक्रम… जोर से चूसो…” विक्रम ने दूसरे स्तन को हाथ से मसला, निप्पल को पिंच किया। प्रिया का शरीर कांप रहा था।

प्रिया ने विक्रम की शर्ट उतारी, उसके सीने पर हाथ फेरा। विक्रम की पैंट में उभार साफ दिख रहा था। प्रिया ने पैंट खोली, और विक्रम का ल@@ड बाहर निकाल लिया – लंबा, मोटा, काला और धड़कता हुआ। “ओह… कितना बड़ा है… राजेश का तो छोटा सा है।” प्रिया ने उसे सहलाया, फिर मुंह में ले लिया। विक्रम की आह निकल गई – “भाभीजी… उफ्फ… चूसो ऐसे ही…” प्रिया ने जीभ से चाटा, गले तक लिया। विक्रम के हाथ प्रिया के बालों में थे, वह उसे धक्का दे रहा था।

विक्रम ने प्रिया को सोफे पर लिटाया। पेटीकोट ऊपर चढ़ाया, प@@%%ी उतार दी। प्रिया की च@@त गीली हो चुकी थी, बाल साफ किए हुए, गुलाबी और चमकती। विक्रम ने उंगली डाली, प्रिया चीखी – “आह… हां… अंदर डालो…” विक्रम ने दो उंगलियां डालीं, घुमाईं। प्रिया की कमर उछलने लगी। “विक्रम… अब सहन नहीं होता… च@@दो मुझे…” विक्रम ने अपना ल@@ड प्रिया की च@@त पर रगड़ा, फिर एक झटके में अंदर पेल दिया। प्रिया की चीख निकल गई – “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन मत रुको…” विक्रम ने धीरे-धीरे झटके मारने शुरू किए। हर झटके में ल@@ड पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। प्रिया की च@@त टाइट थी, ल@@ड को जकड़ रही थी।

विक्रम ने स्पीड बढ़ाई। धप-धप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। प्रिया के स्तन उछल रहे थे, विक्रम ने उन्हें दबाया। “भाभीजी… कितनी टाइट हो… मजा आ रहा है…” प्रिया ने पैर फैलाए, विक्रम को और गहरा लिया। “हां विक्रम… तेज च@@दो… फाड़ दो मेरी च@@त…” दस मिनट की च@@$$ई के बाद प्रिया झड़ गई – “आह… आ रहा है… उफ्फ…” उसकी च@@त सिकुड़ी, रस बहने लगा। विक्रम भी रुक न सका, ल@@ड बाहर निकाला और प्रिया के स्तनों पर माल छोड़ दिया।

दोनों हांफते हुए लिपट गए। लेकिन ये शुरुआत थी। अगली रात विक्रम फिर आया। इस बार उन्होंने बेडरूम में। विक्रम ने प्रिया को डॉगी स्टाइल में किया। प्रिया घुटनों पर थी, विक्रम पीछे से। उसने प्रिया की ग@@ड पर थप्पड़ मारा, फिर ल@@ड च@@त में पेला। “भाभीजी… तुम्हारी ग@@ड कितनी मस्त है…” प्रिया सिसक रही थी – “हां… च@@दो… ग@@ड भी मार लो…” विक्रम ने उंगली से ग@@ड छेद को सहलाया, फिर तेल लगाकर ल@@ड डाला। प्रिया चिल्लाई – “आह्ह्ह… फट गई… धीरे…” लेकिन जल्दी मजा आने लगा। विक्रम ने ग@@ड च@@$$ई की, झटके मारे। प्रिया की आंखों से आंसू आ गए, लेकिन वो रुकने नहीं दी। “जोर से… और जोर से…” विक्रम झड़ गया, प्रिया की ग@@ड में ही।

इसके बाद हर रात विक्रम आता। कभी किचन में, कभी छत पर। प्रिया को अब अकेलापन नहीं लगता। भरतपुर की गर्म रातें और गर्म हो गईं। एक दिन राजेश आया, लेकिन प्रिया का मन विक्रम में था। वो छिपकर मिलती रही। विक्रम कहता – “भाभीजी, तुम मेरी हो।” प्रिया मुस्कुराती – “हां, अब हमेशा।”

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